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Mamata Alleges Plot to Split TMC

"मैं भी बड़ी खिलाड़ी हूं, समय आने पर जवाब दूंगी": फेसबुक लाइव में ममता का भाजपा पर बड़ा हमला

Deepshikha जून 2, 2026 0
Mamata Banerjee addresses supporters via Facebook Live amid political turmoil in West Bengal
Mamata Banerjee Targets BJP in Facebook Live

 

पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी उठापटक के बीच तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को फेसबुक लाइव के जरिए भाजपा और राज्य प्रशासन पर तीखा हमला बोला। पार्टी के कुछ विधायकों के दल बदलने और संगठन में बढ़ती हलचल के बीच ममता ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस को तोड़ने की कोशिश की जा रही है, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं होगा।

अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों, धनबल और प्रशासनिक दबाव के सहारे उनकी पार्टी को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने विरोधियों को चेतावनी देते हुए कहा, "अगर कोई यह खेल खेल रहा है तो उसे बता दूं कि मैं भी बड़ी खिलाड़ी हूं। समय आने पर इसका जवाब जरूर दूंगी।"

विधायकों को धमकाने का आरोप

ममता बनर्जी ने दावा किया कि उनकी पार्टी के चार विधायकों ने उनसे शिकायत की है कि कुछ पुलिस अधिकारी उन्हें पार्टी की बैठकों में शामिल न होने की चेतावनी दे रहे हैं। उनके अनुसार, विधायकों को कहा गया है कि यदि वे कालीघाट या तृणमूल कांग्रेस की संगठनात्मक बैठकों में हिस्सा लेते हैं तो उनके खिलाफ आर्म्स एक्ट या मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में कार्रवाई की जा सकती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी विधायकों को भाजपा नेताओं के संपर्क में आने की सलाह भी दे रहे हैं। हालांकि इन आरोपों पर सरकार या पुलिस की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पार्टी छोड़ने वालों पर साधा निशाना

हाल में पार्टी से निष्कासित नेताओं का नाम लिए बिना ममता बनर्जी ने कहा कि कुछ लोगों की कोई विचारधारा नहीं होती और वे केवल अपने स्वार्थ के लिए राजनीति करते हैं। उन्होंने ऐसे नेताओं को आगे बढ़ाने पर खेद जताया और जनता से माफी भी मांगी।

उन्होंने कहा कि राजनीति में अवसर देने के बावजूद कुछ लोगों ने पार्टी के साथ विश्वासघात किया, जिसका उन्हें अफसोस रहेगा।

कार्यकर्ताओं के भरोसे संगठन मजबूत करने का दावा

ममता बनर्जी ने कहा कि कुछ नेता दबाव या लालच में आकर पार्टी छोड़ सकते हैं, लेकिन तृणमूल कांग्रेस की असली ताकत उसके जमीनी कार्यकर्ता हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी का संगठन कार्यकर्ताओं की बदौलत मजबूत बना रहेगा।

उन्होंने बताया कि वह स्वयं संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी कर रही हैं और कार्यकर्ताओं की समस्याओं को सीधे सुन रही हैं। जरूरत पड़ने पर पार्टी की ओर से कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।

 

धरने से पहले बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब तृणमूल कांग्रेस 2 जून को कोलकाता में बड़े विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फेसबुक लाइव के जरिए ममता ने अपने समर्थकों को संदेश देने के साथ-साथ भाजपा सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की है।

अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इन आरोपों पर राज्य सरकार और भाजपा की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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4399 दिनों का रिकॉर्ड: नेहरू को पीछे छोड़ भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री बने मोदी

  नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया है। लगातार तीसरी बार देश की सत्ता संभाल रहे मोदी अब भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने वाले नेता बन गए हैं। उन्होंने देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड पीछे छोड़ते हुए 4,399 दिनों का लगातार निर्वाचित कार्यकाल पूरा कर लिया है। लगातार तीसरे कार्यकाल में बना नया इतिहास प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद उन्होंने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में भी जीत दर्ज कर लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की। इसी के साथ उनका निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल 4,399 दिनों तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे लंबा लगातार निर्वाचित कार्यकाल है। नेहरू का रिकॉर्ड टूटा पंडित Jawaharlal Nehru ने 13 मई 1952 को पहले आम चुनाव के बाद निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था और 27 मई 1964 तक इस पद पर रहे। निर्वाचित प्रधानमंत्री के तौर पर उनका कार्यकाल 4,398 दिनों का था। यदि 15 अगस्त 1947 से उनके पूरे प्रधानमंत्री कार्यकाल को शामिल किया जाए तो वे कुल 6,130 दिनों तक देश के प्रधानमंत्री रहे थे। लेकिन निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में लगातार कार्यकाल के मामले में मोदी अब उनसे आगे निकल गए हैं। गुजरात से दिल्ली तक का लंबा राजनीतिक सफर राष्ट्रीय राजनीति में आने से पहले नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था। लगभग 13 वर्षों तक राज्य का नेतृत्व करने के बाद वे 2014 में देश के प्रधानमंत्री बने। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में उनका कुल नेतृत्वकाल अब 8,931 दिनों तक पहुंच चुका है, जो भारत के किसी भी निर्वाचित सरकार प्रमुख के लिए एक नया रिकॉर्ड माना जा रहा है। मोदी के नाम पहले से कई बड़े रिकॉर्ड प्रधानमंत्री मोदी पहले भी कई राजनीतिक उपलब्धियां अपने नाम कर चुके हैं। वे: स्वतंत्र भारत के बाद जन्म लेने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं। पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने लगातार दो पूर्ण कार्यकाल पूरे किए। लगातार तीन लोकसभा चुनाव जीतकर सत्ता में लौटने वाले चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं। सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री दोनों पदों पर रहने वाले निर्वाचित नेताओं में से एक हैं। सोशल मीडिया पर भी मजबूत मौजूदगी राजनीतिक उपलब्धियों के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। यूट्यूब पर 3 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर। इंस्टाग्राम पर 10 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स वाले दुनिया के पहले कार्यरत राष्ट्र प्रमुख। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर 10 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स। 12 वर्षों के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियां आर्थिक क्षेत्र भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना। डिजिटल भुगतान प्रणाली UPI को वैश्विक पहचान मिली। निवेश और कारोबार को बढ़ावा देने के लिए कई सुधार लागू किए गए। जनकल्याण योजनाएं प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत करोड़ों बैंक खाते खुले। उज्ज्वला योजना के माध्यम से करोड़ों परिवारों को गैस कनेक्शन मिला। आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री आवास योजना का विस्तार हुआ। जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत अभियान को व्यापक स्तर पर लागू किया गया। बड़े राजनीतिक फैसले जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया। तीन तलाक कानून लागू किया गया। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पारित हुआ। नए संसद भवन का उद्घाटन किया गया। बुनियादी ढांचा और रक्षा वंदे भारत ट्रेनों की शुरुआत। एक्सप्रेसवे, हाईवे और एयरपोर्ट नेटवर्क का विस्तार। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर। राफेल लड़ाकू विमानों को भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया। वैश्विक मंच पर भारत G20 New Delhi Summit की सफल मेजबानी। International Solar Alliance को वैश्विक पहचान। ग्लोबल साउथ की आवाज के रूप में भारत की भूमिका मजबूत हुई। क्यों महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि? प्रधानमंत्री मोदी का 4,399 दिनों का लगातार निर्वाचित कार्यकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। यह उपलब्धि न केवल उनके लंबे राजनीतिक सफर को दर्शाती है, बल्कि लगातार तीन आम चुनावों में मिले जनादेश को भी रेखांकित करती है। भारत के राजनीतिक इतिहास में यह रिकॉर्ड अब एक नए मानक के रूप में दर्ज हो गया है।  

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कोलकाता, एजेंसियां। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी राजनीतिक घमासान के बीच मंगलवार को एक नया मोड़ सामने आया। फर्जी हस्ताक्षर विवाद की जांच के सिलसिले में CID की टीम मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पहुंची। हालांकि, पार्टी नेताओं ने अभिषेक बनर्जी की गैरमौजूदगी का हवाला देते हुए जांच टीम को परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी। CID अधिकारियों के साथ कालीघाट थाना पुलिस और बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मी भी मौजूद थीं। जांच एजेंसी उन आरोपों की पड़ताल कर रही है, जिनमें दावा किया गया है कि TMC विधायक दल से जुड़े एक प्रस्ताव पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे। क्या है पूरा विवाद? बागी विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि नेता विपक्ष बनाए जाने से संबंधित प्रस्ताव पर उनके हस्ताक्षर फर्जी तरीके से किए गए। आरोप सीधे अभिषेक बनर्जी के लेटरहेड से जुड़े दस्तावेजों पर लगाए गए हैं। इसी मामले की जांच के तहत CID लगातार सबूत जुटा रही है। पार्टी में बढ़ी अंदरूनी खींचतान इस विवाद ने TMC के भीतर चल रही गुटबाजी को भी उजागर कर दिया है। शिकायत करने वाले विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित किया जा चुका है। वहीं, ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता बनाए जाने के फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, जिसकी सुनवाई जल्द होने वाली है। राजनीतिक असर पर नजर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल फर्जी हस्ताक्षर तक सीमित नहीं है, बल्कि TMC के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर चल रही खींचतान का संकेत भी देता है। अब सबकी नजर CID जांच और अदालत की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है, जो इस मामले की दिशा तय कर सकती है।

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खान सर को फिलहाल राहत, कोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक; फायरिंग मामले में पुलिस से मांगी केस डायरी

  पटना: फायरिंग और हिंसा से जुड़े चर्चित मामले में खान ग्लोबल स्टडीज के संस्थापक खान सर को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। पटना सिविल कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने साथ ही पुलिस को मामले की केस डायरी पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अगली सुनवाई या अगले आदेश तक खान सर के खिलाफ कोई कठोर या दबावपूर्ण कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस आदेश के बाद फिलहाल उनकी गिरफ्तारी की आशंका टल गई है। हत्या की कोशिश और आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज है मामला खान सर ने सोमवार को जिला एवं सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। उनके खिलाफ हत्या की कोशिश और हथियारों के कथित अवैध इस्तेमाल से संबंधित मामला दर्ज किया गया है। एफआईआर के अनुसार, फायरिंग की घटना के दौरान मौजूद सुरक्षा गार्डों के बयान के आधार पर पुलिस ने खान सर को भी आरोपी बनाया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने गार्ड्स से कहा था, "तुम गोली चलाओ, बाकी मैं देख लूंगा।" खान सर और उनके समर्थक इन आरोपों को निराधार बता रहे हैं। जेल में बंद सुरक्षा गार्डों की जमानत पर भी नजर इसी मामले में गिरफ्तार किए गए खान सर के दो सुरक्षा गार्ड दीपक कुमार और तालेबर सिंह की जमानत याचिका पर भी अदालत में सुनवाई हुई। दोनों को 4 जून को गिरफ्तार किया गया था। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत के सामने अपनी दलीलें रखीं, जिसके बाद न्यायालय ने पुलिस से मामले से जुड़े सबूत प्रस्तुत करने को कहा। कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था और अब दोनों की जमानत पर फैसला आने की संभावना है। रौशन आनंद की जमानत पर भी आज फैसला संभव दूसरी ओर, खान सर की कोचिंग पर हमले के मामले में जेल में बंद ज्ञान बिंदु कोचिंग के निदेशक रौशन आनंद की जमानत याचिका पर भी आज फैसला आ सकता है। रौशन आनंद की गिरफ्तारी को लेकर उनके समर्थकों और छात्रों में नाराजगी देखी जा रही है। सोमवार को पटना में बड़ी संख्या में छात्रों ने कैंडल मार्च निकालकर उनकी रिहाई की मांग की। छात्रों ने निकाला कैंडल मार्च, लगाए समर्थन में नारे पटना की सड़कों पर निकले छात्रों ने रौशन आनंद के समर्थन में नारेबाजी की और उनकी रिहाई की मांग उठाई। कई छात्र हाथों में पोस्टर लिए दिखाई दिए, जिन पर "झूठे केस में हमारा जीवन मत बर्बाद करो" और "मैं निर्दोष हूं" जैसे संदेश लिखे थे। प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों ने खान सर की गिरफ्तारी की मांग भी की, जिससे यह विवाद अब छात्रों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है। पुलिस की भूमिका पर खान सर के बदले सुर घटना के बाद शुरुआती प्रतिक्रिया में पुलिस की सराहना करने वाले खान सर ने अब पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि घटना के समय पुलिस मौके पर देर से पहुंची थी। फायरिंग के वायरल वीडियो पर सफाई देते हुए खान सर ने कहा कि उस समय हालात बेहद तनावपूर्ण थे और उनके गार्ड्स ने आत्मरक्षा में गोली चलाई थी। उन्होंने कहा, "मुझे पता था कि पुलिस को पहुंचने में समय लगेगा। पुलिस उड़कर तो नहीं आ सकती। ऐसे में सुरक्षा गार्डों का काम लोगों की सुरक्षा करना होता है।" क्लासरूम में छात्रों को दिखाई घटना की कहानी विवाद के बीच खान सर का एक नया वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह छात्रों को कोचिंग परिसर में हुई घटना के बारे में जानकारी देते नजर आ रहे हैं। वीडियो में उन्होंने कथित तौर पर सीसीटीवी फुटेज दिखाते हुए दावा किया कि उनके एक सुरक्षा गार्ड को बेरहमी से पीटा गया था और इस मामले में मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई है। उन्होंने छात्रों से कहा कि मामले के मूल मुद्दे से ध्यान भटकाया जा रहा है और घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। "कोचिंग बंद हुई तो फीस बढ़ जाएगी" अपने संबोधन के दौरान खान सर ने कोचिंग फीस का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि यदि खान ग्लोबल स्टडीज जैसी संस्थाएं बंद हो गईं तो आने वाले महीनों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाली कई कोचिंग संस्थानों की फीस एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल व्यावसायिक लाभ कमाना नहीं, बल्कि छात्रों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। मामले पर टिकी सबकी निगाहें फायरिंग, कोचिंग संस्थानों के बीच विवाद और छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बीच यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। अब निगाहें अदालत के अगले आदेश, सुरक्षा गार्डों की जमानत और रौशन आनंद के मामले में आने वाले फैसले पर टिकी हैं, जो इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकते हैं।  

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