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Siddaramaiah Exit Buzz Grows in Karnataka Congress

कर्नाटक में बड़ा राजनीतिक उलटफेर संभव, 28 मई को इस्तीफा दे सकते हैं सिद्धारमैया

surbhi मई 27, 2026 0
Karnataka CM Siddaramaiah amid resignation buzz and Congress leadership talks in Delhi
Siddaramaiah Resignation Rumours Karnataka Congress

कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान की लंबी बैठक और उसके बाद राहुल गांधी व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अलग मुलाकात ने नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं को नया बल दे दिया है।

कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर किसी भी बदलाव से इनकार किया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया 28 मई को बड़ा फैसला ले सकते हैं। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, वे इस्तीफा देने पर विचार कर रहे हैं।

दिल्ली में हुई हाईलेवल बैठक से बढ़ी चर्चाएं

मंगलवार को दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान ने राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों को लेकर अहम बैठक बुलाई। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, रणदीप सिंह सुरजेवाला और केसी वेणुगोपाल मौजूद रहे।

बैठक के बाद राहुल गांधी और सिद्धारमैया के बीच अलग से वन-टू-वन बातचीत हुई। सूत्रों के मुताबिक, इस मुलाकात में कर्नाटक में संभावित नेतृत्व परिवर्तन और सत्ता हस्तांतरण के विकल्पों पर चर्चा की गई।

सिद्धारमैया को राज्यसभा भेजने का भी विकल्प

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व सिद्धारमैया को राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका देने पर विचार कर रहा है। इसके तहत उन्हें कर्नाटक से राज्यसभा भेजे जाने का विकल्प भी चर्चा में है। अभी तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि अगले दौर की बातचीत के बाद ही कांग्रेस हाईकमान कोई स्पष्ट रोडमैप तय करेगा।

28 मई को हो सकता है बड़ा ऐलान

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया 28 मई को अपने बेंगलुरु आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं। इसी दौरान वे अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा बयान दे सकते हैं।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को संभालने के लिए कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला को बेंगलुरु भेजा जा सकता है। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि डीके शिवकुमार फिलहाल दिल्ली में हैं और जल्द बेंगलुरु लौट सकते हैं।

डीके शिवकुमार की दावेदारी फिर चर्चा में

कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता परिवर्तन की चर्चाएं लंबे समय से चल रही हैं। वर्ष 2023 विधानसभा चुनाव के बाद से ही यह चर्चा रही कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच ढाई-ढाई साल के कार्यकाल को लेकर कोई समझौता हुआ था। पार्टी ने कभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की। अब सरकार के तीन साल पूरे होने के बाद शिवकुमार समर्थक खुलकर उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठा रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि नेतृत्व परिवर्तन होता है, तो डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार होंगे।


कांग्रेस ने बदलाव की खबरों को बताया अफवाह

इन तमाम अटकलों के बीच कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने नेतृत्व परिवर्तन की खबरों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हुई बैठक सिर्फ राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों को लेकर थी।

वेणुगोपाल ने कहा,
“कर्नाटक में सब ऑल इज वेल है। जो भी चर्चाएं चल रही हैं, वे केवल अटकलें हैं।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उम्मीदवारों की घोषणा अन्य राज्यों के साथ की जाएगी।

बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना

कर्नाटक की राजनीतिक हलचल पर बीजेपी ने कांग्रेस सरकार को घेरा है। बीजेपी सांसद मनन कुमार मिश्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार अंदरूनी खींचतान में उलझी हुई है और राज्य में विकास कार्य ठप पड़ गए हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर कई दावेदार हैं और पार्टी नेतृत्व इस विवाद का समाधान निकालने में असफल साबित हो रहा है।

कांग्रेस के लिए आसान नहीं फैसला

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस नेतृत्व के लिए सिद्धारमैया को हटाने का फैसला आसान नहीं होगा। वे फिलहाल कांग्रेस शासित राज्यों में प्रमुख ओबीसी चेहरा माने जाते हैं और AHINDA सामाजिक समीकरण पर उनकी मजबूत पकड़ है।

कांग्रेस नेतृत्व किसी भी ऐसे कदम से बचना चाहता है, जिससे राज्य में सामाजिक और राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो।

दिल्ली में डटे रहे मंत्री और विधायक

दिल्ली में हुई बैठकों के दौरान कर्नाटक के कई मंत्री, विधायक और सिद्धारमैया समर्थक लगातार सक्रिय रहे। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने अपने समर्थक नेताओं के साथ अलग बैठकें भी कीं।

अब सभी की नजर 28 मई पर टिकी हुई है, जब सिद्धारमैया अपने अगले कदम को लेकर स्थिति साफ कर सकते हैं।

 

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बंगाल के कर्मचारियों को बड़ी सौगात, केंद्र के बराबर मिलेगा महंगाई भत्ता

कोलकाता,एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) को लेकर बड़ी घोषणा की गई है। राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि आगामी बजट में कर्मचारियों को केंद्र सरकार के बराबर महंगाई भत्ता देने की दिशा में बड़ा फैसला लिया जाएगा। इस ऐलान के बाद राज्य के कर्मचारियों में उत्साह का माहौल है।   केंद्रीय दर के बराबर होगा डीए सूत्रों के अनुसार, सरकार का लक्ष्य राज्य कर्मचारियों के डीए को केंद्र सरकार के समान स्तर पर लाना है। लंबे समय से राज्य कर्मचारी इस मांग को लेकर आंदोलन और विरोध कर रहे थे। सरकार ने अब इस अंतर को खत्म करने की दिशा में कदम उठाने की बात कही है।   बकाया डीए पर भी हो सकता है फैसला नई योजना के तहत सिर्फ मौजूदा महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी ही नहीं, बल्कि पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान रुके हुए डीए एरियर को भी चरणबद्ध तरीके से जारी करने की तैयारी की जा रही है। इससे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ा वित्तीय लाभ मिलने की संभावना है।   वित्तीय सुधार और बजट पर फोकस सरकारी सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्रालय को राज्य के राजस्व में सुधार और डीए फंड को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए प्रशासनिक खर्चों में कटौती की योजना बनाई जा रही है। लोक निर्माण विभाग और अन्य विभागों में गैर-जरूरी खर्च कम करने पर भी विचार किया जा रहा है।   14 लाख कर्मचारियों को होगा लाभ इस फैसले से राज्य के लगभग 14 लाख नियमित सरकारी कर्मचारी, शिक्षक, नगर निगम कर्मी और करीब 6 लाख पेंशनभोगी परिवारों को फायदा मिलने की उम्मीद है। इसे राज्य सरकार की एक बड़ी कल्याणकारी पहल माना जा रहा है।   कर्मचारियों में उत्साह, बजट पर नजर डीए बढ़ोतरी की घोषणा के संकेत के बाद कर्मचारियों में खुशी की लहर है। अब सभी की नजर आगामी राज्य बजट पर टिकी हुई है, जिसमें इस फैसले पर अंतिम मुहर लगने की संभावना जताई जा रही है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। नई दिल्ली स्थित झारखंड भवन, वसंत विहार की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से झारखंड सरकार के रेजिडेंट कमिश्नर श्री अरवा राजकमल ने सोमवार को भवन का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने भवन में उपलब्ध सुविधाओं, स्वच्छता व्यवस्था, रखरखाव, सुरक्षा और अतिथि सेवाओं का विस्तृत जायजा लिया तथा अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।   मेंटेनेंस और अतिथि सेवाओं की समीक्षा निरीक्षण के दौरान रेजिडेंट कमिश्नर ने अतिथि कक्षों, कॉमन एरिया, भवन परिसर और रसोईघर का दौरा कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने हाउसकीपिंग, स्वच्छता और रखरखाव कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से भवन संचालन की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में स्थित झारखंड भवन राज्य का प्रतिनिधि संस्थान है, इसलिए यहां आने वाले अतिथियों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।   पार्किंग व्यवस्था सुधारने के निर्देश निरीक्षण के दौरान भवन परिसर में लंबे समय से खड़े छह अनुपयोगी और कंडम वाहनों को लेकर भी चर्चा हुई। रेजिडेंट कमिश्नर ने इन वाहनों की नियमानुसार शीघ्र नीलामी प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया ताकि पार्किंग स्थल का बेहतर और सुव्यवस्थित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने उपलब्ध स्थान और संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर भी विशेष जोर दिया।   बंद पड़े सीसीटीवी कैमरों को तुरंत चालू करने का आदेश भवन की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के दौरान कुछ सीसीटीवी कैमरे बंद पाए गए। इस पर रेजिडेंट कमिश्नर ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल मरम्मत कर सभी कैमरों को पुनः क्रियाशील बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।   आधुनिकीकरण पर रहेगा फोकस रेजिडेंट कमिश्नर ने कहा कि झारखंड भवन में सुविधाओं का निरंतर आधुनिकीकरण और सुधार समय की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भवन संचालन को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और कार्यकुशल बनाया जाए ताकि आगंतुकों और अतिथियों को बेहतर अनुभव मिल सके। निरीक्षण के अंत में उन्होंने भवन की व्यवस्थाओं को और मजबूत बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक सुझाव एवं दिशा-निर्देश दिए।

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Sonia Gandhi and Mamata Banerjee share a warm interaction during INDIA alliance coordination meeting in Delhi.
सोनिया गांधी से गले मिलते ही भावुक हुईं ममता बनर्जी, INDIA बैठक की तस्वीरों ने खींचा ध्यान

  नई दिल्ली: INDIA गठबंधन की समन्वय समिति की बैठक के दौरान सोमवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी देखने को मिली। इस दौरान ममता बनर्जी भावुक भी नजर आईं। दिल्ली में विपक्षी नेताओं की मुलाकात बनी चर्चा का विषय INDIA गठबंधन की बैठक में शामिल होने पहुंचीं ममता बनर्जी का सोनिया गांधी ने स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच कुछ समय तक बातचीत हुई और मुलाकात की तस्वीरें तेजी से चर्चा में आ गईं। राजनीतिक जानकार इसे विपक्षी दलों के बीच बढ़ते संवाद का संकेत मान रहे हैं। तीन दशक पुराने रिश्तों की फिर हुई चर्चा कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के रिश्ते भारतीय राजनीति के सबसे दिलचस्प अध्यायों में से एक रहे हैं। 1998 में कांग्रेस से अलग होकर ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। इसके बाद दोनों दलों के बीच सहयोग और प्रतिस्पर्धा का दौर लगातार चलता रहा। बंगाल की राजनीति में कई बार आमने-सामने आए दोनों दल पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और टीएमसी कई चुनावों में प्रतिद्वंद्वी रही हैं। राज्य की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के उभार के साथ कांग्रेस का प्रभाव सीमित होता गया। इसके बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर दोनों दल कई मौकों पर एक साथ भी नजर आए हैं। 2024 के चुनाव के बाद बढ़ी थी राजनीतिक दूरी लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए थे। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया था, जिसके बाद कांग्रेस और टीएमसी के रिश्तों में तनाव की चर्चा तेज हो गई थी। INDIA गठबंधन को मजबूत करने पर हुई बातचीत सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान विपक्षी एकजुटता और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर भी चर्चा हुई। विपक्षी दल आगामी चुनावों को देखते हुए साझा मुद्दों पर साथ आने की कोशिश कर रहे हैं। 10 जनपथ पर फिर हुई अहम मुलाकात बैठक के अगले दिन ममता बनर्जी ने सोनिया गांधी से उनके आवास 10 जनपथ पर भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई इस बातचीत को विपक्षी राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टीएमसी की चुनौतियों के बीच बढ़ी राजनीतिक सक्रियता हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस को संगठनात्मक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में ममता बनर्जी की विपक्षी नेताओं के साथ लगातार बैठकें राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही हैं। विपक्षी राजनीति में नए संकेत दे रही है यह मुलाकात विश्लेषकों का मानना है कि सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की यह मुलाकात केवल शिष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय और संवाद की संभावनाओं को भी दर्शाती है। आने वाले समय में इसका असर राष्ट्रीय राजनीति में देखने को मिल सकता है।  

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