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चतरा में 1 से 23 अप्रैल तक होमगार्ड भर्ती, DC ने स्टेडियम का लिया जायजा

Anjali Kumari मार्च 31, 2026 0
Home Guard recruitment in Chatra
Home Guard recruitment in Chatra

चतरा। झारखंड के चतरा जिले में 1 से 23 अप्रैल तक होमगार्ड की बहाली होगी। इसे लेकर तैयारी पूरी कर ली गई है। भर्ती प्रक्रिया 1 अप्रैल से शुरू होकर 23 अप्रैल तक चलेगी। इस दौरान सभी अभ्यर्थियों की शारीरिक जांच और लिखित परीक्षा चतरा शहर के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में होगी।

 

DC ने लिया ग्राउंड का जायजा


भर्ती से पहले उपायुक्त कीर्तिश्री जी खुद स्टेडियम पहुंचीं और पूरे इंतजाम का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने वहां मौजूद दंडाधिकारियों और अधिकारियों को साफ निर्देश दिया कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से कराई जाए।

 

भीड़ और सुरक्षा पर खास फोकस


उपायुक्त ने अभ्यर्थियों की सुविधा के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन पर भी खास ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवार आएंगे, ऐसे में हर छोटी-बड़ी व्यवस्था दुरुस्त रहनी चाहिए।

 

पहले ही कर लिया गया ट्रायल


किसी तरह की गड़बड़ी न हो, इसके लिए भर्ती प्रक्रिया का ट्रायल भी कराया गया। इससे प्रशासन को यह समझने में मदद मिली कि कहां सुधार की जरूरत है और कैसे पूरी प्रक्रिया को और बेहतर बनाया जा सकता है।

 

समय पर तैयारी पूरी करने का निर्देश


DC ने सभी अधिकारियों को आपसी तालमेल के साथ काम करने और तय समय के भीतर सभी तैयारियां पूरी करने को कहा। प्रशासन की कोशिश है कि पूरी बहाली प्रक्रिया निष्पक्ष और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो।

 

कई अधिकारी रहे मौजूद


निरीक्षण के दौरान अपर समाहर्ता अरविंद कुमार, डीआरडीए निदेशक अलका कुमारी, एसडीओ जहूर आलम, एसडीपीओ संदीप सुमन, डीएसपी मुख्यालय अमिता लकड़ा, जिला समादेष्टा अमरेंद्र कुमार और इंस्पेक्टर माजिद आलम समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।

 

युवाओं के लिए बड़ा मौका


होमगार्ड बहाली को लेकर जिले के युवाओं में खासा उत्साह है। लंबे समय से इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह एक बड़ा मौका माना जा रहा है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित, अनुज अग्निहोत्री बने टॉपर, 958 उम्मीदवार सफल

UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)   भारतीय पुलिस सेवा (IPS)   भारतीय विदेश सेवा (IFS)   भारतीय राजस्व सेवा (IRS)   भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं   979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं   होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें   “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं   Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें   मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी   Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें   15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98   EWS: 85.92   OBC: 87.28   SC: 79.03   ST: 74.23   आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज

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पटना, एजेंसियां। बिहार में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे अभ्यर्थियों के लिए एक शानदार मौका सामने आया है। पटना हाई कोर्ट ने टेक्निकल असिस्टेंट (ग्रुप-सी) पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह भर्ती उन युवाओं के लिए खास है जो कंप्यूटर, टेक्निकल सपोर्ट, आईटी या इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। इच्छुक उम्मीदवार 1 अप्रैल 2026 से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 53 पदों को भरा जाएगा। आवेदन करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है, जबकि आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तारीख 2 मई 2026 है। ऐसे में उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम समय की भीड़ और तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए समय रहते आवेदन पूरा कर लें।   योग्यता और आयु सीमा क्या है? इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास कंप्यूटर साइंस, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन जैसे विषयों में आईटीआई या डिप्लोमा होना चाहिए। यह योग्यता किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से प्राप्त होनी जरूरी है।आयु सीमा की बात करें तो उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष और अधिकतम उम्र 37 वर्ष होनी चाहिए। हालांकि, एससी, एसटी, महिला और दिव्यांग वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु में छूट दी जाएगी।   चयन प्रक्रिया और परीक्षा पैटर्न चयन प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होगी। सबसे पहले उम्मीदवारों को 100 अंकों की लिखित परीक्षा देनी होगी, जिसकी अवधि 2 घंटे होगी। परीक्षा में सामान्य जागरूकता, रीजनिंग, गणितीय योग्यता, अंग्रेजी और कंप्यूटर ज्ञान से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे। लिखित परीक्षा में सफल होने के लिए उम्मीदवारों को कम से कम 40 प्रतिशत अंक लाने होंगे। इसके बाद सफल अभ्यर्थियों को स्किल टेस्ट और फिर इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा।   फीस, सैलरी और आवेदन प्रक्रिया आवेदन शुल्क सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 1100 रुपये और एससी/एसटी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 550 रुपये तय किया गया है। शुल्क का भुगतान ऑनलाइन मोड में किया जाएगा।   चयनित उम्मीदवारों को 29,200 रुपये से 92,300 रुपये प्रति माह तक वेतन मिलेगा। इसके साथ सरकारी नियमों के अनुसार अन्य भत्ते भी दिए जाएंगे। आवेदन के लिए उम्मीदवारों को पटना हाई कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा। आवेदन के दौरान सभी जानकारियां सही भरें, जरूरी दस्तावेज अपलोड करें और अंत में फॉर्म का प्रिंटआउट जरूर सुरक्षित रखें।

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Home Guard recruitment candidates standing in line for physical test at Jawaharlal Nehru Stadium, Chatra
चतरा में होमगार्ड भर्ती की नई तारीखें जारी: 1 अप्रैल से शुरू होंगे फिजिकल और लिखित परीक्षा, प्रखंडवार शेड्यूल तय

चतरा जिले में होमगार्ड बहाली को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। जिला प्रशासन ने भर्ती प्रक्रिया की नई तिथियां घोषित करते हुए स्पष्ट किया है कि अब शारीरिक दक्षता जांच और लिखित परीक्षा 1 अप्रैल से 23 अप्रैल तक आयोजित की जाएगी। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में होगी परीक्षा भर्ती प्रक्रिया के तहत सभी परीक्षाएं Jawaharlal Nehru Stadium में आयोजित की जाएंगी। प्रशासन ने अभ्यर्थियों के लिए सुबह 6 बजे तक रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी है। समय पर नहीं पहुंचने वाले उम्मीदवारों को परीक्षा में शामिल होने का मौका नहीं मिलेगा। प्रखंडवार परीक्षा शेड्यूल जिला प्रशासन ने परीक्षा की तिथियां प्रखंडवार निर्धारित की हैं- 01 अप्रैल: कान्हाचट्टी 02 अप्रैल: गिद्धौर 04 अप्रैल: लावालौंग 06 अप्रैल: पत्थलगड्डा 07 अप्रैल: मयूरहंड 08 अप्रैल: कुन्दा 09-10 अप्रैल: चतरा सदर 11 अप्रैल: इटखोरी 13 व 15 अप्रैल: हंटरगंज 16-17 अप्रैल: सिमरिया 18 व 20 अप्रैल: प्रतापपुर 21-22 अप्रैल: टंडवा 23 अप्रैल: शहरी तकनीकी एवं गैर-तकनीकी अभ्यर्थी अभ्यर्थियों के लिए जरूरी निर्देश प्रशासन ने सभी उम्मीदवारों को निर्देश दिया है कि वे अपने सभी आवश्यक दस्तावेज साथ लेकर आएं। शारीरिक जांच के लिए निर्धारित मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। पारदर्शिता पर प्रशासन का जोर जिला प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई जाएगी। किसी भी तरह की गड़बड़ी या अनुशासनहीनता पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। अभ्यर्थियों को केवल आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करने की सलाह दी गई है।  

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