नई दिल्ली, एजेंसियां। भीषण गर्मी का असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पौधों पर भी पड़ता है। खासकर गुलाब के पौधे गर्म मौसम में जल्दी मुरझाने लगते हैं। कई लोगों की शिकायत रहती है कि गुलाब की पत्तियां पीली पड़ रही हैं, पौधा सूख रहा है और फूल आना बंद हो गए हैं। गार्डनिंग एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसकी मुख्य वजह मिट्टी का ज्यादा गर्म होना और जड़ों में नमी की कमी है। ऐसे में एक आसान और मुफ्त घरेलू उपाय पौधे को फिर से हरा-भरा बना सकता है।
आरवी गार्डन के एक्सपर्ट के अनुसार, गुलाब के पौधे के लिए एलोवेरा और केले के छिलकों से बनी लिक्विड खाद बेहद फायदेमंद होती है। इसे बनाने के लिए एक लीटर पानी में एलोवेरा की पत्ती का गूदा अच्छी तरह मिलाएं। एलोवेरा पौधों की जड़ों को ठंडक देता है और फंगस से बचाने में मदद करता है।
इसके बाद केले के सूखे छिलकों का पाउडर बनाकर उस घोल में एक चम्मच मिलाएं। केले के छिलकों में पोटेशियम भरपूर मात्रा में होता है, जो गुलाब के पौधे में फूल आने की प्रक्रिया को तेज करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस खाद का इस्तेमाल हफ्ते में केवल एक बार करना चाहिए। ज्यादा मात्रा में खाद देने से पौधों की जड़ें खराब हो सकती हैं। खाद डालने का सही समय सुबह जल्दी या शाम का होता है, क्योंकि उस समय मिट्टी ठंडी रहती है और पौधे पोषक तत्व आसानी से सोख लेते हैं।
खाद डालने से पहले मिट्टी की हल्की गुड़ाई करने से जड़ों तक हवा पहुंचती है और खाद का असर तेजी से होता है। वहीं अत्यधिक गर्मी में मिट्टी के ऊपर सूखे पत्ते या घास बिछाने यानी मल्चिंग करने से नमी बनी रहती है और जड़ें सुरक्षित रहती हैं।
गार्डनिंग एक्सपर्ट्स का मानना है कि सही समय पर देखभाल और घरेलू पोषण मिलने से गुलाब के पौधे दोबारा तेजी से बढ़ते हैं और गर्मियों में भी भरपूर फूल देते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना दौरे के दौरान आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और अभिनेता पवन कल्याण के हैदराबाद स्थित घर पहुंचकर उनसे मुलाकात की। प्रधानमंत्री के इस खास दौरे के बाद पवन कल्याण की पत्नी Anna Lezhneva ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा किया, जो तेजी से वायरल हो रहा है। परिवार के साथ बिताया समय जुबली हिल्स स्थित आवास पर पवन कल्याण और उनके परिवार ने प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने हाल ही में हुई पवन कल्याण की सर्जरी और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। उन्होंने परिवार के सदस्यों से भी बातचीत की और पवन कल्याण को स्वास्थ्य का ध्यान रखने की सलाह दी। अन्ना लेझनेवा ने अपने पोस्ट में लिखा कि प्रधानमंत्री ने उनसे मुस्कुराते हुए कहा कि वे पवन कल्याण का अच्छे से ख्याल रखें। उन्होंने कहा कि यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं थी, बल्कि उसमें इंसानियत और अपनापन साफ नजर आ रहा था। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्ट प्रधानमंत्री की यात्रा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। अन्ना लेझनेवा ने पोस्ट में लिखा कि यह पल उनके परिवार के लिए हमेशा यादगार रहेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उनका स्नेह और चिंता दिल को छू लेने वाली थी। पीएम मोदी ने भी साझा किया संदेश प्रधानमंत्री मोदी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि उन्होंने पवन कल्याण और उनके परिवार से मुलाकात की तथा उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। वहीं, पवन कल्याण ने प्रधानमंत्री के घर आने और हालचाल जानने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की यह मुलाकात और परिवार को दिया गया सम्मान जीवनभर याद रहेगा।
Kiaasa Retail Limited भारतीय एथनिक वियर मार्केट में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है। हाल ही में BSE SME प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध हुई कंपनी ने अप्रैल महीने में देश के तीन बड़े शहरों में नए एक्सक्लूसिव ब्रांड आउटलेट्स (EBOs) शुरू करने की घोषणा की है। कंपनी का यह विस्तार केवल नए स्टोर खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के तेजी से बढ़ते फैशन और रिटेल बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। कंपनी ने इस बार महाराष्ट्र, बिहार और छत्तीसगढ़ में अपने नए स्टोर्स लॉन्च किए हैं। नागपुर में स्टोर Glocal Square Mall में खोला गया है, जबकि बिहार की राजधानी पटना में नया आउटलेट City Centre Mall में शुरू हुआ है। वहीं छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कंपनी ने Zora The Mall में अपना नया स्टोर लॉन्च किया है। इन सभी लोकेशंस को प्रीमियम और तेजी से विकसित हो रहे शॉपिंग डेस्टिनेशन के रूप में देखा जाता है। कंपनी का फोकस खास तौर पर आधुनिक भारतीय महिलाओं के लिए प्रीमियम एथनिक फैशन उपलब्ध कराने पर है। Kiaasa अपने डिजाइनों में पारंपरिक भारतीय पहनावे और आधुनिक फैशन ट्रेंड्स का मिश्रण पेश करती है, जिसकी वजह से युवा ग्राहकों के बीच इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। अप्रैल में हुए ये तीन नए लॉन्च यह भी दिखाते हैं कि कंपनी बेहद आक्रामक विस्तार रणनीति पर काम कर रही है। इससे पहले मार्च महीने में भी कंपनी ने भोपाल, इंदौर, अयोध्या और ज़ीरकपुर जैसे शहरों में चार नए स्टोर्स शुरू किए थे। लगातार नए शहरों में विस्तार से साफ है कि Kiaasa अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उभरते टियर-1 और हाई-ग्रोथ शहरों को भी अपना बड़ा बाजार मान रही है। Kiaasa Retail Limited ने अपने “Vision 2028-29” के तहत देशभर में 250 स्टोर्स का विशाल नेटवर्क तैयार करने का लक्ष्य रखा है। कंपनी का मानना है कि भारत में एथनिक वियर इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में इसकी मांग और बढ़ेगी। इसी को ध्यान में रखते हुए Kiaasa लगातार अपनी भौतिक उपस्थिति मजबूत कर रही है। कंपनी अपने हालिया IPO से जुटाई गई राशि का उपयोग नए स्टोर्स खोलने, सप्लाई चेन को मजबूत बनाने और ओमनीचैनल नेटवर्क को बेहतर करने में कर रही है। Kiaasa ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों को बेहतर अनुभव देने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी भविष्य में “सेम-डे डिलीवरी” जैसी आधुनिक सुविधाएं भी बड़े स्तर पर उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है, ताकि ग्राहकों को तेज और सुविधाजनक सेवा मिल सके। कंपनी के प्रबंध निदेशक Om Prakash ने कहा कि नागपुर, पटना और रायपुर जैसे शहर भारत की नई फैशन राजधानियों के रूप में तेजी से उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी का उद्देश्य “मास-प्रीमियम” सेगमेंट में अपनी मजबूत पहचान बनाना और गुणवत्तापूर्ण एथनिक फैशन को देशभर के ग्राहकों तक पहुंचाना है। उन्होंने यह भी कहा कि Kiaasa आने वाले वर्षों में देश की सबसे भरोसेमंद एथनिक फैशन ब्रांड्स में शामिल होने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अक्सर घर की अलमारी में कई पुरानी साड़ियां रखी रह जाती हैं, जिन्हें लोग इस्तेमाल नहीं करते। लेकिन अब इन साड़ियों को फेंकने या संभालकर रखने की जरूरत नहीं है। थोड़ी सी क्रिएटिविटी से इन्हें घर की सजावट और रोजमर्रा के उपयोग की शानदार चीजों में बदला जा सकता है। खास बात यह है कि पुरानी साड़ियों से बने सजावटी सामान घर को एथनिक और यूनिक लुक देते हैं। पुरानी साड़ी से बनाएं खूबसूरत पर्दे अगर आपके पास चंदेरी, सिल्क, रेयॉन या प्रिंटेड साड़ी है, तो उससे घर के दरवाजों या खिड़कियों के लिए आकर्षक पर्दे तैयार किए जा सकते हैं। साड़ी का डिजाइन और रंग घर को रॉयल और पारंपरिक लुक देता है। एक साड़ी से आसानी से एक बड़ा पर्दा तैयार किया जा सकता है। कुशन कवर से दें एस्थेटिक लुक प्रिंटेड या एम्ब्रॉयडरी वाली पुरानी साड़ियों से सुंदर कुशन कवर बनाए जा सकते हैं। साड़ी के एथनिक डिजाइन सोफे और बेड को नया लुक देते हैं। यदि कुशन कवर के किनारों पर टसल लगा दिए जाएं, तो उनका लुक और भी आकर्षक हो जाता है। टेबल कवर और रनर भी बन सकते हैं सिल्क या बनारसी साड़ी से टेबल कवर और टेबल रनर बनाना भी शानदार विकल्प है। बस टेबल का आकार नापकर साड़ी को काटें और किनारों को सिल दें। इससे डाइनिंग टेबल बेहद स्टाइलिश दिखाई देती है। बेडरूम को दें नया बैकड्रॉप भारी कढ़ाई वाली पुरानी साड़ियों का इस्तेमाल बेड के पीछे वॉल बैकड्रॉप के रूप में किया जा सकता है। इससे बेडरूम को एस्थेटिक और रॉयल लुक मिलता है। आजकल इस तरह की फैब्रिक डेकोरेशन काफी ट्रेंड में है। वॉल हैंगिंग से चमकेंगी दीवारें पुरानी साड़ी के कपड़े से फैब्रिक आर्ट और वॉल हैंगिंग बनाकर घर की दीवारों को खूबसूरत बनाया जा सकता है। यह घर को हैंडमेड और क्रिएटिव टच देता है। पुराने कपड़ों का नया इस्तेमाल विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने कपड़ों को दोबारा इस्तेमाल करना न सिर्फ खर्च बचाता है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद होता है। थोड़ी मेहनत से पुरानी साड़ियां घर की सजावट का खास हिस्सा बन सकती हैं।