₹20,000 के बजट में नया स्मार्टफोन खरीदना अब पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है, क्योंकि इस प्राइस रेंज में कंपनियां प्रीमियम फीचर्स देने लगी हैं। इसी मुकाबले में हाल ही में लॉन्च हुआ OnePlus Nord CE6 Lite और पहले से मौजूद OPPO K14 आमने-सामने हैं। दोनों स्मार्टफोन बड़ी बैटरी, हाई रिफ्रेश रेट डिस्प्ले और 5G सपोर्ट जैसे फीचर्स के साथ आते हैं।
लेकिन सवाल यही है कि रोजमर्रा इस्तेमाल, गेमिंग, कैमरा और लंबी अवधि के लिहाज से कौन-सा फोन ज्यादा बेहतर डील साबित होता है? आइए जानते हैं दोनों स्मार्टफोन्स के बीच पूरा फर्क।
दोनों स्मार्टफोन्स लगभग एक ही बजट में आते हैं, लेकिन OPPO K14 थोड़ा सस्ता है।
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कीमत के हिसाब से OPPO K14 करीब ₹1,000 से ₹2,000 तक सस्ता पड़ता है, लेकिन फीचर्स के मामले में तस्वीर थोड़ी अलग नजर आती है।
दोनों फोन्स फ्लैट फ्रेम डिजाइन के साथ आते हैं और हाथ में पकड़ने पर प्रीमियम फील देते हैं।
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यहां OnePlus साफ बढ़त बनाता है क्योंकि इसका FHD+ डिस्प्ले ज्यादा शार्प और क्लियर विजुअल देता है। गेमिंग और वीडियो देखने का अनुभव भी बेहतर मिलता है।
अगर आप ज्यादा मजबूत और टिकाऊ फोन चाहते हैं, तो OPPO K14 बेहतर साबित हो सकता है।
IP69 रेटिंग की वजह से OPPO फोन पानी और धूल से ज्यादा बेहतर सुरक्षा देता है।
दोनों स्मार्टफोन्स लगभग समान कैमरा सेटअप के साथ आते हैं।
दिन की रोशनी में दोनों फोन अच्छी तस्वीरें लेते हैं और सोशल मीडिया के लिए बढ़िया आउटपुट देते हैं। हालांकि लो-लाइट फोटोग्राफी में बहुत बड़ा फर्क देखने को नहीं मिलता।
यहीं पर OnePlus थोड़ा मजबूत दिखाई देता है।
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Dimensity 7400 Apex नया और ज्यादा पावरफुल चिपसेट माना जा रहा है। अगर आप:
तो OnePlus Nord CE6 Lite ज्यादा बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
दोनों फोन्स में:
दी गई है। इतनी बड़ी बैटरी के साथ दोनों फोन आराम से पूरा दिन निकाल सकते हैं। सामान्य इस्तेमाल में बैटरी दो दिन तक चलने की संभावना है।
OnePlus का फोन Android 16 के साथ आता है, इसलिए यह थोड़ा ज्यादा फ्यूचर-रेडी नजर आता है।
अगर आप बेहतर डिस्प्ले, ज्यादा दमदार प्रोसेसर और स्मूद परफॉर्मेंस चाहते हैं, तो OnePlus Nord CE6 Lite ज्यादा मजबूत विकल्प साबित होता है।
वहीं अगर आपका बजट थोड़ा कम है और आप मजबूत बिल्ड क्वालिटी व बड़ी बैटरी वाला भरोसेमंद फोन चाहते हैं, तो OPPO K14 भी अच्छा ऑप्शन है।
कुल मिलाकर ऑलराउंड एक्सपीरियंस के मामले में OnePlus Nord CE6 Lite हल्की बढ़त बनाता नजर आता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
AI पर दांव लगा रही Meta, लेकिन कर्मचारी परेशान Meta अपने बिजनेस को तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कंपनी में बदलने में जुटी है। लेकिन कंपनी के अंदर काम कर रहे हजारों कर्मचारी इस बदलाव से खुद को असहज और दबाव में महसूस कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक Meta अब अपने कर्मचारियों की कंप्यूटर गतिविधियों को ट्रैक कर रही है ताकि AI मॉडल को ट्रेन किया जा सके। इसमें यह देखा जा रहा है कि कर्मचारी कंप्यूटर पर क्या टाइप करते हैं, माउस कैसे चलाते हैं और स्क्रीन पर क्या देखते हैं। इस फैसले के बाद कंपनी के अंदर कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई है। कर्मचारियों ने बताया ‘प्राइवेसी का उल्लंघन’ कई कर्मचारियों ने Meta के इस कदम को निजी गोपनीयता में दखल बताया। आंतरिक चैट और पोस्ट्स में कर्मचारियों ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। एक इंजीनियरिंग मैनेजर ने लिखा कि यह उन्हें बेहद असहज महसूस करा रहा है और पूछा कि क्या इससे बाहर निकलने का कोई विकल्प है। इस पर Andrew Bosworth ने जवाब दिया कि कंपनी के लैपटॉप पर काम करने वालों के पास “ऑप्ट-आउट” का विकल्प नहीं होगा। AI इस्तेमाल अब परफॉर्मेंस रिव्यू का हिस्सा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि Meta अब कर्मचारियों के AI टूल इस्तेमाल को उनके प्रदर्शन मूल्यांकन का हिस्सा भी बना रही है। कंपनी अपने 78 हजार कर्मचारियों को AI टूल अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रही है। इसके लिए “AI Transformation Weeks” जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जहां कर्मचारियों को AI एजेंट और AI कोडिंग टूल्स इस्तेमाल करना सिखाया गया। नौकरी कटौती से बढ़ी चिंता AI पर भारी निवेश के बीच कंपनी लागत कम करने के लिए कर्मचारियों की छंटनी भी कर रही है। Meta ने हाल ही में करीब 10 प्रतिशत कर्मचारियों की कटौती की घोषणा की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक लगभग 8 हजार कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है। इससे कंपनी के अंदर डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है। कई कर्मचारी अब नई नौकरी तलाश रहे हैं, जबकि कुछ लोग चाहते हैं कि उन्हें भी छंटनी में शामिल किया जाए ताकि उन्हें सेवरेंस पैकेज मिल सके। ‘क्या हम अपनी जगह लेने वाले AI को ट्रेन कर रहे हैं?’ कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ी चिंता यही है कि कहीं वे खुद अपने AI रिप्लेसमेंट को ट्रेन तो नहीं कर रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि AI कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ा सकता है, लेकिन इससे काम का दबाव और मानसिक तनाव भी तेजी से बढ़ रहा है। Mark Zuckerberg लगातार AI और “Superintelligence” को कंपनी का भविष्य बता रहे हैं। Meta फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म में AI फीचर्स को तेजी से जोड़ रही है और डेटा सेंटर व AI मॉडल पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है। कंपनियों के लिए बड़ा संकेत विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में दूसरी टेक कंपनियां भी इसी तरह AI आधारित बदलाव करेंगी। लेकिन अगर कर्मचारियों की मानसिक स्थिति, प्राइवेसी और नौकरी की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया तो असंतोष और बढ़ सकता है। अब टेक इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि AI और कर्मचारियों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
गर्मी के मौसम में नया स्मार्टफोन, AC, टीवी या होम अप्लायंस खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए बड़ी खबर है। Amazon India ने अपनी Summer Sale शुरू कर दी है, जिसमें प्रीमियम स्मार्टफोन्स, मोबाइल एक्सेसरीज, AC, फ्रिज और कई इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स पर भारी डिस्काउंट दिया जा रहा है। खास बात यह है कि कई फ्लैगशिप डिवाइसेज अपनी लॉन्च कीमत से काफी कम दाम में उपलब्ध हैं। बैंक ऑफर्स, एक्सचेंज बोनस और नो-कॉस्ट EMI जैसी सुविधाओं ने इन डील्स को और भी आकर्षक बना दिया है। Samsung Galaxy S25 Ultra पर बड़ी कीमत कटौती इस सेल में सबसे ज्यादा चर्चा Samsung Galaxy S25 Ultra की हो रही है। यह प्रीमियम फ्लैगशिप स्मार्टफोन पिछले साल करीब ₹1.30 लाख की कीमत में लॉन्च हुआ था, लेकिन अब इसे लगभग ₹94 हजार तक में खरीदा जा सकता है। बैंक डिस्काउंट और अन्य ऑफर्स के बाद यह डील प्रीमियम एंड्रॉयड स्मार्टफोन खरीदने वालों के लिए काफी आकर्षक मानी जा रही है। स्मार्टफोन और मोबाइल एक्सेसरीज पर भी शानदार ऑफर्स सेल के दौरान Samsung, realme, Redmi और Vivo जैसे ब्रांड्स के स्मार्टफोन्स पर भी अच्छी छूट मिल रही है। इसके अलावा मोबाइल एक्सेसरीज पर 40 प्रतिशत तक का डिस्काउंट दिया जा रहा है। चार्जर, ईयरबड्स, पावर बैंक और मोबाइल कवर जैसे प्रोडक्ट्स कम कीमत में उपलब्ध हैं। गेमिंग और कंटेंट क्रिएशन से जुड़े गैजेट्स पर भी ऑफर्स मिल रहे हैं। AC, फ्रिज और टीवी खरीदने का मौका गर्मी बढ़ने के साथ एयर कंडीशनर और कूलिंग प्रोडक्ट्स की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। Summer Sale में विंडो और स्प्लिट AC दोनों कैटेगरी में बड़े ऑफर्स दिए जा रहे हैं। इसके अलावा स्मार्ट टीवी, फ्रिज और किचन अप्लायंसेज पर भी कीमतों में कटौती की गई है। कई प्रोडक्ट्स पर नो-कॉस्ट EMI और एक्सचेंज ऑफर भी मिल रहे हैं, जिससे ग्राहक कम बजट में अपग्रेड कर सकते हैं। बैंक ऑफर और कैशबैक से अतिरिक्त बचत Amazon India इस सेल में चुनिंदा बैंक कार्ड्स पर 10 प्रतिशत तक का इंस्टेंट कैशबैक भी दे रहा है। इससे ग्राहकों को डिस्काउंट के ऊपर अतिरिक्त बचत का मौका मिल रहा है। कई प्रोडक्ट्स पर एक्सचेंज बोनस भी दिया जा रहा है, जिससे पुराने डिवाइस देकर नया प्रोडक्ट कम कीमत में खरीदा जा सकता है। Dashcam और गैजेट्स पर भी भारी छूट इस बार की सेल में Dashcam जैसे ऑटोमोबाइल गैजेट्स पर भी शानदार डील्स मिल रही हैं। कंपनी के मुताबिक कुछ Dashcam मॉडल्स पर 60 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। कार यूजर्स, ट्रैवल व्लॉगर्स और रोड ट्रिप पसंद करने वालों के बीच इन गैजेट्स की मांग लगातार बढ़ रही है, ऐसे में यह ऑफर काफी लोगों को आकर्षित कर सकता है।
भारत में तेजी से बढ़ती ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री पर अब सरकार ने सख्त निगरानी शुरू कर दी है. 1 मई 2026 से लागू हुए नए नियमों के बाद उन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर दबाव बढ़ गया है, जहां खिलाड़ी पैसे लगाकर कैश रिवॉर्ड जीतते थे. सरकार का कहना है कि इन नियमों का मकसद लोगों को आर्थिक नुकसान से बचाना, बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अवैध गेमिंग नेटवर्क पर रोक लगाना है. गेमिंग कंपनियों के लिए नए नियम लागू सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर को तीन श्रेणियों में बांटा है: मनी गेमिंग कॉम्पिटिटिव ईस्पोर्ट्स कैजुअल गेमिंग इस वर्गीकरण के जरिए अब यह तय करना आसान होगा कि कौन-सा प्लेटफॉर्म किस तरह की सेवा दे रहा है और कहां नियमों का उल्लंघन हो रहा है. कैश रिवॉर्ड वाले गेम्स पर फोकस सरकार की सबसे बड़ी चिंता उन गेम्स को लेकर है, जिनमें खिलाड़ी पैसे जमा कर कैश प्राइज जीतते हैं. पिछले कुछ वर्षों में ऐसे गेम्स से जुड़े आर्थिक नुकसान और लत की कई शिकायतें सामने आई थीं. इसी वजह से अब इन प्लेटफॉर्म्स पर सख्त रेगुलेशन लागू किया गया है. नई रेगुलेटरी बॉडी करेगी निगरानी सरकार ने “ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया” नाम की नई संस्था बनाई है. यह संस्था: गेमिंग प्लेटफॉर्म्स की मॉनिटरिंग करेगी नए गेम्स को मंजूरी देगी अवैध और फर्जी गेमिंग ऐप्स पर कार्रवाई करेगी रिपोर्ट्स के मुताबिक, किसी भी नए गेम को लॉन्च करने से पहले 90 दिनों के भीतर रेगुलेटरी अप्रूवल लेना जरूरी होगा. बच्चों की सुरक्षा पर खास जोर नए नियमों के तहत कंपनियों को: एज वेरिफिकेशन सिस्टम लागू करना होगा पैरेंटल कंट्रोल फीचर देना होगा गेमिंग लिमिट जैसी सुविधाएं जोड़नी होंगी सरकार का मानना है कि इससे बच्चों में गेमिंग की लत और आर्थिक नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी. इन्फ्लुएंसर्स और विज्ञापनों पर भी सख्ती अब सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स बैन या अवैध गेम्स का प्रमोशन नहीं कर सकेंगे. पिछले कुछ सालों में कई गेमिंग ऐप्स ने बड़े इन्फ्लुएंसर्स के जरिए यूजर्स को आकर्षित किया था. नए नियमों के बाद ऐसे प्रचार पर रोक लग सकती है. इसके अलावा ईस्पोर्ट्स संगठनों के लिए 10 साल का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन भी जरूरी कर दिया गया है. गेमिंग इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियमों से ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. अवैध प्लेटफॉर्म्स पर दबाव बढ़ेगा भरोसेमंद कंपनियों को पारदर्शी तरीके से काम करने का मौका मिलेगा कैश रिवॉर्ड आधारित बिजनेस मॉडल वाली कंपनियों को नुकसान हो सकता है सरकार का दावा है कि यह कदम खिलाड़ियों की सुरक्षा और जिम्मेदार गेमिंग को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है.