रांची। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की शासी परिषद की बैठक मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में रिम्स को अत्याधुनिक, मरीज-केंद्रित और विश्वस्तरीय चिकित्सा संस्थान बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगी। बैठक में कुल 19 एजेंडों और 5 अतिरिक्त विषयों पर चर्चा की गई।
बैठक में रिम्स के लिए 200 अत्याधुनिक वेंटिलेटर खरीदने, रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत और मेडिकल शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए स्मार्ट क्लासरूम स्थापित करने को मंजूरी दी गई। इसके अलावा अस्पताल की जरूरत के अनुसार आवश्यक चिकित्सा उपकरणों और मशीनों की शीघ्र खरीद सुनिश्चित करने तथा लंबित खरीद आदेश तत्काल जारी करने के निर्देश दिए गए।
शासी परिषद ने रिम्स के सभी यूजी और पीजी छात्रावासों को पीपीपी मॉडल पर संचालित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने, पूरे परिसर के शौचालयों को एयरपोर्ट की तर्ज पर आधुनिक बनाने और मुख्य प्रवेश द्वार को हाईटेक स्वरूप देने का निर्णय लिया। साथ ही ऑर्थोपेडिक वार्ड के पूर्ण पुनर्निर्माण और एमबीबीएस सीटें बढ़ने के अनुरूप नए भवन, छात्रावास और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए तकनीकी आकलन कराने का निर्देश भी दिया गया।
बैठक में मरीजों के समग्र उपचार के लिए रिहैबिलिटेशन सेंटर स्थापित करने, थैलेसीमिया मरीजों के लिए ब्लड बैंक को सशक्त बनाने, बच्चों में आनुवंशिक बीमारियों की शीघ्र पहचान के लिए जेनेटिक स्क्रीनिंग व्यवस्था को मजबूत करने और स्टेम सेल संरक्षण के लिए पीपीपी मॉडल पर निजी भागीदारी की संभावना पर विचार किया गया। वहीं ऑन्कोलॉजी विभाग के लिए रेडियोथेरेपी मशीन की खरीद प्रक्रिया तेज करने और अस्पताल प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यकता अनुसार हॉस्पिटल मैनेजरों की नियुक्ति का भी निर्णय लिया गया।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि रिम्स में अब केवल योजनाएं नहीं बनेंगी, बल्कि उनका समयबद्ध क्रियान्वयन भी सुनिश्चित होगा। उन्होंने अधिकारियों को विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनावश्यक देरी नहीं होने देने के निर्देश देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य रिम्स को आधुनिक तकनीक, बेहतर संसाधनों और उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं से लैस कर देश के अग्रणी चिकित्सा संस्थानों में शामिल करना है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
जामताड़ा में आयोजित जनता दरबार में बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई। डीसी ने तकनीकी खामियों से परेशान उपभोक्ताओं से लेकर आधार और मंईयां सम्मान योजना के फरियादियों को त्वरित राहत देने के कड़े निर्देश दिए हैं। आम आदमी जब सरकारी विभागों की तकनीकी खामियों और लालफीताशाही का शिकार होता है, तो उसे न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं। झारखंड के जामताड़ा में एक ऐसा ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां बिजली विभाग की लापरवाही ने एक आम उपभोक्ता की नींद उड़ा दी। विभाग ने पहले तो लगातार छह महीने तक कोई बिजली बिल ही नहीं भेजा और फिर अचानक एक दिन पूरे 6 लाख रुपये का भारी-भरकम बकाया थमा दिया। परेशान उपभोक्ता जब समाधान की उम्मीद लेकर स्थानीय बिजली कार्यालय पहुंचा, तो वहां के कर्मचारियों ने पल्ला झाड़ते हुए कह दिया कि यह एक 'तकनीकी गड़बड़ी' है जिसे सिर्फ दुमका कार्यालय से ही सुधारा जा सकता है। सरकारी सिस्टम की इस बेरुखी से थक-हारकर पीड़ित ने मंगलवार को जामताड़ा समाहरणालय में आयोजित उपायुक्त (डीसी) के 'जनता दरबार' का दरवाजा खटखटाया। मामले की गंभीरता को समझते हुए डीसी ने तुरंत संज्ञान लिया और उपभोक्ता को आश्वस्त किया कि अब उसे दुमका के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे विभागीय स्तर पर बातचीत कर इस तकनीकी खामी को दूर करें और उपभोक्ता को फौरी राहत दें। मंगलवार का यह जनता दरबार सिर्फ बिजली की शिकायतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक संवेदनशीलता का भी गवाह बना। दरबार में एक ऐसे व्यक्ति का मामला सामने आया जो बीमारी के कारण चलने-फिरने में पूरी तरह लाचार था और आधार सेंटर तक नहीं पहुंच सकता था। इस पर डीसी ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि वे खुद उस व्यक्ति के घर जाएं और वहीं जाकर उसका आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया पूरी करें। शिक्षा और युवाओं के भविष्य से जुड़े मामले भी इस दौरान सुलझाए गए। एक महिला अपनी बेटी के दाखिले की समस्या लेकर पहुंची थी। उसकी बेटी का चयन रांची के पॉलिटेक्निक कॉलेज में हुआ था, लेकिन निजी कारणों से वह पढ़ाई जारी नहीं रख सकी। अब वह जामताड़ा कॉलेज में दाखिला लेना चाहती थी, लेकिन रांची के कॉलेज से 'ट्रांसफर सर्टिफिकेट' (टीसी) न मिलने के कारण नामांकन अटका हुआ था। उपायुक्त ने मौके पर ही संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को रांची पॉलिटेक्निक कॉलेज से समन्वय स्थापित कर छात्रा को जल्द टीसी दिलाने के आदेश दिए। महिलाओं से जुड़ी 'मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना' की स्थिति भी दरबार में चर्चा का विषय रही। कई महिलाओं ने शिकायत की कि वास्तविक उम्र कम होने के बावजूद दस्तावेजों में उम्र अधिक दर्ज होने के कारण उनका नाम योजना से काट दिया गया है। उपायुक्त ने उन्हें सही उम्र दर्ज करवाकर दस्तावेज सुधारने की सलाह दी और भरोसा दिलाया कि पोर्टल दोबारा खुलने पर प्राथमिकता के आधार पर उनका नाम जोड़ा जाएगा। हालांकि, इसी बीच जोबामुनी सोरेन और आलिया सुल्ताना खातून जैसी कई महिलाओं ने अपने बैंक खातों में योजना की राशि पहुंचने की पुष्टि करते हुए प्रशासन के सामने खुशी भी जाहिर की। इसके अलावा, जमीन के आपसी बंटवारे, गोचर भूमि पर अवैध कब्जे, अतिक्रमण और आयुष्मान कार्ड बनवाने जैसी कई अन्य जमीनी समस्याओं पर भी डीसी ने सुनवाई की। जामताड़ा का यह जनता दरबार इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि यदि शीर्ष अधिकारी सीधे जनता से जुड़ें, तो सिस्टम की भूलभुलैया में फंसे आम इंसान की समस्याओं का ऑन-स्पॉट समाधान कितनी आसानी से निकाला जा सकता है।
जमशेदपुर। जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र की विधायक पूर्णिमा दास साहू का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह ग्रामीण महिलाओं के साथ बारिश के बीच खेत में धान की रोपाई करती नजर आ रही हैं। रांची से जमशेदपुर लौटते समय राष्ट्रीय राजमार्ग-33 (NH-33) पर तमाड़ के नीरूडीह गांव के पास खेतों से महिलाओं के रोपाई गीत सुनकर विधायक ने अपना काफिला रुकवा दिया और सीधे पानी से भरे खेत में उतर गईं। महिलाओं के साथ मिलकर की धान रोपाई खेत में पहुंचने के बाद विधायक ने ग्रामीण महिलाओं से धान का बिचड़ा (पौध) लिया और उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर धान रोपना शुरू कर दिया। इस दौरान उन्होंने महिलाओं से खेती-किसानी, बारिश की स्थिति और फसल से जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से बातचीत की। महिलाओं ने बताया कि वे अपने ही खेतों में रोपाई कर रही हैं। विधायक ने उनकी समस्याओं और ग्रामीण जीवन से जुड़े मुद्दों को भी ध्यान से सुना। बचपन की यादें हुईं ताजा धान रोपाई के दौरान पूर्णिमा दास साहू भावुक भी नजर आईं। उन्होंने कहा कि खेत में उतरते ही उन्हें बचपन के दिन याद आ गए, जब वह अपनी बुआ के गांव जाकर महिलाओं के साथ धान रोपा करती थीं। उन्होंने कहा कि वर्षों बाद फिर से यह अनुभव प्राप्त कर उन्हें बेहद खुशी और आत्मीयता का एहसास हुआ। किसानों को बताया देश की रीढ़ विधायक ने किसानों को देश का असली अन्नदाता बताते हुए कहा कि उनकी मेहनत और समर्पण के कारण ही देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है। उन्होंने कहा कि खेतों में काम करना बेहद कठिन है, लेकिन किसान हर परिस्थिति में अपने दायित्व का निर्वहन करते हैं। इसलिए उनके योगदान का सम्मान किया जाना चाहिए। सादगी ने जीता लोगों का दिल विधायक का यह सहज और जमीन से जुड़ा अंदाज स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों को काफी पसंद आया। लोगों ने इसे जनप्रतिनिधि और आम जनता के बीच मजबूत जुड़ाव का उदाहरण बताया। खेत में धान रोपाई का उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जहां लोग उनकी सादगी, किसानों के प्रति सम्मान और ग्रामीण संस्कृति से जुड़ाव की सराहना कर रहे हैं।
गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र स्थित औद्योगिक इलाके की एक फैक्ट्री में सोमवार देर रात दर्दनाक हादसा हो गया। फैक्ट्री में पिछले दो दशकों से कार्यरत 52 वर्षीय सुपरवाइजर राजकिशोर सिन्हा की कोयला लदे भारी मालवाहक वाहन की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था और कार्यस्थल पर पर्याप्त रोशनी को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मृतक धनबाद के निरसा का निवासी था और वर्तमान में गिरिडीह शहर के कुटिया मंदिर रोड में रह रहा था। घटना की सूचना मिलते ही मुफ्फसिल थाना प्रभारी श्याम किशोर महतो पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। हादसा इतना भीषण था कि शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गया, जिसे बोरे में भरकर सदर अस्पताल लाया गया। हालांकि, परिजनों ने उचित मुआवजे की मांग करते हुए पोस्टमार्टम फिलहाल रुकवा दिया है। प्रत्यक्षदर्शी कर्मचारियों के अनुसार राजकिशोर सिन्हा रात में टॉर्च की रोशनी से मालवाहक वाहन को बैक करवा रहे थे। इसी दौरान वाहन चालक उन्हें देख नहीं पाया और वाहन उनके ऊपर चढ़ गया। मृतक के भांजे आयुष रंजन सिन्हा ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री परिसर में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण टॉर्च के सहारे काम करना पड़ रहा था। सचिव अधिवक्ता चुन्नूकांत और भाकपा माले भाजपा नेता एवं बार एसोसिएशन के सचिव अधिवक्ता चुन्नूकांत और भाकपा माले नेता राजेश सिन्हा ने भी मौके पर पहुंचकर मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा देने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि यदि फैक्ट्री में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था होती तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। वहीं, फैक्ट्री प्रबंधन ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि वह मृतक के परिवार के साथ खड़ा है और उन्हें उचित मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और परिजनों की शिकायत के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जाएगी।