West Bengal election 2026

Suvendu Adhikari addressing BJP workers in Nandigram after Bengal election victory in 2026
ममता के गढ़ में जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी का बड़ा दावा, बोले- BJP का वोट शेयर 60% तक ले जाएंगे

Suvendu Adhikari Mission 60 Percent Vote: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने पार्टी के भविष्य को लेकर बड़ा दावा किया है. नंदीग्राम में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि भाजपा आने वाले समय में बंगाल में अपना वोट शेयर 46 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत तक ले जायेगी. बंगाल में विकास की राजनीति का दावा शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में अब विकास की राजनीति को नई गति मिलेगी. उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य में ऐसा विकास होगा कि भाजपा का जनाधार तेजी से बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि इस विधानसभा चुनाव में भाजपा को करीब 46 प्रतिशत वोट मिले हैं और आने वाले वर्षों में यह समर्थन 60 प्रतिशत के पार पहुंच सकता है. शुभेंदु ने इसे भाजपा के “दीर्घकालिक राजनीतिक मिशन” का हिस्सा बताया. 10 दिन में छोड़ेंगे एक सीट भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों सीटों से जीत दर्ज करने के बाद अब शुभेंदु अधिकारी को नियम के मुताबिक एक सीट छोड़नी होगी. इस पर उन्होंने कहा कि वे अगले 10 दिनों के भीतर एक सीट से इस्तीफा दे देंगे. उन्होंने कहा कि किस सीट को बरकरार रखा जायेगा, इसका फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा. शुभेंदु ने कहा कि वे दोनों क्षेत्रों की जनता के आभारी हैं और किसी भी क्षेत्र की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेंगे. “2011 के परिवर्तन का हिस्सा था, अब असली परिवर्तन होगा” अपने संबोधन में शुभेंदु अधिकारी ने 2011 के राजनीतिक बदलाव का भी जिक्र किया, जब उन्होंने ममता बनर्जी के साथ मिलकर वाममोर्चा सरकार को सत्ता से बाहर करने में अहम भूमिका निभायी थी. उन्होंने कहा कि वह 2011 के परिवर्तन का हिस्सा थे, लेकिन अब बंगाल में “वास्तविक परिवर्तन” का दौर शुरू होगा. शुभेंदु ने दावा किया कि भाजपा ऐसा काम करेगी कि राज्य में पार्टी की सरकार “100 साल तक” बनी रहे. कार्यकर्ताओं से शांति बनाये रखने की अपील भाजपा नेता ने पार्टी कार्यकर्ताओं से फिलहाल विजय जुलूस और उत्सव से दूरी बनाये रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि 9 मई को नई सरकार के शपथ ग्रहण के बाद ही आधिकारिक रूप से जश्न मनाया जाये. उन्होंने कार्यकर्ताओं से अनुशासन और शांति बनाये रखने को कहा. साथ ही टीएमसी शासन के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं पर हुए कथित हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जायेगी. नंदीग्राम में पूजा और शहीद कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना भी की. इसके अलावा उन्होंने चुनावी हिंसा में मारे गये भाजपा कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद राज्य के हर वर्ग और क्षेत्र तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाया जायेगा. शुभेंदु के “मिशन-60” बयान के बाद बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू हो गयी है और विपक्षी दलों में हलचल बढ़ गयी है.  

surbhi मई 7, 2026 0
Mamata Banerjee campaigns in West Bengal amid tough electoral battle to retain power
ममता बनर्जी के लिए सत्ता की राह सबसे कठिन? ‘नबान्न’ बचाने की जंग में 5 बड़े फैक्टर बने चुनौती

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से पहले राज्य की राजनीति अपने चरम पर है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ममता बनर्जी चौथी बार सत्ता में वापसी कर पाएंगी या इस बार बदलाव की हवा ‘नबान्न’ तक पहुंच जाएगी। करीब 15 वर्षों से सत्ता में काबिज तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सामने इस बार बहुस्तरीय चुनौतियां खड़ी हैं, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती हैं। 1. भ्रष्टाचार के आरोप: छवि पर गहरा असर इस चुनाव में टीएमसी सरकार के खिलाफ सबसे बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार रहा है। शिक्षक भर्ती घोटाला राशन घोटाला कोयला तस्करी मामला इन मामलों में पार्टी के कई बड़े नेताओं की गिरफ्तारी और प्रवर्तन निदेशालय (ED) व केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की लगातार कार्रवाई ने सरकार की साख को चोट पहुंचाई है। विपक्ष ने इसे “सिस्टमेटिक करप्शन” बताकर जनता के बीच मजबूत नैरेटिव बनाया है। ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है। 2. महिला सुरक्षा और संदेशखाली जैसे विवाद महिला वोट बैंक टीएमसी की सबसे बड़ी ताकत रहा है, लेकिन हालिया घटनाओं ने इस आधार को कमजोर करने की कोशिश की है। संदेशखाली विवाद आरजी कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े आरोप इन घटनाओं ने कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाकर टीएमसी पर तीखा हमला बोला है। 3. एंटी-इन्कम्बेंसी: 15 साल की सत्ता का असर लगातार तीन कार्यकाल तक सत्ता में रहने के बाद एंटी-इन्कम्बेंसी का असर साफ दिखाई दे रहा है। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की दबंगई के आरोप ‘सिंडिकेट राज’ की शिकायतें स्थानीय प्रशासन पर भ्रष्टाचार के आरोप हालांकि, राज्य सरकार की योजनाएं–जैसे महिला और गरीब वर्ग के लिए आर्थिक सहायता–अब भी लोकप्रिय हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर असंतोष चुनावी समीकरण बदल सकता है। 4. भाजपा का उभार और बदला राजनीतिक संतुलन पश्चिम बंगाल की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का तेजी से उभार टीएमसी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। 2011 में मामूली मौजूदगी 2021 में 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्ष बूथ स्तर तक मजबूत संगठन उत्तर बंगाल, जंगलमहल और सीमावर्ती क्षेत्रों में भाजपा की पकड़ मजबूत हुई है। धार्मिक ध्रुवीकरण और हिंदुत्व की राजनीति ने पारंपरिक वोट बैंक को प्रभावित किया है, जिससे मुकाबला और कड़ा हो गया है। 5. युवाओं की नाराजगी और रोजगार संकट भर्ती घोटालों और सीमित रोजगार अवसरों ने युवाओं में निराशा पैदा की है। सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता पर सवाल निजी क्षेत्र में सीमित अवसर औद्योगिक विकास की धीमी रफ्तार हालांकि ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाएं गरीब और महिला मतदाताओं को जोड़ने में सफल रही हैं, लेकिन शिक्षित युवा वर्ग बदलाव की तलाश में नजर आ रहा है। ममता बनर्जी का ‘फाइटर’ फैक्टर इन तमाम चुनौतियों के बावजूद ममता बनर्जी की सबसे बड़ी ताकत उनकी व्यक्तिगत छवि और जमीनी पकड़ है। संघर्षशील नेता की पहचान सीधे जनता से संवाद कल्याणकारी योजनाओं का व्यापक असर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी आखिरी समय में चुनावी बाजी पलटने की क्षमता रखती हैं। 4 मई का फैसला तय करेगा भविष्य अब नजरें 4 मई पर टिकी हैं, जब चुनावी नतीजे सामने आएंगे। क्या ‘दीदी’ एक बार फिर सत्ता बचा लेंगी? या बंगाल में सत्ता परिवर्तन का नया अध्याय शुरू होगा?

surbhi मई 2, 2026 0
CAPF personnel guard West Bengal counting centre with strict QR code entry security
बंगाल काउंटिंग डे पर अभेद सुरक्षा घेरा: 700 CAPF कंपनियां तैनात, QR कोड के बिना एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना (4 मई) को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर कड़ी कर दी गई है। राज्य में अक्सर चुनाव के बाद होने वाली हिंसा को ध्यान में रखते हुए इस बार भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने पहले से ही व्यापक रणनीति तैयार कर ली है। “राज्य के हर कोने में कानून का राज रहेगा” चुनाव आयोग और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी प्रकार की हिंसा, उपद्रव या अवैध गतिविधि को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग ने कहा है कि मतगणना के दौरान और उसके बाद भी पूरे राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। 700 CAPF कंपनियों की तैनाती, मल्टी-लेयर सिक्योरिटी सुरक्षा के मद्देनजर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की करीब 700 कंपनियों को राज्यभर में तैनात किया जा रहा है। यह तैनाती सिर्फ काउंटिंग डे तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि नतीजों के बाद भी संवेदनशील इलाकों में बलों की मौजूदगी बनी रहेगी। सुरक्षा व्यवस्था को तीन स्तरों में बांटा गया है: पहला घेरा: काउंटिंग सेंटर के बाहरी इलाके में, जहां भारी संख्या में केंद्रीय बल तैनात रहेंगे। दूसरा घेरा: सेंटर के प्रवेश द्वार पर, जहां पहचान और जांच की कड़ी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। तीसरा घेरा: काउंटिंग हॉल के अंदर, जहां केवल अधिकृत अधिकारी और कर्मचारी ही मौजूद रहेंगे। इसके अलावा, ‘वल्नरेबल’ और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष पेट्रोलिंग की व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी तरह की भीड़ या हिंसक गतिविधि को तुरंत रोका जा सके। QR कोड आधारित डिजिटल एंट्री सिस्टम इस बार सुरक्षा व्यवस्था को और आधुनिक बनाते हुए काउंटिंग सेंटर्स में प्रवेश के लिए QR-Coded Photo ID अनिवार्य कर दिया गया है। बिना इस डिजिटल पहचान पत्र के किसी भी व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं होगी। यह कदम फर्जी पहचान या अनधिकृत प्रवेश को रोकने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। 24/7 कमांड हब और हाई-टेक निगरानी चुनाव आयोग ने राज्यभर में अत्याधुनिक कमांड हब स्थापित किए हैं, जहां से चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाएगी। सभी मतगणना केंद्रों को CCTV कैमरों से जोड़ा गया है और उनकी लाइव फीड सीधे आयोग के नियंत्रण कक्ष तक पहुंचेगी। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्या सामने आने पर तुरंत एक्शन लेने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) भी तैनात की गई है। आम जनता के लिए हेल्पलाइन और शिकायत व्यवस्था आयोग ने नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1800 345 0008 और ईमेल wbfreeandfairpolls@gmail.com जारी किया है। कोई भी व्यक्ति हिंसा या गड़बड़ी की सूचना दे सकता है शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी हर शिकायत पर त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है हाईकोर्ट की निगरानी में चुनाव प्रक्रिया कलकत्ता उच्च न्यायालय ने भी स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान पूरा नागरिक और पुलिस प्रशासन चुनाव आयोग के नियंत्रण में रहेगा। कोर्ट ने स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। पोस्ट-पोल हिंसा रोकने पर विशेष फोकस पश्चिम बंगाल में पिछले चुनावों के बाद हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार सुरक्षा एजेंसियों को पहले से ही अलर्ट मोड पर रखा गया है। संवेदनशील जिलों में फ्लैग मार्च लगातार ड्रोन और CCTV निगरानी स्थानीय पुलिस और केंद्रीय बलों के बीच समन्वय लोकतंत्र की मजबूती की दिशा में बड़ा कदम चुनाव आयोग की यह व्यापक और सख्त तैयारी इस बात का संकेत है कि इस बार किसी भी कीमत पर शांति भंग नहीं होने दी जाएगी। आयोग का उद्देश्य सिर्फ मतगणना कराना नहीं, बल्कि ऐसा सुरक्षित माहौल तैयार करना है, जहां हर नागरिक बिना डर के लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बन सके।  

surbhi मई 2, 2026 0
Mamata Banerjee inspects strong room ahead of West Bengal election countin
“EVM से छेड़छाड़ हुई तो जान की बाजी लगा देंगे” – स्ट्रॉन्गरूम दौरे के बाद ममता बनर्जी की चेतावनी

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में मतगणना से पहले सियासी तनाव और बढ़ गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दक्षिण कोलकाता के स्ट्रॉन्गरूम का दौरा करने के बाद EVM में कथित गड़बड़ी को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। 3 घंटे तक किया निरीक्षण ममता बनर्जी ने सखावत मेमोरियल स्कूल स्थित स्ट्रॉन्गरूम का दौरा किया, जो भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र का वितरण केंद्र है। यहां EVM और मतपत्र सुरक्षित रखे जाते हैं। उन्होंने करीब 3 घंटे से ज्यादा समय तक अंदर रहकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। “जान की बाजी लगाकर लड़ेंगे” स्ट्रॉन्गरूम से बाहर निकलते ही ममता बनर्जी ने कहा, “अगर कोई EVM मशीन चुराने या मतगणना में छेड़छाड़ करने की कोशिश करता है, तो हम जान की बाजी लगाकर लड़ेंगे। मैं पूरी जिंदगी लड़ती रहूंगी।” उन्होंने बताया कि सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद उन्हें शक हुआ, जिसके चलते उन्होंने खुद मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण किया। ‘हेरफेर’ के आरोप ममता बनर्जी ने दावा किया कि स्ट्रॉन्गरूम सुरक्षित है, लेकिन कुछ जगहों पर गड़बड़ी के संकेत मिले हैं। तृणमूल कांग्रेस ने एक वायरल वीडियो का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि अधिकृत प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बिना चुनाव सामग्री को खोला गया, जो नियमों का गंभीर उल्लंघन है। केंद्रीय बलों पर आरोप ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि शुरुआत में केंद्रीय सुरक्षा बलों ने उन्हें अंदर जाने से रोका। हालांकि, उन्होंने उम्मीदवार के रूप में अपने अधिकारों का हवाला दिया, जिसके बाद उन्हें प्रवेश की अनुमति मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पार्टी प्रतिनिधियों के साथ एकतरफा कार्रवाई की जा रही है और कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। बीजेपी और चुनाव आयोग पर निशाना तृणमूल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी और भारत निर्वाचन आयोग पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है और किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। काउंटिंग से पहले बढ़ा विवाद 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले यह मुद्दा बड़ा राजनीतिक विवाद बनता जा रहा है। एक ओर टीएमसी लगातार सवाल उठा रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी इन आरोपों को खारिज कर रही है। अब सबकी नजरें काउंटिंग डे पर टिकी हैं, जहां यह साफ होगा कि आरोपों और दावों के बीच जनता का फैसला किसके पक्ष में जाता है।  

surbhi मई 1, 2026 0
Mamata Banerjee and Firhad Hakim amid West Bengal election 2026 political buzz
कोलकाता में मेयर फिरहाद हकीम का दावा: 6 मई को शपथ लेंगी ममता बनर्जी, दुर्गापुर में ‘गुड़-बतासा’ और ‘पाचन’ वाली सियासत तेज

कोलकाता/दुर्गापुर : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से पहले सियासी बयानबाजी चरम पर पहुंच गई है। एग्जिट पोल के बाद जहां भारतीय जनता पार्टी खेमे में उत्साह है, वहीं तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने भी आत्मविश्वास भरे दावे करने शुरू कर दिए हैं। 6 मई को शपथ का दावा कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि ममता बनर्जी 6 मई को चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगी। कोलकाता नगर निगम के अधिवेशन के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस 202 से 225 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी। उन्होंने भाजपा के दावों को सिरे से खारिज किया। दुर्गापुर में ‘गुड़-बतासा’ और पहरा दूसरी ओर, दुर्गापुर में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी के लिए अनोखा तरीका अपनाया है। दुर्गापुर गवर्नमेंट कॉलेज के पास बनाए गए पहरा केंद्र में कार्यकर्ता दिन-रात डटे हुए हैं। गर्मी से बचने के लिए कार्यकर्ता ‘गुड़-बतासा’ खा रहे हैं और राहगीरों को भी बांट रहे हैं। साथ ही, ‘पाचन’ (डंडा) शब्द का इस्तेमाल कर विरोधियों को चेतावनी देने की बात भी सामने आई है, जिससे सियासी माहौल और गरमा गया है। EVM सुरक्षा को लेकर आशंका टीएमसी के स्थानीय युवा नेता अजय देबनाथ का कहना है कि उन्हें EVM से छेड़छाड़ की आशंका है। इसी वजह से कार्यकर्ता लगातार निगरानी कर रहे हैं और किसी भी स्थिति के लिए तैयार हैं। उन्होंने अणुव्रत मंडल के ‘मॉडल’ का हवाला देते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो ‘पाचन’ का इस्तेमाल भी किया जाएगा। भाजपा का तीखा पलटवार टीएमसी की इस सक्रियता पर भाजपा ने कड़ा हमला बोला है। भाजपा जिला प्रवक्ता सुमंत मंडल ने तंज कसते हुए कहा कि अणुव्रत मंडल खुद केंद्रीय एजेंसियों प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के मामलों में उलझे हुए हैं, लेकिन उनके समर्थक अब भी पुरानी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर ‘पाचन’ की राजनीति करनी है तो बंगाल नहीं, कहीं और जाना चाहिए। भाजपा का दावा है कि 4 मई के बाद तृणमूल नेताओं को सत्ता से बाहर होना पड़ेगा। बढ़ता सियासी तापमान नतीजों से पहले ही पश्चिम बंगाल में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। एक ओर टीएमसी सत्ता में वापसी का दावा कर रही है, तो दूसरी ओर भाजपा बदलाव की बात कर रही है। अब सभी की नजरें 4 मई को आने वाले नतीजों और उसके बाद की सियासी तस्वीर पर टिकी हैं।  

surbhi मई 1, 2026 0
IPS Ajay Pal Sharma faces Supreme Court petition over alleged bias during West Bengal election duty
बंगाल चुनाव विवाद: IPS अजय पाल शर्मा पर निष्पक्षता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका

निष्पक्ष चुनाव पर उठे सवाल पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच पुलिस ऑब्जर्वर के रूप में तैनात आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उन पर निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने उन्हें पद से हटाने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका, चुनाव आयोग पर कार्रवाई का दबाव यह जनहित याचिका आदित्य दास नामक याचिकाकर्ता की ओर से दाखिल की गई है। इसमें चुनाव आयोग से अपील की गई है कि अजय पाल शर्मा को उनके पद से हटाया जाए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपनी भूमिका के अनुरूप निष्पक्षता नहीं बरती और मतदाताओं पर प्रभाव डालने या उन्हें डराने-धमकाने जैसा व्यवहार किया। वायरल वीडियो से शुरू हुआ विवाद इस पूरे मामले की शुरुआत उस वायरल वीडियो से हुई, जिसमें अजय पाल शर्मा को फाल्टा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार जहांगीर खान को कथित तौर पर चेतावनी देते हुए देखा गया। वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई और उनके आचरण पर सवाल उठने लगे। निष्पक्ष चुनाव को लेकर उठी मांग याचिका में दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है कि ऐसे अधिकारियों को हटाया जाए, जिन पर पक्षपात के आरोप लग रहे हैं। हालांकि, इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई है। कौन हैं IPS अजय पाल शर्मा? अजय पाल शर्मा 2011 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्हें कड़े और सख्त पुलिसिंग के लिए जाना जाता है और उनकी छवि अक्सर ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ और ‘यूपी के सिंघम’ के रूप में देखी जाती है। वर्तमान में उन्हें पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में पुलिस ऑब्जर्वर के रूप में तैनात किया गया है। राजनीतिक बयानबाजी भी तेज इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि कुछ अधिकारियों की नियुक्ति राजनीतिक प्रभाव से जुड़ी हो सकती है। वहीं टीएमसी की ओर से भी इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए जा रहे हैं।  

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
CRPF personnel seize cash during West Bengal Assembly Election 2026 polling operations
बंगाल चुनाव में बड़ी कार्रवाई: पोलिंग एजेंट से नकदी बरामद, अब तक 481 करोड़ की जब्ती

चुनाव आयोग की सख्ती, पूरे राज्य में अवैध धन और सामग्री पर कड़ा प्रहार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान के बाद निर्वाचन आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है। राज्य भर में चलाए गए सघन अभियान के दौरान अब तक 481 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध नकदी, शराब, नशीले पदार्थ और अन्य सामग्री जब्त की गई है। पोलिंग एजेंट के पास से नकदी बरामद सबसे चौंकाने वाली घटना मुर्शिदाबाद जिले के मुराराई विधानसभा क्षेत्र में सामने आई, जहां मतदान के दिन ही CRPF जवानों ने एक पोलिंग एजेंट के पास से 1.65 लाख रुपये से अधिक नकद बरामद किए। यह कार्रवाई बूथ संख्या 137 पर की गई। 181 जगहों पर छापेमारी, नशीले पदार्थ भी जब्त चुनाव से पहले और मतदान के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने राज्यभर में 181 स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान शराब, बीयर और स्पिरिट सहित बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद किए गए, जिनकी कीमत करीब 55 लाख रुपये से अधिक आंकी गई है। अब तक 481 करोड़ से ज्यादा की जब्ती चुनाव आयोग के अनुसार, 15 मार्च 2026 से शुरू हुई कार्रवाई में अब तक: 29 करोड़ रुपये नकद 108 करोड़ रुपये से अधिक के नशीले पदार्थ 107 करोड़ रुपये से ज्यादा की शराब 57 करोड़ रुपये की कीमती धातुएं 179 करोड़ रुपये के फ्रीबीज (मुफ्त वितरण सामग्री) जब्त किए जा चुके हैं। हथियार और विस्फोटक भी बरामद सुरक्षा एजेंसियों ने चुनावी माहौल को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक भी जब्त किए हैं। अब तक: 384 अवैध हथियार 1232 बम 595 कारतूस 216 किलो से अधिक विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है। लाखों पोस्टर और प्रचार सामग्री हटाई गई मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के तहत पूरे राज्य में अभियान चलाकर लाखों अवैध पोस्टर और प्रचार सामग्री हटाई गई है। कोलकाता, मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना जैसे जिलों में सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई है। चुनाव आयोग की सख्त निगरानी जारी निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि आगामी चरणों में भी आचार संहिता का सख्ती से पालन कराया जाएगा और किसी भी तरह की गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।  

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
west bengal election 2026
बंगाल चुनाव में रिकॉर्ड मतदान, पहले चरण में 92% वोटिंग से बढ़ी हलचल

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में रिकॉर्ड तोड़ मतदान दर्ज किया गया है। लगभग 92% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया, जो राज्य के चुनावी इतिहास में एक बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। इस भारी मतदान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। पहले चरण में कुल 152 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ। पूरे मतदान प्रक्रिया के दौरान कहीं से भी किसी बड़ी हिंसा या अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली, जिससे चुनाव आयोग और सुरक्षा एजेंसियों को राहत मिली है। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस की तैनाती के बीच मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।   अमित शाह का बयान: बदलाव का संकेत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उच्च मतदान प्रतिशत को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मतदाताओं का आभार जताते हुए कहा कि यह उत्साह लोकतंत्र की मजबूती और अच्छे शासन की दिशा में बदलाव का संकेत है। शाह ने इसे “भ्रष्टाचार और गुंडाराज के अंत की शुरुआत” बताया और कहा कि जनता ने स्पष्ट संदेश दिया है।   राजनीतिक माहौल में बढ़ी हलचल बंपर वोटिंग को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों में अलग-अलग राय सामने आ रही है। भाजपा इसे सत्ता विरोधी लहर और बदलाव की मजबूत संकेत के रूप में देख रही है, जबकि इसे टीएमसी के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति माना जा रहा है। कई विशेषज्ञ इसे भ्रष्टाचार और शासन के मुद्दों पर जनता का जनमत संग्रह भी बता रहे हैं।   सुरक्षा व्यवस्था की सराहना गृह मंत्री ने मतदान प्रक्रिया को सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों की भी सराहना की। उनके अनुसार, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के कारण ही इतने बड़े पैमाने पर मतदान बिना किसी बड़ी बाधा के संपन्न हो सका।   आगे के चरणों पर नजर पहले चरण के रिकॉर्ड मतदान ने पूरे चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है। अब सभी की नजर आने वाले चरणों पर है, जो राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

Anjali Kumari अप्रैल 24, 2026 0
West Bengal map
बंगाल चुनाव 2026: पहले चरण में दागी और धनी उम्मीदवारों का दबदबा, BJP के 70% प्रत्याशी दागी, TMC सबसे अमीर

कोलकाता: Association for Democratic Reforms (ADR) की ताजा रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक चुनावी मैदान में उतरे उम्मीदवारों में दागी और करोड़पति प्रत्याशियों का दबदबा साफ दिखाई दे रहा है। 23% उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले ADR और पश्चिम बंगाल इलेक्शन वॉच द्वारा 1,475 उम्मीदवारों के हलफनामों के विश्लेषण में सामने आया कि: कुल 23% उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं 294 उम्मीदवारों पर गंभीर आरोप (हत्या, हत्या का प्रयास, दुष्कर्म आदि) इनमें 19 पर हत्या और 98 पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले दर्ज दागी उम्मीदवारों में BJP सबसे आगे पार्टीवार आंकड़े भी काफी चौंकाने वाले हैं: BJP: 70% (152 में से 106 उम्मीदवार दागी) TMC: 43% उम्मीदवारों पर केस CPI(M): 43% Congress: 26% 66 सीटें ‘रेड अलर्ट’ घोषित रिपोर्ट के अनुसार, पहले चरण की 152 सीटों में से 66 सीटों को ‘रेड अलर्ट’ घोषित किया गया है। इन सीटों पर तीन या उससे अधिक उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। धनबल में TMC सबसे आगे सिर्फ बाहुबल ही नहीं, धनबल के मामले में भी चुनाव काफी भारी दिख रहा है: उम्मीदवारों की औसत संपत्ति: 1.34 करोड़ रुपये TMC उम्मीदवार सबसे अमीर, औसत संपत्ति 5.70 करोड़ रुपये कुल 309 उम्मीदवार (21%) करोड़पति महिला प्रतिनिधित्व अब भी कम रिपोर्ट में महिला भागीदारी को लेकर निराशाजनक तस्वीर सामने आई है: कुल 1,478 उम्मीदवारों में सिर्फ 167 महिलाएं (11%) टिकट वितरण में महिलाओं को अब भी सीमित अवसर कब होगी वोटिंग? West Bengal की 294 विधानसभा सीटों के लिए मतदान दो चरणों में होगा: पहला चरण: 23 अप्रैल दूसरा चरण: 29 अप्रैल नतीजे: 4 मई ADR की रिपोर्ट ने एक बार फिर चुनावी राजनीति में “विनिंग एबिलिटी” को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति पर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता इस बार साफ छवि को प्राथमिकता देते हैं या फिर धनबल और बाहुबल का असर बरकरार रहता है।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
Kolkata Municipal Corporation commissioner addressing preparedness for elections and Kalbaisakhi storm warning in city
कोलकाता में चुनाव और कालबैसाखी की दोहरी चुनौती, KMC कमिश्नर स्मिता पांडे ने कहा–कामकाज पर नहीं पड़ेगा असर

कोलकाता: Kolkata में West Bengal Assembly Election 2026 के बीच प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। एक ओर चुनावी तैयारियां चरम पर हैं, वहीं दूसरी ओर कालबैसाखी (Norwester) तूफान की चेतावनी ने नगर प्रशासन की जिम्मेदारियां बढ़ा दी हैं। इस बीच कोलकाता नगर निगम (KMC) की आयुक्त और उत्तर कोलकाता की जिला निर्वाचन अधिकारी स्मिता पांडे ने स्पष्ट किया है कि इन दोनों परिस्थितियों के बावजूद शहर का नियमित कामकाज प्रभावित नहीं होगा। चुनाव और प्रशासनिक जिम्मेदारी साथ-साथ स्मिता पांडे को KMC आयुक्त के साथ DEO का अतिरिक्त प्रभार चुनावी व्यस्तताओं के बीच भी निगम सेवाएं जारी रहने का दावा अधिकारियों को दोहरी जिम्मेदारी निभाने के निर्देश आयुक्त ने कहा कि चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए भी निगम की टीम अपनी नियमित जिम्मेदारियों को पूरी दक्षता से निभा रही है। कालबैसाखी से निपटने की तैयारी मौसम विभाग ने तेज आंधी और भारी बारिश की चेतावनी दी ड्रेनेज सिस्टम और पंपिंग स्टेशनों को हाई अलर्ट पर रखा गया हालिया तूफान में गिरे पेड़ों को रिकॉर्ड समय में हटाया गया जलजमाव रोकने के लिए विशेष निगरानी आयुक्त के अनुसार, मानसून से पूर्व तैयारियों को पहले ही मजबूत कर लिया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं पर फोकस संवेदनशील मतदान केंद्रों पर विशेष निगरानी बिजली, पानी और सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित चुनाव के दौरान नागरिकों को असुविधा न हो, इसके निर्देश बैठक में यह सुनिश्चित किया गया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी क्षेत्र में बुनियादी सेवाओं की कमी न हो। प्रशासन का आश्वासन स्मिता पांडे ने भरोसा दिलाया कि मौसम की चुनौती और चुनावी व्यस्तता के बावजूद आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। निगम और प्रशासन हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क है। कोलकाता में इस समय चुनाव और मौसम दोनों की चुनौती एक साथ सामने है, लेकिन प्रशासन का दावा है कि बेहतर समन्वय और तैयारियों के चलते न तो चुनाव प्रक्रिया प्रभावित होगी और न ही शहर की दैनिक सेवाएं।  

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
ममता बनर्जी सागरदिघी रैली और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
SIR अफसरों को बंधक बनाने पर SC नाराज़, ममता बोलीं- ‘प्रशासन मेरे हाथ में नहीं’

कोलकाता,एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मालदा जिले में SIR (Special Intensive Revision) के लिए गए अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की घटना ने बड़ा राजनीतिक और संवैधानिक विवाद खड़ा कर दिया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी समय पर नहीं दी गई और फिलहाल राज्य की प्रशासनिक मशीनरी उनके नियंत्रण में नहीं है।   चुनावी रैली में  ममता बनर्जी ने क्या कहा ? मुर्शिदाबाद जिले के सागरदिघी में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग ने चुनाव से पहले प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव किए हैं, जिसके कारण राज्य में कानून-व्यवस्था पर उनका नियंत्रण नहीं रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि “मेरी सारी शक्तियां छीन ली गई हैं” और वर्तमान स्थिति “सुपर राष्ट्रपति शासन” जैसी लग रही है। ममता ने यह भी दावा किया कि उन्हें मालदा की घटना के बारे में आधी रात को एक पत्रकार से पता चला।   मुख्यमंत्री ने SIR प्रक्रिया को लेकर  क्या कहा ? मुख्यमंत्री ने SIR प्रक्रिया को लेकर भी नाराजगी जताई और कहा कि वह समझ सकती हैं कि लोग क्यों गुस्से में हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि इस पूरे घटनाक्रम के लिए कौन जिम्मेदार है।   दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को बेहद गंभीर मानते हुए सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाना केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि न्यायिक संस्थाओं के अधिकारों को चुनौती देने जैसा है। मुख्य न्यायाधीश ने इसे “सोची-समझी और उकसावे वाली कार्रवाई” बताया और कहा कि इसकी जांच CBI या NIA जैसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जानी चाहिए।

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 2, 2026 0
शुभेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी के बीच चुनावी मुकाबले का दृश्य
बंगाल चुनाव : शुभेंदु अधिकारी दो अप्रैल को भरेंगे नामांकन, चुनाव आयोग ने बीडीओ पर की बड़ी कार्रवाई

नई दिल्ली/कोलकाता,एजेंसियां। पांच राज्यों असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल में एक ओर भवानीपुर सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधी टक्कर की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग ने नदिया जिले के एक बीडीओ को निलंबित कर सख्त संदेश दिया है।   चुनाव प्रशिक्षण के दौरान विवाद चुनाव आयोग ने नदिया जिले के हंसखली ब्लॉक में तैनात बीडीओ सायनतन भट्टाचार्य को निलंबित करने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई 27 मार्च को चुनाव अधिकारियों की ट्रेनिंग के दौरान हुई हिंसा के बाद की गई। आरोप है कि प्रशिक्षण शुरू होने से पहले प्रोजेक्टर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सरकारी विज्ञापन दिखाया गया, जिस पर शिक्षक सैकत चट्टोपाध्याय ने आपत्ति जताई। इसके बाद कथित तौर पर उनके साथ मारपीट हुई और सिर में गंभीर चोट आई। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई है।   आयोग ने माना गंभीर लापरवाही चुनाव आयोग ने कहा कि बीडीओ ट्रेनिंग कार्यक्रम के प्रभारी थे, लेकिन वे प्रोटोकॉल और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया का पालन कराने में विफल रहे। आयोग ने राज्य प्रशासन को आदेश दिया है कि निलंबन और विभागीय जांच की कार्रवाई तत्काल प्रभाव से लागू की जाए।   भवानीपुर सीट पर सियासी घमासान पश्चिम बंगाल की सबसे चर्चित सीट भवानीपुर पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी दो अप्रैल को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में नामांकन भरेंगे। इसे भाजपा के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आठ अप्रैल को कालीघाट से शक्ति जुलूस निकालकर नामांकन दाखिल करेंगी।   अन्य चुनावी हलचल भाजपा ने पश्चिम बंगाल के लिए 13 उम्मीदवारों की चौथी सूची भी जारी की है। वहीं, केरल चुनाव में कांग्रेस के समर्थन में तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी एक और दो अप्रैल को प्रचार करेंगे।

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 1, 2026 0
Voter finger with ink mark over West Bengal map highlighting 2026 election voter list decision
West Bengal Chunav 2026: 27 लाख वोटरों का आज होगा फैसला, ‘ग्रीन सिग्नल’ या मायूसी-सप्लीमेंट्री लिस्ट पर टिकी निगाहें

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले आज का दिन राज्य के करीब 27.2 लाख मतदाताओं के लिए बेहद अहम है। ये वे लोग हैं, जिनका नाम ‘अंडर एडजुडिकेशन’ श्रेणी में रखा गया था और जिनका मतदान अधिकार अब चुनाव आयोग की पहली सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट के जरिए तय होगा। दरअसल, ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न’ (SIR) के दौरान राज्य के लगभग 60 लाख मतदाताओं को इस श्रेणी में रखा गया था। यानी इन मतदाताओं के दस्तावेज़ों और पात्रता पर अंतिम निर्णय अभी लंबित था। अब जारी होने वाली पहली सप्लीमेंट्री लिस्ट से इनमें से करीब आधे लोगों की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी कि वे आगामी चुनाव में वोट डाल सकेंगे या नहीं। 8.6% वोटरों का भविष्य अधर में 28 फरवरी को जारी अंतिम मतदाता सूची में राज्य के करीब 7 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 8.6% यानी 60 लाख लोगों की स्थिति स्पष्ट नहीं थी। यही वजह है कि लाखों परिवारों में असमंजस और चिंता का माहौल है। चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, जिन मतदाताओं के दस्तावेज़ों में विसंगतियां पाई गईं या सुनवाई के दौरान संतोषजनक प्रमाण नहीं दिए गए, उन्हें ‘अंडर एडजुडिकेशन’ में रखा गया। तीन चरणों में आएगी सप्लीमेंट्री लिस्ट पहली सूची: 23 मार्च दूसरी सूची: अगले शुक्रवार तीसरी सूची: 3 अप्रैल पहली सूची जारी होने के बाद 27.2 लाख लोगों को अपने मतदान अधिकार की स्थिति का पता चल जाएगा, जबकि बाकी लोगों को अभी और इंतजार करना होगा। नाम नहीं आया तो क्या विकल्प? यदि किसी मतदाता का नाम सप्लीमेंट्री सूची में शामिल नहीं होता है, तो उसके पास अपील का विकल्प मौजूद रहेगा। वे: ECINET ऐप के माध्यम से ऑनलाइन अपील कर सकते हैं जिला मजिस्ट्रेट या उप-विभागीय अधिकारी के समक्ष आवेदन दे सकते हैं इसके लिए चुनाव आयोग ने 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल का गठन किया है। जमीनी स्तर पर बेचैनी और उम्मीद भवानीपुर की शिखा दास, जो पिछले चार दशकों से मतदान करती आ रही हैं, इस बार अपने नाम को लेकर अनिश्चितता में हैं। उनके परिवार के अन्य सदस्यों के नाम सूची में हैं, लेकिन उनका नाम रोका गया है। वहीं अलीपुर के सौरव चक्रवर्ती और कैनिंग के अकरमुल हक सरदार जैसे कई मतदाता अपने दस्तावेजों के आधार पर आश्वस्त हैं, लेकिन अंतिम सूची का इंतजार उन्हें बेचैन कर रहा है। प्रशासन अलर्ट मोड में राज्य सरकार ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि सूची जारी होने के बाद किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
Bharatiya Janata Party West Bengal elections candidates list
पश्चिम बंगाल चुनाव: BJP ने जारी की 144 उम्मीदवारों की पहली सूची

कोलकाता, एजेंसियां। वेस्ट बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। BJP ने चुनाव को लेकर अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इस सूची में कुल 144 प्रत्याशियों के नाम शामिल हैं। पार्टी ने कई बड़े नेताओं को चुनावी मैदान में उतारा है, जिससे राज्य में सियासी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।सबसे बड़ी बात यह है कि भाजपा ने नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी  को दो सीटों नंदीग्राम और भवानीपुर से उम्मीदवार बनाया है। इन दोनों सीटों पर मुकाबला काफी अहम माना जा रहा है।   नंदीग्राम और भवानीपुर सीट पर खास नजर नंदीग्राम सीट पहले भी राज्य की सबसे चर्चित सीटों में रही है। पिछले चुनाव में ममता बनर्जी ने इसी सीट से चुनाव लड़ा था और यहां उनका मुकाबला शुभेंदु अधिकारी से हुआ था। उस चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को कड़ी टक्कर देते हुए जीत हासिल की थी। हालांकि ममता बनर्जी ने भवानीपुर सीट से जीत दर्ज कर सरकार बनाई थी। इस बार भाजपा ने रणनीतिक दांव खेलते हुए शुभेंदु अधिकारी को दोनों सीटों से मैदान में उतार दिया है। इससे चुनावी मुकाबला और दिलचस्प होने की संभावना जताई जा रही है।   अशोक डिंडा को फिर होंगे चुनावी मैदान में क्रिकेटर अशोक डिंडा को भाजपा ने फिर से मोयना विधानसभा सीट से मौका दिया है। इससे पहले भी डिंडा को भाजपा ने मोयना विधासभा से ही टिकट दिया था और उन्होंने 1260 वोटों से जीत दर्ज की थी। भाजपा की इस सूची में कई प्रमुख नेताओं को जगह दी गई है। पार्टी ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को खड़गपुर सदर सीट से उम्मीदवार बनाया है। नीचे सूची में देखें, किसे कहां से टिकट मिला है।  क्र.    विधानसभा का नाम    उम्मीदवार का नाम 1    कूचबिहार उत्तर (अजा)    सुकुमार रॉय 2    सीतलकुची (अजा)    सावित्री बर्मन 3    दिनहाटा    अजय रॉय 4    तूफानगंज    मालती रावा रॉय 5    कुमारग्राम (अजजा)    मनोज कुमार ओरांव 6    कालचीनी (अजजा)    विशाल लामा 7    अलीपुरद्वार    परितोष दास 8    फालाकाटा (अजा)    दीपक बर्मन 9    डाबग्राम-फूलबाड़ी    शिखा चटर्जी 10    नागराकाटा (अजजा)    पुना भेंगरा 11    माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी (अजा)    आनंदमय बर्मन 12    सिलीगुड़ी    शंकर घोष 13    फांसीदेवा (अजजा)    दुर्गा मुर्मू 14    गोलपोखर    सरजीत बिस्वास 15    चाकुलिया    मनोज जैन 16    करनदिघी    बिराज बिस्वास 17    कलियागंज (अजा)    उत्पल महाराज 18    रायगंज    कौशिक चौधरी 19    कुशमंडी (अजा)    तापस चंद्र रॉय 20    कुमारगंज    शुभेंदु सरकार 21    बालुरघाट    बिद्युत रॉय 22    तपन (अजजा)    बुधराई टुडू 23    गंगारामपुर (अजा)    सत्येंद्र नाथ राय 24    हरिरामपुर    देबब्रत मजुमदार 25    हबीबपुर (अजजा)    जोएल मुर्मू 26    गाजोल (अजा)    चिन्मय देब बर्मन 27    चंचल    रतन दास 28    मालतीपुर    आशीष दास 29    रतुआ    अभिषेक सिंघानिया 30    मानिकचक    गौर चंद्र मंडल 31    मालदा (अजा)    गोपाल चंद्र साहा 32    मोथाबाड़ी    निबारण घोष 33    सुजापुर    अभिराज चौधरी 34    सुती    महाबीर घोष 35    रघुनाथगंज    सुरजीत पोद्दार 36    लालगोला    अमर कुमार दास 37    भगवानगोला    भास्कर सरकार 38    मुर्शिदाबाद    गौरी शंकर घोष 39    रेजिनगर    बापन घोष 40    बेलडांगा    भरत कुमार झावर 41    बहरामपुर    सुब्रत मित्रा 42    हरिहरपाड़ा    तन्मय बिस्वास 43    नउदा    राणा मंडल 44    डोमकल    नंद दुलाल पाल 45    जलंगी    नबा कुमार सरकार 46    करीमपुर    समरेंद्रनाथ घोष 47    पलासीपाड़ा    अनिमा दत्ता 48    कालीगंज    बापन घोष 49    राणाघाट उत्तर पश्चिम    पार्थसारथी चटर्जी 50    राणाघाट उत्तर पूर्व (अजा)    असीम बिस्वास 51    चकदहा    बंकिम चंद्र घोष 52    हरिनघाटा (अजा)    असीम कुमार सरकार 53    बदुरिया    सुकृति सरकार 54    अमडंगा    अरिंदम डे 55    नैहाटी    सौमित्र चटर्जी 56    भाटपाड़ा    पवन कुमार सिंह 57    बारानगर    सजल घोष 58    देंगंगा    तरुण कांति घोष 59    बशीरहाट उत्तर    नारायण चन्द्र मंडल 60    बसंती (अजा)    बिकास सरदार 61    कुलतली (अजा)    माधवी महलदर 62    पाथरप्रतिमा    असित कुमार हल्दर 63    काकद्वीप    दीपांकर जना 64    रायदिघी    पलाश राणा 65    कैनिंग पूर्व    असीम सपुई 66    डायमंड हार्बर    दीपक कुमार हल्दर 67    बिष्णुपुर (अजा)    अग्निश्वर नस्कर 68    बज बज    तरुण कुमार अदाक 69    मेटियाब्रुज    वीर बहादुर सिंह 70    भवानीपुर    शुभेंदु अधिकारी 71    रासबिहारी    स्वपन दास गुप्ता 72    हावड़ा उत्तर    उमेश राय 73    शिबपुर    रूद्रनील घोष 74    उलबेरिया दक्षिण    मंगलानंद पुरी महाराज 75    अमता    अमित सामंत 76    डोमजूर    गोबिंद हाजरा 77    सप्तग्राम    स्वराज घोष 78    तारकेश्वर    संतु पान 79    पुरसुराह    बिमान घोष 80    आरामबाग (अजा)    हेमंत बाग 81    गोघाट (अजा)    प्रशांत दिघर 82    खानाकुल    सुशांत घोष 83    पंसकुरा पूर्व    सुब्रत मैती 84    पंसकुरा पश्चिम    सिंतु सेनापति 85    मोयना    अशोक डिंडा 86    महिषादल    सुभाष पांजा 87    हल्दिया (अजा)    प्रदीप कुमार बिजली 88    नंदीग्राम    शुभेंदु अधिकारी 89    पटाशपुर    तपन मैती 90    कांथी उत्तर    सुमिता सिन्हा 91    कांथी दक्षिण    अरूप कुमार दास 92    रामनगर    चंद्र शेखर मंडल 93    दांतन    अजीत कुमार जना 94    नयाग्राम (अजजा)    अमिया किस्कू 95    गोपीबल्लभपुर    राजेश महतो 96    झारग्राम    लक्ष्मीकांत साहू 97    केशियारी (अजजा)    भद्रा हेम्ब्रम 98    खड़गपुर सदर    दिलीप घोष 99    नारायणगढ़    राम प्रसाद गिरि 100    सबंग    अमल पांडा 101    खड़गपुर    तपन भुया 102    डेबरा    शुभाशीष ओम 103    दासपुर    तपन दत्ता 104    घाटाल (अजा)    शीतल कपाट 105    चंद्रकोना (अजा)    सुकांत दोलुई 106    सालबोनी    बिमान महतो 107    केशपुर (अजा)    शुभेंदु सामंत 108    बिनपुर (अजजा)    प्रणत टुडू 109    बांदवान (अजजा)    लबसेन बास्के 110    बलरामपुर    जलधर महतो 111    मानबाजार (अजजा)    मैना मुर्मू 112    काशीपुर    कमलकांत हंसदा 113    पारा (अजा)    नदियार चंद बाउरी 114    रघुनाथपुर (अजा)    मामोनी बाउरी 115    साल्टोरा (अजा)    चंदना बाउरी 116    छतना    सत्यनारायण मुखोपाध्याय 117    रानीबांध (अजजा)    क्षुदिराम टुडू 118    रायपुर (अजजा)    क्षेत्र मोहन हंसदा 119    तालडांगरा    सौविक पात्रा 120    बरजोड़ा    बिलेश्वर सिंघा 121    ओंदा    अमरनाथ शाखा 122    कटुलपुर (अजा)    लक्ष्मीकांत मजुमदार 123    इंदस (अजा)    निर्मल कुमार धारा 124    सोनामखी (अजा)    दिबाकर घरामी 125    रैना (अजा)    सुभाष पात्रा 126    जमालपुर (अजा)    अरुण हल्दर 127    मोटेश्वर    सैकत पंजा 128    बर्धमान उत्तर (अजा)    संजय दास 129    भातर    सोमेन करफा 130    केतुग्राम    अनादि घोष (मथुरा) 131    औसग्राम (अजा)    कलिता माझी 132    पांडबेश्वर    जितेंद्र कुमार तिवारी 133    दुर्गापुर पूर्व    चंद्र शेखर बनर्जी 134    दुर्गापुर पश्चिम    लक्ष्मण चंद घोरुई 135    जामुारिया    बिजन मुखर्जी 136    आसनसोल दक्षिण    अग्निमित्रा पॉल 137    आसनसोल उत्तर    कृष्णेंदु मुखर्जी 138    कुल्टी    अजय कुमार पोद्दार 139    दुबराजपुर (अजा)    अनुप कुमार साहा 140    सूरी    जगन्नाथ चट्टोपाध्याय 141    बोलपुर    दिलीप कुमार घोष 142    नानूर (अजा)    खोकन दास 143    मयूरेश्वर    दुध कुमार मंडल 144    हंसन    निखिल बनर्जी   दो चरणों में होंगे चुनाव Election Commission of India ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में कराने का फैसला किया है। राज्य में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान होगा। वहीं मतगणना 4 मई को की जाएगी।पश्चिम बंगाल के साथ ही Assam, Kerala, Tamil Nadu और Puducherry में भी इसी दौरान चुनाव होंगे।   पिछले चुनाव का परिणाम 2021 के विधानसभा चुनाव में All India Trinamool Congress ने बड़ी जीत दर्ज की थी। ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी ने 215 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, जबकि भाजपा को 77 सीटें मिली थीं और वह मुख्य विपक्षी दल बनी थी। अब 2026 के चुनाव में भाजपा अपने प्रदर्शन को बेहतर करने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरी है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इस बार राज्य में मुकाबला और भी कड़ा होने की संभावना है।

Juli Gupta मार्च 17, 2026 0
BJP and opposition leaders
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: बीजेपी की पहली सूची से 8 विधायकों की छुट्टी, वाम मोर्चे में भी उम्मीदवारों को लेकर असमंजस

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। Election Commission of India द्वारा दो चरणों में मतदान की घोषणा के साथ ही सभी दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। राज्य में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को होगा, जबकि पूरी चुनाव प्रक्रिया के बाद 4 मई को मतगणना के साथ नतीजे घोषित किए जाएंगे। इस बीच उम्मीदवारों की पहली सूची जारी होते ही राजनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं।   बीजेपी की पहली सूची: 144 उम्मीदवार, कई बड़े फैसले Bharatiya Janata Party ने अपनी पहली सूची में 144 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। इस सूची में कई नए चेहरों को मौका दिया गया है, जबकि कुछ मौजूदा विधायकों को टिकट नहीं मिलने से पार्टी के भीतर हलचल बढ़ गई है। सबसे बड़ा राजनीतिक दांव तब देखने को मिला जब पार्टी ने Suvendu Adhikari को दो महत्वपूर्ण सीटों-भवानीपुर और नंदीग्राम-से उम्मीदवार बनाया। यह सीधा मुकाबला Mamata Banerjee के खिलाफ रणनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा, अग्निमित्रा पॉल को आसनसोल दक्षिण, सुकुमार को कूचबिहार उत्तर (आरक्षित), साबित्री बर्मन को शीतलकुची और अजय रॉय को दिनहाटा से टिकट दिया गया है।   8 मौजूदा विधायकों का टिकट कटा बीजेपी की सूची में सबसे ज्यादा चर्चा उन 8 मौजूदा विधायकों को लेकर है, जिन्हें इस बार टिकट नहीं मिला। पार्टी ने 144 में से 48 सीटों पर अपने मौजूदा विधायकों में से सिर्फ 40 को दोबारा मौका दिया है। सूत्रों के अनुसार, जिन सीटों पर बदलाव हुआ है, उनमें उत्तर बंगाल, रारह बंगाल और दक्षिण बंगाल के क्षेत्र शामिल हैं। सबसे चौंकाने वाला फैसला दक्षिण दिनाजपुर की बालुरघाट सीट को लेकर सामने आया, जहां 2021 में जीत दर्ज करने वाले अर्थशास्त्री अशोक लाहिड़ी को टिकट नहीं दिया गया। उनके कद और पार्टी में प्रभाव को देखते हुए यह फैसला राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।   वाम मोर्चे में भी असमंजस, CPM की सूची पर उठे सवाल दूसरी ओर Communist Party of India (Marxist) (सीपीएम) ने 192 सीटों के लिए उम्मीदवारों की प्रारंभिक सूची जारी की है। हालांकि, इस सूची के सामने आने के बाद पार्टी के भीतर कुछ सीटों को लेकर असहमति देखने को मिल रही है। खासकर मुर्शिदाबाद की रानीनगर सीट और टॉलीगंज सीट पर उम्मीदवार घोषित न होने से सवाल खड़े हो गए हैं। पार्टी की आंतरिक नीति के तहत इस बार राज्य सचिव मंडल के अधिकांश सदस्य चुनाव नहीं लड़ेंगे। इसी कारण Mohammad Salim और Sujan Chakraborty जैसे नेताओं की उम्मीदवारी पर संशय बना हुआ है। हालांकि, Minakshi Mukherjee को अपवाद के रूप में हुगली की उत्तरपाड़ा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है।   चुनाव कार्यक्रम: महत्वपूर्ण तारीखें अधिसूचना जारी: 30 मार्च 2026   नामांकन: 30 मार्च से 6 अप्रैल   नामांकन जांच: 7 अप्रैल   नाम वापसी की अंतिम तारीख: 9 अप्रैल   मतदान (पहला चरण): 23 अप्रैल   मतगणना: 4 मई 2026     राजनीतिक तस्वीर: त्रिकोणीय मुकाबले की तैयारी राज्य में इस बार मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है। एक ओर All India Trinamool Congress लगातार सत्ता बरकरार रखने की कोशिश में है, तो वहीं बीजेपी बदलाव का दावा कर रही है। दूसरी ओर वाम मोर्चा भी अपनी खोई जमीन वापस पाने के लिए सक्रिय हो गया है। उम्मीदवारों की पहली सूची के बाद यह साफ हो गया है कि इस चुनाव में रणनीतिक बदलाव, नए चेहरे और अंदरूनी समीकरण बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0