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Bengal Cracks Down on Illegal Immigration

बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ पश्चिम बंगाल में व्यापक अभियान, सीमावर्ती जिलों से कोलकाता तक जांच तेज

Deepshikha जून 12, 2026 0
Security personnel conduct verification drive in West Bengal against illegal immigration and fake document networks.
West Bengal Illegal Immigration Crackdown

 

कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने अवैध बांग्लादेशी नागरिकों और फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान शुरू किया है। गृह विभाग के निर्देश पर पुलिस, खुफिया एजेंसियां और केंद्रीय सुरक्षा बल संयुक्त रूप से संवेदनशील इलाकों में जांच अभियान चला रहे हैं।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, खुफिया इनपुट के आधार पर उन क्षेत्रों की पहचान की जा रही है जहां फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी और अन्य दस्तावेजों के जरिए संदिग्ध लोगों के रहने की आशंका है। अभियान केवल सीमावर्ती जिलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कोलकाता समेत प्रमुख शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में भी एक साथ चलाया जाएगा।

सीमावर्ती जिलों में विशेष निगरानी

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने वरिष्ठ पुलिस और खुफिया अधिकारियों के साथ बैठक कर अभियान की रूपरेखा तैयार की है। उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, नदिया, मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे सीमावर्ती जिलों में विशेष जांच दल (SIT) गठित किए गए हैं, जो स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं।

भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा बढ़ाई गई

सीमा सुरक्षा बल (BSF) और राज्य पुलिस ने संयुक्त गश्त बढ़ा दी है। संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में ड्रोन, थर्मल इमेजिंग कैमरों और अन्य आधुनिक तकनीकों की मदद से चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है, ताकि अवैध आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।

शहरी क्षेत्रों में भी पहचान सत्यापन अभियान

कोलकाता, हावड़ा और हुगली के औद्योगिक क्षेत्रों, जूट मिलों और बड़े निर्माण स्थलों पर काम करने वाले श्रमिकों के पहचान पत्रों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि कुछ संदिग्ध व्यक्ति फर्जी पहचान के जरिए इन इलाकों में रह सकते हैं।

फर्जी दस्तावेज नेटवर्क पर कार्रवाई

पुलिस ने उत्तर 24 परगना के सीमावर्ती क्षेत्र से दो आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, दोनों पर अवैध रूप से सीमा पार कराने और फर्जी भारतीय दस्तावेज उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क से जुड़े होने का आरोप है। उनके कब्जे से कथित तौर पर कई फर्जी मुहरें और दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

अधिकारियों का कहना है कि अभियान आगे भी जारी रहेगा और अवैध दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Indian External Affairs Minister S Jaishankar raises concerns over US Navy action affecting Indian sailors in Gulf waters.
US Navy हमले पर भारत का कड़ा विरोध, एस. जयशंकर ने मार्को रुबियो से कहा- ‘व्यावसायिक जहाजों पर घातक कार्रवाई उचित नहीं’

खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नाविकों की मौत पर भारत का सख्त रुख खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई में भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत ने अमेरिका के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio से बातचीत कर स्पष्ट कहा कि व्यावसायिक जहाजों पर इस तरह की घातक सैन्य कार्रवाई उचित नहीं है। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय नाविकों की मौत पर भारत की गहरी चिंता और विरोध अमेरिकी पक्ष के सामने रखा है। उन्होंने कहा कि नागरिक जहाजों को निशाना बनाने जैसी घटनाएं अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। दो दिनों में दूसरी बार अमेरिकी राजनयिक को तलब किया गया भारत सरकार ने 48 घंटे के भीतर दूसरी बार भारत में अमेरिकी मिशन के प्रभारी अधिकारी (Charge d’Affaires) Jason Meeks को विदेश मंत्रालय बुलाकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी नौसेना द्वारा ओमान की खाड़ी में भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों के कारण तीन भारतीयों की जान जा चुकी है। भारत ने इसे “टाला जा सकने वाला और दुखद नुकसान” बताया है। MT Settebello हमले में 3 भारतीयों की मौत सरकार के अनुसार, एमटी सेत्तेबेलो (MT Settebello) नामक जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। जहाज पर कुल 24 भारतीय मौजूद थे, जिनमें से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया। इसके अलावा अमेरिकी बलों ने ओमान तट के पास गिनी-बिसाउ ध्वज वाले टैंकर MT Jalveer के इंजन कक्ष पर हेलफायर मिसाइलें दागीं। इस जहाज पर मौजूद सभी 20 भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकाला गया। विदेश मंत्रालय ने जताई गहरी चिंता विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि नागरिक जहाजों के खिलाफ घातक बल का इस्तेमाल पूरी तरह अस्वीकार्य है। मंत्रालय ने कहा कि ऐसी कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा, स्थिरता और विश्वसनीयता को कमजोर करती हैं। भारत ने अमेरिकी प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में तैनात उसकी सैन्य इकाइयां भविष्य में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। पश्चिम एशिया संघर्ष का भारतीय नाविकों पर असर पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव का असर भारतीय नाविकों पर भी पड़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार संघर्ष शुरू होने के बाद अब तक 13 भारतीयों की मौत हो चुकी है, जबकि एक नाविक अब भी लापता बताया जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य बना वैश्विक चिंता का केंद्र Strait of Hormuz दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक तेल और गैस परिवहन होता है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव और नौसैनिक गतिविधियों ने न केवल समुद्री सुरक्षा को प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी अस्थिरता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो तेल और गैस की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका असर भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।  

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अभिषेक बनर्जी के घर पुलिस की छापेमारी

कोलकता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार तड़के बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पर पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की संयुक्त टीम ने छापेमारी की। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कार्रवाई पश्चिम मेदिनीपुर जिले के शालबनी थाने में दर्ज एक मामले से जुड़ी थी। पुलिस का उद्देश्य उनके कार्यकारी सहायक सुमित रॉय की तलाश करना बताया गया, जो कथित तौर पर फरार हैं।   तड़के 3 बजे शुरू हुई कार्रवाई जानकारी के मुताबिक, टीम सुबह करीब 3 बजे आवास पर पहुंची। शुरुआत में दरवाजा खटखटाया गया, लेकिन जवाब न मिलने पर घंटों इंतजार किया गया। इसके बाद राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की मदद से मुख्य द्वार का ताला तोड़कर पुलिस घर के अंदर दाखिल हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी, महिला कर्मी और केंद्रीय बल तैनात रहे।   टीएमसी का विरोध और आरोप टीएमसी ने इस कार्रवाई को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी का आरोप है कि पुलिस ने जबरन ताला तोड़कर घर में प्रवेश किया और तलाशी ली। छापेमारी के दौरान चार घंटे से अधिक समय तक कार्रवाई चली और सुबह तक सुरक्षा बल परिसर में मौजूद रहे।   ममता बनर्जी मौके पर पहुंचीं घटना की जानकारी मिलते ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तुरंत अपने आवास से अभिषेक बनर्जी के घर पहुंचीं। कुछ देर बाद संयुक्त टीम वहां से रवाना हो गई।   लगातार जांच एजेंसियों के समन अभिषेक बनर्जी को आने वाले दिनों में कई जांच एजेंसियों के सामने पेश होना है। 14 से 16 जून के बीच उन्हें विधानसभा से जुड़े कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले, शिक्षक भर्ती घोटाले और अन्य मामलों में पूछताछ के लिए बुलाया गया है। यह घटना राज्य की सियासत में नए विवाद और तनाव का कारण बन गई है।

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अब पेट्रोल पंप से नहीं खरीद सकेंगे ज्यादा तेल! सरकार ने लागू किए नए नियम

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खरीद को लेकर नई गाइडलाइन जारी करते हुए बड़े औद्योगिक, व्यावसायिक और संस्थागत उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए आदेश के तहत ऐसे उपभोक्ता अब सामान्य पेट्रोल पंपों (रिटेल आउटलेट्स) से ईंधन नहीं खरीद सकेंगे। उन्हें अपनी आवश्यकता के अनुसार पेट्रोल और डीजल केवल अधिकृत बल्क सेल प्वाइंट्स (थोक बिक्री केंद्रों) से ही खरीदना होगा। यह व्यवस्था शुरुआती तौर पर 90 दिनों के लिए लागू की गई है।   मध्य-पूर्व संकट के बीच लिया गया फैसला सरकार का यह निर्णय ऐसे समय आया है जब मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी हुई है। आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ कम रखने के लिए सरकारी तेल कंपनियों ने खुदरा कीमतों में सीमित बढ़ोतरी की, जबकि थोक ग्राहकों के लिए ईंधन महंगा कर दिया गया। इसी वजह से कई बड़े उद्योग और संस्थान सस्ता ईंधन पाने के लिए पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में डीजल खरीदने लगे, जिससे कई क्षेत्रों में आम लोगों के लिए आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई।   200 लीटर से अधिक डीजल नहीं मिलेगा नई गाइडलाइन के अनुसार, किसी भी संदिग्ध ग्राहक या वाहन को एक पेट्रोल पंप से एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही दिया जाएगा। इससे अधिक मात्रा में ईंधन खरीदने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा डीजल की बिक्री केवल वाहन के मुख्य ईंधन टैंक या पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) से प्रमाणित कंटेनरों में ही की जाएगी।   नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल पंप से खरीदे गए डीजल को दोबारा मुनाफे के लिए बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों, संस्थानों या पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही राज्य सरकारों को जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।   जांच और जब्ती का अधिकार भी बढ़ाया गया नए निर्देशों के तहत अधिकृत अधिकारी, डीएसपी स्तर या उससे ऊपर के पुलिस अधिकारी तथा तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी पेट्रोल पंपों की जांच कर सकेंगे। यदि कहीं अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो वे ईंधन और संबंधित सामग्री जब्त करने की कार्रवाई भी कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना और कालाबाजारी पर रोक लगाना है।

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Domestic LPG cylinders stacked at a distribution center after latest cooking gas price hike in India.
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घरेलू गैस सिलेंडर फिर महंगा, विपक्ष का केंद्र सरकार पर हमला; महंगाई को लेकर बढ़ी सियासी गर्मी

Deepshikha जून 8, 2026 0

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