1434 – फ्रांस के विश्वविख्यात सेंट पीटर कैथेड्रल की आधारशिला रखी गई।
1611 – टेलीस्कोप शब्द का पहली बार प्रयोग इटली के वैज्ञानिक फेडेरिको सेसी ने किया।
1659 – औरंगजेब ने दिल्ली पर हुकूमत की लड़ाई में दारा को हराया।
1736 - तस्कर एंड्रयू विल्सन के निष्पादन के बाद एडिनबर्ग में निजी दंगे हुए, जब शहर के गार्ड कप्तान जॉन पोर्टियस ने अपने लोगों को भीड़ पर आग लगाने का आदेश दिया। पोर्टरी को बाद में गिरफ्तार किया गया।
1775 - पहली बीजावृत्तिवादी संगठन का आयोजन फिलाडेल्फिया, अमेरिका में हुआ।
1809 – नेपोलियन ने बावारिया की लड़ाई में बगआस्ट्रिया को शिकस्त दी।
1814 – नेपोलियन को राजगद्दी से हटाया गया।
1834 - व्हिग पार्टी को आधिकारिक तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका के सीनेटर हेनरी क्ले द्वारा नामित किया गया।
1849 – यूरोपीय देश हंगरी ने आस्ट्रिया से स्वतंत्र होने की घोषणा की और लुईस कोसुथ को अपना नेता चुना।
1865 – अमरीका के 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को वाशिंगटन के ‘फोर्ड थियटर’ में उस समय गोली मार दी गई, जब वो 'आवर अमेरिकन कज़िन' नाटक देख रहे थे।
1912 – विलासिता और शान ओ शौकत से भरपूर टाइटेनिक जहाज समुद्र में सफर करते समय एक हिमखंड से टकराकर डूब गया। जबकि टाइटेनिक को इस तरह से तैयार किया गया था कि वो कभी डूबेगा ही नहीं।
1944 – बंबई बंदरगाह पर हुए भयंकर विस्फोट में लगभग 300 लोग मारे गए और दो करोड़ पाउंड की क्षति हुई (1944 में मुम्बई बंदरगाह में अकस्मात आग लग जाने के कारण 66 अग्निशमन कर्मी वीरगति को प्राप्त हुए थे। इन शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने व अग्नि से बचाव के उपाय बताने के लिए देशभर में अग्निशमन दिवस मनाया जाता है।)।
1970 – अमरीकी अंतरिक्ष यान अपोलो 13 में धमाका हुआ। हांलाकि 17 अप्रैल, 1970 को अपोलो 13 सफलतापूर्वक धरती पर वापस लौट आया।
1981 – पहला अंतरिक्ष यान कोलंबिया-1 वापस धरती पर लौटा।
1988 – तत्कालीन सोवियत संघ, अमेरिका, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच अफगानिस्तान की संधि पर हस्ताक्षर हुआ। जिसके तहत सोवियत संघ को अफ़गानिस्तान से अपने सैनिकों को हटाना था।
1995 – भारत चौथी बार एशिया कप चैंपियन बना। शाहजाह में खेले गए फाइनल में श्रीलंका को हराया।
1995 - यूक्रैन में स्थित चेरनोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र वर्ष 2000 तक बंद करने की घोषणा।
1999 - मलेशिया के अपदस्थ उपप्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम को भ्रष्टाचार के मामले में छह वर्ष क़ैद की सज़ा।
2000 - रूस की संसद ने संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस के बीच 'स्टार्ट-2' परमाणु शस्त्र कटौती संधि का अनुमोदन किया।
2002 - अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में मुकदमें का सामना कर रहे सर्बियाई नेता का निधन।
2003 - इस्रायल के प्रधानमंत्री एरियल शैरोन पश्चिमी तट से कुछ यहूदी बस्तियाँ हटाने पर सहमत।
2004 - अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश ने ईराक को दूसरा वियतनाम न बनने देने की घोषणा की।
2005 - भारत और अमेरिका ने अपने-अपने उड़ान क्षेत्र एक-दूसरे की एयरलाइनों के लिए खोलने का ऐतिहासिक समझौता किया।
2006 - चीन में प्रथम बौद्ध विश्व सम्मेलन शुरू।
2008 - उत्तर प्रदेश सरकार ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश का भौगोलिक नक्शा बनाने की घोषणा की।
2008 - किर्लोस्कर ब्रदर्स को दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) की कोडरमा ताप विद्युत परियोजना से 166 करोड़ 77 लाख रुपये का आर्डर मिला।
2008 - 40 वर्ष बाद भारत व बांग्लादेश के बीच सम्बन्धों को मज़बूत बनाने के लिए मैत्री एक्सप्रेस कोलकाता और बांग्लादेश की राजधानी ढाका से एक दूसरे देश के लिए रवाना हुई।
2008 - पुरातत्वविदों ने मिस्र के सिनाई प्राय:द्वीप से रोमन सम्राट वेलेन्स के काल के प्राचीन सिक्के बरामद करने का दावा किया।
2010 - पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और उड़ीसा में चक्रवाती तूफ़ान में 123 लोगों की मृत्यु हो गई।
2010 – चीन के किगगाई में 6.9 तीव्रता का भूकंप आया, इस आपदा में लगभग 2700 लोग मारे गए।
2011- राष्ट्रीय सुरक्षा सूचकांक (एनएसआई) द्वारा हाल ही में किए सर्वेक्षण में भारत को दुनिया का पांचवा सर्वाधिक शक्तिशाली देश माना गया। सूची में अमेरिका को पहले तथा चीन दूसरे स्थान पर है। जापान और रूस को क्रमश: तीसरा और चौथा स्थान मिला है। कार्य-कुशल जनसंख्या के मामले में भारत तीसरे स्थान पर है, चीन पहले स्थान पर है। रक्षा की दृष्टि से भारत चौथी महाशक्ति है।
2013 - सोमालिया के मोगादिशु में आतंकवादी हमले में 20 मरे।
2019 - एक आर.टी.आई के जवाब में RBI का खुलासा: मोदी सरकार में बैंकों के डूब गए रुपए 5. 55 लाख करोड़।
2019 - लीबियाई संघर्ष में 120 से ज्यादा की मौत, करीब 600 घायल : रिपोर्ट।
2019 -नेपाल: हवाईअड्डे पर खड़े हेलिकॉप्टर से टकराया विमान, दो की मौत, पांच घायल।
2020 - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए देश में लॉकडाउन अगले महीने की तीन तारीख तक बढ़ाने का फैसला किया।
2020 - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने COVID-19 के खिलाफ लड़ने के लिए “सप्तपदी” (सात मंत्र)का शुभारंभ किया।
2021 - विश्व बैंक ने बांग्लादेश को कोविड महामारी से निपटने के लिए एक अरब डॉलर की वित्तीय सहायता दी।
2021 - अटल नवाचार मिशन और नीति आयोग ने आज दसॉ सिस्टम्स फाउण्डेशन के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
2021 - असम में बोहाग बिहु पक्षी गणना (Bohag Bihu Bird Count) शुरू हुई।
2022 - प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री संग्रहालय का उद्घाटन किया।
2023 - जम्मू - कश्मीर के उधमपुर में बैसाखी सेलिब्रेशन के दौरान ब्रिज टूटने से 6 से ज्यादा लोग घायल हुए।
2023 - पीएम मोदी ने पूर्वोत्तर भारत को पहला AIIMS और तीन मेडिकल कॉलेज राष्ट्र को समर्पित किए।
2023 - रक्षा , वित्त और अर्थशास्त्र पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का नई दिल्ली में समापन हुआ।
2023 - विश्व मुद्रा कोष/विश्व बैंक के वसंतकालीन सम्मेलनों के दौरान श्रीलंका के कर्ज के मामले पर उच्चस्तरीय बैठक हुई।
2023 - भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन नई दिल्ली से अंबेडकर सर्किट पर रवाना हुई।
2023 - जूस उपग्रह को फ्रेंच गुयाना के कोरू अंतरिक्ष केंद्र से एरियन-5 रॉकेट के जरिए प्रक्षेपित किया गया।
1862 - प्रभाशंकर पाटनी - गुजरात के प्रमुख सार्वजनिक कार्यकर्त्ता थे।
1891 - बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर।
1907 - पूरन चन्द जोशी - स्वाधीनता सेनानी।
1919 - शमशाद बेगम - हिन्दी फ़िल्मों की प्रसिद्ध पार्श्वगायिका।
1920 - गवरी देवी - राजस्थान की प्रसिद्ध मांड गायिका।
1922 - अली अकबर ख़ाँ - प्रसिद्ध भारतीय संगीतकार, शास्त्रीय गायक और सरोद वादक।
1940 - अवतार एनगिल - कवि एवं साहित्यकार।
1954 - ललिता वकील - हिमाचल प्रदेश की शिल्पकार व सामाजिक कार्यकर्ता ।
1957 - के. सिवन - भारत के अन्तरिक्ष वैज्ञानिक।
1859 - जमशेद जी जीजाभाई, अपने व्यवसाय से अत्यंत धनी बने, दानवीर थे।
1950 - रमण महर्षि - बीसवीं सदी के महान् संत और समाज सेवक।
1962 – भारत रत्न से सम्मानित प्रसिद्ध भारतीय अभियंता एवं राजनयिक मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का निधन हुआ।
1963 - राहुल सांकृत्यायन- हिन्दी के एक प्रमुख साहित्यकार।
1986 - नितिन बोस - प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक, छायाकार और लेखक।
2013 - रामा प्रसाद गोयनका - आरपीजी समूह के संस्थापक और अध्यक्ष एमेरिटस थे।
2013 - प्रतिवादि भयंकर श्रीनिवास - भारत के एक अनुभवी नेपथ्यगायक थे।
2017 - गिरीश चंद्र 'गैरी' सक्सेना - जम्मू और कश्मीर राज्य के राज्यपाल थे।
2021 - पूर्व निर्वाचन आयुक्त जी वी जी कृष्णमूर्ति का उम्र संबंधी बीमारियों के चलते निधन हुआ।
2022 - टीवी शो प्रोड्यूसर और हिंदी सिनेमा की जानी मानी एक्ट्रेस मंजू सिंह (74) का निधन हुआ।
2023 - ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बल्लेबाज केन आर्चर (95) का निधन हुआ।
2023 - आयरिश रॉक गिटारवादक और गीतकार मार्क शीहान (46) का निधन हुआ।
श्री नायकबा पालकी समारोह (बनपुरी)।
श्री कराड महाकाली यात्रा प्रारंभ (चंद्रपुर)।
श्री रामानुजाचार्य जयन्ती ( कन्फर्म कर लें , तमिल आदि कलेन्डर के अनुसार 12 या 13 मई आदि को )।
बोहाग बिहू (असम का मुख्य त्योहार)।
मेला माईसरखाना (पं.)।
श्री यमुना छठ / जयन्ती ( चैत्र शुक्ल षष्ठी )।
भगवान सम्भवनाथ जी मोक्ष कल्याणक ( चैत्र शुक्ल षष्ठी )।
डॉ भीमराव अंबेडकर जयंती (133वीं )।
महर्षि वेंकटरमण अय्यर स्मृति दिवस।
राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस अमेरिका ( National Dolphin Day America)।
विश्व चगास रोग दिवस (5वां)।
राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) की 8वीं वर्षगांठ।
विश्व एयरोनॉटिक्स और ब्रह्माण्ड विज्ञान दिवस।
ब्लैक डे (साउथ कोरिया)।
अग्निशमन सेवा दिवस व अग्निशमन सेवा सप्ताह (14-20 अप्रैल)।
कृपया ध्यान दें
यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
लोकसभा में बिल गिरने के बाद भाजपा का पलटवार, कल से देशभर में आंदोलन शुरू महिला आरक्षण बिल संसद में पास न होने के बाद अब देश की राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दलों ने विपक्ष के खिलाफ बड़ा मोर्चा खोलते हुए देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। यह फैसला उस समय लिया गया जब संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाया और गिर गया। हर जिले में प्रदर्शन की तैयारी पार्टी सूत्रों के मुताबिक, BJP ने अपने सभी राज्य इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे देश के हर जिला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करें। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जनता के बीच यह संदेश पहुंचाना है कि विपक्ष ने महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के ऐतिहासिक मौके को रोक दिया। महिला मोर्चा संभालेगा मोर्चा इस आंदोलन में BJP महिला मोर्चा की भूमिका सबसे अहम रहने वाली है। पार्टी की महिला नेता और कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर अभियान चलाकर महिलाओं के बीच जागरूकता फैलाएंगी। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक, हर माध्यम से इस मुद्दे को उठाने की रणनीति बनाई गई है। चुनावी राज्यों में बनेगा बड़ा मुद्दा भाजपा इस मुद्दे को आगामी चुनावों में भी जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में इसे प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया जाएगा। पार्टी इसे महिलाओं के सशक्तिकरण से जोड़ते हुए विपक्ष के खिलाफ माहौल बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। वोटिंग में क्या हुआ था? लोकसभा में हुए मतदान में बिल के पक्ष में 298 सांसदों ने वोट दिया, जबकि 230 सांसद इसके खिलाफ रहे। संवैधानिक संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण यह विधेयक पास नहीं हो सका। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण बिल पारित नहीं हुआ। सरकार का दावा बनाम विपक्ष का रुख BJP और NDA का कहना है कि यह बिल महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम था। वहीं, विपक्ष इसे विवादित मुद्दों से जोड़कर पेश करने का आरोप लगा रहा है। अब यह मुद्दा संसद से निकलकर सड़कों तक पहुंच चुका है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक माहौल और गरमा सकते हैं।
ll~ वैदिक पंचांग ~ll 🌞 🌤️ *दिनांक - 18 अप्रैल 2026* 🌤️ *दिन - शनिवार* 🌤️ *विक्रम संवत 2083* 🌤️ *शक संवत -1948* 🌤️ *अयन - उत्तरायण* 🌤️ *ऋतु - वसंत ॠतु* 🌤️ *मास - वैशाख* 🌤️ *पक्ष - शुक्ल* 🌤️ *तिथि - प्रतिपदा दोपहर 02:10 तक तत्पश्चात द्वितीया* 🌤️ *नक्षत्र - अश्विनी सुबह 09:42 तक तत्पश्चात भरणी* 🌤️ *योग - प्रीति रात्रि 11:56 तक तत्पश्चात आयुष्मान* 🌤️*राहुकाल - सुबह 09:28 से सुबह 11:03 तक* 🌤️ *सूर्योदय - 05:38* 🌤️ *सूर्यास्त - 06:17* 👉 *दिशाशूल - पूर्व दिशा मे* 🚩 *व्रत पर्व विवरण- चंद्र-दर्शन (शाम 06:49 से रात्रि 07:52 तक)* 💥 *विशेष - प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा पेठा) न खाएं क्योकि यह धन का नाश करने वाला है (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
नई दिल्ली: गर्मियों के मौसम के साथ बाजारों में आम, केला और पपीता की आमद तेज हो गई है, लेकिन इस बार इन फलों की गुणवत्ता को लेकर सरकार पहले से ज्यादा सतर्क नजर आ रही है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि वे फल मंडियों, गोदामों और थोक बाजारों में सख्त निगरानी रखें और जरूरत पड़ने पर छापेमारी भी करें। केमिकल से पकाए फलों पर सख्ती FSSAI ने साफ किया है कि आम, केला और पपीता जैसे फलों को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले खतरनाक रसायनों पर पूरी तरह प्रतिबंध है। खास तौर पर कैल्शियम कार्बाइड (जिसे आम भाषा में ‘मसाला’ कहा जाता है) का उपयोग गैरकानूनी है। यह केमिकल न सिर्फ फलों की गुणवत्ता को खराब करता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करता है। सेहत पर पड़ सकता है गंभीर असर विशेषज्ञों के मुताबिक, कैल्शियम कार्बाइड के संपर्क या सेवन से: निगलने में दिक्कत उल्टी और पेट की परेशानी त्वचा पर जलन या अल्सर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा कुछ व्यापारी एथेफोन जैसे घोल का भी इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे भी सुरक्षित नहीं माना जाता। राज्यों को दिए गए सख्त निर्देश FSSAI ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों और क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि: फल मंडियों और स्टोरेज सेंटर की नियमित जांच हो थोक बाजारों और सप्लाई चेन पर कड़ी नजर रखी जाए संदिग्ध मामलों में तुरंत कार्रवाई की जाए खासतौर पर उन जगहों पर ज्यादा सतर्कता बरतने को कहा गया है, जहां बड़े पैमाने पर मौसमी फलों का भंडारण किया जाता है। उपभोक्ताओं की सुरक्षा प्राथमिकता FSSAI का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं तक जो फल पहुंचें, वे न सिर्फ स्वाद में अच्छे हों बल्कि पूरी तरह सुरक्षित भी हों। गर्मियों में फलों की मांग बढ़ने के साथ मिलावट और केमिकल के इस्तेमाल का खतरा भी बढ़ जाता है, ऐसे में इस बार नियामक पहले से ही एक्शन मोड में नजर आ रहा है।