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Govt Extends EV Subsidy Deadline in India

EV खरीदने वालों के लिए बड़ी राहत: सरकार ने बढ़ाई सब्सिडी की समय सीमा, जानें कितना होगा फायदा

surbhi मार्च 30, 2026 0
Electric scooters and e-rickshaws at charging station showing government EV subsidy benefits in India
EV Subsidy Extended in India

देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। PM E-DRIVE Scheme के तहत मिलने वाली सब्सिडी की समय सीमा बढ़ा दी गई है, जिससे अब EV खरीदने की योजना बना रहे लोगों को ज्यादा समय और फायदा मिलेगा।

क्या है नई डेडलाइन?

सरकार ने अलग-अलग श्रेणी के वाहनों के लिए नई समय सीमा तय की है:

  • इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर: 31 जुलाई 2026 तक सब्सिडी का लाभ
  • इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (E-Rickshaw/E-Cart): 31 मार्च 2028 तक

हालांकि, L5 कैटेगरी वाले थ्री-व्हीलर के लिए सब्सिडी पहले ही बंद की जा चुकी है।

कितना मिलेगा फायदा?

सब्सिडी सीधे वाहन की कीमत को कम करती है, जिससे आम लोगों के लिए EV खरीदना आसान हो जाता है।

  • ₹2,500 प्रति kWh की दर से सब्सिडी
  • अधिकतम ₹5,000 तक का लाभ प्रति वाहन

प्राइस कैप:

  • टू-व्हीलर: ₹1.5 लाख तक
  • थ्री-व्हीलर: ₹2.5 लाख तक

यानि तय कीमत सीमा के अंदर आने वाले वाहनों पर ही यह सब्सिडी लागू होगी।

ध्यान रखें: सीमित है बजट

इस योजना का कुल बजट करीब ₹10,900 करोड़ है। सरकार ने साफ किया है कि यह फंड-लिमिटेड स्कीम है।

मतलब अगर बजट पहले खत्म हो गया, तो तय समय सीमा से पहले ही सब्सिडी बंद हो सकती है। इसलिए एक्सपर्ट सलाह दे रहे हैं कि ग्राहक आखिरी तारीख का इंतजार न करें।

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी जोर

सरकार सिर्फ वाहन खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क भी तेजी से बढ़ाया जा रहा है।

इससे EV यूजर्स को लंबी दूरी तय करने में आसानी होगी और “बैटरी खत्म होने” की चिंता भी कम होगी।

क्या है इसका असर?

इस फैसले से:

  • EV सस्ते होंगे
  • मिडिल क्लास के लिए खरीद आसान होगी
  • प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी
  • इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बड़ा बढ़ावा मिलेगा
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Shashi Tharoor
केरल में चुनाव प्रचार के दौरान शशि थरूर के काफिले पर हमला, एक आरोपी हिरासत में

तिरुवंतपुरम, एजेंसियां। केरलम के मलप्पुरम जिले में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के चुनावी काफिले से जुड़ी एक गंभीर घटना सामने आई है। शुक्रवार शाम वांडूर इलाके में प्रचार कार्यक्रम के लिए जाते समय उनके काफिले को कुछ लोगों ने कथित तौर पर रोक लिया और इस दौरान उनके ड्राइवर व गनमैन पर हमला कर दिया गया। पुलिस के अनुसार, घटना शाम करीब 7:30 बजे थिरुवल्ली-चेल्लीथोडु पुल के पास हुई, जब सड़क पर जाम जैसी स्थिति बनी हुई थी और काफिले की रफ्तार धीमी हो गई थी।   कैसे हुआ हमला? एफआईआर के मुताबिक, दो वाहनों में सवार करीब पांच लोग अचानक सांसद के वाहन के आगे आ गए और रास्ता रोक दिया। जब गनमैन रतीश के.पी. ने उन्हें हटाने और रास्ता साफ करने की कोशिश की, तो आरोपियों ने कथित तौर पर उनके साथ-साथ ड्राइवर पर भी हमला कर दिया। पुलिस का कहना है कि सड़क संकरी थी और सुरक्षा कर्मी ने केवल आगे चल रहे वाहन को थोड़ा आगे बढ़ाने के लिए कहा था, ताकि काफिला निकल सके। इसी बात पर विवाद बढ़ गया।   एक आरोपी हिरासत में, बाकी की तलाश जारी वांडूर पुलिस ने गनमैन की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने एक आरोपी को हिरासत में लिया है, जबकि अन्य हमलावरों की पहचान भी कर ली गई है। कुछ रिपोर्टों में दो वाहनों को जब्त किए जाने और अन्य संदिग्धों को पकड़ने के लिए छापेमारी की बात भी सामने आई है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हमला अचानक हुआ या इसके पीछे कोई सुनियोजित मंशा थी।   चुनावी माहौल में बढ़ी सुरक्षा चिंता इस घटना ने केरल में चुनावी माहौल के बीच वीआईपी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य में 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होना है और मतगणना 4 मई को होगी। ऐसे में चुनाव प्रचार के दौरान इस तरह की घटना राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकती है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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केरल में शशि थरूर के काफिले पर हमला, गनमैन और ड्राइवर घायल

वंडूर (केरल): कांग्रेस सांसद शशि थरूर के काफिले पर शुक्रवार शाम हमला होने की घटना सामने आई है। इस हमले में उनके गनमैन और ड्राइवर घायल हो गए, जबकि शशि थरूर सुरक्षित हैं। पुलिस ने मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और अन्य की तलाश जारी है। जानकारी के मुताबिक, यह घटना वंडूर क्षेत्र के चेलिथोडे इलाके में शाम करीब 7:30 बजे हुई। उस समय शशि थरूर एक चुनावी कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। रास्ते में पुल के पास सड़क संकरी होने के कारण जाम की स्थिति बन गई थी। इसी दौरान दो गाड़ियों में सवार करीब पांच लोगों ने थरूर के काफिले को रोक लिया। बताया जा रहा है कि जब गनमैन रतीश के पी ने रास्ता खाली करने के लिए सामने खड़ी गाड़ी को हटाने को कहा, तो आरोपियों ने गनमैन और ड्राइवर पर हमला कर दिया। घटना के बाद गनमैन की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने देर रात एक आरोपी को हिरासत में लिया, जबकि अन्य आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और हमले के पीछे की वजह जानने का प्रयास कर रही है। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उनके गार्ड पर हमले को लेकर चिंता जताने वाले सभी लोगों का वह धन्यवाद करते हैं। उन्होंने बताया कि गार्ड अब सुरक्षित है और उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा। थरूर ने यह भी कहा कि घटना के बावजूद उन्होंने अपने तय कार्यक्रम पूरे किए। फिलहाल, पुलिस जांच के बाद ही इस हमले के कारणों का खुलासा हो सकेगा।  

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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी है, जिससे देश में LPG सप्लाई को लेकर उम्मीद बढ़ गई है। ‘ग्रीन सान्वी’ लेकर आ रहा 44,000 टन LPG भारतीय झंडे वाला जहाज ‘ग्रीन सान्वी’ सफलतापूर्वक होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुका है इस पर करीब 44,000 मीट्रिक टन LPG लदा हुआ है जहाज अब मुंबई बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है सातवां जहाज पहुंचा भारत की ओर युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 6 LPG जहाज भारत पहुंच चुके हैं ‘ग्रीन सान्वी’ इस दौरान होर्मुज पार करने वाला 7वां जहाज है इससे देश में LPG की कमी को कुछ हद तक दूर करने में मदद मिलेगी क्यों अहम है यह राहत? होर्मुज स्ट्रेट पर पाबंदियों के कारण कच्चे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई भारत में कई जगह LPG के लिए लंबी कतारें देखी जा रही हैं अभी 17 जहाज फंसे हुए होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में 17 भारतीय जहाज अब भी फंसे हैं इनमें से ग्रीन आशा और जग विक्रम जैसे जहाज LPG से लदे हुए हैं ये जहाज ईरान की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं आगे क्या? अगर बाकी जहाजों को भी जल्द क्लियरेंस मिलती है, तो: भारत में LPG संकट काफी हद तक कम हो सकता है सप्लाई चेन फिर से सामान्य होने लगेगी

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