नई दिल्ली, एजेंसियां। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, प्रदूषण और बाजार में मिलने वाले केमिकल युक्त शैम्पू हमारे बालों की प्राकृतिक चमक छीन लेते हैं। बालों का झड़ना, डैंड्रफ और रूखापन एक आम समस्या बन गई है। ऐसे में प्रेरणा द्वारा सुझाया गया यह घरेलू हर्बल शैम्पू बालों की देखभाल के लिए सबसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है। प्राचीन आयुर्वेद की शक्ति से भरपूर यह शैम्पू न केवल बालों को साफ करता है, बल्कि उन्हें जड़ों से मजबूत और रेशमी भी बनाता है।
इस शैम्पू को तैयार करने के लिए चार मुख्य जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है, जिनके अपने विशिष्ट गुण हैं:
• रीठा (Soapnuts): यह एक प्राकृतिक क्लींजर है जो झाग पैदा करता है और स्कैल्प की गंदगी को बिना नुकसान पहुँचाए साफ करता है।
• शिकाकाई: इसे 'बालों का फल' कहा जाता है। यह बालों के पीएच स्तर को बनाए रखता है और उन्हें उलझने से रोकता है।
• आंवला: विटामिन-सी से भरपूर आंवला बालों को काला बनाए रखने और मजबूती देने में सहायक है।
• मेथी दाना: यह डैंड्रफ को खत्म करने और बालों को कंडीशन करने का काम करता है।
आवश्यक सामग्री:
• रीठा: 8-10 पीस
• शिकाकाई: 4-5 टुकड़े
• सूखा आंवला: 4-5 पीस
• मेथी दाना: 1 चम्मच
• पानी: 2-3 कप
1. भिगोना: सबसे पहले रीठा, शिकाकाई और आंवला को एक बर्तन में 2-3 कप पानी डालकर रात भर के लिए भिगो दें।
2. उबालना: अगले दिन उसी पानी के साथ इन सामग्रियों को मध्यम आंच पर 10-15 मिनट तक उबालें। जब पानी उबलकर आधा रह जाए, तो गैस बंद कर दें।
3. मसलना और छानना: मिश्रण के ठंडा होने पर इसे हाथों से अच्छी तरह मसलें ताकि जड़ी-बूटियों का सारा सत्व पानी में आ जाए। अब इस गाढ़े तरल को एक साफ कपड़े या छलनी से छान लें।
4. मेथी का मिश्रण: पहले से भिगोकर पीसे हुए मेथी दाना के पेस्ट को इस छने हुए पानी में मिलाएं। आपका 100% प्राकृतिक हर्बल शैम्पू तैयार है।
अपने बालों को सादे पानी से गीला करें और इस तैयार मिश्रण को स्कैल्प पर लगाएं। उंगलियों से हल्के हाथों से 2-3 मिनट तक मसाज करें और फिर साफ पानी से धो लें।
• नेचुरल क्लींजिंग: यह स्कैल्प के प्राकृतिक तेल को सोखे बिना गहराई से सफाई करता है।
• झड़ते बालों पर लगाम: पोषण मिलने से बाल जड़ों से मजबूत होते हैं और टूटना कम हो जाता है।
• डैंड्रफ से मुक्ति: मेथी और आंवला के एंटी-बैक्टीरियल गुण रूसी को जड़ से खत्म करते हैं।
• रेशमी चमक: यह एक बेहतरीन कंडीशनर का काम करता है, जिससे बाल रुई जैसे नरम और चमकदार हो जाते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मुख्यमंत्री M. K. Stalin ने मदुरै की जनसभा से बड़ा चुनावी संदेश दिया। उन्होंने लोगों से DMK और उसके सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस को समर्थन देने की अपील करते हुए कहा कि यह चुनाव सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि तमिलनाडु की पहचान, भाषा और भविष्य का चुनाव है। स्टालिन ने कहा कि अगर जनता फिर से भरोसा जताती है, तो राज्य विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा और देश में और मजबूती से अपनी अलग पहचान बनाए रखेगा। ANI-आधारित रिपोर्टों के मुताबिक, मदुरै रैली में उन्होंने खुद को “न्याय की धरती” से जुड़ा बताते हुए भावनात्मक अपील भी की। तीन-भाषा नीति पर फिर स्पष्ट एलान स्टालिन ने रैली में नई शिक्षा नीति (NEP) और तीन-भाषा फॉर्मूले का कड़ा विरोध दोहराया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “जब तक DMK सत्ता में है, तमिलनाडु में तीन-भाषा नीति लागू नहीं होने दी जाएगी।” उनका आरोप है कि यह नीति गैर-हिंदी राज्यों पर हिंदी थोपने का परोक्ष तरीका है। हाल के दिनों में उन्होंने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय पर यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा नीति के जरिए संघीय ढांचे और भाषाई विविधता को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। यह मुद्दा अब चुनावी बहस का बड़ा केंद्र बन चुका है। 234 सीटों पर जीत का दावा, मुकाबला हुआ दिलचस्प सीएम स्टालिन ने चुनाव को लेकर पूरा आत्मविश्वास दिखाते हुए दावा किया कि उनकी पार्टी 234 की 234 सीटों पर जीत दर्ज कर सकती है। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक चरण में मतदान होना है, जबकि 4 मई को नतीजे आएंगे। इस बार मुख्य मुकाबला DMK-नेतृत्व वाले गठबंधन और AIADMK-नेतृत्व वाले NDA के बीच माना जा रहा है, लेकिन अभिनेता-राजनेता Vijay की सक्रियता ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है। ऐसे में भाषा, पहचान और क्षेत्रीय स्वाभिमान इस चुनाव के सबसे बड़े मुद्दों में उभरते दिख रहे हैं।
दिसपुर, एजेंसियां। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर मंगलवार को असम क्राइम ब्रांच की टीम पहुंची, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई। यह कार्रवाई उस विवाद के बाद हुई है जिसमें पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा पर कथित तौर पर तीन पासपोर्ट रखने और विदेशों में संपत्ति होने के आरोप लगाए थे। इन आरोपों को मुख्यमंत्री और उनके परिवार ने सिरे से खारिज करते हुए मानहानि और आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, छापेमारी के दौरान दिल्ली पुलिस की टीम भी मौके पर मौजूद रही। क्या है पूरा मामला? विवाद की शुरुआत तब हुई जब पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास यूएई, मिस्र और एंटीगुआ-बारबुडा के पासपोर्ट हैं। इसके साथ ही विदेशों में कथित संपत्ति और कारोबारी हितों को लेकर भी सवाल उठाए गए। इन आरोपों के बाद हिमंत बिस्वा सरमा ने इन्हें “फर्जी, दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताया। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों में कई विसंगतियां हैं और ये कथित तौर पर “डिजिटल मैनिपुलेशन” का मामला हो सकता है। उनकी पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा ने भी इन आरोपों को “बेबुनियाद” बताया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। चुनावी माहौल में और गरमाई सियासत यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब असम विधानसभा चुनाव बेहद करीब हैं। ऐसे में इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सरमा पहले ही कह चुके हैं कि आरोपों के जरिए चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की गई है। फिलहाल असम पुलिस शिकायत के आधार पर जांच कर रही है, जबकि कांग्रेस इस कार्रवाई को राजनीतिक दबाव के रूप में देख सकती है। आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर और गरमा सकता है।
भारत ने अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक बड़ा और अहम पड़ाव पार कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात ट्वीट कर वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए बताया कि देश तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है। यह उपलब्धि तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) के “क्रिटिकैलिटी” हासिल करने से जुड़ी मानी जा रही है। क्या हासिल किया भारत ने? भारत ने सफलतापूर्वक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक में बड़ी उपलब्धि हासिल की है यह तकनीक खपत से ज्यादा परमाणु ईंधन पैदा कर सकती है इससे भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा मजबूत होगी ‘क्रिटिकैलिटी’ का क्या मतलब है? सरल भाषा में- जब परमाणु रिएक्टर स्वयं चलने वाली (self-sustaining) विखंडन प्रक्रिया हासिल कर लेता है यानी अब उसे बाहरी न्यूट्रॉन की जरूरत नहीं रहती इसे ही “क्रिटिकैलिटी” कहा जाता है, जो किसी भी रिएक्टर के सफल संचालन की सबसे अहम तकनीकी उपलब्धि होती है। फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) क्या होता है? यह एक उन्नत परमाणु रिएक्टर है अपनी खपत से ज्यादा फ्यूल (ईंधन) पैदा करता है प्लूटोनियम और यूरेनियम के मिश्रण का इस्तेमाल करता है खास बात: यह रिएक्टर थोरियम को उपयोगी ईंधन (U-233) में बदलने का रास्ता खोलता है। क्यों खास है भारत के लिए? भारत के पास- दुनिया का सिर्फ 2% यूरेनियम लेकिन करीब 25% थोरियम भंडार इसलिए भारत की रणनीति रही है कि थोरियम का इस्तेमाल कर लंबे समय तक सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा हासिल की जाए। भारत का 3-स्टेज परमाणु कार्यक्रम पहला चरण: प्राकृतिक यूरेनियम से बिजली उत्पादन दूसरा चरण (अब शुरू): प्लूटोनियम आधारित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर थोरियम को उपयोगी ईंधन में बदलने की तैयारी तीसरा चरण (भविष्य): पूरी तरह थोरियम आधारित रिएक्टर दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता दुनिया में भारत की स्थिति इस उपलब्धि के बाद भारत- रूस के बाद कमर्शियल फास्ट ब्रीडर रिएक्टर रखने वाला दूसरा देश बन सकता है स्वदेशी ताकत का उदाहरण यह परियोजना पूरी तरह मेड इन इंडिया है 200 से ज्यादा भारतीय कंपनियों (MSME सहित) का योगदान उन्नत सेफ्टी सिस्टम: आपात स्थिति में खुद बंद होने की क्षमता आगे क्या? यह सफलता भारत को तीसरे चरण यानी थोरियम आधारित ऊर्जा क्रांति की ओर ले जाएगी इससे- ऊर्जा आयात पर निर्भरता घटेगी स्वच्छ ऊर्जा बढ़ेगी भारत की वैश्विक तकनीकी स्थिति मजबूत होगी