गुवाहाटी, 4 मई: असम विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के बीच शुरुआती रुझानों ने साफ संकेत दे दिए हैं कि राज्य में एक बार फिर Bharatiya Janata Party (BJP) की सरकार बन सकती है। रुझानों में पार्टी ने तीन-चौथाई का आंकड़ा पार करते हुए करीब 95 सीटों पर बढ़त बना ली है, जो स्पष्ट जनादेश की ओर इशारा करता है। BJP की ऐतिहासिक बढ़त 126 सीटों वाली असम विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 64 है, लेकिन शुरुआती रुझानों में BJP इससे काफी आगे निकलती दिख रही है। BJP: 90+ सीटों पर बढ़त (कुछ रुझानों में 95 तक) Indian National Congress (कांग्रेस): 25-30 सीटों के आसपास अन्य दल: सीमित बढ़त इन आंकड़ों से साफ है कि BJP लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की ओर बढ़ रही है। ‘हिमंता फैक्टर’ फिर काम करता दिख रहा मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma जलुकबाड़ी सीट से बढ़त बनाए हुए हैं। उनके नेतृत्व में पार्टी ने इस चुनाव में आक्रामक प्रचार किया था और अब रुझानों में उसका असर दिख रहा है। अहम सीटों का हाल जोरहाट: BJP के हितेंद्र नाथ गोस्वामी आगे, कांग्रेस के Gaurav Gogoi पीछे सिस्सीबर्गांव, तिंगखोंग, गोलाघाट: BJP उम्मीदवार बढ़त में पक्केबेटबारी: कांग्रेस को बढ़त दलगांव: All India United Democratic Front के मजिबुर रहमान आगे बिन्नाकांडी: AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल बढ़त में घंटे-दर-घंटे मजबूत होती बढ़त पहले घंटे में BJP 67 सीटों पर आगे 10 बजे के आसपास बढ़त 80+ सीटों तक पहुंची ताजा रुझानों में BJP 90 से ज्यादा सीटों पर बढ़त के साथ तीन-चौथाई आंकड़े के पार यह ट्रेंड दिखाता है कि जैसे-जैसे वोटों की गिनती आगे बढ़ रही है, BJP की स्थिति और मजबूत होती जा रही है। कांग्रेस का दावा बरकरार कांग्रेस नेता Pawan Khera ने दावा किया है कि उनकी पार्टी पांचों राज्यों में अच्छा प्रदर्शन करेगी। हालांकि असम के रुझान फिलहाल कांग्रेस के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं। जश्न की तैयारी शुरू दिल्ली स्थित BJP मुख्यालय में शुरुआती रुझानों के बीच जश्न की तैयारी शुरू हो गई है। कार्यकर्ताओं के लिए मिठाइयां और खाने-पीने का इंतजाम किया जा रहा है, जिससे पार्टी खेमे में उत्साह साफ नजर आ रहा है। सुरक्षा और मतगणना राज्य के 35 जिलों के 40 मतगणना केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा के बीच गिनती जारी है। पहले पोस्टल बैलेट और फिर EVM वोटों की गिनती की जा रही है।
तिरुवनंतपुरम, 4 मई: केरल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना सोमवार सुबह शुरू होते ही राजनीतिक तस्वीर साफ होने लगी है। शुरुआती रुझानों में United Democratic Front (UDF) बढ़त बनाता नजर आ रहा है, जिससे Indian National Congress (कांग्रेस) खेमे में उत्साह है। रुझानों में UDF को बढ़त अब तक सामने आए शुरुआती रुझानों के अनुसार: UDF 60 से अधिक सीटों पर आगे Left Democratic Front (LDF) 50 से ज्यादा सीटों पर बढ़त ये आंकड़े फिलहाल डाक मतपत्रों की गिनती पर आधारित हैं, जो कुल वोटों का लगभग 1.36% है। शशि थरूर का बयान कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने कहा कि मतगणना के शुरुआती डेढ़ घंटे में ही रुझान स्पष्ट रूप से UDF के पक्ष में दिख रहे हैं। उन्होंने बताया कि LDF के कई मजबूत और लोकप्रिय नेता भी पीछे चल रहे हैं, जो राज्य में बदलाव के संकेत दे रहे हैं। थरूर ने कहा, “केरल की जनता बधाई की हकदार है, क्योंकि उसने बदलाव का मन बना लिया है।” हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम नतीजों से पहले कोई जश्न नहीं मनाया जाएगा। “सरकार बदलना सबसे जरूरी” Shashi Tharoor ने जोर देते हुए कहा कि सबसे जरूरी है कि राज्य में सरकार बदले और नीतियों में सुधार हो। उन्होंने कहा कि: केरल की आर्थिक स्थिति को सुधारने की जरूरत है निवेश को बढ़ावा देना होगा युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने होंगे क्या कहते हैं संकेत? शुरुआती रुझानों से यह संकेत मिल रहा है कि इस बार केरल में सत्ता परिवर्तन की संभावना बन रही है। हालांकि, अंतिम नतीजों के लिए अभी इंतजार करना होगा, क्योंकि आगे की गिनती में तस्वीर बदल भी सकती है।
कोलकाता, 4 मई: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना शुरू हो चुकी है और शुरुआती रुझानों ने राज्य की सियासत को बेहद रोमांचक बना दिया है। सबसे ज्यादा नजर भवानीपुर सीट पर है, जहां Mamata Banerjee और Suvendu Adhikari के बीच हाई-वोल्टेज मुकाबला चल रहा है। भवानीपुर: ममता vs शुभेंदु भवानीपुर सीट पर शुरुआती रुझानों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। पहले Mamata Banerjee आगे थीं, लेकिन बाद में Suvendu Adhikari ने बढ़त बना ली। इससे साफ है कि यह सीट अंत तक बेहद करीबी मुकाबले वाली रहने वाली है। बहरामपुर: कांग्रेस vs TMC बहरामपुर सीट पर Adhir Ranjan Chowdhury और तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के बीच कड़ी टक्कर है। शुरुआती रुझानों में कभी कांग्रेस तो कभी TMC आगे नजर आ रही है, जिससे यह सीट भी हाई-प्रोफाइल बनी हुई है। आसनसोल दक्षिण: BJP की मजबूत बढ़त आसनसोल दक्षिण सीट पर भाजपा की Agnimitra Paul ने शुरुआती राउंड में ही बड़ी बढ़त बना ली है। अग्निमित्रा पॉल: 10,055 वोट TMC के तापस बनर्जी: 3,784 वोट CPM उम्मीदवार तीसरे स्थान पर यहां भाजपा ने शुरुआती बढ़त के साथ विपक्ष पर दबाव बना दिया है। नंदीग्राम: शुभेंदु का दबदबा नंदीग्राम सीट पर Suvendu Adhikari 3000 से ज्यादा वोटों से आगे चल रहे हैं। यह सीट पहले भी काफी चर्चा में रही है और इस बार भी मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है। अन्य VIP सीटों का हाल सोनारपुर दक्षिण: भाजपा की Rupa Ganguly आगे श्यामपुकुर: भाजपा उम्मीदवार बढ़त पर, TMC पीछे कोलकाता पोर्ट: Firhad Hakim की सीट पर कड़ी नजर दमदम और दमदम उत्तर: कांटे की टक्कर सिलीगुड़ी, खड़गपुर सदर और भांगड़: सभी सीटों पर कड़ा मुकाबला जारी क्या कहते हैं शुरुआती संकेत? शुरुआती रुझानों से साफ है कि इस बार पश्चिम बंगाल में मुकाबला बेहद करीबी है। All India Trinamool Congress, Bharatiya Janata Party, Indian National Congress, Communist Party of India (Marxist) और Indian Secular Front के बीच बहुकोणीय लड़ाई देखने को मिल रही है।
गुवाहाटी, 4 मई: असम विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना सोमवार सुबह 8 बजे से शुरू हो चुकी है और शुरुआती रुझानों में Bharatiya Janata Party (BJP) ने बढ़त बना ली है। 126 सीटों पर हुए इस चुनाव के नतीजे आज यह तय करेंगे कि राज्य में सत्ता किसके हाथ में जाएगी। 9:45 बजे तक रुझान ताजा आंकड़ों के मुताबिक अब तक 58 सीटों के रुझान सामने आ चुके हैं, जिनमें: BJP 36 सीटों पर आगे Indian National Congress (कांग्रेस) 10 सीटों पर बढ़त Bodoland People's Front (BPF) 5 सीटों पर आगे Asom Gana Parishad (AGP) 3 सीटों पर बढ़त Assam Jatiya Parishad (AJP) 3 सीटों पर आगे All India United Democratic Front (AIUDF) 1 सीट पर बढ़त रुझानों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि NDA गठबंधन राज्य में मजबूत स्थिति में है। तेजी से बढ़ी BJP की बढ़त मतगणना के शुरुआती घंटों में BJP की बढ़त लगातार बढ़ती गई: 9:15 बजे तक BJP 8 सीटों पर आगे थी 9:30 बजे तक बढ़त 19 सीटों तक पहुंची 9:45 बजे तक BJP 36 सीटों पर आगे हो गई नेताओं के बयान केंद्रीय मंत्री Sarbananda Sonowal ने दावा किया है कि NDA गठबंधन लगभग 100 सीटों के आसपास पहुंच सकता है और सरकार बनाएगा। वहीं मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma के नेतृत्व में BJP लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी को लेकर आश्वस्त नजर आ रही है। दूसरी ओर, कांग्रेस नेता Gaurav Gogoi ने ‘साइलेंट वोटर’ पर भरोसा जताते हुए परिणाम बदलने की उम्मीद जताई है। मतदान और उम्मीदवार 9 अप्रैल को मतदान हुआ था 85% से अधिक मतदान दर्ज किया गया कुल 2.5 करोड़ मतदाताओं ने हिस्सा लिया 126 सीटों पर 722 उम्मीदवार मैदान में इनमें 59 महिला उम्मीदवार शामिल प्रमुख मुद्दे इस बार चुनाव में CAA-NRC, बांग्लादेशी घुसपैठ, बाढ़, रोजगार, विकास और चाय बागान मजदूरों की स्थिति जैसे मुद्दे हावी रहे। सुरक्षा और मतगणना 35 जिलों के 40 मतगणना केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा के बीच पहले पोस्टल बैलेट और फिर EVM वोटों की गिनती की जा रही है। CAPF और राज्य पुलिस की भारी तैनाती की गई है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में रिकॉर्ड तोड़ मतदान दर्ज किया गया है। लगभग 92% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया, जो राज्य के चुनावी इतिहास में एक बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। इस भारी मतदान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। पहले चरण में कुल 152 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ। पूरे मतदान प्रक्रिया के दौरान कहीं से भी किसी बड़ी हिंसा या अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली, जिससे चुनाव आयोग और सुरक्षा एजेंसियों को राहत मिली है। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस की तैनाती के बीच मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। अमित शाह का बयान: बदलाव का संकेत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उच्च मतदान प्रतिशत को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मतदाताओं का आभार जताते हुए कहा कि यह उत्साह लोकतंत्र की मजबूती और अच्छे शासन की दिशा में बदलाव का संकेत है। शाह ने इसे “भ्रष्टाचार और गुंडाराज के अंत की शुरुआत” बताया और कहा कि जनता ने स्पष्ट संदेश दिया है। राजनीतिक माहौल में बढ़ी हलचल बंपर वोटिंग को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों में अलग-अलग राय सामने आ रही है। भाजपा इसे सत्ता विरोधी लहर और बदलाव की मजबूत संकेत के रूप में देख रही है, जबकि इसे टीएमसी के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति माना जा रहा है। कई विशेषज्ञ इसे भ्रष्टाचार और शासन के मुद्दों पर जनता का जनमत संग्रह भी बता रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था की सराहना गृह मंत्री ने मतदान प्रक्रिया को सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों की भी सराहना की। उनके अनुसार, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के कारण ही इतने बड़े पैमाने पर मतदान बिना किसी बड़ी बाधा के संपन्न हो सका। आगे के चरणों पर नजर पहले चरण के रिकॉर्ड मतदान ने पूरे चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है। अब सभी की नजर आने वाले चरणों पर है, जो राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
चुनाव आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge को प्रधानमंत्री Narendra Modi पर की गई विवादित टिप्पणी को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आयोग का कहना है कि यह बयान आदर्श आचार संहिता (MCC) का उल्लंघन प्रतीत होता है। क्या है पूरा मामला? दरअसल, खरगे ने तमिलनाडु चुनाव प्रचार के अंतिम दिन चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीएम मोदी को “आतंकवादी” कह दिया था। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया और मामले ने तूल पकड़ लिया। चुनाव आयोग ने क्या कहा? Election Commission of India ने अपने नोटिस में कहा कि प्रथम दृष्टया खरगे का बयान आचार संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन करता है। आयोग ने उन्हें 24 घंटे के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि तय समय में जवाब नहीं मिलने पर आयोग एकतरफा कार्रवाई कर सकता है। खरगे की सफाई विवाद बढ़ने के बाद खरगे ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनका आशय पीएम को “आतंकवादी” कहना नहीं था, बल्कि वह यह कहना चाहते थे कि प्रधानमंत्री लोकतांत्रिक व्यवस्था को “डराने-धमकाने” का काम कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्ष को निशाना बना रही है। बीजेपी ने की सख्त कार्रवाई की मांग इस मुद्दे पर बीजेपी नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju, Nirmala Sitharaman और Arjun Ram Meghwal के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर खरगे के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सार्वजनिक माफी की मांग की। बीजेपी ने इस बयान को “अत्यंत आपत्तिजनक” बताते हुए कहा कि यह राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ है। कांग्रेस का पलटवार वहीं कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का आरोप है कि आयोग विपक्ष की शिकायतों पर धीमी कार्रवाई करता है, जबकि बीजेपी से जुड़े मामलों में तेजी दिखाता है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आयोग के रवैये को “संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ” बताया। चुनावी माहौल में बढ़ा विवाद तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव के बीच यह विवाद और गहरा गया है। राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, जिससे चुनावी माहौल और अधिक गरमा गया है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने गुरुवार को तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान मतदाताओं से बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। उन्होंने मतदान को “पवित्र लोकतांत्रिक कर्तव्य” बताते हुए खासकर युवाओं और महिलाओं से रिकॉर्ड संख्या में वोट डालने का आग्रह किया। युवाओं और महिलाओं से खास अपील प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अलग-अलग संदेश जारी करते हुए कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के मतदाता पूरे उत्साह के साथ अपने अधिकार का उपयोग करें और रिकॉर्ड मतदान सुनिश्चित करें। इसी तरह, पश्चिम बंगाल के मतदाताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने चुनाव को “लोकतंत्र का उत्सव” बताया और लोगों से बिना किसी डर के मतदान करने की अपील की। दोनों राज्यों में कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में गुरुवार सुबह से मतदान शुरू हो गया। चुनाव आयोग की देखरेख में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं ताकि शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित हो सके। तमिलनाडु में सभी 234 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में वोटिंग हो रही है, जबकि पश्चिम बंगाल में चुनाव दो चरणों में आयोजित किए जा रहे हैं। पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान जारी है। चुनाव आयोग की तैयारी और प्रक्रिया Election Commission of India के अनुसार, मतदान से पहले सभी बूथों पर मॉक पोल कराए गए ताकि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) की जांच हो सके। पहले चरण में कुल 1,478 उम्मीदवार मैदान में हैं। मतदान प्रक्रिया शाम 6 बजे तक जारी रहेगी, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी। लोकतंत्र के पर्व में भागीदारी का संदेश प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि ज्यादा से ज्यादा मतदान देश के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करता है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे इस “लोकतंत्र के पर्व” में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव को लेकर प्रचार का शोर आज थम जाएगा। चुनाव आयोग ने मंगलवार शाम 5 बजे से ‘साइलेंस पीरियड’ लागू करने का ऐलान किया है। इन राज्यों में 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होना है। क्या होता है साइलेंस पीरियड? ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ की धारा 126 के तहत- मतदान से 48 घंटे पहले प्रचार पर पूरी तरह रोक लग जाती है कोई भी पार्टी या उम्मीदवार रैली, जनसभा, जुलूस डोर-टू-डोर कैंपेन भाषण या प्रचार गतिविधि नहीं कर सकते इसके अलावा- टीवी, सोशल मीडिया, SMS, कॉल के जरिए वोट मांगना भी प्रतिबंधित रहेगा ओपिनियन पोल और सर्वे के प्रसारण पर भी रोक रहेगी बाहरी कार्यकर्ताओं को जाना होगा चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है कि- जो राजनीतिक कार्यकर्ता संबंधित राज्य के मतदाता नहीं हैं उन्हें प्रचार खत्म होते ही इलाका छोड़ना होगा स्टालिन का केंद्र पर हमला तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने पुडुचेरी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा- पुडुचेरी की विधानसभा 14 बार राज्य का दर्जा देने का प्रस्ताव पास कर चुकी है इसके बावजूद केंद्र सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया स्टालिन ने पुडुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा (Statehood) देने की मांग दोहराई। केरल में वोटर्स को जागरूक करने का अनोखा तरीका केरल में मुख्य चुनाव अधिकारी रतन यू. केलकर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है- इसमें वे अधिकारियों के साथ समुद्र किनारे डांस करते नजर आ रहे हैं यह वीडियो युवाओं को वोट डालने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से बनाया गया है अन्य राजनीतिक हलचल अभिषेक बनर्जी (TMC) ने पाकिस्तान को लेकर विवादित बयान दिया लिएंडर पेस को ‘X’ कैटेगरी सुरक्षा मिली (हाल ही में BJP जॉइन की) असम CM हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी ने कांग्रेस के खिलाफ FIR दर्ज कराई तमिलनाडु चुनाव अपडेट 234 सीटों पर 7,000+ उम्मीदवारों ने नामांकन किया नामांकन की जांच: 7 अप्रैल नाम वापसी की अंतिम तारीख: 9 अप्रैल मतदान: 23 अप्रैल
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।