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Worms Found in Vande Bharat Meal, IRCTC Fined ₹10 Lakh

वंदे भारत में खाने में कीड़े मिलने पर बड़ा एक्शन: IRCTC पर 10 लाख का जुर्माना, ठेकेदार का कॉन्ट्रैक्ट खत्म

kalpana मार्च 26, 2026 0
Worms found in curd served on Vande Bharat Express train
Vande Bharat Food Controversy Worms Found in Meal

नई दिल्ली। देश की प्रीमियम ट्रेन सेवा वंदे भारत एक्सप्रेस एक बार फिर खाने की गुणवत्ता को लेकर विवादों में आ गई है। पटना-टाटानगर रूट पर चलने वाली इस ट्रेन में एक यात्री को परोसे गए भोजन में कीड़े मिलने का मामला सामने आने के बाद रेल मंत्रालय ने कड़ा एक्शन लिया है।

वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप

यह मामला 15 मार्च 2026 का है, जब पटना के कंटेंट क्रिएटर रितेश कुमार सिंह ने ट्रेन में परोसे गए खाने का वीडियो रिकॉर्ड किया। वीडियो में दही के कटोरे में साफ तौर पर कीड़े दिखाई दे रहे थे। उन्होंने तुरंत ट्रेन मैनेजर को शिकायत भी दर्ज कराई।

दूसरे वीडियो में रेलवे अधिकारी मौके पर पहुंचकर जांच करते नजर आए। टॉर्च की रोशनी में दही की बारीकी से जांच की गई, जबकि आसपास मौजूद अन्य यात्री भी इस घटना को देखकर हैरान रह गए।

यात्रियों में नाराजगी, सोशल मीडिया पर उठा मुद्दा

वीडियो सामने आने के बाद यह मामला तेजी से वायरल हो गया। सहयात्रियों ने भी मौके पर शिकायत दर्ज कराने और मामले को सार्वजनिक करने की सलाह दी। सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।

रेलवे का सख्त रुख

मामले की गंभीरता को देखते हुए रेल मंत्रालय ने तत्काल कार्रवाई करते हुए IRCTC पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही संबंधित सर्विस प्रोवाइडर पर 50 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाते हुए उसका कॉन्ट्रैक्ट भी समाप्त करने का आदेश दिया गया।

रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यात्रियों की सुरक्षा और भोजन की गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस तरह की लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

गुणवत्ता पर उठे बड़े सवाल

यह घटना एक बार फिर ट्रेन में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रीमियम ट्रेनों में इस तरह की घटनाएं यात्रियों के भरोसे को कमजोर कर सकती हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Malda violence update
पश्चिम बंगाल: मालदा प्रदर्शन मामले में मुख्य साजिशकर्ता गिरफ्तार, 35 लोग हिरासत में

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के मालदा में बुधवार को हुई हिंसक प्रदर्शन की घटना के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई की है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद चुनाव आयोग ने मामले की NIA जांच का आदेश दिया था, जिसके तहत अबतक 35 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य साजिशकर्ता मोफक्करुल इस्लाम भी शामिल है, जिसे बागडोगरा एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया।   इस्लाम मुर्शिदाबाद को मुख्य साजिशकर्ता बतया गया  इस्लाम मुर्शिदाबाद के कालियाचोक मामले का मुख्य साजिशकर्ता बताया जा रहा है। ADG नॉर्थ बंगाल जयरामन ने कहा कि इस्लाम को लोगों को भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है और यह जांच की जाएगी कि घटना पहले से योजनाबद्ध थी या नहीं। गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों में ISF उम्मीदवार शाहजहां अली भी शामिल हैं। घटना के दौरान मालदा के कालियाचक में सात न्यायिक अधिकारियों को उपद्रवियों ने लगभग 8 घंटे तक बंधक बनाकर रखा था। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही उन्हें सुरक्षित छुड़ाया जा सका। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने इस घटना को सोची समझी साजिश करार दिया और बंगाल में कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। गिरफ्तारी के बाद मोफक्करुल इस्लाम ने अपनी सफाई दी और कहा कि वह आंदोलन में शामिल नहीं था। उनका दावा है कि वह केवल नेशनल हाईवे से गुजर रहे थे और भाषण देने के लिए वहां रुके थे। उन्होंने कहा कि किसी भी न्यायिक अधिकारी को उनके कारण रोक नहीं गया।NIA की जांच के तहत अब सभी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि यह घटना पूर्व नियोजित थी या नहीं। मालदा हिंसा मामले की जांच आगे बढ़ रही है और प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है। इस मामले में राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है, क्योंकि विपक्ष ने राज्य सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

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Rising gas prices
मिडिल ईस्ट तनाव और गैस महंगी, होटल-रेस्टोरेंट में बढ़ सकते हैं खाने के रेट

नई दिल्ली, एजेंसियां। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और भारत में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती कीमतों के चलते होटल और रेस्टोरेंट के खर्च में तेजी से इजाफा हुआ है। इसके परिणामस्वरूप आने वाले समय में खाने की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।   होटल इंडस्ट्री पर बढ़ा दबाव होटल एंड रेस्तरां एसोसिएशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया (HRAWI) के प्रवक्ता प्रदीप शेट्टी ने कहा कि 28 फरवरी से संघर्ष और पश्चिम एशिया में जारी तनाव की वजह से इंडस्ट्री के खर्च लगभग 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण बार-बार बंद होना, काम के कम घंटे, मेन्यू में बदलाव और खाना बनाने के नए तरीके अपनाना है। बिजनेस में गिरावट के कारण मुनाफा कम हुआ है, जिससे होटल और रेस्टोरेंट के लिए बढ़ते खर्च को संभालना चुनौतीपूर्ण हो गया है।   कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में वृद्धि देश में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इस साल के पहले चार महीनों में यह पाँचवीं बार बढ़ी, और अब दिल्ली में एक सिलेंडर की कीमत 2078.50 रुपये तक पहुँच गई है। इस साल अब तक दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर के दाम कुल 498 रुपये बढ़ चुके हैं।   खाने की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना HRAWI का कहना है कि बढ़ते खर्च और घटते मुनाफे के बीच होटल और रेस्टोरेंट के पास खाने की कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। इंडस्ट्री संकेत दे रही है कि जल्द ही मेन्यू में बदलाव और रेट बढ़ने की संभावना है, जिससे आम ग्राहकों को महंगे खाने का सामना करना पड़ सकता है।

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भारत की समुद्री रक्षा क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठने जा रहा है। रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने देश की तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी INS Aridhaman की संभावित लॉन्चिंग के संकेत दिए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, “यह सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि शक्ति का प्रतीक है-‘Aridhaman’।” यह पनडुब्बी भारत की न्यूक्लियर डिटरेंस क्षमता को और मजबूत करेगी, जिससे देश की ‘सेकंड स्ट्राइक’ क्षमता और अधिक प्रभावी बनेगी। समुद्री शक्ति में बड़ा इजाफा INS Aridhaman, भारत की स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी परियोजना का तीसरा अहम हिस्सा है, जो पहले से सेवा में मौजूद INS Arihant और INS Arighaat के बाद शामिल होगी। करीब 7,000 टन वजनी यह पनडुब्बी आधुनिक डिजाइन और बेहतर स्टेल्थ टेक्नोलॉजी से लैस है, जिससे दुश्मन के लिए इसे ट्रैक करना बेहद मुश्किल होगा। मिसाइल क्षमता: पहले से दोगुनी ताकत INS Aridhaman की सबसे बड़ी खासियत इसकी मिसाइल क्षमता है। इसमें 8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब्स हैं, जो इसे और अधिक घातक बनाते हैं। 8 K-4 मिसाइल (3500 किमी रेंज) या 24 K-15 मिसाइल (750 किमी रेंज) यह क्षमता इसे लंबी दूरी तक सटीक और शक्तिशाली हमला करने में सक्षम बनाती है। भारत की ‘Second Strike’ रणनीति को मजबूती परमाणु पनडुब्बियां (SSBN) किसी भी देश की रक्षा रणनीति में बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। INS Aridhaman के शामिल होने से भारत की “Continuous At-Sea Deterrence” क्षमता मजबूत होगी, यानी हर समय एक परमाणु पनडुब्बी समुद्र में तैनात रह सकेगी। इससे यह सुनिश्चित होता है कि किसी भी संभावित हमले की स्थिति में भारत जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम रहेगा। विशाखापत्तनम में लॉन्चिंग, Taragiri भी शामिल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विशाखापत्तनम दौरे पर हैं, जहां INS Aridhaman की लॉन्चिंग के साथ-साथ अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट INS Taragiri को भी नौसेना में शामिल किया जाएगा। Visakhapatnam भारत के परमाणु पनडुब्बी बेड़े का प्रमुख केंद्र है और यहीं इनका निर्माण व तैनाती होती है। भारत की बढ़ती समुद्री ताकत का संकेत INS Aridhaman का शामिल होना न केवल रक्षा क्षमता को मजबूत करेगा, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा निर्माण को भी नई ऊंचाई देगा। आने वाले समय में चौथी परमाणु पनडुब्बी के जुड़ने के बाद भारत पूरी तरह से मजबूत न्यूक्लियर ट्रायड हासिल कर लेगा।  

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