बीआरएलएफ (BRLF) की पहल से झारखंड के एक दिहाड़ी मज़दूर की ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई है। वैज्ञानिक खेती और पशुपालन के दम पर आज यह परिवार न सिर्फ आत्मनिर्भर है, बल्कि अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम स्कूल में शिक्षा भी दिला रहा है।
किसी समय परिवार की रोजी-रोटी चलाने के लिए दूसरों के यहां दिहाड़ी मज़दूरी करना और ताड़ी निकालकर गुजारा करना इस परिवार की नियति थी। घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि खाने के लिए चावल भी खरीद कर लाना पड़ता था। लेकिन, दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन ने झारखंड के पथरगामा में रहने वाले इस किसान परिवार की तकदीर बदल कर रख दी है। आज यह परिवार अपने खेत की उपज और पशुपालन के जरिए लाखों की कमाई कर रहा है और इलाके के अन्य किसानों के लिए एक बड़ी मिसाल बन गया है।
इस बदलाव की शुरुआत एक खाली पड़े बंजर मैदान और एक कुएं से हुई। शुरुआत में किसान को खेती का कोई खास अनुभव नहीं था। लेकिन, बीआरएलएफ (BRLF - भारत रूरल लाइवलीहुड्स फाउंडेशन) के प्रतिनिधियों (जिन्हें स्थानीय लोग 'दादा' कहते हैं) ने इलाके में दस्तक दी। संस्था के लोगों ने न सिर्फ बीज उपलब्ध कराए, बल्कि बंजर ज़मीन पर खेती करने की आधुनिक तकनीकें भी सिखाईं।
नतीजतन, एक छोटे से ज़मीन के टुकड़े पर मात्र दो से तीन महीने की मेहनत के बाद ही किसान को 30,000 रुपये की शानदार आमदनी हुई। इस शुरुआती सफलता ने किसान का हौसला बढ़ा दिया। अब किसान की योजना अपने बगल में पड़ी दो एकड़ की बंजर भूमि को भी उपजाऊ बनाने की है। उसे उम्मीद है कि सिर्फ मिर्च की खेती से ही आने वाले समय में उसे 2 से ढाई लाख रुपये तक की शानदार कमाई हो सकती है।
पथरगामा में स्थानीय किसानों को आर्थिक रूप से और मजबूत करने के लिए बीआरएलएफ के तहत एक बकरी प्रजनन केंद्र भी स्थापित किया गया है। यहां किसानों को बकरियों के टीकाकरण (Vaccination), कृमिनाशन (Deworming), पोषण और पशुओं की उचित देखभाल का वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इस प्रशिक्षण का फायदा उठाते हुए, इस किसान ने 20 बकरियों के साथ अपना व्यवसाय शुरू किया था। अब तक वह करीब 20 बकरियां बेच चुका है, जिससे उसे 80,000 रुपये का सीधा मुनाफा हुआ है। जानवरों के बेहतर स्वास्थ्य और इस बंपर मुनाफे को देखकर अब गांव के अन्य किसान भी पशुपालन की इन आधुनिक पद्धतियों को अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं।
इस क्षेत्र में अब पारंपरिक खेती की जगह 'क्रॉप बास्केट' (Crop Basket) मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके तहत खरीफ, रबी और गरमा—तीनों मौसमों में फसलें उगाई जा रही हैं, जिससे साल भर खेती और आमदनी का पहिया घूमता रहता है। साथ ही, ज़मीन की उर्वरता बनाए रखने के लिए जैविक खाद (कम्पोस्ट) और जैविक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इस पूरी सफलता के पीछे पति-पत्नी की साझा मेहनत है। दोनों मिलकर खेतों में सब्जियां तोड़ते हैं और फिर स्थानीय हाट-बाज़ार में जाकर उपज बेचते हैं। आर्थिक स्थिति सुधरने का सबसे बड़ा फायदा उनकी अगली पीढ़ी को मिल रहा है। जो शिक्षा कभी इस किसान या उसके पिता-दादा को नसीब नहीं हुई, वही शिक्षा आज वे अपने दोनों बेटों को इंग्लिश मीडियम स्कूल में दिला रहे हैं।
आज यह किसान पूरी तरह आत्मनिर्भर हो चुका है। उसे अब खाद बनाने से लेकर, सही समय पर बीज बोने और हार्वेस्टिंग (फसल कटाई) करने की पूरी समझ हो गई है। किसान गर्व से कहता है, "अब मुझे दादा लोगों (संस्था के लोगों) की हर कदम पर ज़रूरत नहीं है। अगर दूसरे किसान भी मुझसे आइडिया लेना चाहेंगे, तो अब मैं उन्हें भी खेती के तरीके बता सकता हूं।" यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि सही दिशा और संसाधनों से बदलते ग्रामीण भारत की एक जीती-जागती तस्वीर है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची: झारखंड में दो दिनों की सुस्ती के बाद एक बार फिर मॉनसून सक्रिय होने की संभावना जताई गई है। मौसम विज्ञान केंद्र के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, राज्य के कई जिलों में 17 जून को तेज हवा, वज्रपात और हल्की बारिश हो सकती है। संभावित खराब मौसम को देखते हुए कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, रांची, खूंटी, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, रामगढ़ और बोकारो में दोपहर के बाद मौसम अचानक बदल सकता है। इन इलाकों में 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, गरज-चमक के साथ वज्रपात और कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। हालांकि राज्य के अन्य हिस्सों में आसमान में बादल छाए रहने के बावजूद तापमान में बढ़ोतरी बनी रह सकती है। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि 18 जून को भी लगभग ऐसी ही स्थिति बनी रहेगी। 19 जून से और बिगड़ सकता है मौसम मौसम विभाग के मुताबिक 19 जून से मौसम का प्रभाव और अधिक बढ़ सकता है। रांची समेत राज्य के 17 जिलों में तीन दिनों तक तेज आंधी, वज्रपात और रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना जताई गई है। इसको देखते हुए इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों में शामिल हैं: रांची हजारीबाग खूंटी रामगढ़ कोडरमा गिरिडीह बोकारो धनबाद पूर्वी सिंहभूम पश्चिमी सिंहभूम सरायकेला-खरसावां देवघर जामताड़ा दुमका पाकुड़ साहिबगंज गोड्डा इन जिलों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और कई स्थानों पर गरज के साथ बारिश होने की संभावना है। मॉनसून कमजोर पड़ते ही बढ़ी गर्मी पिछले कुछ दिनों में मॉनसून की गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण राज्य के कई जिलों में तापमान में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। मेदिनीनगर सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 42.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। रांची का अधिकतम तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस रहा। जमशेदपुर में तापमान 39.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बोकारो में अधिकतम तापमान 39.2 डिग्री सेल्सियस रहा। चाईबासा का अधिकतम तापमान 39.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य में बहुत कम वर्षा हुई और केवल कांके क्षेत्र में एक मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग का कहना है कि 22 जून तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल सकता है और कई इलाकों में अच्छी बारिश होने की संभावना बनी हुई है।
हजारीबाग। हजारीबाग जिले की दनुआ घाटी में बुधवार को पांच गाड़ियां आपस में टकरा गईं। टक्कर इतनी जोरदार थी कि पाइप से लदा एक ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गया। हादसे के बाद कुछ देर के लिए इलाके में अफरा-तफरी मच गई और सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घाटी में वाहन सामान्य से अधिक रफ्तार से चल रहे थे। इसी दौरान अचानक एक वाहन के ब्रेक लगाने से पीछे आ रही गाड़ियों का संतुलन बिगड़ गया और एक के बाद एक कई वाहन आपस में भिड़ गए। टक्कर के दौरान पाइप से भरा ट्रक भी नियंत्रण खो बैठा और सड़क किनारे पलट गया। सड़क पर बिखर गए भारी पाइप ट्रक के पलटते ही उसमें लदे भारी-भरकम पाइप सड़क पर बिखर गए। इससे सड़क यातायात बाधित हो गया और दोनों तरफ वाहनों की लंबी लाइन लग गई। मची अफरातफरी हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों में कुछ देर तक अफरा-तफरी का माहौल रहा। कई वाहन चालक अपने वाहन छोड़कर घटना स्थल की ओर दौड़ पड़े और हालात का जायजा लेने लगे। घाटी से गुजर रहे यात्रियों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सड़क जाम होने के कारण कई वाहन लंबे समय तक फंसे रहे। कुछ लोगों ने वैकल्पिक रास्ते तलाशने की कोशिश की, लेकिन घाटी क्षेत्र होने के कारण उन्हें भी परेशानी उठानी पड़ी। सूचना मिलते ही पहुंची पुलिस घटना की जानकारी मिलते ही चौपारण थाना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया। सबसे पहले दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाने और सड़क पर बिखरे पाइपों को किनारे कराने का काम शुरू किया गया। स्थानीय लोगों की मदद से पुलिसकर्मियों ने यातायात को नियंत्रित किया और जाम हटाने की कोशिश की। अधिकारियों ने वाहनों को धीरे-धीरे एक लेन से गुजरने की व्यवस्था की ताकि यातायात पूरी तरह ठप न हो। कुछ लोगों को आई मामूली चोटे हादसे में कुछ लोगों को हल्की चोटें लगने की सूचना मिली है। हालांकि किसी के गंभीर रूप से घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है। घायलों को प्राथमिक उपचार दिया गया और उनकी स्थिति सामान्य बताई जा रही है। मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि यदि टक्कर की रफ्तार और अधिक होती तो हादसा और भी भयावह हो सकता था। गनीमत रही कि किसी की जान नहीं गई। प्रशासन की तत्परता से खुला रास्ता दुर्घटना के बाद प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए सड़क से क्षतिग्रस्त वाहनों और बिखरे पाइपों को हटाने का काम शुरू कराया। कई घंटों की मशक्कत के बाद धीरे-धीरे यातायात सामान्य होने लगा। अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।
रांची। रांची के कोकर से गायब मासूम बच्ची अदिति पांडे का पता बताने वाले को रांची पुलिस इनाम देगी। इसकी घोषणा रांची पुलिस ने की है। इनाम की राशि एक लाख रूपये रखी गई है। 18 महीने की अदिति पांडेय सदर थाना क्षेत्र के कोकर स्थित खोरहा टोली से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई है। इस घटना के बाद से बच्ची के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस की ओर से जारी सूचना के अनुसार जो भी व्यक्ति इस बच्ची के संबंध में सही जानकारी देगा, उसे रांची पुलिस की ओर से एक लाख रुपये का नकद इनाम दिया जाएगा। गोपनीय रखी जायेगी सूचना पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी भी नागरिक को इस बच्ची के बारे में कोई भी सुराग या जानकारी मिले, तो वे तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित करें। प्रशासन ने यह भरोसा दिलाया है कि जानकारी देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी। किसी को भी बच्ची के बारे में कोई भी जानकारी मिले, तो तुरंत नजदीकी थाना क्षेत्र या संबंधित पुलिस अधिकारियों के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क कर किया जा सकता है। ये नंबर हैं.. 9431706136/9431706137 या सदर डीएसपी 9431102090 और सदर थाना प्रभारी 9431706160 में संपर्क कर सकते है।