भारतीय ऑटो बाजार तेजी से इलेक्ट्रिक और वैकल्पिक ईंधन तकनीक की ओर बढ़ रहा है। इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए Tata Motors आने वाले समय में अपनी कार लाइनअप को और मजबूत करने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी 2026 में कई नई इलेक्ट्रिक और स्मार्ट कारें लॉन्च कर सकती है, जिनमें EV, Flex Fuel और फेसलिफ्ट मॉडल शामिल होंगे। इन अपकमिंग मॉडल्स में Tata Sierra EV, Tata Safari EV, Tata Avinya EV, Tata Punch Flex Fuel और Tata Tiago फेसलिफ्ट जैसे नाम शामिल हैं। Tata Sierra EV: क्लासिक नाम, इलेक्ट्रिक अवतार Tata Sierra EV को कंपनी की सबसे चर्चित आने वाली कारों में गिना जा रहा है। यह मॉडल पुराने Sierra से प्रेरित डिजाइन के साथ नए इलेक्ट्रिक अवतार में पेश किया जा सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार इसमें: 500KM से ज्यादा ड्राइविंग रेंज डेडिकेटेड EV प्लेटफॉर्म प्रीमियम इंटीरियर कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी क्लोज्ड फ्रंट पैनल डिजाइन जैसे फीचर्स मिल सकते हैं। इसकी शुरुआती कीमत लगभग ₹18 लाख (एक्स-शोरूम) हो सकती है। Tata Safari EV: फैमिली SUV का इलेक्ट्रिक वर्जन कंपनी अपनी लोकप्रिय SUV Safari को भी इलेक्ट्रिक वर्जन में ला सकती है। Tata Safari EV मौजूदा ICE मॉडल जैसा डिजाइन रख सकती है, लेकिन इसमें EV-स्पेशल बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इसमें क्लोज्ड ग्रिल, एयरोडायनामिक अलॉय व्हील्स और एडवांस्ड सेफ्टी फीचर्स दिए जा सकते हैं। यह SUV खास तौर पर बड़े परिवारों और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले ग्राहकों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। संभावित शुरुआती कीमत: लगभग ₹26 लाख (एक्स-शोरूम) Tata Avinya EV: Tata की सबसे प्रीमियम EV Auto Expo 2022 में पेश की गई Tata Avinya EV पहले ही अपने फ्यूचरिस्टिक डिजाइन के कारण काफी सुर्खियां बटोर चुकी है। यह मॉडल कंपनी की मौजूदा EVs से बिल्कुल अलग हो सकती है। इसमें: मिनिमलिस्ट इंटीरियर लाउंज जैसी सीटिंग सस्टेनेबल मटेरियल अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग ADAS सेफ्टी फीचर्स दिए जाने की उम्मीद है। इसकी संभावित कीमत लगभग ₹30 लाख (एक्स-शोरूम) हो सकती है। Tata Punch Flex Fuel: वैकल्पिक ईंधन पर बड़ा दांव Tata Punch का नया Flex Fuel वर्जन भी 2026 में लॉन्च हो सकता है। यह कंपनी की पहली Flex Fuel टेक्नोलॉजी वाली कार हो सकती है। यह मॉडल एथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल पर चलेगा, जिससे: पेट्रोल पर निर्भरता कम होगी प्रदूषण घटाने में मदद मिलेगी वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा मिलेगा हालांकि डिजाइन और फीचर्स मौजूदा Punch जैसे ही रह सकते हैं। Tata Tiago Facelift: नए लुक और फीचर्स के साथ अपडेट Tata Tiago फेसलिफ्ट में कंपनी कई कॉस्मेटिक और टेक्नोलॉजी अपडेट दे सकती है। संभावित बदलाव: नई फ्रंट ग्रिल अपडेटेड बंपर नए अलॉय व्हील्स बड़ा इंफोटेनमेंट सिस्टम ज्यादा कनेक्टेड फीचर्स Tiago फिलहाल पेट्रोल, CNG और EV विकल्पों में उपलब्ध है। फेसलिफ्ट मॉडल की कीमत मौजूदा मॉडल से थोड़ी ज्यादा हो सकती है। Tata की रणनीति क्या बताती है? इन अपकमिंग मॉडल्स से साफ है कि Tata Motors भारतीय बाजार में EV और वैकल्पिक ईंधन तकनीक पर बड़ा फोकस कर रही है। कंपनी अलग-अलग बजट और जरूरतों वाले ग्राहकों को टारगेट करते हुए प्रीमियम से लेकर अफोर्डेबल सेगमेंट तक अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
भारत के बड़े शहरों में बढ़ता ट्रैफिक, महंगे पेट्रोल-डीजल और पार्किंग की परेशानी अब लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ तेजी से आकर्षित कर रही है। रोजाना ऑफिस, कॉलेज या लोकल ट्रैवल के लिए अब इलेक्ट्रिक कार, स्कूटर और ई-साइकिल किफायती और सुविधाजनक विकल्प बनते जा रहे हैं। अगर आप भी डेली कम्यूट के लिए नया EV खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो ये मॉडल्स आपके लिए अच्छे विकल्प साबित हो सकते हैं। शहरों के ट्रैफिक के लिए बेस्ट इलेक्ट्रिक कारें MG Comet EV कॉम्पैक्ट डिजाइन, आसान पार्किंग और कम रनिंग कॉस्ट की वजह से यह शहरों के लिए बेहद लोकप्रिय बन रही है। छोटे परिवार और सिटी ड्राइव के लिए इसे अच्छा विकल्प माना जाता है। Tata Tiago EV बेहतर सर्विस नेटवर्क और फैमिली यूज के लिए यह कार तेजी से पसंद की जा रही है। इसकी ड्राइविंग रेंज और प्रैक्टिकल डिजाइन इसे मजबूत विकल्प बनाते हैं। Vayve Eva यह माइक्रो EV अपने कॉम्पैक्ट साइज और संभावित सोलर चार्जिंग सपोर्ट की वजह से चर्चा में है। छोटी दूरी के लिए यह काफी किफायती साबित हो सकती है। डेली ट्रैवल के लिए लोकप्रिय इलेक्ट्रिक स्कूटर्स Ola S1 Air बड़े बूट स्पेस, स्मार्ट फीचर्स और टेक्नोलॉजी आधारित इंटरफेस की वजह से युवा ग्राहकों के बीच इसकी मांग बढ़ रही है। Ather 450S प्रीमियम बिल्ड क्वालिटी और स्मूद राइड एक्सपीरियंस के लिए जाना जाता है। इसमें स्मार्ट कनेक्टिविटी फीचर्स भी मिलते हैं। TVS iQube आरामदायक राइड और भरोसेमंद सर्विस नेटवर्क इसे डेली कम्यूटर्स के बीच बेहद लोकप्रिय बनाता है। कम बजट वालों के लिए बाइक और ई-साइकिल विकल्प Revolt RV1 अगर आप बाइक जैसा एक्सपीरियंस चाहते हैं, तो यह इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल अच्छा विकल्प हो सकती है। शहरों में इसकी हैंडलिंग आसान मानी जाती है। Hero Electric Optima कम बजट में इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने वालों के लिए यह काफी लोकप्रिय विकल्प है। EMotorad Doodle Pro यह फोल्डेबल ई-साइकिल छोटे सफर और मेट्रो कनेक्टिविटी के लिए डिजाइन की गई है। इसकी चार्जिंग कॉस्ट बेहद कम है और इसे आसानी से स्टोर किया जा सकता है। नए कॉन्सेप्ट EV भी बढ़ा रहे विकल्प Strom R3 यह कॉम्पैक्ट थ्री-व्हील EV छोटे शहरों और सिंगल यूजर ट्रैवल के लिए अलग पहचान बना रहा है। इसकी रनिंग कॉस्ट काफी कम बताई जाती है। क्यों तेजी से बढ़ रही EV की डिमांड? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत में EV अपनाने की रफ्तार और तेज होगी। सरकार की नई EV पॉलिसी, बढ़ता चार्जिंग नेटवर्क और महंगे ईंधन लोगों को इलेक्ट्रिक विकल्पों की तरफ आकर्षित कर रहे हैं। कम चार्जिंग खर्च, आसान पार्किंग और कम मेंटेनेंस कॉस्ट की वजह से छोटे और किफायती EV अब डेली कम्यूट का बड़ा हिस्सा बन सकते हैं।
भारतीय टू-व्हीलर बाजार तेजी से बदल रहा है और अब चर्चा एक ऐसी तकनीक की हो रही है, जो आने वाले वर्षों में स्कूटर इंडस्ट्री की तस्वीर बदल सकती है। देश की प्रमुख ऑटो कंपनी Bajaj Auto अपने लोकप्रिय Bajaj Chetak के नए हाइड्रोजन वर्जन पर काम कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह स्कूटर हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी से लैस हो सकता है और एक बार में करीब 280 किलोमीटर तक की रेंज देने का दावा किया जा रहा है। अगर यह तकनीक सफल रहती है, तो यह सिर्फ इलेक्ट्रिक स्कूटर्स के लिए ही नहीं बल्कि पूरे टू-व्हीलर मार्केट के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। खास बात यह है कि इसे लेकर “पानी से चलने वाले स्कूटर” जैसी चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। इलेक्ट्रिक के बाद अब हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी पर दांव Bajaj पहले ही अपने इलेक्ट्रिक चेतक के जरिए ईवी मार्केट में मजबूत पकड़ बना चुकी है। अब कंपनी अगला कदम हाइड्रोजन मोबिलिटी की दिशा में बढ़ाती दिख रही है। माना जा रहा है कि कंपनी ने इस तकनीक से जुड़े पेटेंट पर पहले ही काम शुरू कर दिया था और अब इसकी शुरुआती जानकारी सामने आने लगी है। यह नया स्कूटर पारंपरिक लिथियम-आयन बैटरी सिस्टम की जगह हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकता है। यही वजह है कि इसे मौजूदा इलेक्ट्रिक स्कूटर्स से अलग और ज्यादा एडवांस माना जा रहा है। आखिर कैसे काम करेगी यह टेक्नोलॉजी? हाइड्रोजन फ्यूल सेल सिस्टम में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया कर बिजली तैयार की जाती है। यही बिजली स्कूटर की मोटर को पावर देती है। इस प्रक्रिया में प्रदूषण बेहद कम होता है और मुख्य रूप से पानी ही उप-उत्पाद के रूप में निकलता है। हालांकि सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में “एक लीटर पानी से 280Km” जैसे दावे किए जा रहे हैं, लेकिन तकनीकी रूप से स्कूटर सीधे पानी से नहीं चलता। पहले हाइड्रोजन तैयार करनी होती है, जिसके बाद फ्यूल सेल सिस्टम काम करता है। कंपनी ने अभी तक इसकी आधिकारिक टेक्निकल डिटेल्स साझा नहीं की हैं। डिजाइन रहेगा रेट्रो, फीचर्स होंगे हाईटेक नई हाइड्रोजन चेतक का डिजाइन मौजूदा इलेक्ट्रिक चेतक की तरह क्लासिक और रेट्रो स्टाइल में रखा जा सकता है। चेतक की पहचान उसके पुराने आइकॉनिक लुक से जुड़ी रही है और कंपनी उसी पहचान को बरकरार रख सकती है। फीचर्स की बात करें तो इसमें डिजिटल स्मार्ट डिस्प्ले, कनेक्टेड टेक्नोलॉजी, नेविगेशन सपोर्ट, स्मार्टफोन कनेक्टिविटी, आधुनिक सेफ्टी सिस्टम और बेहतर राइडिंग मोड्स मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी इसे प्रीमियम सेगमेंट में उतार सकती है। लॉन्च और कीमत को लेकर क्या संकेत मिले? फिलहाल कंपनी ने न तो इसकी लॉन्च डेट की पुष्टि की है और न ही कीमत का आधिकारिक ऐलान किया है। हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ग्राहक इसे लगभग 20 हजार रुपये की डाउन पेमेंट के साथ बुक कर सकते हैं। अगर Bajaj इस स्कूटर को बड़े स्तर पर लॉन्च करती है, तो यह भारत में हाइड्रोजन आधारित टू-व्हीलर सेगमेंट की शुरुआत मानी जा सकती है। क्या भारत में सफल होगी हाइड्रोजन स्कूटर टेक्नोलॉजी? भारत में पेट्रोल की बढ़ती कीमतें और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सीमित चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर लगातार चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में हाइड्रोजन आधारित स्कूटर एक वैकल्पिक समाधान बन सकता है। लेकिन इसकी सफलता कई अहम बातों पर निर्भर करेगी– हाइड्रोजन फ्यूल की उपलब्धता रिफ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तकनीक की लागत सुरक्षा मानक आम ग्राहकों के लिए कीमत दुनिया की कई बड़ी ऑटो कंपनियां अब इलेक्ट्रिक के साथ-साथ हाइड्रोजन मोबिलिटी पर भी तेजी से काम कर रही हैं। ऐसे में Bajaj का यह कदम संकेत देता है कि भविष्य का भारतीय टू-व्हीलर बाजार सिर्फ बैटरी आधारित ईवी तक सीमित नहीं रहेगा। पूरा ऑटो सेक्टर अब इस बात पर नजर लगाए बैठा है कि क्या हाइड्रोजन चेतक वास्तव में सड़कों पर उतर पाएगा और क्या यह तकनीक आम लोगों के लिए व्यावहारिक साबित होगी।
इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत करते हुए Ola Electric ने नई Ola S1 X+ 5.2 kWh को भारत में लॉन्च कर दिया है। यह स्कूटर दमदार परफॉर्मेंस, लंबी रेंज और एडवांस टेक्नोलॉजी के साथ मिड-प्राइस सेगमेंट में एक मजबूत दावेदार बनकर उभरी है। कंपनी ने इसकी शुरुआती कीमत ₹1,29,999 (एक्स-शोरूम) रखी है, जो 15 अप्रैल 2026 के बाद बढ़ सकती है। 4680 Bharat Cell: Ola की बड़ी टेक्नोलॉजी पहल इस स्कूटर की सबसे खास बात है इसका इन-हाउस विकसित 4680 Bharat Cell बैटरी सिस्टम। Ola Electric का दावा है कि यह तकनीक: ज्यादा लंबी रेंज देती है बैटरी एफिशिएंसी बढ़ाती है EV को आम लोगों के लिए ज्यादा सुलभ बनाती है यह कदम भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परफॉर्मेंस में नहीं कोई समझौता Ola S1 X+ 5.2 kWh को पावर देने के लिए 11 kW का मिड-ड्राइव मोटर दिया गया है, जो शानदार स्पीड और स्मूद राइडिंग अनुभव देता है। मुख्य फीचर्स: टॉप स्पीड: 125 किमी/घंटा रेंज: 320 किमी (सिंगल चार्ज) ब्रेकिंग सिस्टम: Brake-by-Wire + फ्रंट डिस्क ब्रेक इन स्पेसिफिकेशंस के साथ यह स्कूटर अपने सेगमेंट में सबसे पावरफुल विकल्पों में शामिल हो जाती है। Ola के पोर्टफोलियो को मिला नया बूस्ट नई S1 X+ 5.2 kWh के साथ Ola Electric ने अपने प्रोडक्ट लाइनअप को और मजबूत कर दिया है। कंपनी पहले से: S1 Pro+ और S1 Pro जैसे प्रीमियम मॉडल S1 X सीरीज के मास मार्केट स्कूटर्स और Roadster बाइक रेंज ऑफर कर रही है। इस नए मॉडल के आने से मिड-रेंज सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा और तेज होने की उम्मीद है। EV मार्केट में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर्स की मांग तेजी से बढ़ रही है और Ola की यह नई पेशकश ग्राहकों को ज्यादा विकल्प देगी। लंबी रेंज, हाई स्पीड और एडवांस फीचर्स के साथ यह स्कूटर खासतौर पर उन यूजर्स को आकर्षित कर सकती है, जो पेट्रोल वाहनों से EV की ओर शिफ्ट करना चाहते हैं।
भारत की प्रतिष्ठित बाइक निर्माता Royal Enfield ने इलेक्ट्रिक सेगमेंट में बड़ा कदम रखते हुए अपनी पहली इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल Royal Enfield Flying Flea C6 लॉन्च कर दी है। Flying Flea ब्रांड के तहत पेश की गई यह बाइक न सिर्फ क्लासिक डिजाइन बल्कि आधुनिक टेक्नोलॉजी के साथ बाजार में उतारी गई है। कीमत और उपलब्धता Flying Flea C6 की एक्स-शोरूम कीमत ₹2.79 लाख रखी गई है। हालांकि Battery-as-a-Service (BaaS) विकल्प के साथ इसकी कीमत घटकर ₹1.99 लाख तक आ जाती है। इसकी बुकिंग 10 अप्रैल दोपहर 12 बजे से शुरू हो जाएगी, जबकि डिलीवरी मई के अंत तक शुरू होने की संभावना है। शुरुआत में इसे बेंगलुरु में लॉन्च किया जाएगा और बाद में अन्य शहरों में उपलब्ध कराया जाएगा। रेंज और परफॉर्मेंस इस इलेक्ट्रिक बाइक में 15.4 kW का PMSM मोटर दिया गया है, जो 3.91 kWh बैटरी पैक से लैस है। रेंज: 154 Km (IDC) टॉप स्पीड: 115 Km/h 0-60 Km/h: सिर्फ 3.7 सेकंड चार्जिंग की बात करें तो ऑनबोर्ड चार्जर से बैटरी को 20% से 80% तक चार्ज करने में करीब 65 मिनट का समय लगता है। एडवांस फीचर्स Flying Flea C6 को आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है: ऑल-LED लाइटिंग Google बेस्ड नेविगेशन वायरलेस फोन चार्जिंग कॉर्नरिंग ABS और ट्रैक्शन कंट्रोल Sport और Individual राइड मोड Individual मोड में राइडर अपनी जरूरत के अनुसार ABS, ट्रैक्शन कंट्रोल और थ्रॉटल रिस्पॉन्स को कस्टमाइज कर सकता है। डिजाइन और बिल्ड डिजाइन के मामले में यह बाइक Royal Enfield की पारंपरिक शैली से हटकर एक यूनिक और कॉम्पैक्ट लुक में आती है। एक्सपोज्ड फ्रेम गिर्डर-टाइप फ्रंट सस्पेंशन फ्लोटिंग सीट डिटैचेबल पिलियन सीट महज 124 किलोग्राम वजन के साथ यह कंपनी की अब तक की सबसे हल्की मोटरसाइकिल भी बन गई है। एल्युमिनियम केसिंग में रखा गया बैटरी पैक इसकी कूलिंग और एयरोडायनामिक्स को बेहतर बनाता है।
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में तेजी से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच Ather Energy की Ather Rizta काफी चर्चा में है। इसका टॉप वेरिएंट Rizta Z 3.7kWh खासतौर पर लंबी रेंज और प्रीमियम फीचर्स के लिए जाना जा रहा है। अगर आप इसे खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो इन 5 अहम बातों को जरूर जान लें- 1. परफॉर्मेंस: पावर वही, भरोसा कायम Rizta Z 3.7kWh में 4.3kW की पीक पावर और 22Nm टॉर्क मिलता है। टॉप स्पीड: 80 kmph (Zip मोड में) बैटरी बड़ी होने के बावजूद परफॉर्मेंस में कोई बदलाव नहीं 2. फीचर्स: टेक्नोलॉजी में आगे यह टॉप वेरिएंट कई स्मार्ट फीचर्स से लैस है- टचस्क्रीन TFT डिस्प्ले Google Maps नेविगेशन ब्लूटूथ कनेक्टिविटी कनेक्टेड स्मार्ट फीचर्स यह इसे S वेरिएंट से ज्यादा प्रीमियम बनाता है। 3. चार्जिंग टाइम: थोड़ा लंबा इंतजार बड़ी बैटरी के साथ चार्जिंग टाइम भी बढ़ जाता है- 0-80%: लगभग 4 घंटे 30 मिनट 0-100%: करीब 5 घंटे 45 मिनट 4. रेंज: सबसे बड़ा प्लस पॉइंट 3.7kWh बैटरी के साथ- क्लेम्ड IDC रेंज: 159 किमी रियल वर्ल्ड में बेहतर लॉन्ग-राइड क्षमता यह इसे डेली कम्यूट के साथ-साथ लंबी दूरी के लिए भी उपयुक्त बनाता है। 5. कीमत: प्रीमियम लेकिन वैल्यू फॉर मनी? Rizta Z 3.7kWh की कीमत ₹1.52 लाख (एक्स-शोरूम, बेंगलुरु) है। इस प्राइस रेंज में यह एक फीचर-लोडेड फैमिली इलेक्ट्रिक स्कूटर का विकल्प बनकर सामने आता है। क्या आपको खरीदना चाहिए? अगर आप एक ऐसा इलेक्ट्रिक स्कूटर चाहते हैं जिसमें लंबी रेंज, स्मार्ट फीचर्स और भरोसेमंद परफॉर्मेंस हो, तो Ather Rizta Z 3.7kWh एक मजबूत दावेदार है। हालांकि, खरीदने से पहले अपने उपयोग और बजट को जरूर ध्यान में रखें।
देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। PM E-DRIVE Scheme के तहत मिलने वाली सब्सिडी की समय सीमा बढ़ा दी गई है, जिससे अब EV खरीदने की योजना बना रहे लोगों को ज्यादा समय और फायदा मिलेगा। क्या है नई डेडलाइन? सरकार ने अलग-अलग श्रेणी के वाहनों के लिए नई समय सीमा तय की है: इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर: 31 जुलाई 2026 तक सब्सिडी का लाभ इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (E-Rickshaw/E-Cart): 31 मार्च 2028 तक हालांकि, L5 कैटेगरी वाले थ्री-व्हीलर के लिए सब्सिडी पहले ही बंद की जा चुकी है। कितना मिलेगा फायदा? सब्सिडी सीधे वाहन की कीमत को कम करती है, जिससे आम लोगों के लिए EV खरीदना आसान हो जाता है। ₹2,500 प्रति kWh की दर से सब्सिडी अधिकतम ₹5,000 तक का लाभ प्रति वाहन प्राइस कैप: टू-व्हीलर: ₹1.5 लाख तक थ्री-व्हीलर: ₹2.5 लाख तक यानि तय कीमत सीमा के अंदर आने वाले वाहनों पर ही यह सब्सिडी लागू होगी। ध्यान रखें: सीमित है बजट इस योजना का कुल बजट करीब ₹10,900 करोड़ है। सरकार ने साफ किया है कि यह फंड-लिमिटेड स्कीम है। मतलब अगर बजट पहले खत्म हो गया, तो तय समय सीमा से पहले ही सब्सिडी बंद हो सकती है। इसलिए एक्सपर्ट सलाह दे रहे हैं कि ग्राहक आखिरी तारीख का इंतजार न करें। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी जोर सरकार सिर्फ वाहन खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क भी तेजी से बढ़ाया जा रहा है। इससे EV यूजर्स को लंबी दूरी तय करने में आसानी होगी और “बैटरी खत्म होने” की चिंता भी कम होगी। क्या है इसका असर? इस फैसले से: EV सस्ते होंगे मिडिल क्लास के लिए खरीद आसान होगी प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बड़ा बढ़ावा मिलेगा
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।