नई दिल्ली, एजेंसियां। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनी OpenAI के पहले उपभोक्ता हार्डवेयर डिवाइस को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी अपने पहले AI गैजेट के रूप में एक स्क्रीन-फ्री स्मार्ट स्पीकर लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। यह डिवाइस पारंपरिक स्मार्ट स्पीकर से अलग होगा और ChatGPT की मदद से अधिक प्राकृतिक और इंसानों जैसी बातचीत करने में सक्षम होगा। कैमरा और सेंसर से होगा लैस रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस AI डिवाइस में कैमरा और कई सेंसर दिए जाएंगे, जो आसपास के माहौल को समझने में मदद करेंगे। डिवाइस यूजर के संदर्भ के अनुसार जवाब देने, स्मार्ट होम डिवाइस नियंत्रित करने, मैसेज भेजने, मीडिया चलाने और अन्य AI आधारित कार्य करने में सक्षम होगा। जॉनी आइव की टीम कर रही है डिजाइन इस प्रोजेक्ट पर Apple के पूर्व मुख्य डिजाइनर जॉनी आइव की टीम काम कर रही है। OpenAI ने पिछले वर्ष उनकी AI हार्डवेयर कंपनी io का अधिग्रहण किया था। इसके बाद से कंपनी उपभोक्ता AI हार्डवेयर विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। 2027 में लॉन्च होने की संभावना ब्लूमबर्ग और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, OpenAI इस डिवाइस को 2027 में बाजार में उतार सकती है। हालांकि कंपनी ने अब तक इसके डिजाइन, कीमत या लॉन्च डेट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। AI हार्डवेयर बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा यदि यह डिवाइस लॉन्च होती है, तो OpenAI सीधे AI हार्डवेयर बाजार में कदम रखेगी और Amazon Echo, Google Nest जैसे स्मार्ट स्पीकर के साथ नई प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। कंपनी का लक्ष्य ऐसा AI डिवाइस तैयार करना है, जो स्मार्टफोन पर निर्भरता कम करते हुए अधिक स्वाभाविक और सहज उपयोग का अनुभव दे सके।
मुंबई, एजेंसियां। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बड़ा दांव खेलते हुए 8,900 AI इंजीनियरों की नई टीम बनाने का ऐलान किया है। कंपनी का उद्देश्य एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए AI आधारित समाधान तैयार करना और वैश्विक स्तर पर OpenAI, Microsoft, Amazon तथा Anthropic जैसी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करना है। AI इंजीनियर सीधे ग्राहकों के साथ करेंगे काम TCS के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के. कृतिवासन ने बताया कि नई टीम में शामिल इंजीनियर केवल सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे सीधे ग्राहकों के साथ मिलकर उनकी जरूरत के मुताबिक AI समाधान विकसित करेंगे। कंपनी इन्हें "Forward Deployed Engineers" के रूप में तैयार कर रही है, ताकि AI प्रोजेक्ट्स को तेजी से लागू किया जा सके। AI कारोबार को नई ऊंचाई देने की रणनीति कंपनी का कहना है कि आने वाले वर्षों में AI सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ेगी। इसी को देखते हुए TCS बड़े पैमाने पर अपने कर्मचारियों को AI, मशीन लर्निंग और जनरेटिव AI तकनीकों में प्रशिक्षित कर रही है। कंपनी पहले ही लाखों कर्मचारियों को AI से जुड़ी स्किल्स की ट्रेनिंग दे चुकी है और अब विशेषज्ञ इंजीनियरों की अलग टीम तैयार की जा रही है। वैश्विक AI बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा विशेषज्ञों का मानना है कि TCS का यह कदम भारतीय आईटी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। AI तकनीक में बढ़ते निवेश के साथ भारतीय कंपनियां अब केवल आउटसोर्सिंग तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि वैश्विक AI नवाचार और एंटरप्राइज समाधान के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी कर रही हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत सरकार ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों और सरकारी विभागों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर नई सलाह जारी की है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाली इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) और संबंधित एजेंसियों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े कार्यों में OpenAI, Anthropic और अन्य विदेशी AI मॉडल के उपयोग में सावधानी बरतने को कहा है। सरकार का जोर स्वदेशी AI समाधान विकसित करने पर है। संवेदनशील डेटा की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता सरकार ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील सरकारी डेटा से जुड़े कार्यों में विदेशी AI मॉडल का उपयोग करने से पहले विस्तृत सुरक्षा मूल्यांकन किया जाना चाहिए। मंत्रालयों को निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी AI टूल का इस्तेमाल करते समय डेटा गोपनीयता, साइबर सुरक्षा और भारतीय कानूनों का पूरा पालन सुनिश्चित करें। स्वदेशी AI मॉडल को मिलेगा बढ़ावा सरकार का मानना है कि भारत को लंबे समय में घरेलू AI मॉडल और तकनीकों पर अधिक निर्भर होना चाहिए। इसी दिशा में IndiaAI Mission के तहत भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स को उन्नत AI मॉडल विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे डेटा देश के भीतर सुरक्षित रहेगा और विदेशी प्लेटफॉर्म पर निर्भरता कम होगी। AI के जिम्मेदार उपयोग पर जोर विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार AI तकनीक का विरोध नहीं कर रही है, बल्कि उसका सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना चाहती है। आने वाले समय में AI से जुड़े स्पष्ट दिशा-निर्देश और सुरक्षा मानक जारी किए जा सकते हैं, ताकि सरकारी संस्थानों में AI का उपयोग सुरक्षित और प्रभावी ढंग से किया जा सके।
शंघाई, एजेंसियां। चीन की AI कंपनी StepFun ने दुनिया का पहला एजेंटिक AI स्मार्टफोन "STEPX Neo" लॉन्च करने का दावा किया है। यह फोन पारंपरिक स्मार्टफोन से अलग है क्योंकि इसमें Step AOS ऑपरेटिंग सिस्टम और Step Amoo AI एजेंट दिया गया है, जो केवल सवालों के जवाब नहीं देता बल्कि यूज़र के लिए कई काम खुद पूरा कर सकता है। Step Amoo करेगा मल्टी-स्टेप काम अपने आप फोन का सबसे बड़ा आकर्षण Step Amoo AI एजेंट है। यूज़र अगर सिर्फ एक निर्देश देगा, जैसे "वीकेंड ट्रिप बुक कर दो" या "रेस्टोरेंट में टेबल बुक कर दो", तो Amoo खुद अलग-अलग ऐप्स खोलकर टिकट बुक करेगा, होटल खोजेगा, पेमेंट करेगा और पूरा काम बिना बार-बार निर्देश दिए पूरा कर देगा। यह Alipay, Meituan, Didi और Baidu समेत 10 से अधिक बड़े प्लेटफॉर्म के साथ काम कर सकता है। बिना इंटरनेट भी करेगा कई AI फीचर कंपनी के अनुसार, STEPX Neo में ऑन-डिवाइस AI मॉडल दिया गया है, जिससे कई AI फीचर बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी काम करेंगे। जरूरत पड़ने पर फोन क्लाउड AI का भी उपयोग करेगा। Step AOS को Android, Linux और RTOS की नींव पर तैयार किया गया है ताकि AI एजेंट को सिस्टम के हर हिस्से तक पहुंच मिल सके। AI स्मार्टफोन की नई दौड़ हुई तेज STEPX Neo के लॉन्च के साथ AI स्मार्टफोन बाजार में नई प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, OpenAI, Apple और अन्य बड़ी टेक कंपनियां भी AI-केंद्रित स्मार्टफोन पर काम कर रही हैं। हालांकि StepFun का दावा है कि उसने दुनिया का पहला मास-मार्केट एजेंटिक AI फोन पेश कर इस दौड़ में बढ़त बना ली है।
कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने अपने खिलाफ दर्ज कथित नफरती भाषण के मामले में गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने अदालत से जांच के दौरान किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने और पुलिस पूछताछ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराने की अनुमति देने की मांग की है। मामले पर हाईकोर्ट 15 जुलाई को सुनवाई करेगा। गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक की मांग महुआ मोइत्रा ने अपनी याचिका में कहा है कि जांच के दौरान पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। इसलिए उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि अंतिम निर्णय तक उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न की जाए। इसके साथ ही उन्होंने व्यक्तिगत रूप से थाने में उपस्थित होने से छूट देने और वर्चुअल माध्यम से पूछताछ की अनुमति देने की भी मांग की है। हाईकोर्ट ने सुनवाई की तारीख तय की मामले का उल्लेख किए जाने पर न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि याचिका पर 15 जुलाई को सुनवाई की जाएगी। अदालत ने महुआ मोइत्रा के वकील को सभी प्रतिवादियों को नोटिस भेजने का निर्देश भी दिया है। क्या है पूरा मामला? महुआ मोइत्रा के वकील ने अदालत को बताया कि हाल ही में नदिया जिले की एक निचली अदालत में पेशी के दौरान कुछ लोगों ने चेहरा ढककर उन पर अंडे फेंके और विरोध प्रदर्शन किया था। इस घटना के बाद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर कथित रूप से टिप्पणी की थी कि "जो लोग अपना चेहरा ढकते हैं, उन्हें बुर्का पहन लेना चाहिए।" इसी बयान को लेकर उनके खिलाफ नफरती भाषण का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस नोटिस पर जताई आपत्ति याचिका में कहा गया है कि पुलिस लगातार उन्हें थाने में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए नोटिस भेज रही है। महुआ मोइत्रा की ओर से आशंका जताई गई है कि यदि वह थाने जाती हैं तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है या उनके साथ दोबारा हमला हो सकता है। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से व्यक्तिगत उपस्थिति के बजाय ऑनलाइन पूछताछ की अनुमति देने की मांग की है। 15 जुलाई की सुनवाई पर टिकी नजर अब इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट 15 जुलाई को सुनवाई करेगा। अदालत यह तय करेगी कि महुआ मोइत्रा को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी जाए या नहीं और क्या उन्हें वर्चुअल माध्यम से पूछताछ की अनुमति मिल सकती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती जा रही है। इसी बीच OpenAI ने अपने नए फ्लैगशिप AI मॉडल GPT-5.6 Sol को पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह मॉडल स्वतंत्र Design Arena बेंचमार्क में Anthropic के Claude Fable 5 से आगे निकल गया है। इसके साथ ही OpenAI ने कहा कि GPT-5.6 Sol को कोडिंग, तर्क क्षमता (Reasoning), सुरक्षा और कई अन्य AI कार्यों में भी पहले के मुकाबले बेहतर बनाया गया है। Design Arena रैंकिंग में हासिल किया पहला स्थान OpenAI के अध्यक्ष ग्रेग ब्रॉकमैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए इसे कंपनी के लिए एक बड़ा पड़ाव बताया। Design Arena द्वारा जारी फ्रंट-एंड डिज़ाइन लीडरबोर्ड के अनुसार, GPT-5.6 Sol ने 1353 Elo स्कोर के साथ पहला स्थान हासिल किया। वहीं, GLM 5.2 1351 अंकों के साथ दूसरे और Claude Fable 5 1345 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। यह रैंकिंग AI मॉडल्स की वेब डिज़ाइन और फ्रंट-एंड डेवलपमेंट क्षमता के आधार पर तैयार की जाती है। क्या है GPT-5.6 फैमिली? OpenAI ने GPT-5.6 सीरीज़ के तहत तीन नए मॉडल लॉन्च किए हैं- GPT-5.6 Sol – जटिल कोडिंग, उन्नत रीजनिंग और AI एजेंट आधारित कार्यों के लिए। GPT-5.6 Terra – रोजमर्रा के कार्यों और संतुलित प्रदर्शन के लिए। GPT-5.6 Luna – कम लागत और तेज़ स्पीड वाले AI कार्यों के लिए। फिलहाल इन मॉडलों को सीमित संख्या में चुनिंदा डेवलपर्स और एंटरप्राइज पार्टनर्स के लिए उपलब्ध कराया गया है। आने वाले हफ्तों में इन्हें व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराया जाएगा। नए फीचर्स से लैस है GPT-5.6 Sol OpenAI के अनुसार, GPT-5.6 Sol में कई नए फीचर्स शामिल किए गए हैं। इनमें प्रमुख हैं- Maximum Reasoning Mode, जो जटिल समस्याओं को बेहतर तरीके से हल करने में सक्षम है। Ultra Mode, जिसमें सब-एजेंट्स की मदद से कई चरणों वाले कार्य पूरे किए जा सकते हैं। वैज्ञानिक शोध, विशेषकर बायोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी से जुड़े कार्यों में बेहतर प्रदर्शन। कम टोकन इस्तेमाल करते हुए अधिक प्रभावी परिणाम देने की क्षमता। सुरक्षा पर भी दिया गया खास ध्यान OpenAI का कहना है कि GPT-5.6 में सुरक्षा को पहले से अधिक मजबूत बनाया गया है। कंपनी के मुताबिक, मॉडल को साइबर दुरुपयोग, संवेदनशील जैविक जानकारी के गलत इस्तेमाल और सुरक्षा उपायों को दरकिनार करने जैसी संभावित चुनौतियों से बचाने के लिए व्यापक परीक्षण किए गए हैं। OpenAI ने बताया कि मॉडल की सुरक्षा जांच के लिए लाखों GPU घंटों तक ऑटोमेटेड रेड-टीमिंग और विशेषज्ञों द्वारा परीक्षण किए गए। कब मिलेगा GPT-5.6? फिलहाल GPT-5.6 API और Codex के जरिए चुनिंदा पार्टनर्स के लिए उपलब्ध है। OpenAI ने संकेत दिया है कि आने वाले कुछ सप्ताह में इसे ChatGPT प्लेटफॉर्म पर भी चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा। कितनी होगी कीमत? OpenAI ने GPT-5.6 मॉडल्स की API कीमतें भी घोषित की हैं- GPT-5.6 Sol – 5 डॉलर प्रति मिलियन इनपुट टोकन और 30 डॉलर प्रति मिलियन आउटपुट टोकन GPT-5.6 Terra – 2.5 डॉलर प्रति मिलियन इनपुट और 15 डॉलर प्रति मिलियन आउटपुट टोकन GPT-5.6 Luna – 1 डॉलर प्रति मिलियन इनपुट और 6 डॉलर प्रति मिलियन आउटपुट टोकन AI प्रतिस्पर्धा में बढ़ी टक्कर GPT-5.6 Sol के लॉन्च के साथ OpenAI और Anthropic के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होने की उम्मीद है। बेहतर डिज़ाइन क्षमता, उन्नत कोडिंग, मजबूत रीजनिंग और सुरक्षा फीचर्स के साथ OpenAI अपने नए मॉडल को डेवलपर्स और एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए अधिक सक्षम विकल्प के रूप में पेश कर रहा है।
सैन फ्रांसिस्को, एजेंसियां। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में बड़ी घोषणा करते हुए OpenAI ने अपनी नई GPT-5.6 मॉडल फैमिली लॉन्च कर दी है। इस नई श्रृंखला में Sol, Terra और Luna नाम के तीन अलग-अलग मॉडल शामिल हैं, जिन्हें अलग-अलग जरूरतों और उपयोगकर्ताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। कंपनी का कहना है कि नए मॉडल पहले की तुलना में अधिक तेज, सक्षम, सुरक्षित और किफायती हैं। तीन मॉडल, तीन अलग-अलग क्षमताएं OpenAI के अनुसार, GPT-5.6 Sol सबसे शक्तिशाली मॉडल है, जिसे जटिल कोडिंग, वैज्ञानिक शोध, साइबर सुरक्षा और गहन विश्लेषण जैसे कार्यों के लिए डिजाइन किया गया है। Terra रोजमर्रा के पेशेवर कार्यों के लिए संतुलित प्रदर्शन देता है, जबकि Luna सबसे तेज और कम लागत वाला मॉडल है, जो बड़े पैमाने पर उपयोग और तेज प्रतिक्रिया के लिए तैयार किया गया है। बेहतर प्रदर्शन और कम लागत का दावा कंपनी का दावा है कि GPT-5.6 फैमिली पहले की तुलना में कम टोकन खर्च कर बेहतर परिणाम देने में सक्षम है। खासतौर पर Sol मॉडल को सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, कंप्यूटर उपयोग, साइबर सुरक्षा और वैज्ञानिक कार्यों में उल्लेखनीय सुधार के साथ पेश किया गया है। Terra और Luna मॉडल भी कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाला प्रदर्शन देने के लिए विकसित किए गए हैं। सुरक्षा पर भी खास जोर OpenAI ने बताया कि GPT-5.6 Sol में अब तक का सबसे मजबूत सुरक्षा ढांचा जोड़ा गया है। मॉडल को कई सप्ताह तक रेड-टीमिंग और सुरक्षा परीक्षणों से गुजारा गया ताकि साइबर दुरुपयोग और अन्य जोखिमों को कम किया जा सके। फिलहाल चरणबद्ध तरीके से हो रहा रोलआउट OpenAI ने GPT-5.6 फैमिली का रोलआउट चरणबद्ध तरीके से शुरू किया है। शुरुआत में इसे ChatGPT, Codex और API के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है तथा आने वाले दिनों में इसका दायरा और बढ़ाया जाएगा। AI इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा होगी और तेज विशेषज्ञों का मानना है कि GPT-5.6 के लॉन्च के बाद OpenAI, Google, Anthropic और xAI जैसी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होगी। नए मॉडल एंटरप्राइज, डेवलपर्स और रिसर्च सेक्टर के लिए AI क्षमताओं को एक नए स्तर पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
सैन फ्रांसिस्को, एजेंसियां। अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए OpenAI ने अपने नए वॉयस मॉडल GPT-Live-1 को लॉन्च कर दिया है। यह मॉडल ChatGPT Voice को पहले की तुलना में अधिक स्वाभाविक, तेज और इंसानों जैसी बातचीत करने में सक्षम बनाता है। कंपनी ने इसके साथ GPT-Live-1 mini भी पेश किया है, जिसे मुफ्त उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। एक साथ सुनेगा भी और बोलेगा भी GPT-Live-1 की सबसे बड़ी खासियत इसकी फुल-डुप्लेक्स तकनीक है। यानी अब ChatGPT उपयोगकर्ता की बात पूरी होने का इंतजार किए बिना बातचीत के दौरान सुन और जवाब दे सकेगा। इससे बातचीत अधिक स्वाभाविक लगेगी और बीच में रुकावटें भी कम होंगी। जवाब देते हुए करेगा वेब सर्च और रीजनिंग OpenAI के अनुसार, यदि किसी सवाल के लिए वेब सर्च या गहन विश्लेषण की जरूरत होगी, तो GPT-Live-1 बैकग्राउंड में कंपनी के नवीनतम मॉडल की मदद लेकर जवाब तैयार करेगा। इस दौरान बातचीत का प्रवाह भी बना रहेगा। किसे मिलेगा नया फीचर? कंपनी ने बताया कि GPT-Live-1 को दुनिया भर में Go, Plus और Pro प्लान के उपयोगकर्ताओं के लिए डिफॉल्ट वॉयस मॉडल के रूप में जारी किया जा रहा है। वहीं Free प्लान के यूजर्स को GPT-Live-1 mini मिलेगा। यह अपडेट ChatGPT.com, Android और iOS पर चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जा रहा है। रीयल-टाइम ट्रांसलेशन समेत कई नई खूबियां नए वॉयस मॉडल में रीयल-टाइम अनुवाद, अधिक प्राकृतिक प्रतिक्रिया, बीच में पूछे गए सवालों को समझने की क्षमता और कम रुकावट जैसी कई नई सुविधाएं शामिल की गई हैं। इससे भाषा सीखने, यात्रा, पढ़ाई और रोजमर्रा के कामों में AI का उपयोग पहले से अधिक आसान हो जाएगा। वॉयस AI को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी OpenAI का कहना है कि GPT-Live-1 सिर्फ वॉयस अपग्रेड नहीं, बल्कि इंसानों और AI के बीच अधिक सहज संवाद की दिशा में एक बड़ा कदम है। कंपनी का लक्ष्य भविष्य में ऐसे AI सिस्टम विकसित करना है जो लंबी और जटिल बातचीत को भी स्वाभाविक तरीके से संभाल सकें।
सैन फ्रांसिस्को, एजेंसियां। Meta ने अपना नया AI इमेज जनरेशन मॉडल 'Muse Image' लॉन्च कर दिया है। यह मॉडल Meta AI में उपलब्ध होगा और यूजर्स को केवल टेक्स्ट प्रॉम्प्ट ही नहीं, बल्कि फोटो, स्केच और नोट्स के आधार पर भी नई AI तस्वीरें बनाने और एडिट करने की सुविधा देगा। कंपनी ने इसे अपने नए Meta Superintelligence Labs का पहला इमेज जनरेशन मॉडल बताया है। Instagram और WhatsApp से होगी शुरुआत Meta के अनुसार, Muse Image की मदद से यूजर्स Instagram Stories के लिए 30 से अधिक नए AI इफेक्ट्स का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके अलावा WhatsApp में Meta AI चैट के जरिए भी AI इमेज बनाई जा सकेगी। आने वाले महीनों में यह फीचर Facebook और Messenger पर भी उपलब्ध कराया जाएगा। AI से फोटो एडिट करना होगा और आसान नया मॉडल जटिल निर्देशों को समझने, कई तस्वीरों को मिलाकर नई इमेज तैयार करने और स्केच या ड्रॉइंग के जरिए इमेज एडिट करने में सक्षम है। Meta का दावा है कि यह मॉडल पहले की तुलना में अधिक सटीक, तेज और बेहतर गुणवत्ता वाली तस्वीरें तैयार करेगा। कंपनी ने Muse Video नाम के AI वीडियो मॉडल की शुरुआती झलक भी पेश की है। AI रेस में Google और OpenAI को चुनौती Muse Image के लॉन्च के साथ Meta ने AI इमेज जनरेशन की दौड़ में OpenAI और Google को सीधी चुनौती दी है। कंपनी का कहना है कि आने वाले समय में यह तकनीक क्रिएटर्स, विज्ञापनदाताओं और आम यूजर्स के लिए कंटेंट तैयार करने का तरीका पूरी तरह बदल सकती है।
सैन फ्रांसिस्को, एजेंसियां। टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट ने एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए 'Microsoft Frontier Company' नाम से नई AI कंपनी लॉन्च करने की घोषणा की है। कंपनी इस पहल में शुरुआती चरण में 2.5 अरब डॉलर (लगभग 21,000 करोड़ रुपये) का निवेश करेगी। इसका उद्देश्य विभिन्न उद्योगों की कंपनियों को उनकी जरूरत के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समाधान अपनाने और उससे बेहतर व्यावसायिक परिणाम हासिल करने में मदद करना है। 6000 इंजीनियर और विशेषज्ञ देंगे सहायता माइक्रोसॉफ्ट ने बताया कि नई कंपनी के तहत 6,000 इंजीनियर और उद्योग विशेषज्ञ ग्राहकों के साथ सीधे काम करेंगे। ये टीमें कंपनियों की जरूरतों के अनुसार AI मॉडल चुनने, उन्हें लागू करने और उनके मौजूदा डेटा व सिस्टम के साथ एकीकृत करने में मदद करेंगी। सिर्फ Microsoft AI नहीं, अन्य मॉडल भी होंगे उपलब्ध माइक्रोसॉफ्ट की नई कंपनी केवल अपने AI टूल्स तक सीमित नहीं रहेगी। ग्राहक जरूरत के अनुसार OpenAI, Anthropic, ओपन-सोर्स और अन्य AI मॉडलों का भी उपयोग कर सकेंगे। कंपनी का कहना है कि उसका लक्ष्य ग्राहकों को सबसे उपयुक्त AI समाधान उपलब्ध कराना है। बड़ी कंपनियां होंगी शुरुआती ग्राहक माइक्रोसॉफ्ट ने बताया कि Unilever और Novo Nordisk जैसी वैश्विक कंपनियां इस नई पहल की शुरुआती ग्राहकों में शामिल होंगी। कंपनी का दावा है कि इससे AI लागू करने की लागत और समय दोनों कम होंगे तथा कंपनियों को निवेश पर बेहतर रिटर्न मिलेगा। एंटरप्राइज AI बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा विशेषज्ञों का मानना है कि Microsoft Frontier Company के लॉन्च से एंटरप्राइज AI सेवाओं के बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज होगी। माइक्रोसॉफ्ट का यह कदम उन कंपनियों को आकर्षित करने की कोशिश है जो अलग-अलग AI मॉडलों का इस्तेमाल कर अपने कारोबार में AI का अधिक प्रभावी उपयोग करना चाहती हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही OpenAI ने भारत में अपनी मौजूदगी को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। ChatGPT विकसित करने वाली कंपनी ने उबर इंडिया और साउथ एशिया के प्रमुख प्रभजीत सिंह को भारत का पहला मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है। वह सितंबर 2026 से नई जिम्मेदारी संभालेंगे। यह पहली बार है जब OpenAI ने भारत में शीर्ष स्तर पर नेतृत्व नियुक्त किया है। भारत में बिजनेस विस्तार की जिम्मेदारी OpenAI के अनुसार, प्रभजीत सिंह भारत में कंपनी के सभी प्रमुख कारोबारी संचालन की कमान संभालेंगे। वह एशिया-प्रशांत (APAC) प्रमुख किरन मणी को रिपोर्ट करेंगे। उनकी जिम्मेदारियों में भारत में कंज्यूमर ग्रोथ बढ़ाना, विभिन्न उद्योगों में AI के उपयोग को विस्तार देना, सरकारी नीतियों के साथ समन्वय स्थापित करना और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मजबूत करना शामिल होगा। OpenAI के लिए क्यों अहम है भारत भारत OpenAI के लिए अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा यूजर मार्केट बन चुका है। देश में शिक्षा, शोध, कोडिंग और पेशेवर कार्यों में ChatGPT का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में कंपनी भारत में अपनी व्यावसायिक गतिविधियों और साझेदारियों को और मजबूत करना चाहती है। आईआईटी खड़गपुर और आईआईएम अहमदाबाद से पढ़ाई कर चुके प्रभजीत सिंह को भारतीय बाजार और कॉर्पोरेट जगत का व्यापक अनुभव है, जिसका लाभ OpenAI को मिलने की उम्मीद है। उबर में 11 साल का सफल कार्यकाल प्रभजीत सिंह ने OpenAI में शामिल होने से पहले उबर इंडिया और साउथ एशिया के प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने उबर में लगभग 11 वर्षों तक काम किया और उनके नेतृत्व में कंपनी ने महानगरों के साथ-साथ छोटे शहरों तक कैब, ऑटो और बाइक सेवाओं का विस्तार किया। उबर ने जताया आभार उबर ने प्रभजीत सिंह के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारत कंपनी के लिए सबसे महत्वपूर्ण बाजारों में से एक बना रहेगा। कंपनी ने भरोसा जताया कि नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद भारत में इनोवेशन और मोबिलिटी सेवाओं का विस्तार लगातार जारी रहेगा। वहीं, OpenAI की यह नियुक्ति भारतीय AI बाजार में उसके दीर्घकालिक निवेश और रणनीतिक विस्तार का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है।
AI और नौकरियों पर नई बहस कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को लेकर पिछले कुछ वर्षों से यह आशंका जताई जा रही थी कि यह तकनीक लाखों लोगों की नौकरियां खत्म कर सकती है। तकनीकी विशेषज्ञों और उद्योग जगत के कई नेताओं ने चेतावनी दी थी कि AI कई पेशों को पूरी तरह बदल देगा और रोजगार बाजार पर बड़ा असर डालेगा। लेकिन अब इस बहस में नया मोड़ आता दिखाई दे रहा है। OpenAI के सीईओ Sam Altman ने हाल ही में कहा है कि वास्तविक स्थिति उन आशंकाओं से अलग हो सकती है जो अब तक सामने आती रही हैं। उनके अनुसार, जिन कंपनियों ने AI को सबसे अधिक अपनाया है, वे ही सबसे ज्यादा कर्मचारियों की भर्ती भी कर रही हैं। "AI अपनाने वाली कंपनियां भर्ती बढ़ा रही हैं" एक साक्षात्कार के दौरान सैम ऑल्टमैन ने कहा कि उनके अनुभव में AI का व्यापक उपयोग करने वाली कंपनियां अपने कार्यबल को कम नहीं कर रहीं, बल्कि नए लोगों को नियुक्त कर रही हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि जो कंपनियां छंटनी के लिए AI को जिम्मेदार ठहरा रही हैं, उनमें से कई वास्तव में AI में सबसे कम निवेश कर रही हैं। ऑल्टमैन के मुताबिक, कई मामलों में AI को कर्मचारियों की कटौती का कारण बताना वास्तविक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शाता। AI कर्मचारियों की जगह नहीं, उनकी क्षमता बढ़ा रहा ऑल्टमैन का कहना है कि AI को लेकर उनकी अपनी सोच भी समय के साथ बदली है। OpenAI के कोडिंग टूल्स और अन्य AI मॉडल्स के उपयोग को करीब से देखने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि यह तकनीक कुछ कार्यों में बेहद सक्षम है, लेकिन अभी भी कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इसकी सीमाएं मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि AI छोटे और विशिष्ट कार्यों को तेजी से पूरा कर सकता है, लेकिन लंबी अवधि की योजना बनाना, जटिल परियोजनाओं का प्रबंधन करना और लगातार निगरानी जैसे कार्य अभी भी इंसानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाए रखते हैं। क्या छंटनी के लिए AI को बहाना बनाया जा रहा है? ऑल्टमैन ने "AI वॉशिंग" शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि कई बार कंपनियां कर्मचारियों की छंटनी को AI से जोड़ देती हैं, जबकि इसके पीछे अन्य व्यावसायिक कारण भी हो सकते हैं। उनका मानना है कि AI का रोजगार बाजार पर प्रभाव जरूर पड़ेगा, लेकिन फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म कर रहा है। उनके अनुसार, AI का दीर्घकालिक प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है और इस पर गंभीर अध्ययन की आवश्यकता है। हम समाज में बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं ऑल्टमैन ने स्वीकार किया कि AI को लेकर लोगों की चिंताएं पूरी तरह निराधार नहीं हैं। उनका कहना है कि दुनिया एक ऐसे तकनीकी बदलाव को देख रही है जो लंबे समय में समाज, अर्थव्यवस्था और कार्यस्थलों को गहराई से प्रभावित कर सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि AI की वर्तमान क्षमताओं को लेकर कई बार अतिशयोक्तिपूर्ण दावे किए गए हैं, जिससे लोगों के बीच अनावश्यक भय भी पैदा हुआ। OpenAI ने भी मानी अपनी गलती OpenAI प्रमुख ने स्वीकार किया कि उनकी कंपनी के कुछ पुराने दावों ने भी नौकरी खोने की आशंकाओं को बढ़ावा दिया हो सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय कंपनी ने दावा किया था कि उसका मॉडल कई पेशों में पेशेवरों से बेहतर प्रदर्शन करता है। अब ऑल्टमैन का कहना है कि उस दावे को अधिक स्पष्ट तरीके से प्रस्तुत किया जाना चाहिए था। उनके अनुसार, AI पूरे पेशे में नहीं बल्कि उन पेशों से जुड़े कुछ विशेष कार्यों में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। AI पर चर्चा हो रही अधिक संतुलित AI तकनीक के तेजी से विकास के बीच अब उद्योग जगत में इस विषय पर अधिक संतुलित चर्चा देखने को मिल रही है। जहां एक ओर AI से जुड़े जोखिमों को स्वीकार किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके जरिए उत्पादकता बढ़ाने, नए अवसर पैदा करने और व्यवसायों को विस्तार देने की संभावनाओं पर भी जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI नौकरियों को पूरी तरह खत्म करने के बजाय कार्य करने के तरीकों को बदल सकता है, जिससे नए कौशल और नई भूमिकाओं की मांग बढ़ेगी।
TeamPCP Hacker Group: दुनिया भर में साइबर सुरक्षा एजेंसियों और टेक कंपनियों की चिंता बढ़ाने वाला हैकर समूह TeamPCP तेजी से सुर्खियों में आ रहा है। पिछले कुछ महीनों में इस समूह ने सैकड़ों ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर और डेवलपर टूल्स को संक्रमित कर बड़े पैमाने पर सप्लाई चेन हमले किए हैं। हाल ही में GitHub पर हुए डेटा ब्रीच के पीछे भी इसी समूह का हाथ माना जा रहा है, जिसने टेक इंडस्ट्री में नई चिंता पैदा कर दी है। GitHub डेटा ब्रीच के बाद चर्चा में आया TeamPCP कोड होस्टिंग प्लेटफॉर्म GitHub ने हाल ही में पुष्टि की कि उसके हजारों आंतरिक रिपॉजिटरी साइबर हमले की चपेट में आ गए। जांच में सामने आया कि एक डेवलपर ने VS Code का संक्रमित एक्सटेंशन इंस्टॉल कर लिया था, जिसके जरिए हैकर्स को सिस्टम तक पहुंच मिली। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 3,800 आंतरिक रिपॉजिटरी प्रभावित हुईं। हालांकि कंपनी का कहना है कि ग्राहकों का डेटा सुरक्षित रहा, लेकिन इस घटना ने ओपन-सोर्स इकोसिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर कौन है TeamPCP? TeamPCP की शुरुआत 2025 के अंत में हुई थी। शुरुआत में यह समूह क्लाउड सिस्टम की कमजोरियों और वेब डेवलपमेंट टूल्स में मौजूद खामियों का फायदा उठाकर बॉटनेट नेटवर्क तैयार करता था। बाद में इसने अपनी गतिविधियों का विस्तार करते हुए सॉफ्टवेयर सप्लाई चेन अटैक को मुख्य हथियार बना लिया। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह समूह मुख्य रूप से आर्थिक लाभ के लिए काम करता है। हैकर्स डेटा चोरी करने, फिरौती मांगने और संवेदनशील जानकारी बेचने जैसे कामों में शामिल बताए जाते हैं। कैसे काम करता है TeamPCP का नेटवर्क? TeamPCP का तरीका बेहद खतरनाक और जटिल माना जाता है। यह सबसे पहले किसी लोकप्रिय ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर या डेवलपर टूल तक पहुंच बनाता है। इसके बाद उस सॉफ्टवेयर में मालवेयर कोड जोड़ दिया जाता है। जब डेवलपर्स या कंपनियां उस संक्रमित सॉफ्टवेयर को डाउनलोड करती हैं, तो उनके सिस्टम में भी मालवेयर पहुंच जाता है। इसके जरिए हैकर्स लॉगिन क्रेडेंशियल, एक्सेस टोकन और अन्य संवेदनशील जानकारी चुरा लेते हैं। बाद में इन्हीं जानकारियों का इस्तेमाल करके और अधिक सॉफ्टवेयर को संक्रमित किया जाता है। 'Mini Shai-Hulud' वर्म बना सबसे बड़ा हथियार रिपोर्ट्स के अनुसार TeamPCP ने अपने कई हमलों को ऑटोमेट करने के लिए "Mini Shai-Hulud" नामक सेल्फ-प्रोपेगेटिंग वर्म का इस्तेमाल किया है। यह वर्म एक सिस्टम से दूसरे सिस्टम तक खुद फैल सकता है और संक्रमित नेटवर्क का दायरा लगातार बढ़ाता रहता है। साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि इसी तकनीक की वजह से TeamPCP बहुत कम समय में सैकड़ों सॉफ्टवेयर पैकेज को प्रभावित करने में सफल रहा। OpenAI, GitHub और कई बड़ी कंपनियां बन चुकी हैं शिकार TeamPCP का नाम कई हाई-प्रोफाइल साइबर हमलों से जोड़ा जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार यह समूह GitHub के अलावा OpenAI, Mercor, Mistral, Checkmarx और TanStack जैसी तकनीकी कंपनियों को भी निशाना बना चुका है। साइबर सुरक्षा फर्मों का दावा है कि पिछले कुछ महीनों में TeamPCP ने 20 से अधिक बड़े सप्लाई चेन अटैक किए हैं, जिनमें 500 से ज्यादा सॉफ्टवेयर पैकेज संक्रमित हुए। इन हमलों का असर दुनिया भर की सैकड़ों कंपनियों पर पड़ा है। संगठनों को कैसे रहना चाहिए सुरक्षित? विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियों को अपने सुरक्षा मानकों को और मजबूत करना होगा। नियमित रूप से एक्सेस टोकन बदलना, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन लागू करना और किसी भी नए सॉफ्टवेयर अपडेट को जांच के बाद ही इंस्टॉल करना जरूरी है। इसके अलावा ओपन-सोर्स पैकेज डाउनलोड करते समय स्रोत की विश्वसनीयता की जांच करना और संदिग्ध गतिविधियों की लगातार निगरानी करना भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बढ़ता खतरा, बढ़ती चुनौती TeamPCP ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक साइबर हमले केवल किसी एक कंपनी को नहीं बल्कि पूरे सॉफ्टवेयर इकोसिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं। जैसे-जैसे दुनिया ओपन-सोर्स तकनीकों पर अधिक निर्भर होती जा रही है, वैसे-वैसे ऐसे सप्लाई चेन हमलों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में TeamPCP जैसी संगठित हैकर टीमों से निपटना टेक इंडस्ट्री की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल होगा।
OpenAI ने डेवलपर्स के लिए लॉन्च किया स्मार्ट मोबाइल कोडिंग एक्सपीरियंस AI कंपनी OpenAI ने अपने AI कोडिंग असिस्टेंट Codex को अब सीधे ChatGPT मोबाइल ऐप में रोलआउट करना शुरू कर दिया है। इस नए फीचर की मदद से यूजर्स अब स्मार्टफोन से भी अपने कोडिंग प्रोजेक्ट्स को मॉनिटर और मैनेज कर सकेंगे। कंपनी के अनुसार, यह फीचर खास तौर पर उन डेवलपर्स के लिए उपयोगी होगा जो लैपटॉप या डेस्क से दूर रहते हुए भी अपने प्रोजेक्ट्स पर नजर बनाए रखना चाहते हैं। क्या-क्या कर सकेंगे यूजर्स? नए Codex मोबाइल इंटीग्रेशन के जरिए यूजर्स कई एडवांस फीचर्स का इस्तेमाल कर पाएंगे: एक्टिव कोडिंग थ्रेड्स मॉनिटर करना टर्मिनल आउटपुट देखना कमांड अप्रूव करना मॉडल बदलना नए टास्क शुरू करना लाइव टेस्ट रिजल्ट्स और स्क्रीनशॉट्स देखना इससे डेवलपर्स चलते-फिरते भी अपने कोडिंग वर्कफ़्लो को कंट्रोल कर सकेंगे। सिक्योरिटी और डिवाइस सिंक पर खास फोकस OpenAI का कहना है कि Codex से जुड़े फाइल्स, परमिशन और क्रेडेंशियल्स उसी डिवाइस पर सुरक्षित रहेंगे जहां सिस्टम रन कर रहा होगा। मोबाइल ऐप केवल लाइव अपडेट्स और कंट्रोल इंटरफेस के रूप में काम करेगा। इसके लिए कंपनी ने सिक्योर रिले लेयर का इस्तेमाल किया है, जिससे अलग-अलग डिवाइसेज सुरक्षित तरीके से कनेक्टेड रहेंगे, बिना सीधे पब्लिक इंटरनेट पर एक्सपोज हुए। डेवलपर्स को कैसे मिलेगा फायदा? इस फीचर के जरिए डेवलपर्स: ऑफिस से बाहर रहते हुए बग डिबगिंग शुरू कर सकेंगे ट्रैवलिंग के दौरान कोडिंग कमांड अप्रूव कर पाएंगे मीटिंग से पहले प्रोजेक्ट समरी तैयार कर सकेंगे फोन से नए आइडियाज और टास्क भेज सकेंगे इसका मतलब है कि डेवलपमेंट वर्क अब केवल कंप्यूटर तक सीमित नहीं रहेगा। किन यूजर्स को मिलेगा यह फीचर? Codex सपोर्ट फिलहाल iOS और Android प्लेटफॉर्म पर प्रीव्यू मोड में रोलआउट किया जा रहा है। OpenAI के मुताबिक: यह फीचर Free और Go प्लान्स में भी उपलब्ध होगा केवल सपोर्टेड रीजन में काम करेगा यूजर्स को ChatGPT मोबाइल ऐप और macOS Codex ऐप दोनों अपडेट करने होंगे Windows सपोर्ट बाद में जारी किया जाएगा AI कोडिंग का बदलता भविष्य टेक इंडस्ट्री में AI आधारित डेवलपमेंट टूल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में OpenAI का यह कदम डेवलपर्स के लिए अधिक फ्लेक्सिबल और मोबाइल-फ्रेंडली कोडिंग एक्सपीरियंस देने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
Microsoft और OpenAI के बीच साझेदारी में बड़ा बदलाव हुआ है। अब माइक्रोसॉफ्ट के पास OpenAI की तकनीक पर एक्सक्लूसिव अधिकार नहीं रहेगा, जिससे ChatGPT और अन्य OpenAI सेवाएं प्रतिद्वंद्वी क्लाउड प्लेटफॉर्म्स पर भी उपलब्ध हो सकेंगी। क्या बदला है? नई व्यवस्था के तहत: माइक्रोसॉफ्ट OpenAI का प्राथमिक क्लाउड पार्टनर बना रहेगा। उसे 2032 तक OpenAI की बौद्धिक संपदा का लाइसेंस मिलेगा। लेकिन अब OpenAI अपने उत्पाद अन्य क्लाउड कंपनियों के जरिए भी बेच सकेगा। यह OpenAI के लिए बड़ी रणनीतिक आजादी है। Amazon और Google को मिलेगा फायदा इस बदलाव से Amazon Web Services और Google Cloud के ग्राहकों के लिए OpenAI सेवाओं को अपनाना आसान हो जाएगा। पहले Microsoft की एक्सक्लूसिविटी के कारण यह प्रक्रिया जटिल थी। Microsoft क्यों पीछे हट रहा है? माइक्रोसॉफ्ट अब OpenAI पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। कंपनी: अपने AI मॉडल विकसित कर रही है Anthropic जैसे अन्य AI पार्टनर्स के मॉडल भी अपना रही है AI डेटा सेंटर पर होने वाले भारी खर्च को नियंत्रित करना चाहती है OpenAI को क्या मिलेगा? अधिक एंटरप्राइज ग्राहक बेहतर स्केलेबिलिटी IPO से पहले मजबूत बाजार स्थिति क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के अधिक विकल्प एंटीट्रस्ट जांच से राहत यह कदम अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप में चल रही नियामकीय जांच के बीच भी अहम माना जा रहा है। एक्सक्लूसिविटी खत्म होने से माइक्रोसॉफ्ट पर प्रतिस्पर्धा-विरोधी आरोप कमजोर पड़ सकते हैं। AI इंडस्ट्री में नया मोड़ यह बदलाव AI बाजार में प्रतिस्पर्धा को और तेज करेगा। अब OpenAI केवल Microsoft के इकोसिस्टम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापक क्लाउड बाजार में सीधी प्रतिस्पर्धा करेगा।
चीनी AI कंपनियों पर बौद्धिक संपदा चोरी का आरोप अमेरिका ने चीनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने दुनिया भर में अपने दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को निर्देश दिया है कि वे सहयोगी देशों को चीन की AI कंपनियों से जुड़े संभावित खतरों के बारे में आगाह करें। इस सूची में चीनी AI स्टार्टअप DeepSeek का नाम प्रमुखता से शामिल है। अमेरिकी AI मॉडल की चोरी का दावा रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सरकार का आरोप है कि कुछ चीनी कंपनियां अमेरिकी AI लैब्स द्वारा विकसित उन्नत मॉडल की तकनीक को अवैध तरीके से हासिल कर रही हैं। इसमें "डिस्टिलेशन" तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसके जरिए बड़े AI मॉडल के आउटपुट से छोटे और कम लागत वाले मॉडल तैयार किए जाते हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने राजनयिकों से कहा है कि वे अन्य देशों को इस खतरे के प्रति सतर्क करें। OpenAI ने पहले भी जताई थी चिंता OpenAI पहले ही अमेरिकी सांसदों को चेतावनी दे चुका है कि DeepSeek जैसी कंपनियां उसके मॉडल की नकल करने की कोशिश कर रही हैं। फरवरी में आई रिपोर्ट में कहा गया था कि चीनी कंपनियां अमेरिकी AI तकनीक को अपने मॉडल ट्रेनिंग में इस्तेमाल करना चाहती हैं। चीन ने आरोपों को बताया बेबुनियाद वहीं, China ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने कहा कि ये दावे पूरी तरह निराधार हैं और चीन के AI विकास को बदनाम करने की कोशिश है। DeepSeek ने लॉन्च किया नया मॉडल इन आरोपों के बीच DeepSeek ने अपना नया AI मॉडल V4 पेश किया है। खास बात यह है कि यह मॉडल Huawei के चिप्स के लिए अनुकूलित किया गया है। इसे चीन की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। कई देशों ने लगाया प्रतिबंध डेटा सुरक्षा चिंताओं के चलते कई पश्चिमी और एशियाई देशों ने सरकारी संस्थानों में DeepSeek के उपयोग पर रोक लगा दी है। इसके बावजूद, ओपन-सोर्स AI प्लेटफॉर्म्स पर DeepSeek के मॉडल बेहद लोकप्रिय बने हुए हैं। अमेरिका-चीन तनाव फिर बढ़ने के आसार यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump जल्द ही चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping से बीजिंग में मुलाकात करने वाले हैं। ऐसे में यह विवाद दोनों देशों के बीच तकनीकी तनाव को फिर से बढ़ा सकता है।
AI इमेज बनाने का नया दौर शुरू तकनीकी दुनिया में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। OpenAI ने अपने इमेज जनरेशन टूल का नया वर्जन ChatGPT Images 2.0 लॉन्च किया है, जो पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा स्मार्ट और सटीक माना जा रहा है। कंपनी का दावा है कि अब AI सिर्फ तस्वीरें नहीं बनाएगा, बल्कि उन्हें “समझकर” तैयार करेगा। जटिल निर्देशों को समझने में ज्यादा सक्षम इस नए मॉडल की सबसे बड़ी खासियत इसकी बेहतर समझ (reasoning) क्षमता है। पहले जहां AI इमेज बनाते समय कई बार टेक्स्ट या डिजाइन गड़बड़ा जाते थे, वहीं अब यह सिस्टम जटिल निर्देशों को भी बेहतर तरीके से समझकर सटीक और साफ विजुअल तैयार करता है। पोस्टर, मेन्यू या स्लाइड जैसी चीजों में अब टेक्स्ट भी साफ और पढ़ने योग्य दिखाई देता है। इमेज बनाने से पहले ‘सोचने’ की प्रक्रिया ChatGPT Images 2.0 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह इमेज बनाने से पहले एक “सोचने की प्रक्रिया” अपनाता है। यानी यह पहले दिए गए निर्देशों को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर समझता है, फिर तय करता है कि तस्वीर कैसी होनी चाहिए। इस वजह से इमेज बनने में थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन रिजल्ट ज्यादा सटीक और बेहतर मिलता है। एक जैसी स्टाइल और बेहतर स्ट्रक्चर नया मॉडल एक ही तरह की कई इमेज में एक जैसा स्टाइल बनाए रखने में भी सक्षम है। अगर किसी कैरेक्टर या डिजाइन को बार-बार बनाना हो, तो उसकी पहचान और लुक में निरंतरता बनी रहती है। साथ ही, अगर यूज़र किसी खास लेआउट या डिजाइन की मांग करता है, तो AI उसे ज्यादा सही तरीके से फॉलो करता है। Google Gemini को टक्कर AI की दुनिया में अब मुकाबला और तेज हो गया है। Google Gemini पहले से ही मल्टीमॉडल AI में मजबूत माना जाता था, लेकिन ChatGPT Images 2.0 के आने से यह अंतर काफी कम हो गया है। अब OpenAI का यह नया मॉडल टेक्स्ट और इमेज दोनों को समझने में ज्यादा सक्षम बनता जा रहा है। भविष्य की दिशा: एकीकृत AI अनुभव विशेषज्ञों का मानना है कि यह अपडेट AI को एक नए स्तर पर ले जाता है, जहां टेक्स्ट और इमेज दोनों एक ही समझ के आधार पर काम करेंगे। इससे यूज़र्स को बार-बार कोशिश करने की जरूरत कम होगी और बेहतर रिजल्ट जल्दी मिलेंगे।
टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक और बड़ा अपडेट सामने आया है। ChatGPT का नया Library फीचर यूजर्स के लिए फाइल मैनेजमेंट को पहले से कहीं ज्यादा आसान और स्मार्ट बना रहा है। अब बार-बार फाइल अपलोड करने की झंझट खत्म—यह फीचर एक डिजिटल लॉकर की तरह काम करता है, जहां आपकी सभी फाइल्स सुरक्षित और व्यवस्थित रहती हैं। क्या है ChatGPT Library फीचर? यह फीचर यूजर्स को अपनी अपलोड की गई या AI द्वारा बनाई गई फाइल्स को एक ही जगह स्टोर, सर्च और दोबारा इस्तेमाल करने की सुविधा देता है। सभी फाइल्स एक अलग “Library” सेक्शन में सेव होती हैं नाम या फाइल टाइप से आसानी से सर्च कर सकते हैं जरूरत पड़ने पर तुरंत चैट में इस्तेमाल कर सकते हैं किन यूजर्स को मिल रहा है यह फीचर? OpenAI के अनुसार, यह फीचर फिलहाल: ChatGPT Plus ChatGPT Pro ChatGPT Business यूजर्स के लिए उपलब्ध है। फ्री यूजर्स को अभी इसका इंतजार करना होगा। भारत में यह फीचर धीरे-धीरे रोलआउट हो रहा है। कैसे करें इस्तेमाल? (Step-by-Step Guide) 👉 फाइल लाइब्रेरी में जोड़ने का तरीका ChatGPT वेब खोलें कंपोजर मेन्यू (Add बटन) पर क्लिक करें “Add from Library” ऑप्शन चुनें फाइल सेलेक्ट करें फाइल ऑटोमैटिक लाइब्रेरी में सेव हो जाएगी 👉 फाइल डिलीट करने का तरीका ChatGPT खोलें “Library” टैब में जाएं जिस फाइल को हटाना है उसे चुनें Delete बटन पर क्लिक करें ध्यान रखने वाली जरूरी बातें यह फीचर अभी वेब वर्जन पर उपलब्ध है AI से बनी इमेज अभी “Images टैब” में ही दिखेंगी कुछ देशों (जैसे UK और यूरोप के कुछ हिस्सों) में यह फीचर फिलहाल उपलब्ध नहीं है क्यों है यह फीचर खास? Library फीचर खास तौर पर उन यूजर्स के लिए फायदेमंद है जो बार-बार फाइल्स के साथ काम करते हैं—जैसे कंटेंट क्रिएटर, स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल्स। यह न केवल समय बचाता है, बल्कि काम को अधिक व्यवस्थित और तेज भी बनाता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।