बेंगलुरु : शहर में अचानक हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचा दी। करीब एक घंटे की तेज बारिश ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया, जिसमें अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
सबसे दर्दनाक हादसा बॉरिंग एंड लेडी कर्जन अस्पताल में हुआ, जहां तेज बारिश के दौरान एक दीवार ढह गई। इस हादसे में 7 लोगों की जान चली गई, जिनमें एक 6 साल की बच्ची भी शामिल है।
बारिश के दौरान अलग-अलग घटनाओं में भी लोगों की मौत हुई।
तेज बारिश के कारण शहर के निचले इलाकों में पानी भर गया। कई प्रमुख सड़कें जलमग्न हो गईं, जिससे यातायात पूरी तरह ठप पड़ गया। ऑफिस टाइम में बारिश होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
नगर निकाय के मुताबिक, शहर में कम से कम 87 पेड़ उखड़ गए और 131 पेड़ों की शाखाएं टूट गईं। इनमें से कई पेड़ सड़क किनारे खड़े वाहनों पर गिर गए, जिससे कारों और दोपहिया वाहनों को नुकसान पहुंचा।
अब तक 60 पेड़ और 98 शाखाओं को हटाया जा चुका है, जबकि बाकी जगहों पर काम जारी है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले तीन दिनों तक कर्नाटक के कई हिस्सों में भारी बारिश जारी रह सकती है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की अपील की है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक जटिल वैश्विक समीकरण के बीच फंसे नजर आ रहे हैं। एक ओर ईरान के साथ बढ़ता सैन्य और आर्थिक तनाव है, तो दूसरी ओर 14-15 मई को प्रस्तावित चीन का बेहद अहम दौरा। यह दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक संतुलन से जुड़ा हुआ है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है–क्या पहले ईरान के साथ टकराव सुलझाया जाए या चीन के साथ रिश्तों को प्राथमिकता दी जाए? क्यों इतना अहम है चीन दौरा? व्हाइट हाउस के अधिकारियों के अनुसार, यह दौरा कई वजहों से बेहद महत्वपूर्ण है: अमेरिका-चीन के बीच व्यापार और प्रतिबंधों को लेकर तनाव वैश्विक सप्लाई चेन में आ रही रुकावटें ऊर्जा संकट और तेल आपूर्ति का मुद्दा दरअसल, अमेरिका यह समझता है कि चीन के साथ सीधी बातचीत के बिना मौजूदा संकटों का समाधान मुश्किल होगा। यही वजह है कि पहले टाले जा चुके इस दौरे को अब हर हाल में पूरा करने की कोशिश की जा रही है। ईरान संकट ने बढ़ाई कूटनीतिक चुनौती ट्रंप के सामने सबसे बड़ी चुनौती ईरान से जुड़ी स्थिति है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है, वहां बढ़ते तनाव ने हालात को और गंभीर बना दिया है। इस मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से को तेल सप्लाई होता है मार्च की शुरुआत से ही यहां व्यवधान की स्थिति बनी हुई है कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है इसका सीधा असर वैश्विक बाजार, खासकर तेल कीमतों और व्यापार पर पड़ा है। ऊर्जा संकट और वैश्विक असर चीन समेत एशिया के कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस समुद्री मार्ग पर निर्भर हैं। रास्ता बाधित होने के कारण: तेल की सप्लाई कम हुई कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ा कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ी यही वजह है कि अब यह मुद्दा अमेरिका-चीन वार्ता का केंद्र बन चुका है। चीन की भूमिका–मध्यस्थ या रणनीतिक खिलाड़ी? चीन इस पूरे विवाद में खुद को एक संभावित मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है। लेकिन स्थिति इतनी सरल नहीं है: अमेरिका ने चीन की कई शिपिंग कंपनियों और तेल रिफाइनरियों पर प्रतिबंध लगाए हैं आरोप है कि ये कंपनियां ईरान से तेल खरीदकर अमेरिकी नियमों का उल्लंघन कर रही हैं ऐसे में चीन एक तरफ समाधान चाहता है, तो दूसरी तरफ अपने आर्थिक हितों की भी रक्षा कर रहा है। ट्रंप के सामने दो रास्ते इस पूरे घटनाक्रम में ट्रंप प्रशासन के सामने दो बड़े विकल्प हैं: 1. सैन्य दबाव बढ़ाना ईरान पर और कड़े प्रतिबंध सैन्य कार्रवाई की संभावना क्षेत्र में अमेरिका की मौजूदगी बढ़ाना 2. कूटनीतिक समाधान चीन की मध्यस्थता का इस्तेमाल ईरान के साथ बातचीत ऊर्जा और व्यापार को स्थिर करने की कोशिश विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप फिलहाल दोनों रणनीतियों को साथ लेकर चल रहे हैं–एक तरफ दबाव, दूसरी तरफ बातचीत। दौरे पर पड़ सकता है असर? अगर ईरान के साथ तनाव और बढ़ता है, तो: ट्रंप का चीन दौरा फिर टल सकता है या फिर दौरे का एजेंडा पूरी तरह ईरान संकट पर केंद्रित हो सकता है लेकिन अगर कोई आंशिक समाधान निकलता है, तो यह दौरा वैश्विक राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।
जबलपुर में हुए दर्दनाक नाव हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे के बाद सामने आई एक तस्वीर ने हर किसी को भावुक कर दिया। रेस्क्यू टीम को एक मां और उसके 4 साल के बेटे के शव मिले, जो आखिरी पल तक एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। दिल दहला देने वाला दृश्य शुक्रवार (1 मई) को चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जब मां-बेटे के शव पानी से बाहर निकाले गए, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। दोनों के शरीर पर लाइफ जैकेट बंधी हुई थी, लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और माहौल गमगीन हो गया। बरगी डैम में हुआ हादसा यह हादसा बरगी डैम के जलाशय में गुरुवार (30 अप्रैल) को हुआ। करीब 29 लोगों को लेकर जा रही एक क्रूज नाव अचानक आए तेज तूफान और हवाओं की वजह से पलट गई। हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन और रेस्क्यू ऑपरेशन घटना के बाद SDRF, स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। बचाव अभियान लगातार जारी है और लापता लोगों की तलाश की जा रही है। मौके पर पहुंचे राज्य के कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह भी इस हृदयविदारक दृश्य को देखकर भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या बताया प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शाम करीब 6 बजे अचानक तेज हवाएं चलने लगीं और जलाशय का पानी उफान पर आ गया। यात्रियों ने खतरा भांपते हुए नाव को किनारे ले जाने की गुहार लगाई, लेकिन उनकी बात अनसुनी कर दी गई। कुछ ही देर में नाव असंतुलित होकर पलट गई। स्थानीय लोगों ने बचाई कई जानें हादसे के बाद आसपास मौजूद स्थानीय लोगों ने तुरंत मदद के लिए हाथ बढ़ाया। रस्सियों की मदद से कई यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, खासकर वे लोग जिन्होंने लाइफ जैकेट पहन रखी थी। हालांकि, कई लोगों को बचाया नहीं जा सका। जांच और सवाल इस हादसे के बाद सुरक्षा इंतजामों और नाव संचालन को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर किन लापरवाहियों की वजह से यह हादसा हुआ।
1707 – इंग्लैंड, वेल्स व स्कॉटलैंड से मिलकर ग्रेट ब्रिटेन बना। 1711 - ऑस्ट्रिया ने कैरेल - हंगेरी विद्रोह पर शांति के लिए हस्ताक्षर किया 1715 - पर्शिया ने स्वीडन से युद्ध की घोषणा की। 1726 - वोल्टेयर ने इंग्लैंड में निर्वासन शुरू किया। 1753 - लिनिअस द्वारा प्रजातियों के प्लांटारम का प्रकाशन, और वनस्पति नामकरण अंतर्राष्ट्रीय संहिता द्वारा अपनाई गई संयंत्र वर्गीकरण की औपचारिक तिथि प्रारंभ की गयी। 1778 - अमेरिकी क्रांति: कुटिल बिलेट की लड़ाई हेटबोरो, पेनसिल्वेनिया में शुरू हुई। 1781 - सम्राट जोज़ेफ द्वितीय जनसंख्या के संरक्षण को कम कर दिया। 1786 - मोजार्ट के ओपेरा विवाह की शादी वियना में प्रीमियर हुई। 1822 - जॉन फिलिप्स बोस्टन के पहले मेयर बने। 1834 - बेल्जियन संसद ने रेलवे कानूनों को स्वीकार किया 1840 – यूनाइटेड किंगडम ने पहला आधिकारिक डाक टिकट जारी किया गया। 1851 – रानी विक्टोरिया ने लंदन में ग्रेट एक्जीबिशन खोली। 1889 – विश्व श्रम संघ के निर्णय को विश्व मज़दूर दिवस घोषित किया गया। 1 मई सन 1886 ईसवी को अमरीका के शिकागो नगर में 40 हज़ार से अधिक मज़ूदरों ने अपने अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन किये किंतु इन प्रदर्शनों को अमरीकी पुलिस ने निर्ममता से कुचल दिया। 1897 – स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। 1908 – प्रफुल्ल चाकी ने मुजफ्फरपुर बम कांड मामले में अपनी पिस्तौल से खुद को गोली मारी। 1912 – कैंसर के इलाज के लिए रेडियम को टेस्ट किया गया। 1914 – कार निर्माता फोर्ड वह पहली कंपनी बनी जिसने अपने कर्मचारियों के लिए आठ घंटे काम करने का नियम लागू किया। 1922 - दिल्ली यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई। 1923 – भारत में मई दिवस मनाने की शुरुआत सन 1923 में चेन्नई में हुई। इससे पहले भारत के 80 देश ऐसे थे जहां एक मई को श्रम दिवस के रूप में मनाया जाता था। 1931 – न्यूयार्क की एक महत्त्वपूर्ण इमारत एंपायर स्टेट बिल्डिंग का निर्माण पूरा हुआ। 1945 - सोवियत लाल सेना का बर्लिन में प्रवेश। 1956 – जोनास सॉल्क द्वारा विकसित पोलियो वैक्सीन जनता के लिए उपलब्ध करायी गयी। 1960 – पूर्व सोवियत संघ ने अमरीका का एक यू-2 जासूसी विमान मार गिराया और उसके पायलट गैरी पार्वज़ को गिरफ़तार कर लिया बाद में सन 1962 में अमरीका के साथ जासूसों के प्रत्यपर्ण के दौरान वे अमरीका लौटे। 1960 – महाराष्ट्र और गुजरात एक दूसरे से अलग हुए। 1961 – क्यूबा के प्रधानमंत्री डॉक्टर फ़िदेल कास्त्रो ने क्यूबा को समाजवादी राष्ट्र घोषित कर दिया और चुनावी प्रक्रिया को खत्म कर दिया। 1972 – देश की कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण किया गया। 1977 – इस्तांबुल के तकसीम स्क्वायर में श्रम दिवस समारोह के दौरान 36 लोगों की मौत हुई। 1984 - फू दोरजी बिना ऑक्सीजन के माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने में सफल। 1993 - श्रीलंका के राष्ट्रपति रणसिंघे प्रेमदास की बम विस्फोट में मृत्यु। 1996 - संयुक्त राष्ट्र ने स्वयं को सरकारी तौर पर निर्धन घोषित किया। 1998 – पोलैंड, हंगरी और चेक गणराज्य को नाटो में शामिल करने संबंधी प्रस्ताव सीनेट में पारित हुआ। 1999 – ब्रिटेन के पर्वतारोही जॉर्ज मैलोरी का शव हिमालय की चोटी माउंट एवरेस्ट पर पाया गया। वे इससे 75 वर्ष पूर्व पर्वतारोहण के दौरान गायब हो गये थे। 1999 - नेपाल में मृत्युदंड की सज़ा समाप्त। 1999 – मिरया मोस्कोसो पनामा की प्रथम महिला राष्ट्रपति नियुक्त की गईं। 2000 – एबीसी के शो हू वॉन्ट्स बी अ मिलियनेअर का प्रसारण। 2000 - अंतर्राष्ट्रीय अन्तर-संसदीय संघ ने पाकिस्तान, आइवरी कोस्ट व सूडान को देश की संसद भंग करने के लिए संघ की सदस्यता से निलंबित किया। 2001 - लश्कर-ए-तोइबा व जैश-ए-मोहम्मद संयुक्त राज्य अमेरिका में आतंकवादी संगठन घोषित। 2001 - भारत संयुक्त अमेरिकी की विशेष 301 सूची में शामिल। 2002 - अमेरिका की अपील पर इस्रायल ने हेब्रोन से सेना हटाई। 2003 – अमरीकी राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यु बुश ने मॉस्को और वाशिंगटन के बीच 1972 में होने वाली एबीएम संधि को बहुत पुरानी कहकर निरस्त कर दिया। 2003 - अमेरिकी राजनयिक पाल ब्रोमर की इराक के प्रशासक पद पर नियुक्ति। 2004 - यूरोपीय संघ में 10 नये राष्ट्र शामिल। 2005 - सद्दाम हुसैन ने सशर्त रिहाई की अमेरिकी पेशकश ठुकराई। 2007 - ईएसपीएन द्वारा वनडे क्रिकेट रैंकिंग में भारत को नवां स्थान। 2008 - राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में सात नये जजों की नियुक्ति की। 2008 - पाकिस्तान के तालिबान समर्थक आतंकी गुट का पश्चिमोत्तर सीमान्त प्रान्त के डेरा अदम खेल शहर पर नियंत्रण। 2008 - बेलारूस ने 10 अमेरिकी राजनयिकों को देश छोड़ने का आदेश दिया। 2009 – स्वीडन में समलैंगिक विवाह को वैधता दी गई। 2011 – 9/11 हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान के एबटाबाद में मारे जाने की घोषणा हुई। 2012 - चीन और रूस ने 15 $ ट्रिलियन डॉलर व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किये। 2019 - संयुक्त राष्ट्र ने जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया। 2019 - महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में नक्सलियों के बारूदी सुरंग विस्फोट में पुलिस के 15 जवान शहीद। 2019 - आतंकी हमलों के बाद श्रीलंका में बुर्का समेत चेहरा ढकने वाली हर चीज पर प्रतिबंध। 2020 - केंद्र सरकार (भारत) ने मौजूदा लॉकडाउन की अवधि को चार मई से दो और सप्ताह(17 मई) के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। 2020 - मणिपुर के काले चावल (चक-हाओ),गोरखपुर टेराकोटा , कश्मीरी केसर और कोविलपट्टी की कदलाई मितई को भौगोलिक संकेत (जीआई टैग) प्रदान किया गया। 2021 - रूस से कोविड टीके स्पुतनिक-वी की पहली खेप भारत पहुंची। 2021 - गुजरात के भरूच में एक कोविड 19 अस्पताल में आग लगने से 18 लोगों की मौत हुई। 2022 - नेशनल ओपन एक्सेस रजिस्ट्री (एनओएआर) ने सफलतापूर्वक काम करना शुरू किया। 2022 - केरल में तटरक्षक बल ने इंजन कक्ष में पानी भर जाने के कारण फंसे मालवाहक MSV मालाबार लाइट पोत के चालक दल के सभी छह सदस्यों को सुरक्षित बचाया। 2022 - स्पाइसजेट के मुंबई से दुर्गापुर के लिए उड़ान भरने वाले विमान के गंभीर तूफान में घिरने से 40 यात्री के घायल हुए। 2023 - गुतारेस संयुक्त राष्ट्र प्रमुख की बुलाई दो दिवसीय दोहा बैठक की मेजबानी के लिए दोहा पहुंचे। 2023 - एयर मार्शल साजू बालकृष्णन ने अंडमान और निकोबार कमांड (सीआईएनसीएएन) के 17वें कमांडर-इन-चीफ के रूप में कार्यभार संभाला। 2023 - एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी ने दक्षिण पश्चिमी वायु कमान के वायु अधिकारी कमांडिंग-इन-चीफ का पदभार ग्रहण किया। 2023 - आसियान भारत समुद्री अभ्यास (AIME-2023) के आयोजन के लिए भारतीय नौसेना के जहाज सिंगापुर पहुंचे। 2023 - पराग्वे में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हुआ। 2024 - चीन में बारिश-तूफान का कहर जारी, राजमार्ग ढहने से कम से कम 19 लोगों की मौत हुई। 1 मई को जन्मे व्यक्ति 1632 - हंबीरराव मोहिते - मराठा साम्राज्य के सेनापति थे (मतभेद)। 1872 - वजीर हसन - प्रमुख राष्ट्रवादी मुस्लिम नेता थे। 1909 - महामाया प्रसाद सिन्हा - भारतीय राजनीतिज्ञ और जल क्रांति दल के राजनेता थे। 1910 - निरंजन नाथ वांचू - वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तथा केरल और मध्य प्रदेश के भूतपूर्व राज्यपाल। 1913 - बलराज साहनी- प्रसिद्ध हिन्दी फ़िल्म अभिनेता। 1919 – भारतीय पार्श्व गायक मन्ना डे का जन्म हुआ (1920 का भी वर्णन)। 1922 - मधु लिमये - भारत के समाजवादी विचारों के निबन्धकार एवं कार्यकर्ता थे। 1926 - इकबाल सिंह किंगरा सिख समुदाय के एक भारतीय सामाजिक - आध्यात्मिक नेता थे। 1927 - श्याम लाल यादव, भारत के उत्तर प्रदेश की दूसरी विधानसभा सभा में विधायक रहे। 1927 - नामवर सिंह - हिन्दी के प्रसिद्ध कवि एवं समकालीन आलोचक थे। 1932 - एस. एम. कृष्णा - भारतीय राजनीतिज्ञ। 1940 - अरविन्द दवे - भारत की गुप्तचर एजेंसी 'रिसर्च एण्ड एनालिसिस विंग' (रॉ) निदेशक रहे। 1951 – समाज सुधारक एवं सर्वोदय आश्रम टडियांवा के संस्थापक रमेश भाई का जन्म हुआ। 1955 - आनंद महिंद्रा - भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति तथा व्यपारी । 1960 - जगदीश व्योम - भारत के समकालीन कवि एवं लेखक थे। 1961 - अजय भट्ट - भाजपा के राजनीतिज्ञ। 1969 - नबा कुमार सरानिया उर्फ हीरा सरानिया असम के कोकराझार निर्वाचन क्षेत्र से सांसद। 1986 - संदीप कुमार एक भारतीय पुरुष रेसवॉकर , ओलंपिक एथलीट। 1988 – भारतीय अभिनेत्री अनुष्का शर्मा का जन्म हुआ। 1 मई को हुए निधन 1888 - प्रफुल्लचंद चाकी - स्वतन्त्रता सेनानी। 1993 – श्रीलंका के राष्ट्रपति रणसिंघे प्रेमदास की बम विस्फोट में मृत्यु हुईं। 2004 - राम प्रकाश गुप्ता - 'भारतीय जनता पार्टी' के प्रसिद्ध नेता तथा उत्तर प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री तथा मध्य प्रदेश के राज्यपाल। 2008 - निर्मला देशपांडे - गांधीवादी विचारधारा से जुड़ी हुईं प्रसिद्ध महिला सामाजिक कार्यकर्ता। 2017 - कांग्रेस के दिग्गज नेता पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद प्रतापसिंह बघेल (70 ) ने जोबट के मिशन अस्पताल में 4:30 बजे अंतिम सांसे ली । 2020 - प्रोड्यूसर्स गिल्ड के सीईओ कुलमीत मक्कड़ का निधन। 2021 - मेजर बिक्रमजीत कंवरपाल भारतीय फ़िल्म और टेलीविजन अभिनेता थे। 2021 - पंडित देवब्रत (देबू) चौधरी -पद्मश्री और पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित भारतीय सितारवाद और शिक्षक थे। 2021 - दूरदर्शन के अलावा ब्रह्मकुमारीज की पॉप्युलर एंकर रहीं टीवी ऐक्ट्रेस कनुप्रिया का कोरोना के कारण निधन हो गया। 2022 - बोस्नियाई फुटबॉल मिडफील्डर इवान ओसिम (80) का निधन हुआ। 2024 - फ़ील्ड हॉकी प्लेयर ऑस्टिन सावेज (84) का निधन हुआ। 1 मई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव श्री रामप्रकाश गुप्ता स्मृति दिवस। दिल्ली यूनिवर्सिटी स्थापना दिवस (1922)। गुजरात स्थापना दिवस। महाराष्ट्र स्थापना दिवस। अन्तर्राष्ट्रीय मजदूर (श्रमिक , श्रम , मई) दिवस। कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।