राजनीति

BJP Leaders Quit After Annamalai Exit

तमिलनाडु बीजेपी में बढ़ी टूट, अन्नामलाई के बाद उपाध्यक्ष और प्रदेश सचिव ने भी छोड़ी पार्टी

Deepshikha जून 6, 2026 0
Former Tamil Nadu BJP leaders resign and join Annamalai’s new political movement in Chennai
Tamil Nadu BJP Resignations After Annamalai Exit

 

चेन्नई: तमिलनाडु भाजपा में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई के इस्तीफे के बाद पार्टी में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। शुक्रवार को भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष कारू नागराजन और राज्य सचिव सुमति वेंकटेश ने भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। दोनों नेताओं के फैसले ने राज्य इकाई में राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है।

अन्नामलाई के नए अभियान के साथ जुड़े कारू नागराजन

भाजपा छोड़ने के बाद कारू नागराजन ने स्पष्ट किया कि वह अन्नामलाई के नए राजनीतिक अभियान का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि अपने समर्थकों के साथ विचार-विमर्श के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया है।

मीडिया से बातचीत में नागराजन ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी नेता या पार्टी की आलोचना करना नहीं है, बल्कि वे अन्नामलाई की कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता से प्रभावित हैं। उनके अनुसार, अन्नामलाई एक ऊर्जावान और जनसरोकारों से जुड़े नेता हैं, जिनके साथ मिलकर वे काम करना चाहते हैं।

प्रदेश सचिव सुमति वेंकटेश ने भी दिया इस्तीफा

अन्नामलाई के इस्तीफे के कुछ ही समय बाद तमिलनाडु भाजपा की प्रदेश सचिव सुमति वेंकटेश ने भी पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना इस्तीफा साझा करते हुए प्राथमिक सदस्यता समाप्त करने की जानकारी दी।

उनके इस्तीफे को भी राज्य भाजपा में बढ़ते असंतोष और अन्नामलाई के प्रति समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।

युवा मोर्चा के नेता ने भी छोड़ा साथ

भाजपा युवा मोर्चा की तमिलनाडु इकाई के कानूनी संयोजक अभिलाष गोपीनाथ ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। अपने त्यागपत्र में उन्होंने कहा कि अन्नामलाई के नेतृत्व, ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन के प्रति समर्पण ने उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया था।

उन्होंने कहा कि भविष्य में भी वे अन्नामलाई के राजनीतिक विजन और विचारों का समर्थन करते रहेंगे।

नई राजनीति का दावा कर रहे हैं अन्नामलाई

पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने भाजपा छोड़ने के बाद एक नए राजनीतिक आंदोलन की घोषणा की है। उनका कहना है कि यह पहल व्यक्ति-पूजा, चाटुकारिता और वंशवादी राजनीति से अलग आम लोगों की राजनीति को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है।

सोशल मीडिया पर जारी संदेश में उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के इर्द-गिर्द नहीं, बल्कि विचार और सामाजिक परिवर्तन पर आधारित होगा। उन्होंने अपने अभियान का मूल मंत्र “मारुवोम, मातृवोम” (खुद को बदलें, बदलाव लाएं) बताया।

किसी दल से टकराव नहीं, वैकल्पिक राजनीति पर जोर

अन्नामलाई ने स्पष्ट किया है कि उनका नया राजनीतिक अभियान किसी मौजूदा राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी दलों को अपने विचार रखने का अधिकार है और उनका उद्देश्य केवल जनता के सामने एक वैकल्पिक राजनीतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है।

उन्होंने कहा कि उचित समय आने पर आंदोलन की नीतियों और कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

वेबसाइट लॉन्च होते ही हजारों समर्थक जुड़े

अपने नए राजनीतिक अभियान को संगठित करने के लिए अन्नामलाई ने एक विशेष वेबसाइट भी लॉन्च की है। उनके अनुसार, वेबसाइट शुरू होने के कुछ ही घंटों के भीतर लगभग 8.9 लाख लोगों ने स्वयंसेवक के रूप में पंजीकरण कराया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा से लगातार हो रहे इस्तीफे और अन्नामलाई के नए अभियान को मिल रहा शुरुआती समर्थन तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत हो सकता है।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

राजनीति

View more
Sudivya Kumar Sonu
एसआईआर के मुद्दे पर झामुमो का भाजपा पर हमला, सुदिव्य बोले- जनता को किया जा रहा गुमराह

गिरिडीह। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की गिरिडीह जिला कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक बुधवार को शहर के उत्सव उपवन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष संजय सिंह ने की। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान और मतदाता सूची सत्यापन को लेकर पार्टी की रणनीति तय करने के उद्देश्य से आयोजित इस बैठक में बड़ी संख्या में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। बैठक में झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू मुख्य रूप से उपस्थित रहे।   भाजपा पर जनता को गुमराह करने का आरोप बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने भाजपा पर एसआईआर के नाम पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाने की साजिश रची जा रही है, इसलिए झामुमो कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर तक सक्रिय होने और गांव-गांव, घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने का आह्वान किया। सोनू ने कहा कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं कटना चाहिए। इसके लिए कार्यकर्ताओं को सतर्क रहकर लोगों को मतदाता सूची के महत्व और सत्यापन प्रक्रिया की जानकारी देनी होगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए हर नागरिक का मतदान अधिकार सुरक्षित रहना जरूरी है।   शिविर लगाकर लोगों की मदद करने का निर्देश मंत्री ने सभी प्रखंड अध्यक्षों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में विशेष शिविर आयोजित करें और लोगों को आवश्यक फॉर्म भरने में सहायता प्रदान करें। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान होने वाली हर गतिविधि पर नजर रखी जाए और लोगों को भ्रमित करने की किसी भी कोशिश का तथ्यों के आधार पर जवाब दिया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम बने रहें, इसके लिए जमीनी स्तर पर सक्रियता और जागरूकता अभियान चलाना आवश्यक है।   गरीबों और आदिवासियों का नाम नहीं कटने देंगे : संजय सिंह जिला अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि झामुमो कार्यकर्ता घर-घर जाकर मतदाता सूची का सत्यापन करेंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी गरीब, आदिवासी और जरूरतमंद व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रत्येक बूथ पर निगरानी और सतर्कता जरूरी है।   14 जून को होगा कार्यकर्ता सम्मेलन बैठक में 14 जून को एक बड़े कार्यकर्ता सम्मेलन के आयोजन का निर्णय भी लिया गया। इस सम्मेलन में गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन मुख्य रूप से शामिल होंगी। वह कार्यकर्ताओं को पार्टी की नीतियों, संगठनात्मक मजबूती और आगामी चुनावी रणनीति को लेकर मार्गदर्शन देंगी। इसके अलावा बूथ लेवल एजेंटों को प्रशिक्षण देने तथा एसआईआर के दौरान फर्जी दावों और आपत्तियों पर विशेष नजर रखने की योजना भी बनाई गई। पार्टी ने इसे संगठन को मजबूत करने और मतदाता अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।

abhishek singh जून 10, 2026 0
TMC Sushmita Dev Himanta Bishwa Sharma

टीएमसी को एक और झटका, राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने दिया इस्तीफा

TMC MP Shatabdi Roy amid speculation over internal party differences and political developments in West Bengal.

शताब्दी रॉय के बागी खेमे में शामिल होने के दावों से बंगाल की राजनीति में हलचल, टीएमसी और विपक्ष आमने-सामने

Justice Markandey Katju and Mahua Moitra amid social media debate over the reported Ishq Karo Party.

महुआ मोइत्रा को ‘इश्क करो पार्टी’ में शामिल होने का ऑफर? जस्टिस काटजू और TMC सांसद को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

Mamata Banerjee and Abhishek Banerjee during Delhi visit amid speculation over dissent within TMC ranks.
दिल्ली दौरे में ममता बनर्जी को झटका! बागी सांसदों की दूरी से बढ़ीं टीएमसी की मुश्किलें

  नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी के हालिया दिल्ली दौरे ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और असंतोष की अटकलों को और हवा दे दी है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के कुछ असंतुष्ट सांसदों ने नेतृत्व से दूरी बना ली है, जिससे टीएमसी की राष्ट्रीय राजनीति में स्थिति को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं. सांसदों से संपर्क की कोशिशों को नहीं मिला अपेक्षित समर्थन सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पहुंचने के बाद ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कई सांसदों से संपर्क साधने की कोशिश की. कई सांसदों से संपर्क नहीं हो सका. बताया जा रहा है कि कुछ सांसदों के फोन बंद थे, जबकि कुछ ने बातचीत से परहेज किया. राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह घटनाक्रम पार्टी नेतृत्व के लिए चिंता का विषय हो सकता है, खासकर ऐसे समय में जब टीएमसी को संगठनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. बागी खेमे की गतिविधियों पर बनी हुई है नजर टीएमसी के भीतर असंतोष को लेकर चर्चाएं पहले से चल रही थीं. अब खबरें हैं कि कुछ सांसद अलग रणनीति पर काम कर रहे हैं. पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर किसी बड़े विभाजन की पुष्टि नहीं की गई है. सूत्रों का दावा है कि असंतुष्ट नेताओं के बीच लगातार बैठकें हो रही हैं और भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर विचार-विमर्श जारी है. अभिषेक बनर्जी ने संभाला मोर्चा दिल्ली प्रवास के दौरान ममता बनर्जी अपने भतीजे और टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी के आवास पर ठहरीं. बताया जा रहा है कि अभिषेक ने पार्टी के असंतुष्ट नेताओं को मनाने और संवाद कायम रखने की कोशिश की. सूत्रों के मुताबिक अब तक इन प्रयासों को बड़ी सफलता नहीं मिली है. पार्टी नेतृत्व लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और संगठनात्मक एकता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है. विपक्षी राजनीति में टीएमसी की भूमिका पर उठे सवाल पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय तक मजबूत स्थिति रखने वाली टीएमसी के सामने मौजूदा परिस्थितियां नई चुनौती बनकर उभरी हैं. INDIA गठबंधन की राजनीति और राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता के बीच पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति आने वाले दिनों में टीएमसी की रणनीति को प्रभावित कर सकती है. फिलहाल पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है.  

Deepshikha जून 10, 2026 0
BJP leader Kailash Vijayvargiya speaks on Meenakshi Natarajan nomination controversy before Rajya Sabha polls.

कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा बयान: “हमें कांग्रेस के लोगों ने ही दी जानकारी”, मीनाक्षी नटराजन नामांकन रद्द पर बढ़ा सियासी विवाद

Congress leader Meenakshi Natarajan reacts after Rajya Sabha nomination rejection amid political controversy.

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, कांग्रेस का आरोप—‘सीट चोरी’; चुनाव आयोग दफ्तर के बाहर हंगामा, सियासत गरमाई

TMC MP Kakoli Ghosh Dastidar speaks amid claims of MPs backing the NDA in Parliament.

टीएमसी में सियासी हलचल तेज, काकोली घोष दस्तीदार का दावा- 20 सांसदों ने NDA को समर्थन देने का लिया फैसला

TMC leaders and legal representatives amid Calcutta High Court challenge over opposition leader recognition.
टीएमसी का हाईकोर्ट रुख, रीतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष मान्यता देने के फैसले को दी चुनौती

  पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की अंदरूनी खींचतान अब अदालत तक पहुंच गई है। पार्टी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें बागी नेता रीतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी गई थी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति कृष्णा राव की अदालत में होगी। कोर्ट ने इस याचिका को प्राथमिकता के आधार पर सूचीबद्ध करते हुए 11 जून को विस्तृत सुनवाई की तारीख तय की है। विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर कानूनी आपत्ति टीएमसी की ओर से दायर याचिका में विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय को चुनौती दी गई है। पार्टी का तर्क है कि नेता प्रतिपक्ष की मान्यता से जुड़ा फैसला पार्टी की आधिकारिक स्थिति और संगठनात्मक निर्णयों के अनुरूप नहीं है। याचिका में विधानसभा अध्यक्ष को मुख्य प्रतिवादी बनाया गया है। पार्टी का कहना है कि अध्यक्ष के फैसले के कारण विधानसभा के भीतर संवैधानिक और राजनीतिक विवाद पैदा हुआ है। बागी गुट के समर्थन से बढ़ा विवाद विवाद की जड़ टीएमसी विधायकों के भीतर उभरा मतभेद है। विधानसभा चुनाव 2026 के बाद विपक्ष की भूमिका में पहुंची टीएमसी के 80 विधायकों में से बड़ी संख्या ने कथित तौर पर रीतब्रत बनर्जी के समर्थन में रुख अपनाया। इसी समर्थन के आधार पर विधानसभा अध्यक्ष ने रीतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता प्रदान की थी। पार्टी नेतृत्व इस फैसले को चुनौती दे रहा है और आधिकारिक उम्मीदवार के पक्ष में अपनी दलील रख रहा है। नेता प्रतिपक्ष पद को लेकर बढ़ी राजनीतिक लड़ाई टीएमसी नेतृत्व का दावा है कि पार्टी के संगठनात्मक निर्णयों की अनदेखी कर नेता प्रतिपक्ष के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। वहीं बागी गुट का तर्क है कि उन्हें पर्याप्त विधायकों का समर्थन प्राप्त है और इसी आधार पर उन्हें मान्यता मिली है। इस विवाद ने विधानसभा के भीतर विपक्ष की भूमिका और टीएमसी के आंतरिक नेतृत्व को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। विधानसभा में बदला राजनीतिक समीकरण 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर सरकार बनाई, जबकि टीएमसी मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी। चुनाव परिणामों के बाद पार्टी के भीतर उभरे मतभेदों ने उसके सामने नई राजनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। अब सभी की निगाहें 11 जून को होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत का फैसला न केवल नेता प्रतिपक्ष के पद की वैधता तय करेगा, बल्कि राज्य की विपक्षी राजनीति और टीएमसी के आंतरिक शक्ति संतुलन पर भी असर डाल सकता है।  

Deepshikha जून 9, 2026 0
TMC MP Mahua Moitra speaks amid controversy over party loyalty and internal political differences.

टीएमसी में बढ़ी अंदरूनी कलह, महुआ मोइत्रा ने यूसुफ पठान और बागी सांसदों पर साधा निशाना

INDIA alliance leaders discuss opposition unity and strategy during a high-level meeting in New Delhi.

INDIA गठबंधन बैठक में दिखी एकजुटता, लेकिन उभरे पुराने मतभेद; 2029 की तैयारी पर भी हुआ मंथन

INDIA alliance leaders meet in New Delhi to discuss opposition strategy and key national issues.

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से चुनावी पारदर्शिता तक: केंद्र सरकार को घेरने के लिए INDIA गठबंधन की नई रणनीति

0 Comments

Top week

Jamshid Ghomi accused of exporting sensitive US technology to Iran in sanctions case
दुनिया

अमेरिका में ईरान कनेक्शन का खुलासा, प्रतिबंधित टेक्नोलॉजी सप्लाई के आरोप में CEO गिरफ्तार

Deepshikha जून 4, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?