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बंगाल चुनाव में रिकॉर्ड मतदान, पहले चरण में 92% वोटिंग से बढ़ी हलचल

Anjali Kumari अप्रैल 24, 2026 0
west bengal election 2026
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कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में रिकॉर्ड तोड़ मतदान दर्ज किया गया है। लगभग 92% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया, जो राज्य के चुनावी इतिहास में एक बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। इस भारी मतदान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।


पहले चरण में कुल 152 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ। पूरे मतदान प्रक्रिया के दौरान कहीं से भी किसी बड़ी हिंसा या अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली, जिससे चुनाव आयोग और सुरक्षा एजेंसियों को राहत मिली है। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस की तैनाती के बीच मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

 

अमित शाह का बयान: बदलाव का संकेत


केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उच्च मतदान प्रतिशत को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मतदाताओं का आभार जताते हुए कहा कि यह उत्साह लोकतंत्र की मजबूती और अच्छे शासन की दिशा में बदलाव का संकेत है। शाह ने इसे “भ्रष्टाचार और गुंडाराज के अंत की शुरुआत” बताया और कहा कि जनता ने स्पष्ट संदेश दिया है।

 

राजनीतिक माहौल में बढ़ी हलचल


बंपर वोटिंग को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों में अलग-अलग राय सामने आ रही है। भाजपा इसे सत्ता विरोधी लहर और बदलाव की मजबूत संकेत के रूप में देख रही है, जबकि इसे टीएमसी के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति माना जा रहा है। कई विशेषज्ञ इसे भ्रष्टाचार और शासन के मुद्दों पर जनता का जनमत संग्रह भी बता रहे हैं।

 

सुरक्षा व्यवस्था की सराहना


गृह मंत्री ने मतदान प्रक्रिया को सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों की भी सराहना की। उनके अनुसार, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के कारण ही इतने बड़े पैमाने पर मतदान बिना किसी बड़ी बाधा के संपन्न हो सका।

 

आगे के चरणों पर नजर


पहले चरण के रिकॉर्ड मतदान ने पूरे चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है। अब सभी की नजर आने वाले चरणों पर है, जो राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बंगाल में बंपर वोटिंग: क्या ममता की वापसी या मोदी का मिशन पूरा?

West Bengal विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान ने सियासी पारा चरम पर पहुंचा दिया है। करीब 92 फीसदी मतदान ने यह साफ कर दिया है कि बंगाल की जनता इस बार चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है–क्या यह वोटिंग सत्ता परिवर्तन का संकेत है या फिर Mamata Banerjee एक बार फिर वापसी करेंगी? या Narendra Modi का बंगाल फतह का सपना पूरा होगा? रिकॉर्ड वोटिंग ने बढ़ाई धड़कनें पहले चरण में 152 सीटों पर लगभग 91.78 फीसदी मतदान हुआ। पिछले चुनाव की तुलना में यह करीब 9 फीसदी अधिक है। इतनी बड़ी बढ़ोतरी ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। टीएमसी और बीजेपी दोनों इसे अपने पक्ष में बता रही हैं। लेकिन चुनावी राजनीति में एक पुरानी कहावत है–"ज्यादा वोटिंग का मतलब हमेशा सत्ता परिवर्तन नहीं होता।" क्या SIR बना गेमचेंजर? इस बार स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत लाखों नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए। मृतक, पलायन कर चुके और डुप्लीकेट वोटरों के नाम हटने से कुल मतदाताओं की संख्या कम हुई। ऐसे में मतदान प्रतिशत स्वाभाविक रूप से ऊपर गया। यानी सिर्फ प्रतिशत देखकर नतीजों का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। इतिहास क्या कहता है? 2011 में भारी मतदान के बीच ममता बनर्जी ने लेफ्ट के 34 साल के शासन का अंत किया था। लेकिन 2016 और 2021 में मतदान कम होने के बावजूद टीएमसी सत्ता में लौटी। दूसरी ओर, 1984 में रिकॉर्ड मतदान के बावजूद कांग्रेस ऐतिहासिक जीत दर्ज करने में सफल रही थी। वहीं 1989 में अपेक्षाकृत कम मतदान के बावजूद सत्ता बदल गई। मतलब साफ है–वोटिंग प्रतिशत अकेला पैमाना नहीं है। ममता के लिए क्या है चुनौती? ममता बनर्जी की सरकार को 15 साल पूरे हो चुके हैं। भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर विपक्ष लगातार हमलावर है। हालांकि, लक्ष्मी भंडार, मुफ्त राशन और अन्य कल्याणकारी योजनाएं अभी भी टीएमसी की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई हैं। खासकर महिला वोटरों में ममता की पकड़ मजबूत मानी जा रही है। बीजेपी की उम्मीदें क्यों बढ़ीं? बीजेपी पहली बार बंगाल में पूर्ण बहुमत का सपना देख रही है। पार्टी हिंदुत्व, भ्रष्टाचार विरोध, NRC, घुसपैठ और केंद्र की योजनाओं को लेकर आक्रामक अभियान चला रही है। अगर बीजेपी को जीतना है, तो उसे हिंदू वोटों का भारी ध्रुवीकरण करना होगा। साथ ही, उसे ग्रामीण क्षेत्रों में भी मजबूत प्रदर्शन करना होगा। मुस्लिम वोट निर्णायक बंगाल में करीब 27 फीसदी मुस्लिम आबादी है। यदि यह वोट एकजुट होकर टीएमसी के पक्ष में जाता है, तो बीजेपी की राह कठिन हो सकती है। लेकिन अगर Asaduddin Owaisi या अन्य क्षेत्रीय खिलाड़ी मुस्लिम वोटों में सेंध लगाते हैं, तो मुकाबला बेहद दिलचस्प हो जाएगा। ज्यादा वोटिंग का असली मतलब इसका अर्थ सिर्फ इतना है कि मतदाता उत्साहित है। वह बदलाव भी चाहता हो सकता है, और मौजूदा सरकार को बचाने के लिए भी निकल सकता है। वोटिंग का उछाल लोकतंत्र के लिए शानदार संकेत है, लेकिन नतीजों की गारंटी नहीं। आखिर बाजी किसके हाथ? फिलहाल कहना जल्दबाजी होगी। ममता बनर्जी के पास मजबूत संगठन, महिला वोट बैंक और कल्याणकारी योजनाओं का सहारा है। वहीं बीजेपी के पास मोदी फैक्टर, आक्रामक प्रचार और सत्ता विरोधी माहौल का भरोसा। 4 मई को ही तय होगा कि बंगाल में फिर "दीदी" का जादू चलेगा या "मोदी मैजिक" इतिहास रचेगा। अभी के लिए इतना तय है–बंगाल की लड़ाई बेहद रोमांचक और कांटे की है।  

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शुक्रवार सुबह Hooghly River में नाव की सवारी कर चुनावी माहौल को और दिलचस्प बना दिया। हुगली नदी में नौकायन करते हुए पीएम मोदी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। तस्वीरों में प्रधानमंत्री नाव पर बैठे हाथ में कैमरा लिए नजर आ रहे हैं। उन्होंने नदी के मनोरम दृश्यों को अपने कैमरे में कैद किया। इस दौरान उन्होंने नाविकों से बातचीत की और स्थानीय लोगों से भी मुलाकात की। गंगा को बताया बंगाल की आत्मा पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि हर बंगाली के लिए गंगा का विशेष स्थान है। उन्होंने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि बंगाल की आत्मा है, जिसका पवित्र जल एक पूरी सभ्यता की शाश्वत भावना को अपने साथ बहाता है। नाविकों और मॉर्निंग वॉकर्स से संवाद प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्हें नाव चलाने वाले मेहनतकश लोगों से मिलने का अवसर मिला। उन्होंने उनकी मेहनत और समर्पण की सराहना की। इसके अलावा, हुगली तट पर सुबह टहलने आए लोगों से भी उन्होंने बातचीत की। पीएम मोदी ने कहा कि हुगली के तट पर बिताया गया समय मां गंगा के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर था। उन्होंने पश्चिम बंगाल के विकास और बंगालवासियों की समृद्धि के लिए अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया। चुनावी माहौल में बढ़ी हलचल गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में पहले चरण में रिकॉर्ड 92.66 प्रतिशत मतदान हुआ था। अब दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को मतदान होना है। ऐसे में पीएम मोदी की यह नाव यात्रा राजनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है। इससे पहले भी पीएम मोदी झाड़ग्राम में चुनावी रैली के बाद अचानक झालमुड़ी की दुकान पर पहुंचकर स्थानीय स्वाद का आनंद लेते नजर आए थे। अब हुगली में उनकी नाव यात्रा चर्चा का नया केंद्र बन गई है।  

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असम में सनसनी: 19 वर्षीय बेटी ने मां की हत्या की, रातभर कटा सिर लेकर घूमती रही

असम के पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां 19 वर्षीय एक युवती ने कथित तौर पर अपनी मां की बेरहमी से हत्या कर दी। इतना ही नहीं, उसने अपनी मां का सिर धड़ से अलग कर दिया और पूरी रात उसे अपने साथ रखा। इस वारदात ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। मां की हत्या, पिता और बहन पर भी हमला यह घटना डेरामुख लालुंग गांव की है। पुलिस के अनुसार, आरोपी पूजा मलंग ने धारदार हथियार 'दाओ' से अपनी 42 वर्षीय मां अनुमाई मलंग पर हमला किया। हमले में मां की मौके पर ही मौत हो गई। जब पिता प्रेमेंद्र मलंग और बहन ने बीच-बचाव की कोशिश की, तो पूजा ने उन पर भी हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। कटा सिर लेकर रातभर रही फरार हत्या के बाद पूजा अपनी मां का कटा हुआ सिर लेकर मौके से फरार हो गई। पुलिस और स्थानीय लोगों की तलाश के बाद उसे अगली सुबह गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के समय भी उसके पास कटा हुआ सिर मौजूद था, जिससे हर कोई स्तब्ध रह गया। काला जादू और नशे के एंगल से जांच स्थानीय लोगों के बीच इस घटना को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोगों ने काला जादू से जुड़े होने की आशंका जताई है, जबकि कुछ का मानना है कि युवती नशे के प्रभाव में हो सकती थी। हालांकि, पुलिस ने अभी किसी भी संभावना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पूजा सामग्री और हथियार बरामद पुलिस ने आरोपी के पास से एक हंसिया, कैंची, तेल, सिंदूर और मिट्टी का बर्तन समेत पूजा-पाठ से जुड़ी कई वस्तुएं बरामद की हैं। इन बरामद सामानों के आधार पर पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। हत्या के कारणों की तलाश जारी पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिवार में पहले किसी विवाद की जानकारी नहीं मिली थी। फिलहाल आरोपी के खिलाफ हत्या और घातक हथियार से हमला करने का मामला दर्ज कर लिया गया है। हत्या के पीछे की असली वजह का पता लगाने के लिए जांच जारी है।  

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surbhi अप्रैल 18, 2026 0

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