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Kanpur Lawyer Dies by Suicide in Court Complex

कानपुर कोर्ट से वकील ने लगाई छलांग, सुसाइड नोट में पिता पर गंभीर आरोप

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
Young lawyer dies after jumping from Kanpur court building, suicide note alleges mental harassment
Kanpur Lawyer Suicide Court Jump

"मेरे शव को पिता छूएं नहीं"– मौत से पहले WhatsApp स्टेटस पर लिखा दर्द

उत्तर प्रदेश के कानपुर से बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। 24 वर्षीय युवा वकील ने कोर्ट परिसर की इमारत से कूदकर अपनी जान दे दी। घटना के बाद पूरे न्यायालय परिसर में हड़कंप मच गया।

मृतक ने आत्महत्या से पहले दो पन्नों का सुसाइड नोट अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने पिता पर बचपन से मानसिक प्रताड़ना देने के गंभीर आरोप लगाए।

पांचवीं मंजिल से कूदकर दी जान

पुलिस के अनुसार, युवा वकील प्रियंशु श्रीवास्तव ने गुरुवार को कानपुर कोर्ट की पांचवीं मंजिल से छलांग लगा दी। गंभीर हालत में उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

सुसाइड नोट में छलका वर्षों का दर्द

प्रियंशु ने अपने नोट में बचपन की कई घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि छह साल की उम्र में आम का जूस पीने पर उनके पिता ने उन्हें निर्वस्त्र कर घर से बाहर निकाल दिया था।

इस घटना ने उनके मन पर गहरा असर छोड़ा और जीवनभर हीन भावना से जूझते रहे।

"मेरे शव को पिता हाथ न लगाएं"

सुसाइड नोट की सबसे मार्मिक पंक्ति थी–
"मेरे शव को मेरे पिता छूएं नहीं।"

यह पंक्ति उनके भीतर वर्षों से जमा पीड़ा और मानसिक संघर्ष को बयां करती है।

पढ़ाई को लेकर भी लगाया दबाव का आरोप

प्रियंशु ने 2016 की एक घटना का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि वह फिजिकल एजुकेशन पढ़ना चाहते थे, लेकिन पिता ने उन्हें जबरन कंप्यूटर साइंस लेने के लिए मजबूर किया।

मां को परेशान न करने की अपील

अपने अंतिम संदेश में प्रियंशु ने पुलिस और परिवार से अनुरोध किया कि उनकी मां को किसी प्रकार की परेशानी न दी जाए। उन्होंने यह भी लिखा कि अपने इस फैसले के लिए वह किसी और को जिम्मेदार नहीं ठहराते।

पुलिस जांच में जुटी

पुलिस ने सुसाइड नोट को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। कोर्ट परिसर के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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नेपाल-भारत संबंधों में नई हलचल: बालेन शाह के दिल्ली दौरे से पहले काठमांडू में कूटनीतिक सरगर्मी तेज

नेपाल के प्रधानमंत्री Balen Shah के प्रस्तावित भारत दौरे से पहले कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। काठमांडू और नई दिल्ली के बीच उच्च-स्तरीय बातचीत की तैयारियां जारी हैं, वहीं इस बीच United States और China की बढ़ती मौजूदगी ने क्षेत्रीय समीकरणों को और दिलचस्प बना दिया है। ‘औपचारिक नहीं, परिणाम वाला दौरा’ – बालेन शाह बालेन शाह ने स्पष्ट संकेत दिया है कि उनका दिल्ली दौरा सिर्फ औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि ठोस नतीजों पर आधारित होगा। उन्होंने साफ किया है कि वे पुराने पैटर्न को नहीं दोहराना चाहते और भारत यात्रा के दौरान वास्तविक मुद्दों पर प्रगति चाहते हैं। भारतीय विदेश सचिव का काठमांडू दौरा इसी कड़ी में भारत के विदेश सचिव Vikram Misri 11-12 मई को काठमांडू का दौरा कर सकते हैं। उन्हें नेपाल की ओर से औपचारिक निमंत्रण भी भेजा जा चुका है। इस दौरे का मकसद नेपाल सरकार की प्राथमिकताओं को समझना और बालेन शाह की अपेक्षाओं के अनुसार एजेंडा तय करना है। बताया जा रहा है कि S. Jaishankar और नेपाल के विदेश मंत्री Shishir Khanal के बीच पहले ही इस दौरे को लेकर बातचीत हो चुकी है। काठमांडू में बढ़ी वैश्विक सक्रियता इस बीच काठमांडू में अमेरिका और चीन दोनों की कूटनीतिक सक्रियता बढ़ गई है। अमेरिकी और चीनी अधिकारी हाल ही में नेपाल का दौरा कर चुके हैं, जिससे साफ है कि नेपाल अब एक अहम रणनीतिक केंद्र बनता जा रहा है। एजेंडा तय करने पर जोर भारतीय विदेश सचिव का दौरा मुख्य रूप से बालेन शाह की भारत यात्रा के एजेंडे को अंतिम रूप देने पर केंद्रित होगा। इसमें भारत द्वारा नेपाल में चल रही परियोजनाओं की समीक्षा, नई साझेदारियों की संभावनाएं और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा शामिल हो सकती है। प्रोटोकॉल और कूटनीतिक संकेत दिलचस्प बात यह है कि बालेन शाह फिलहाल एक अलग कूटनीतिक रुख अपनाते नजर आ रहे हैं। वे केवल शीर्ष स्तर के नेताओं—राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री—से ही मुलाकात कर रहे हैं और निचले स्तर के अधिकारियों से दूरी बनाए हुए हैं। यह उनके नए ‘स्टैंडर्ड’ सेट करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।  

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1526 — मुगल शासक बाबर  दिल्ली के सुल्तान को पराजित कर नया बादशाह बना। 1662 — नीदरलैंड और फ्रांस ने सैन्य संधि पर हस्ताक्षर किये। 1805 — अमेरिकी नौसैनिकों ने त्रिपोली के तटीय क्षेत्रों में हमला किया।  1878 — कलकत्ता विश्वविद्यालय ने महिलाओं को विश्वविद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में पात्रता के लिये पहली मंजूरी दी। 1908 — लंदन में चौथे ओलंपिक खेल शुरू हुए। 1940 — नाजियों ने पोलैंड के ओस्वीसिम में यातना शिविर का निर्माण शुरू किया। 1941 — द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी की सेना ने एथेंस (यूनान) पर कब्जा किया। 1942 — अमेरिका के ओकलाहोमा प्रांत में भयंकर तूफान के कारण 100 लोग मारे गये। 1960 — फ़्रांस के अधिकार वाला टोगो देश का भाग स्वतंत्र हो गया। 1960 — नेशनल डिफेंस कॉलेज की नयी दिल्ली में स्थापना हुई। 1961 — अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने गामा किरणों के अध्ययन के लिये पृथ्वी की कक्षा में ‘एक्सप्लोरर 11’ लांच किया। 1961 — अफ़्रीक़ा महाद्वीप के सीएरा लियोन देश को स्वतंत्रता मिली यह अफ़्रीक़ा में ब्रिटेन का सबसे पुराना उपनिवेश था। 1963 — क्यूबा के तत्कालीन प्रधानमंत्री फिदेल कास्त्रो रूस की अपनी यात्रा के दौरान राजधानी मॉस्को पहुंचे। 1967 — अमेरिका ने नेवादा परीक्षण स्थल पर परमाणु परीक्षण किया (कन्फर्म नहीं)। 1972 — अंतरिक्ष यान 'अपोलो 16' पृथ्वी पर वापस लौटा। 1976 — अबू धाबी में अरबी मुद्रा कोष की स्थापना की गई। 1984 — लंदन के सेंट जेम्स स्क्वेयर पर स्थित लीबियाई दूतावास पर 11 दिन तक चले क़ब्ज़े का अंत हुआ और वहां बंधक बनाए गए कूटनयिक चलकर बाहर आ गए। 1989 — बांग्लादेश में तूफान से 500 लोगों की मौत हुई। 1992 — ज़ाम्बिया का एक विमान जिसमे इस देश की फ़ुटबाल की राष्ट्रीय टीम सवार थी दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दुर्घटना में विमान पर सवार सभी लोग मारे गये। 1993 — अफगानिस्तानी विमान 'एएनएस-32' दुर्घटनाग्रस्त होने से 76 लोगों की मौत हुई। 1993 — एरीट्रिया को इथोपिया से स्वतंत्रता मिली एरिट्रिया में 30 वर्ष जन संघर्ष के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ के निरीक्षण में एक जनमत संग्रह कराया गया जिसके बाद यह देश स्वतंत्र हो गया। 1994 — दक्षिण अफ्रीका का स्वतंत्रता दिवस मनाया गया 1999 - यूनेस्को द्वारा एक कोरियाई लोक गायक के नाम पर एक नये पुरस्कार अरिरंग की घोषणा। 1999 - दक्षिण कोरिया एवं थाइलैंड के बीच प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर। 2005 - टुलुज (फ़्रांस) में एयरबस निर्मित दुनिया के सबसे बड़े विमान ए-380 ने पहली परीक्षण उड़ान भरी। 2006 — न्यूयॉर्क में फ्रीडम टॉवर का निर्माण शुरू हुआ। 2008 - राजस्थान सरकार ने प्रत्येक ज़िला मुख्यालय पर विकलांगों के लिए मोबाइल् कोर्ट स्थापित करने का निर्णय लिया। 2008 - पाकिस्तान ने अपने विदेश सचिव रियाज मुहम्मद ख़ान को बर्ख़ास्त कर उनके स्थान पर चीन में पाकिस्तान के राजदूत सलमान बशीर को विदेश सचिव नियुक्त किया।  2008 - मोरक्को की एक गद्दा फ़ैक्ट्री में आग लगने से 55 लोगों की मृत्यु। 2010 - यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) ने भारत के नागरिकों की पहचान का एक बड़ा सबूत बनने जा रहे यूनीक आइडेंटिफिकेशन नंबर को अब नया ब्रांड नाम 'आधार' तथा नया लोगो पेश किया। 2011 — अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने जन्म को लेकर हुए विवाद के बाद सार्वजनिक तौर पर जन्म प्रमाण पत्र की एक प्रति जारी की। 2011 — सत्य साईं बाबा को महासमाधि दी गई। 2012 — यूक्रेन के द्निप्रोपेत्रोव्स्क में चार धमाकों में 27 मरे। 2019 - श्रीलंका में तीन और धमाके, छापेमारी के दौरान आतंकी ने खुद को उड़ाया। 2019 - हिमाचल प्रदेश में नीजी बस खाई में गिरने से 10 लोगों की मौत। 2020 - COVID-19 के कारण ऑस्ट्रेलिया में 27 जुलाई से 14 अगस्त तक होने वाले प्रमुख बहुपक्षीय हवाई युद्धाभ्यास पिच ब्लैक 2020 (Pitch Black 2020) को रद्द कर दिया गया। 2020 - राजस्थान हाई कोर्ट ने प्रदेश की सभी अदालतों में जाति का उल्लेख नहीं करने का आदेश जारी किया । 2021 - भारत व फ्रांस की नौसेनाओं के द्विपक्षीय अभ्यास 'वरुण-2021' के 19वें संस्करण का अरब सागर में समापन हुआ ( 25 - 27 अप्रैल, 2021)। 2021 - नासा के हैलीकॉप्टर ने मंगल ग्रह पर एक और सफल उड़ान भरी। 2022 - तमिलनाडु के तंजावुर जिले में रथयात्रा के दौरान करंट लगने से 11 लोगों की मौत व 15 अन्य झुलसे। 2022 - रिलायंस 19 लाख करोड़ रुपये के मार्केट वैल्यू को पार करने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी। 2022 - म्यांमा की एक अदालत ने अपदस्थ नेता आंग सान सू ची को भ्रष्टाचार  मामले में 5 साल जेल की सजा सुनाई। 2023 - महाराष्ट्र के खोपोली में मुंबई- पुणे एक्सप्रेस वे पर 7 गाड़ियों में टक्कर होने से 11 लोग घायल हुए। 2023 - सूडान हिंसा के बाद 246 भारतीयों का दूसरा जत्था मुंबई एयरपोर्ट पहुंचा। 2023 - पश्चिम बंगाल में आकाशीय बिजली की चपेट से आठ लोगों की मौत हुई। 2023 - बांग्लादेश सेना प्रमुख तीन दिवसीय दौरे पर भारत आए। 2023 - भारत की जी20 अध्यक्षता के तहत तीसरी शिक्षा कार्य समूह (EDWG) बैठक भुवनेश्वर में आरंभ हुई। 2024 - इराक की संसद समलैंगिक संबंधों को अपराध घोषित कर एक कानून पारित किया जिसके तहत 15 साल तक की जेल की सज़ा हो सकती है। देश के मौजूदा "वेश्यावृत्ति के विरुद्ध कानून" संख्या 8, 1988 में संशोधन के रूप में LGBT विरोधी कानून पारित किया। 2024 - नासा के इंजीनियरों ने पांच महीने तक डेटा प्राप्त नहीं करने के बाद 15 अरब मील दूर से वॉयजर 1 की सफलतापूर्वक मरम्मत और पुनर्कोडिंग की।   27 अप्रैल को जन्मे व्यक्ति   1820 - हरबर्ट स्पेन्सर, प्रसिद्ध शिक्षाविद, दार्शनिक तथा समाजशास्त्री थे। 1912 - ज़ोहरा सहगल - प्रसिद्ध अभिनेत्री एवं रंगमंच कलाकार थीं। 1920 - मनीभाई देसाई, प्रसिद्ध स्वतन्त्रता सेनानी। 1922 — अमेरिकी अभिनेता (द ऑड कपल ऐंड क्विंज़ी, मी) जैक क्लगमैन का जन्म हुआ। 1931 - श्री विश्वेश तीर्थ - एक भारतीय हिंदू गुरु , संत और श्री पेजावारा थे। 1947 - हरीश रावत, उत्तराखंड के सातवें मुख्यमंत्री । 1949 - पी. सतशिवम - भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश।   27 अप्रैल को हुए निधन   1930 - टी. के. माधवन उर्फ देशाभिमानी माधवन केरल के प्रसिद्ध समाज सुधारक थे। 1960 — बंगाली लेखक राजशेखर बसु का निधन हुआ। 1998 - गुयेन वैन लिंह - वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव थे। 2009 - फ़िरोज़ ख़ान - प्रसिद्ध अभिनेता एवं फ़िल्म निर्माता-निर्देशक। 2010 - हेमंत दास, उड़िया फ़िल्म अभिनेता। 2014 - राकेश दीवाना - छोटे पर्दे के भारतीय अभिनेता, मोटापा घटाने के ऑपरेशन में समस्या से निधन। 2017 - लम्बे समय से कैंसर से पीड़ित हिन्दी प्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता व राजनीतिज्ञ विनोद खन्ना का 70 वर्ष की आयु में निधन। 2020 - ग्रैमी पुरस्कार के लिए नॉमिनेटेड होने वाले सिंगर ट्रॉय स्नेड का निधन। 2021 - भारत के प्रसिद्ध गुजराती कवि दादूदन गढ़वी का 81 साल की उम्र में निधन हुआ।  2021 - प्रसिद्ध कहानीकार, उड़िया और अंग्रेजी के जाने-माने लेखक मनोज दास का 87 वर्ष की आयु में निधन हुआ। 2021 - भारतीय सूचना सेवा के वरिष्ठ अधिकारी संजय कुमार श्रीवास्तव का कोविड के कारण निधन हुआ। 2021 - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चाची नर्मदाबेन मोदी (80) का सिविल अस्पताल में निधन हुआ। 2023 - अमेरिकी पेशेवर बेसबॉल और बास्केटबॉल खिलाड़ी रिचर्ड मॉरो ग्रोट (92) का निधन हुआ। 2023 - ब्रिटिश रॉक'एन'रोलर वी विली हैरिस, 'वाइल्ड मैन ऑफ रॉक' (90) का निधन हुआ।   27 अप्रैल के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव   मुनिश्री शुकदेव जयंती (वैशाख अमावस्या , उत्तर भारत हिन्दी कलेण्डर अनुसार)। मेला पिंजौर (हरियाणा)। खनाणी (कुल्लू)। हरिद्वार - प्रयागराजादि (तीर्थ स्नान महात्म्य)। श्री हरीश रावत जन्म दिवस। श्री टी. के. माधवन उर्फ देशाभिमानी माधवन स्मृति दिवस। श्री राजशेखर बसु स्मृति दिवस। श्री विनोद खन्ना पुण्य दिवस। कवि श्री दादूदन गढ़वी स्मृति दिवस।   कृपया ध्यान दें  यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।

Anjali Kumari अप्रैल 27, 2026 0
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Swati Maliwal resigns AAP
स्वाति मालीवाल ने दिया AAP से इस्तीफा, मोदी जॉइन कर मोदी के नेतृत्व पर जताया भरोसा

नई दिल्ली, एजेंसियां। स्वाति मालीवाल ने आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का ऐलान किया है। उनके इस फैसले से दिल्ली की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मालीवाल ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए भाजपा का दामन थामा है।   केजरीवाल पर लगाए गंभीर आरोप मालीवाल ने Arvind Kejriwal पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उनके घर में उनके साथ मारपीट करवाई गई और बाद में केस वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी ने उन्हें लंबे समय तक संसद में बोलने का अवसर नहीं दिया, जो बेहद अपमानजनक था।   2006 से जुड़ी थीं आंदोलन से मालीवाल ने बताया कि वह 2006 से केजरीवाल के साथ काम कर रही थीं और कई आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि समय के साथ पार्टी की कार्यशैली बदल गई और उनके मूल सिद्धांतों से समझौता होने लगा।   मोदी सरकार के फैसलों की सराहना भाजपा में शामिल होने के फैसले को लेकर मालीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय नेतृत्व की नीतियों की सराहना की। उन्होंने महिला आरक्षण बिल सहित कई फैसलों को ऐतिहासिक बताया और कहा कि देश के विकास के लिए मजबूत नेतृत्व जरूरी है।   राजनीतिक संदेश और अपील मालीवाल ने रचनात्मक राजनीति करने वाले लोगों से भाजपा में शामिल होने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि वह बिना किसी दबाव के यह फैसला ले रही हैं और किसी भी जांच एजेंसी से डरती नहीं हैं।   कुल मिलाकर, स्वाति मालीवाल का यह कदम न केवल आम आदमी पार्टी के लिए झटका माना जा रहा है, बल्कि आने वाले समय में दिल्ली और राष्ट्रीय राजनीति पर इसका असर देखने को मिल सकता है।

Anjali Kumari अप्रैल 25, 2026 0
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surbhi अप्रैल 24, 2026 0

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