राजनीति

27 Lakh Bengal Voters Await Poll Verdict

West Bengal Chunav 2026: 27 लाख वोटरों का आज होगा फैसला, ‘ग्रीन सिग्नल’ या मायूसी-सप्लीमेंट्री लिस्ट पर टिकी निगाहें

surbhi मार्च 23, 2026 0
Voter finger with ink mark over West Bengal map highlighting 2026 election voter list decision
West Bengal Election 2026 Voter Decision

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले आज का दिन राज्य के करीब 27.2 लाख मतदाताओं के लिए बेहद अहम है। ये वे लोग हैं, जिनका नाम ‘अंडर एडजुडिकेशन’ श्रेणी में रखा गया था और जिनका मतदान अधिकार अब चुनाव आयोग की पहली सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट के जरिए तय होगा।

दरअसल, ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न’ (SIR) के दौरान राज्य के लगभग 60 लाख मतदाताओं को इस श्रेणी में रखा गया था। यानी इन मतदाताओं के दस्तावेज़ों और पात्रता पर अंतिम निर्णय अभी लंबित था। अब जारी होने वाली पहली सप्लीमेंट्री लिस्ट से इनमें से करीब आधे लोगों की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी कि वे आगामी चुनाव में वोट डाल सकेंगे या नहीं।

8.6% वोटरों का भविष्य अधर में

28 फरवरी को जारी अंतिम मतदाता सूची में राज्य के करीब 7 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 8.6% यानी 60 लाख लोगों की स्थिति स्पष्ट नहीं थी। यही वजह है कि लाखों परिवारों में असमंजस और चिंता का माहौल है।

चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, जिन मतदाताओं के दस्तावेज़ों में विसंगतियां पाई गईं या सुनवाई के दौरान संतोषजनक प्रमाण नहीं दिए गए, उन्हें ‘अंडर एडजुडिकेशन’ में रखा गया।

तीन चरणों में आएगी सप्लीमेंट्री लिस्ट

  • पहली सूची: 23 मार्च
  • दूसरी सूची: अगले शुक्रवार
  • तीसरी सूची: 3 अप्रैल

पहली सूची जारी होने के बाद 27.2 लाख लोगों को अपने मतदान अधिकार की स्थिति का पता चल जाएगा, जबकि बाकी लोगों को अभी और इंतजार करना होगा।

नाम नहीं आया तो क्या विकल्प?

यदि किसी मतदाता का नाम सप्लीमेंट्री सूची में शामिल नहीं होता है, तो उसके पास अपील का विकल्प मौजूद रहेगा। वे:

  • ECINET ऐप के माध्यम से ऑनलाइन अपील कर सकते हैं
  • जिला मजिस्ट्रेट या उप-विभागीय अधिकारी के समक्ष आवेदन दे सकते हैं

इसके लिए चुनाव आयोग ने 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल का गठन किया है।

जमीनी स्तर पर बेचैनी और उम्मीद

भवानीपुर की शिखा दास, जो पिछले चार दशकों से मतदान करती आ रही हैं, इस बार अपने नाम को लेकर अनिश्चितता में हैं। उनके परिवार के अन्य सदस्यों के नाम सूची में हैं, लेकिन उनका नाम रोका गया है।

वहीं अलीपुर के सौरव चक्रवर्ती और कैनिंग के अकरमुल हक सरदार जैसे कई मतदाता अपने दस्तावेजों के आधार पर आश्वस्त हैं, लेकिन अंतिम सूची का इंतजार उन्हें बेचैन कर रहा है।

प्रशासन अलर्ट मोड में

राज्य सरकार ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि सूची जारी होने के बाद किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित, अनुज अग्निहोत्री बने टॉपर, 958 उम्मीदवार सफल

UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)   भारतीय पुलिस सेवा (IPS)   भारतीय विदेश सेवा (IFS)   भारतीय राजस्व सेवा (IRS)   भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं   979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं   होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें   “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं   Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें   मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी   Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें   15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98   EWS: 85.92   OBC: 87.28   SC: 79.03   ST: 74.23   आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज

राजनीति

View more
Women Reservation Bill Amendment India Politics
महिला आरक्षण बिल में बड़ा संशोधन: किसे मिलेगा फायदा? सरकार vs विपक्ष में बढ़ी सियासी टकराहट

केंद्र सरकार ने 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाकर एक बड़ा राजनीतिक और संवैधानिक कदम उठाने की तैयारी की है। इस सत्र में नारी वंदन अधिनियम, 2023 यानी महिला आरक्षण कानून में संशोधन प्रस्ताव लाया जा सकता है। इस प्रस्ताव को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है और सरकार व विपक्ष आमने-सामने हैं। क्या है सरकार का प्रस्ताव? सूत्रों के मुताबिक, सरकार महिला आरक्षण कानून में दो बड़े बदलाव करने पर विचार कर रही है: परिसीमन (Delimitation) के लिए नई जनगणना की बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाना लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों की संख्या में लगभग 50% तक बढ़ोतरी अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो: उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटें 80 से बढ़कर 120 हो सकती हैं बिहार में 40 से 60 तमिलनाडु में 39 से 58 इस तरह कुल लोकसभा सीटें 543 से बढ़कर करीब 816 तक पहुंच सकती हैं, जिनमें लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। सरकार का क्या कहना है? केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने स्पष्ट किया है कि इस संशोधन को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य महिला प्रतिनिधित्व को तेजी से लागू करना और प्रक्रिया को सरल बनाना है, ताकि 2029 तक इसे लागू किया जा सके। विपक्ष क्यों कर रहा विरोध? विपक्ष इस कदम को चुनावी रणनीति बता रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार महिला वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है राजीव शुक्ला ने इसे चुनावी लाभ के लिए उठाया गया कदम बताया कांग्रेस का दावा है कि महिला आरक्षण की पहल पहले उसी ने की थी OBC महिलाओं के आरक्षण की मांग समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल ने इस मुद्दे को और आगे बढ़ाते हुए OBC महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग उठाई है। उनका कहना है कि: केवल सामान्य महिला आरक्षण पर्याप्त नहीं है पिछड़ी जातियों की महिलाओं को अलग से प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए क्या है असली सियासी गणित? विशेषज्ञों के अनुसार, यह संशोधन कई स्तरों पर असर डाल सकता है: महिला वोट बैंक को प्रभावित करेगा राज्यों में सीटों के पुनर्वितरण से राजनीतिक समीकरण बदलेंगे 2029 चुनाव से पहले बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है पास होने में क्या है चुनौती? चूंकि यह एक संवैधानिक संशोधन है, इसलिए इसे संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। हालांकि कोई भी पार्टी खुले तौर पर महिला आरक्षण का विरोध नहीं कर रही, लेकिन: परिसीमन के आधार OBC आरक्षण समय और मंशा इन मुद्दों पर तीखी बहस तय मानी जा रही है। निष्कर्ष महिला आरक्षण बिल में प्रस्तावित संशोधन सिर्फ एक कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक बदलाव साबित हो सकता है। जहां सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी रणनीति करार दे रहा है।  

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
Ashok Mittal appointed new Deputy Leader of AAP in Rajya Sabha replacing Raghav Chadha

AAP का बड़ा फैसला: राज्यसभा में राघव चड्ढा से उपनेता पद छीना, अशोक मित्तल बने नए उपनेता

Pappu Yadav speaking on Mamata Banerjee during Bengal Elections 2026 political debate

बंगाल चुनाव 2026: ममता बनर्जी पर पप्पू यादव का बड़ा बयान, BJP पर साधा निशाना

Amit Shah roadshow in Bhowanipore Kolkata during Bengal elections with large crowd and BJP supporters

बंगाल चुनाव: भवानीपुर में अमित शाह का रोड शो, बोले-‘ममता को उनके घर में हराना है

Priyanka Gandhi attacks BJP in Assam rally as H.S. Phoolka joins BJP amid 2026 state elections.
Assembly Elections 2026 Live: प्रियंका गांधी का BJP पर बड़ा हमला, फूलका भाजपा में शामिल

पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुदुचेरी में चल रहे विधानसभा चुनावों के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनावी रैलियों से लेकर दल-बदल तक, कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। प्रियंका गांधी का हमला कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने असम के शिवसागर में रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और असम के मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “मोदी जी अमेरिका के गुलाम हैं… और असम के मुख्यमंत्री उनके गुलाम हैं।” प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार डर और दबाव की राजनीति कर रही है और इससे देश को नुकसान हो रहा है।   ओवैसी का मुर्शिदाबाद में बयान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में सभा को संबोधित करते हुए कहा कि:   अगर जनता का अपना नेता नहीं होगा, तो उनकी आवाज दबा दी जाएगी ममता बनर्जी और मोदी सरकार पर एक जैसी राजनीति करने का आरोप लगाया   उन्होंने लोगों से अपनी “स्वतंत्र लीडरशिप” चुनने की अपील की।   बड़ा राजनीतिक बदलाव   वरिष्ठ वकील और आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता एच. एस. फूलका बुधवार को भाजपा में शामिल हो गए। फूलका 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के केस लड़ने के लिए जाने जाते हैं 2014 में AAP में शामिल हुए थे, 2019 में पार्टी छोड़ दी थी   महाराष्ट्र उपचुनाव अपडेट   भाजपा ने महाराष्ट्र के राहुरी विधानसभा उपचुनाव के लिए अक्षय शिवाजीराव कर्डिले को उम्मीदवार घोषित किया है   अहम तारीखें:   नामांकन की अंतिम तारीख:6 अप्रैल जांच:7 अप्रैल नाम वापसी:9 अप्रैल मतदान: 23 अप्रैल मतगणना: 4 मई   यह सीट ग्रामीण और कृषि प्रधान है, जहां मराठा, ओबीसी, दलित और मुस्लिम वोटर अहम भूमिका निभाते हैं।   चुनावी माहौल गरम   देश के पांच राज्यों में चुनाव के बीच:   नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज दल-बदल की राजनीति जारी क्षेत्रीय मुद्दों के साथ राष्ट्रीय मुद्दे भी हावी  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Nishikant Dubey apologizing on social media for his controversial remarks on Biju Patnaik.

निशिकांत दुबे ने मांगी माफी, बोले- बीजू पटनायक महान नेता, बयान को गलत समझा गया

शुभेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी के बीच चुनावी मुकाबले का दृश्य

बंगाल चुनाव : शुभेंदु अधिकारी दो अप्रैल को भरेंगे नामांकन, चुनाव आयोग ने बीडीओ पर की बड़ी कार्रवाई

PM Modi addressing rallies in Assam ahead of 2026 Assembly elections, NDA claims hat-trick

असम विधानसभा चुनाव 2026: असम में NDA की हैट्रिक का दावा, पीएम मोदी का कांग्रेस पर निशाना; ‘विकसित भारत’ पर फोकस

Leander Paes joining BJP with party leaders during press conference ahead of Bengal elections
बंगाल चुनाव से पहले बड़ा दांव: टेनिस स्टार लिएंडर पेस BJP में शामिल

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राजनीति में एक बड़ा और दिलचस्प मोड़ देखने को मिला है। भारत के दिग्गज टेनिस खिलाड़ी Leander Paes ने औपचारिक रूप से Bharatiya Janata Party (BJP) का दामन थाम लिया है। उनकी एंट्री ऐसे समय पर हुई है जब राज्य में चुनावी माहौल तेजी से गरमा रहा है और सभी पार्टियां अपने-अपने स्तर पर रणनीति को धार दे रही हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुआ औपचारिक स्वागत Leander Paes को पार्टी में शामिल करने के लिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju और भाजपा नेता Sukanta Majumdar मौजूद रहे। Kiren Rijiju ने पेस की उपलब्धियों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भारत को अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर पहचान दिलाई और अब वे राजनीति के जरिए देश की सेवा करेंगे। “अब देश और युवाओं की सेवा का समय” BJP में शामिल होने के बाद Leander Paes ने भावुक अंदाज में कहा कि उन्होंने पिछले 40 वर्षों में खेल के जरिए देश का प्रतिनिधित्व किया है और अब वे युवाओं और देश की सेवा के लिए राजनीति में कदम रख रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi, गृह मंत्री Amit Shah और पार्टी नेतृत्व का आभार भी जताया। खेल से राजनीति तक का सफर Leander Paes भारत के सबसे सफल टेनिस खिलाड़ियों में से एक रहे हैं: 1996 बार्सिलोना ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल डेविस कप और ग्रैंड स्लैम में शानदार प्रदर्शन विंबलडन समेत कई अंतरराष्ट्रीय खिताब उनकी लोकप्रियता और पहचान को देखते हुए BJP को उम्मीद है कि यह कदम खासकर युवाओं और शहरी वोटर्स के बीच असर डाल सकता है। चुनावी समीकरण पर क्या असर? Leander Paes की एंट्री को BJP के लिए एक “स्टार पावर” रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। इससे पार्टी की छवि को मजबूती मिल सकती है युवा मतदाताओं को आकर्षित करने में मदद मिल सकती है विपक्ष पर मनोवैज्ञानिक दबाव भी बन सकता है हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी लोकप्रियता वोट में कितनी तब्दील होती है। निष्कर्ष पश्चिम बंगाल की राजनीति में Leander Paes की एंट्री ने चुनावी मुकाबले को और रोमांचक बना दिया है। खेल के मैदान से राजनीति के मैदान तक उनका यह सफर BJP के लिए कितना फायदेमंद साबित होगा, इसका जवाब आने वाले चुनावी नतीजे ही देंगे।  

surbhi मार्च 31, 2026 0
Tamil Nadu election 2026 battle between DMK AIADMK with Vijay TVK influencing voters

तमिलनाडु चुनाव 2026: कांटे की टक्कर में DMK या AIADMK? विजय की TVK बनेगी गेम चेंजर या सिर्फ वोट कटवा

Amit Shah delivering a powerful speech in Lok Sabha targeting opposition over Naxalism issue

लोकसभा में 90 मिनट का सियासी प्रहार: अमित शाह ने नक्सलवाद पर विपक्ष को घेरा

Political leaders reacting to Nishikant Dubey’s controversial statement on Biju Patnaik sparking protests in Odisha

निशिकांत दुबे के बयान पर सियासी बवाल: बीजू पटनायक को लेकर टिप्पणी से ओडिशा में मचा घमासान

0 Comments

Top week

Crowd chaos at Nalanda Sheetla Temple during religious event causing stampede-like situation and casualties
बिहार

नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?