AI पर दांव लगा रही Meta, लेकिन कर्मचारी परेशान Meta अपने बिजनेस को तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कंपनी में बदलने में जुटी है। लेकिन कंपनी के अंदर काम कर रहे हजारों कर्मचारी इस बदलाव से खुद को असहज और दबाव में महसूस कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक Meta अब अपने कर्मचारियों की कंप्यूटर गतिविधियों को ट्रैक कर रही है ताकि AI मॉडल को ट्रेन किया जा सके। इसमें यह देखा जा रहा है कि कर्मचारी कंप्यूटर पर क्या टाइप करते हैं, माउस कैसे चलाते हैं और स्क्रीन पर क्या देखते हैं। इस फैसले के बाद कंपनी के अंदर कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई है। कर्मचारियों ने बताया ‘प्राइवेसी का उल्लंघन’ कई कर्मचारियों ने Meta के इस कदम को निजी गोपनीयता में दखल बताया। आंतरिक चैट और पोस्ट्स में कर्मचारियों ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। एक इंजीनियरिंग मैनेजर ने लिखा कि यह उन्हें बेहद असहज महसूस करा रहा है और पूछा कि क्या इससे बाहर निकलने का कोई विकल्प है। इस पर Andrew Bosworth ने जवाब दिया कि कंपनी के लैपटॉप पर काम करने वालों के पास “ऑप्ट-आउट” का विकल्प नहीं होगा। AI इस्तेमाल अब परफॉर्मेंस रिव्यू का हिस्सा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि Meta अब कर्मचारियों के AI टूल इस्तेमाल को उनके प्रदर्शन मूल्यांकन का हिस्सा भी बना रही है। कंपनी अपने 78 हजार कर्मचारियों को AI टूल अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रही है। इसके लिए “AI Transformation Weeks” जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जहां कर्मचारियों को AI एजेंट और AI कोडिंग टूल्स इस्तेमाल करना सिखाया गया। नौकरी कटौती से बढ़ी चिंता AI पर भारी निवेश के बीच कंपनी लागत कम करने के लिए कर्मचारियों की छंटनी भी कर रही है। Meta ने हाल ही में करीब 10 प्रतिशत कर्मचारियों की कटौती की घोषणा की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक लगभग 8 हजार कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है। इससे कंपनी के अंदर डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है। कई कर्मचारी अब नई नौकरी तलाश रहे हैं, जबकि कुछ लोग चाहते हैं कि उन्हें भी छंटनी में शामिल किया जाए ताकि उन्हें सेवरेंस पैकेज मिल सके। ‘क्या हम अपनी जगह लेने वाले AI को ट्रेन कर रहे हैं?’ कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ी चिंता यही है कि कहीं वे खुद अपने AI रिप्लेसमेंट को ट्रेन तो नहीं कर रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि AI कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ा सकता है, लेकिन इससे काम का दबाव और मानसिक तनाव भी तेजी से बढ़ रहा है। Mark Zuckerberg लगातार AI और “Superintelligence” को कंपनी का भविष्य बता रहे हैं। Meta फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म में AI फीचर्स को तेजी से जोड़ रही है और डेटा सेंटर व AI मॉडल पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है। कंपनियों के लिए बड़ा संकेत विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में दूसरी टेक कंपनियां भी इसी तरह AI आधारित बदलाव करेंगी। लेकिन अगर कर्मचारियों की मानसिक स्थिति, प्राइवेसी और नौकरी की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया तो असंतोष और बढ़ सकता है। अब टेक इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि AI और कर्मचारियों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
चेन्नई, एजेंसियां। अभिनेता से नेता बने थलापति विजय ने रविवार को तमिलनाडु के 9वें मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित समारोह में राहुल गांधी और तृषा समेत कई हस्तियां मौजूद रहीं। विजय के सीएम की शपथ लेने के बाद एक्टर कमल हासन और प्रकाश राज ने उन्हें बधाई दी। कमल हासन ने कहा, ‘तमिलगा वेत्री कड़गम के अध्यक्ष और तमिलनाडु के माननीय मुख्यमंत्री मेरे भाई थिरु विजय को शुभकामनाएं। उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में तमिलनाडु नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। मैं उन्हें दिल से बधाई देता हूं।’ वहीं प्रकाश राज ने ट्वीट कर लिखा, ‘मुख्यमंत्री विजय को बहुत-बहुत बधाई। नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं। उम्मीद है कि आपके नेतृत्व में राज्य और तरक्की करेगा। आर माधवन ने भी दी बधाई एक्टर आर माधवन ने भी विजय को बधाई दी। माधवन ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर विजय की एक फोटो शेयर की और साथ ही लिखा, 'भगवान आपका भला करे और मुझे आप पर बहुत गर्व है। तृषा ने विजय की मां से मुलाकात की शपथ ग्रहण समारोह में एक्ट्रेस तृषा कृष्णन भी पहुंचीं। उन्होंने विजय के परिवार से मुलाकात की और उनकी मां से गले मिलती नजर आईं। विजय ने सुबह 10.15 बजे तमिल में शपथ ली तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) चीफ और एक्टर से नेता बने सी जोसेफ विजय ने रविवार सुबह 10.15 बजे तमिल में सीएम पद की शपथ ली। इस दौरान राहुल गांधी भी मौजूद रहे। विजय शपथ लेते समय निर्धारित लाइनों के अलावा और बातें बोलने लगे। इस पर राज्यपाल अर्लेकर ने उन्हें टोक दिया और कहा कि वही पढ़ें जो लिखकर दिया है। 9 मंत्रियों ने भी शपथ ली विजय के साथ 9 और मंत्रियों ने भी शपथ ली। इनमें एन आनंद, आधव अर्जुन, डॉ. केजी अरुणराज, केए सेंगोट्टैयन, पी वेंकटरमणन, आर निर्मलकुमार, राजमोहन, डॉ. टीके प्रभु, सेल्वी एस कीर्तना शामिल हैं। ये सभी विजय की पार्टी TVK के विधायक हैं। सहयोगी दलों के किसी विधायक को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है।
आज की दुनिया इंटरनेट के बिना लगभग ठहर सी जाती है। ईमेल भेजना हो, वीडियो कॉल करनी हो या सोशल मीडिया स्क्रॉल करना हो, हर काम कुछ सेकंड में पूरा हो जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हजारों किलोमीटर दूर भेजा गया डेटा इतनी तेजी से कैसे पहुंच जाता है? ज्यादातर लोगों को लगता है कि यह सब अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स के जरिए होता है, जबकि असल सच्चाई कुछ और है। दुनिया के करीब 95 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक का आधार समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबलें हैं, जिन्हें सबमरीन कम्युनिकेशन केबल कहा जाता है। यही केबलें दुनिया के अलग-अलग देशों और महाद्वीपों को डिजिटल रूप से जोड़ती हैं। समुद्र के नीचे कैसे काम करता है इंटरनेट का नेटवर्क? समुद्र के नीचे बिछी ये केबलें बेहद पतले ऑप्टिकल फाइबर से बनी होती हैं, जिनके जरिए डेटा प्रकाश (light signals) के रूप में ट्रांसफर किया जाता है। इन केबलों का काम एक देश से दूसरे देश तक इंटरनेट डेटा पहुंचाना होता है। ईमेल, वीडियो कॉल, वेबसाइट, क्लाउड सर्विस और सोशल मीडिया जैसे लगभग सभी इंटरनेशनल ऑनलाइन कम्युनिकेशन इन्हीं के जरिए चलते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक दुनिया में डेटा ट्रांसफर का 95% से ज्यादा हिस्सा इन्हीं केबलों से होकर गुजरता है। यही वजह है कि इन्हें ग्लोबल इंटरनेट की “रीढ़ की हड्डी” भी कहा जाता है। एक सेकंड में भेज सकती हैं कई फिल्में ये हाई-स्पीड फाइबर-ऑप्टिक केबल हर सेकंड कई टेराबिट डेटा ट्रांसमिट करने की क्षमता रखती हैं। एक टेराबिट प्रति सेकंड की स्पीड इतनी तेज होती है कि इसमें कुछ ही पलों में कई 4K HD फिल्में भेजी जा सकती हैं। यही कारण है कि लाखों लोग एक साथ वीडियो स्ट्रीमिंग, गेमिंग और वीडियो कॉलिंग कर पाते हैं। दुनिया भर में फैला है केबलों का विशाल जाल रिपोर्ट्स के अनुसार दुनिया के महासागरों में लगभग 485 से ज्यादा सबमरीन केबलें बिछी हुई हैं। इनकी कुल लंबाई करीब 9 लाख मील से ज्यादा बताई जाती है। ये केबलें अटलांटिक और प्रशांत महासागर के साथ-साथ स्वेज नहर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से होकर गुजरती हैं। कई केबलें बेहद गहरे और दूरदराज समुद्री इलाकों तक फैली हुई हैं। इतने मजबूत होने के बावजूद हर साल कट जाती हैं कई केबलें समुद्र के नीचे बिछी इन केबलों को कई सुरक्षात्मक परतों से ढका जाता है ताकि वे समुद्री दबाव, घर्षण और बाहरी नुकसान से बच सकें। इनमें स्टील कवच जैसी मजबूत लेयर भी शामिल होती हैं। फिर भी हर साल लगभग 100 से 150 केबलें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इसके पीछे मुख्य कारण जहाजों के एंकर, मछली पकड़ने वाले उपकरण और समुद्री गतिविधियां होती हैं। अगर किसी बड़े रूट की केबल कट जाए तो कई देशों में इंटरनेट सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। कैसे सुरक्षित रखी जाती हैं ये केबलें? सबमरीन केबल बिछाने से पहले समुद्री रास्तों का गहराई से अध्ययन किया जाता है ताकि उन्हें सुरक्षित क्षेत्रों से गुजारा जा सके। इसके अलावा कंपनियां मजबूत मटेरियल और आधुनिक निगरानी तकनीक का इस्तेमाल करती हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों को और मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि इन केबलों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने की घटनाओं को रोका जा सके। क्यों जरूरी हैं ये केबलें? आज पूरी दुनिया डिजिटल अर्थव्यवस्था पर निर्भर है। बैंकिंग, सोशल मीडिया, क्लाउड कंप्यूटिंग, ऑनलाइन मीटिंग, AI सर्वर और वीडियो स्ट्रीमिंग जैसी सेवाएं इन्हीं केबलों पर टिकी हैं। यानी अगली बार जब आप Google पर कुछ सर्च करें या Facebook खोलें, तो याद रखिए कि आपके फोन तक पहुंचने वाला डेटा समुद्र की गहराइयों से होकर आया है।
नई दिल्ली: मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता सामने आई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एक नया डीप लर्निंग मॉडल अब MRI स्कैन के जरिए ब्रेन ट्यूमर की पहचान को और तेज़, सटीक और भरोसेमंद बना सकता है। इस तकनीक का नाम MultiAttenNet है, जो जटिल मामलों में भी ट्यूमर को बेहतर तरीके से पहचानने में सक्षम है। कैसे काम करता है यह AI मॉडल? MultiAttenNet एक हाइब्रिड डीप लर्निंग सिस्टम है, जिसमें: मल्टी-स्केल CNN (Convolutional Neural Networks) ट्रांसफॉर्मर बेस्ड अटेंशन मैकेनिज्म का इस्तेमाल किया गया है। यह तकनीक न सिर्फ इमेज के छोटे-छोटे हिस्सों को बारीकी से समझती है, बल्कि पूरे MRI स्कैन का कॉन्टेक्स्ट भी पकड़ती है। इससे अलग-अलग आकार और अनियमित संरचना वाले ट्यूमर की पहचान आसान हो जाती है। फॉल्स पॉजिटिव कम, सटीकता ज्यादा इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत है इसका “अडैप्टिव अटेंशन सिस्टम”, जो सिर्फ जरूरी हिस्सों पर फोकस करता है। इससे: गलत अलर्ट (False Positives) कम होते हैं ट्यूमर की लोकेशन और बाउंड्री ज्यादा सटीक मिलती है कितनी है सटीकता? रिसर्च के दौरान इस मॉडल का परीक्षण कई बड़े डेटासेट्स पर किया गया, जिनमें Brain Tumor Segmentation 2023 शामिल है। नतीजे बेहद प्रभावशाली रहे: Accuracy: 98.4% Sensitivity: 96.8% Specificity: 99.2% False Positive Rate: सिर्फ 1.3% यह प्रदर्शन मौजूदा कई एडवांस सिस्टम्स से बेहतर बताया जा रहा है। कम डेटा में भी असरदार इस AI मॉडल की एक खासियत यह भी है कि यह “सेमी-सुपरवाइज्ड लर्निंग” पर काम करता है। यानी: कम लेबल्ड डेटा में भी ट्रेन हो सकता है अनलेबल्ड डेटा का भी उपयोग करता है अलग-अलग क्लीनिकल परिस्थितियों में बेहतर काम करता है डॉक्टरों और मरीजों के लिए क्या मतलब? ब्रेन ट्यूमर की जल्दी और सही पहचान इलाज के लिए बेहद जरूरी होती है। इस तकनीक से: डॉक्टरों का वर्कलोड कम होगा डायग्नोसिस में एकरूपता (Consistency) बढ़ेगी मरीजों को जल्दी और बेहतर इलाज मिल सकेगा
देश में हर साल बढ़ती गर्मी और हीटवेव के बीच एयर कंडीशनर अब सिर्फ लग्ज़री नहीं, बल्कि जरूरत बन चुका है। ऐसे में IIT Delhi और भारतीय स्टार्टअप Optimist ने मिलकर एक ऐसा 1.5 Ton 5 Star Split AC तैयार किया है, जो 50 डिग्री सेल्सियस तक की भीषण गर्मी में भी कूलिंग देने का दावा करता है। यह इनोवेशन खासतौर पर भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। एक्सट्रीम हीट के लिए बना खास AC भारत के कई हिस्सों में गर्मियों में तापमान 45°C से ऊपर पहुंच जाता है, जहां पारंपरिक AC की क्षमता कम होने लगती है। इस नए AC की खासियतें: 50°C तक भी स्थिर और प्रभावी कूलिंग हाई-एंबिएंट कूलिंग टेक्नोलॉजी लंबे समय तक लगातार चलने की क्षमता गर्म हवा में भी कंप्रेसर की बेहतर परफॉर्मेंस कंपनी का दावा है कि यह AC सिर्फ ठंडी हवा नहीं देता, बल्कि कठिन मौसम में भी लगातार परफॉर्म करता है, जो इसे बाकी मॉडलों से अलग बनाता है। रिसर्च-बेस्ड टेक्नोलॉजी, IIT का साथ इस प्रोजेक्ट को मजबूत बनाने में IIT Delhi की अहम भूमिका रही है। लंबे समय तक रिसर्च और डेवलपमेंट एडवांस लैब टेस्टिंग रियल वर्ल्ड कंडीशन्स में ट्रायल स्टार्टअप Optimist का कहना है कि इस AC को सिर्फ सैद्धांतिक नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है। संभावित एडवांस फीचर्स (रिपोर्ट्स के आधार पर) हालांकि कंपनी ने सभी टेक्निकल डिटेल्स सार्वजनिक नहीं की हैं, लेकिन इसमें कुछ आधुनिक फीचर्स होने की उम्मीद है: इन्वर्टर टेक्नोलॉजी (कम बिजली खपत) बेहतर हीट एक्सचेंज सिस्टम मजबूत कंप्रेसर, जो हाई टेम्परेचर में भी काम करे एनर्जी एफिशिएंसी के लिए 5-स्टार रेटिंग कीमत और वैल्यू फॉर मनी कीमत: लगभग ₹44,490 कैटेगरी: प्रीमियम सेगमेंट इस कीमत में 50°C तक कूलिंग देने का दावा इसे खास बनाता है। आम तौर पर इस रेंज में मिलने वाले AC इतने एक्सट्रीम तापमान के लिए डिजाइन नहीं होते। किन इलाकों के लिए बेस्ट? यह AC खासतौर पर उन जगहों के लिए उपयोगी है जहां गर्मी रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचती है: दिल्ली-एनसीआर राजस्थान उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई हिस्से औद्योगिक या गर्म वातावरण वाले इलाके इसके अलावा, जिन लोगों को 24x7 कूलिंग चाहिए, उनके लिए भी यह एक भरोसेमंद विकल्प हो सकता है। भारतीय AC मार्केट पर असर अगर यह टेक्नोलॉजी बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो इसके कई बड़े प्रभाव हो सकते हैं: भारतीय कंपनियों की टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी विदेशी ब्रांड्स को कड़ी टक्कर मिलेगी एक्सट्रीम वेदर के लिए नए स्टैंडर्ड सेट होंगे रिसर्च-बेस्ड प्रोडक्ट्स का ट्रेंड बढ़ेगा यह इनोवेशन “मेक इन इंडिया” और “डिजाइन इन इंडिया” की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा सकता है। ध्यान रखने वाली बातें हालांकि यह AC काफी एडवांस बताया जा रहा है, लेकिन खरीदने से पहले कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी है: आपके कमरे का साइज (1.5 टन उपयुक्त है या नहीं) बिजली की खपत और बिल सर्विस नेटवर्क और वारंटी आपके इलाके का वास्तविक तापमान
Apple में नेतृत्व परिवर्तन का ऐलान टेक दिग्गज Apple ने अपने टॉप लीडरशिप में बड़ा बदलाव घोषित किया है। कंपनी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (हार्डवेयर इंजीनियरिंग) John Ternus को 1 सितंबर 2026 से नया CEO नियुक्त किया गया है। वहीं मौजूदा CEO Tim Cook इस पद से हटकर कंपनी के बोर्ड में एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की भूमिका निभाएंगे। कंपनी के अनुसार, यह फैसला लंबे समय से चल रही सक्सेशन प्लानिंग का हिस्सा है, जिसे बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी है। स्मूद ट्रांजिशन के लिए साथ काम करेंगे Cook और Ternus Apple ने स्पष्ट किया है कि Tim Cook इस साल गर्मियों तक CEO के रूप में काम करते रहेंगे, ताकि John Ternus के साथ नेतृत्व परिवर्तन सुचारू तरीके से हो सके। नई भूमिका में Cook कंपनी की ग्लोबल पॉलिसी और अहम कॉर्पोरेट फैसलों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। वहीं, Arthur Levinson लीड इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की भूमिका संभालेंगे और Ternus भी बोर्ड में शामिल होंगे। Tim Cook का कार्यकाल और उपलब्धियां Tim Cook ने 1998 में Apple जॉइन किया था और 2011 में CEO बने थे। उनके नेतृत्व में कंपनी ने जबरदस्त वित्तीय और तकनीकी विस्तार हासिल किया। Cook के कार्यकाल में iPhone, Apple Watch, AirPods और अन्य प्रोडक्ट्स ने कंपनी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उन्होंने कहा कि Apple का नेतृत्व करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है और कंपनी के साथ उनका जुड़ाव हमेशा बना रहेगा। John Ternus पर बड़ी जिम्मेदारी करीब 25 वर्षों से Apple के साथ जुड़े John Ternus कंपनी के कई प्रमुख प्रोडक्ट्स–जैसे iPhone, iPad, Mac और Apple Watch–के विकास में अहम भूमिका निभा चुके हैं। Ternus ने इस नई जिम्मेदारी को स्वीकार करते हुए कहा कि Apple के मिशन को आगे बढ़ाना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने Steve Jobs और Tim Cook से मिली सीख को आगे ले जाने की बात कही। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव Apple के अगले दौर की रणनीति, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों पर फोकस को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp यूजर्स के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए कई नए फीचर्स पर काम कर रहा है। आने वाले अपडेट्स में खासतौर पर बिजनेस और पर्सनल चैट्स को अलग करने पर फोकस किया गया है, जिससे ऐप का इस्तेमाल ज्यादा आसान और व्यवस्थित हो सके। बिजनेस चैट्स के लिए अलग इनबॉक्स WhatsApp जल्द ही एक नया फीचर लाने वाला है, जिसमें: बिजनेस से जुड़े मैसेज के लिए अलग इनबॉक्स मिलेगा इससे यूजर्स अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल चैट्स को अलग-अलग मैनेज कर पाएंगे जरूरी बिजनेस मैसेज ढूंढना और जवाब देना आसान हो जाएगा यह फीचर खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद होगा जो WhatsApp का इस्तेमाल काम के लिए भी करते हैं। आने वाले 3 बड़े फीचर्स 1. यूजरनेम फीचर अब बिना मोबाइल नंबर शेयर किए चैटिंग संभव होगी हर यूजर का एक यूनिक यूजरनेम होगा इससे प्राइवेसी और सुरक्षा दोनों बढ़ेंगी 2. नॉइज कैंसिलेशन कॉल के दौरान बैकग्राउंड का शोर कम किया जा सकेगा आवाज ज्यादा साफ और स्पष्ट सुनाई देगी भीड़भाड़ या शोर वाले माहौल में यह फीचर काफी मददगार होगा 3. चैट प्राइवेसी अपडेट्स नए सिक्योरिटी फीचर्स जोड़े जाएंगे यूजर्स को अपनी चैट्स पर ज्यादा कंट्रोल मिलेगा डेटा सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा कब तक आएंगे ये फीचर्स? फिलहाल ये सभी फीचर्स डेवलपमेंट स्टेज में हैं अभी तक इन्हें बीटा वर्जन में भी जारी नहीं किया गया है संभावना है कि आने वाले WhatsApp अपडेट्स में इन्हें धीरे-धीरे रोलआउट किया जाएगा क्या बदलेगा यूजर एक्सपीरियंस? इन नए फीचर्स के आने के बाद WhatsApp का इस्तेमाल: ज्यादा सुरक्षित ज्यादा व्यवस्थित और पहले से ज्यादा प्रोफेशनल हो जाएगा
गर्मियों के मौसम में एयर कंडीशनर (AC) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ जाता है। ऐसे में कई लोग बिजली बचाने के लिए AC को हर 10–15 मिनट में ऑन-ऑफ करते रहते हैं। लेकिन क्या यह तरीका सही है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह आदत फायदे की बजाय नुकसान पहुंचा सकती है। क्या बार-बार AC ऑन-ऑफ करना सही है? टेक्निकल तौर पर AC को बार-बार ऑन-ऑफ करना गलत माना जाता है। जब भी AC चालू किया जाता है, उसका कंप्रेसर (compressor) शुरुआत में ज्यादा बिजली खपत करता है। ऐसे में अगर आप इसे बार-बार बंद करके फिर चालू करते हैं, तो हर बार स्टार्टिंग लोड बढ़ता है, जिससे कुल बिजली खपत ज्यादा हो जाती है। क्यों बढ़ जाता है बिजली बिल? हर बार ON करने पर कंप्रेसर को ज्यादा पावर चाहिए होती है बार-बार स्टार्ट होने से यूनिट को कमरे को फिर से ठंडा करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है इससे बिजली की खपत कम होने के बजाय बढ़ जाती है AC को नुकसान कैसे होता है? कंप्रेसर पर बार-बार दबाव पड़ता है मशीन के पार्ट्स जल्दी घिसने लगते हैं AC की लाइफ कम हो सकती है खराब होने की संभावना बढ़ जाती है सही तरीका क्या है? AC को बार-बार ऑन-ऑफ करने के बजाय लगातार चलने दें तापमान 24–26°C के बीच सेट रखें (यह सबसे ऊर्जा-कुशल माना जाता है) टाइमर या स्लीप मोड का इस्तेमाल करें कमरे को पूरी तरह बंद रखें ताकि कूलिंग बनी रहे नियमित सर्विसिंग कराते रहें AC को बार-बार ऑन-ऑफ करना बिजली बचाने का तरीका नहीं है, बल्कि इससे बिजली बिल बढ़ सकता है और मशीन पर भी बुरा असर पड़ता है। सही उपयोग और सेटिंग्स अपनाकर ही आप बेहतर कूलिंग के साथ
भारत में 5G की रेस तेज होती जा रही है और अब Vodafone Idea (Vi) ने भी बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह अगले दो महीनों में अपने 5G नेटवर्क को 90 नए शहरों तक विस्तार देगी, जिससे कुल कवरेज 133 शहरों तक पहुंच जाएगी। 43 से 133 शहरों तक का सफर फिलहाल Vi का 5G नेटवर्क 17 सर्किल्स के 43 शहरों में उपलब्ध है। कंपनी का लक्ष्य मई 2026 तक इसे बढ़ाकर 133 शहरों तक पहुंचाना है। यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब Vi को Bharti Airtel और Reliance Jio से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जिन्होंने पहले ही देशभर में 5G नेटवर्क तेजी से फैलाया है। किन क्षेत्रों में होगा विस्तार? Vi का यह विस्तार 15 प्रमुख सर्किल्स में किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं: दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल, पंजाब, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश (ईस्ट और वेस्ट), हरियाणा, गुजरात और छत्तीसगढ़। कंपनी खासतौर पर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, हाई डेटा कंजंप्शन वाले इलाकों और तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों पर फोकस कर रही है। इन शहरों को मिलेगा 5G आने वाले समय में जिन प्रमुख शहरों में Vi 5G सेवा शुरू होगी, उनमें Chennai, Hyderabad, Varanasi, Goa, Gandhinagar और Kolhapur जैसे शहर शामिल हैं। इसके अलावा प्रयागराज, पुडुचेरी, सीकर, दुर्गापुर, हरिद्वार और ग्वालियर जैसे शहरों में भी 5G नेटवर्क पहुंचाया जाएगा। टेक्नोलॉजी पार्टनर्स का सहयोग Vi ने अपने 5G नेटवर्क विस्तार के लिए Nokia, Ericsson और Samsung के साथ साझेदारी की है। इन कंपनियों की मदद से Vi उन इलाकों में नेटवर्क मजबूत कर रहा है जहां 5G डिवाइस का इस्तेमाल और डेटा की मांग तेजी से बढ़ रही है। क्यों अहम है यह विस्तार? Vi का यह कदम भारत में 5G प्रतिस्पर्धा को और तेज करेगा। इससे यूजर्स को बेहतर नेटवर्क स्पीड, कम लेटेंसी और बेहतर डिजिटल अनुभव मिलने की उम्मीद है। हालांकि, Vi के लिए यह विस्तार बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि उसे बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए तेजी से नेटवर्क बढ़ाना होगा।
टेक दिग्गज Meta Platforms ने अपने प्लेटफॉर्म्स Facebook और Instagram पर एक नया AI Support Assistant रोलआउट करना शुरू कर दिया है। इस नए फीचर का उद्देश्य यूजर्स को अकाउंट से जुड़ी समस्याओं, कंटेंट मॉडरेशन और सिक्योरिटी मामलों में तुरंत सहायता देना है। 5 सेकंड में जवाब, 24x7 सपोर्ट Meta के अनुसार, यह AI असिस्टेंट यूजर्स के सवालों का जवाब 5 सेकंड से भी कम समय में दे सकता है और 24 घंटे उपलब्ध रहेगा। इसे मोबाइल (Android, iOS) और डेस्कटॉप-दोनों प्लेटफॉर्म्स पर हेल्प सेंटर में इंटीग्रेट किया गया है। क्या-क्या कर सकेगा AI Assistant? Meta AI Support Assistant यूजर्स के लिए कई महत्वपूर्ण काम कर सकता है: स्कैम या फर्जी अकाउंट रिपोर्ट करना कंटेंट हटाए जाने की वजह समझाना पोस्ट हटने पर अपील में मदद पासवर्ड बदलना और प्राइवेसी सेटिंग्स मैनेज करना प्रोफाइल एडिट करना फिलहाल ये फीचर्स Facebook पर पूरी तरह सक्रिय हैं, जबकि Instagram पर भी जल्द इन्हें लागू किया जाएगा। स्कैम और फर्जीवाड़े पर सख्ती Meta ने बताया कि उसके नए AI सिस्टम अब पहले से ज्यादा स्मार्ट हो गए हैं। रोजाना लगभग 5,000 स्कैम प्रयासों को पहचानने में सक्षम सेलिब्रिटी इम्पर्सोनेशन (नकली अकाउंट) में 80% तक कमी आपत्तिजनक कंटेंट की पहचान में दोगुनी क्षमता मल्टी-लैंग्वेज सपोर्ट यह AI असिस्टेंट उन भाषाओं में काम कर सकता है, जिन्हें दुनिया के 98% इंटरनेट यूजर्स इस्तेमाल करते हैं। इससे वैश्विक स्तर पर यूजर्स को बेहतर और तेज सहायता मिलेगी। AI के साथ मानव निगरानी भी जरूरी Meta ने साफ किया है कि भले ही AI को बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है, लेकिन संवेदनशील और जटिल मामलों में मानव हस्तक्षेप जारी रहेगा। कंपनी का मानना है कि AI बड़े स्तर पर काम को तेज कर सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय में इंसानी समझ जरूरी है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। टेक कंपनी गूगल ने अपने लोकप्रिय नेविगेशन प्लेटफॉर्म Google Maps में बड़ा अपडेट जारी किया है। कंपनी के अनुसार यह पिछले दस वर्षों में मैप्स का सबसे बड़ा बदलाव है। इस अपडेट के तहत दो नए एआई आधारित फीचर पेश किए गए हैं Ask Maps और Immersive Navigation। ये दोनों फीचर Gemini AI मॉडल पर आधारित हैं और यूजर्स के लिए लोकेशन खोजने और नेविगेशन को पहले से ज्यादा आसान बनाने के लिए तैयार किए गए हैं।गूगल का कहना है कि इन नए फीचर्स से लोग मैप्स का इस्तेमाल बिल्कुल नए तरीके से कर पाएंगे और उन्हें ज्यादा पर्सनलाइज्ड और स्मार्ट अनुभव मिलेगा। Ask Maps: सवाल पूछकर ढूंढें लोकेशन नए अपडेट में शामिल Ask Maps फीचर एक स्मार्ट सर्च टूल की तरह काम करता है। इसमें यूजर सीधे मैप्स ऐप के अंदर सवाल पूछकर अपनी जरूरत के हिसाब से जगह ढूंढ सकते हैं।उदाहरण के तौर पर अगर कोई यूजर पूछे कि “आज रात खेलने के लिए लाइट वाला पब्लिक टेनिस कोर्ट कहां मिलेगा?” या “ऐसी कॉफी शॉप बताओ जहां फोन चार्ज करने की सुविधा हो और ज्यादा भीड़ भी न हो”, तो यह फीचर तुरंत आसपास की संबंधित लोकेशन दिखा देगा।यूजर को सिर्फ Ask Maps बटन पर टैप करना होगा और इसके बाद मैप पर ही उन्हें पर्सनलाइज्ड जवाब और सुझाव मिल जाएंगे। यह फीचर यूजर के पिछले सर्च, सेव किए गए लोकेशन और उनकी पसंद को ध्यान में रखकर भी परिणाम दिखाता है। गूगल के अनुसार Ask Maps फीचर 30 करोड़ से अधिक स्थानों के डेटा और लगभग 50 करोड़ यूजर रिव्यू का विश्लेषण करता है। इसके साथ ही यूजर उसी इंटरफेस से रेस्टोरेंट बुकिंग, लोकेशन सेव करना, दोस्तों के साथ शेयर करना और सीधे नेविगेशन शुरू करना जैसे काम भी कर सकेंगे।यह फीचर भारत और अमेरिका में धीरे-धीरे रोलआउट किया जा रहा है। Immersive Navigation से मिलेगा 3D नेविगेशन दूसरा नया फीचर Immersive Navigation है, जो मैप्स के नेविगेशन अनुभव को पूरी तरह बदलने वाला माना जा रहा है। इसमें यूजर को रास्तों का 3D व्यू दिखाई देगा, जिसमें आसपास की इमारतें, सड़कें, फ्लाईओवर और अन्य संरचनाएं वास्तविक जैसी दिखाई देंगी। इस फीचर में ट्रैफिक लाइट, क्रॉसवॉक, स्टॉप साइन और रोड लेन जैसी महत्वपूर्ण चीजें भी साफ दिखाई देंगी। इससे ड्राइविंग के दौरान सही लेन चुनना और मोड़ लेना पहले से ज्यादा आसान हो जाएगा। गूगल के अनुसार यह फीचर स्ट्रीट व्यू और एरियल इमेज की मदद से अधिक सटीक विजुअल तैयार करता है। साथ ही इसमें स्मार्ट ज़ूम, ट्रांसपेरेंट बिल्डिंग ओवरले और ज्यादा प्राकृतिक आवाज में नेविगेशन निर्देश भी मिलेंगे।फिलहाल Immersive Navigation फीचर को शुरुआती चरण में अमेरिका में लॉन्च किया गया है और आने वाले महीनों में इसे अन्य देशों में भी उपलब्ध कराया जाएगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। महिलाओं की सुरक्षा और प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने नया फीचर ‘कवच’ (Kavach) लॉन्च किया है। इस फीचर की मदद से महिला ग्राहक अब ऑफलाइन मोबाइल रिचार्ज करते समय अपना असली मोबाइल नंबर दुकानदार के साथ शेयर किए बिना रिचार्ज करा सकती हैं। BSNL ने इस सुविधा की घोषणा 8 मार्च 2026 को इंटरनेशनल वुमेंस डे के मौके पर की थी। फीचर कैसे काम करता है कवच फीचर के तहत महिला यूज़र अपने असली मोबाइल नंबर की जगह एक अस्थायी 10 अंकों का नंबर जनरेट कर सकती हैं। यह नंबर उनके असली BSNL नंबर से लिंक रहता है, लेकिन दुकानदार को असली नंबर दिखाई नहीं देता। महिला ग्राहक इस अस्थायी नंबर को रिटेलर को बता कर रिचार्ज करवा सकती हैं। यह नंबर स्थायी नहीं होता और एक OTP की तरह कुछ समय बाद एक्सपायर हो जाता है। इसलिए हर बार रिचार्ज के लिए नया अस्थायी नंबर जनरेट करना होता है। फीचर एक्टिवेशन प्रक्रिया महिला BSNL ग्राहक इस सुविधा को आसानी से एक्टिवेट कर सकती हैं: * अपने फोन का डायलर ऐप खोलें। * 1800, 180, 1503 या 1500 नंबर डायल करें। * कॉल कनेक्ट होने के बाद 9 दबाकर कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव से बात करें और ‘कवच’ फीचर एक्टिवेट करने के लिए कहें। * प्रक्रिया पूरी होने पर SMS के जरिए 10 अंकों का अस्थायी नंबर प्राप्त होगा। * इस नंबर को रिचार्ज के समय रिटेलर को बताएं। इसके अलावा यूजर्स BSNL Self Care ऐप के जरिए भी फीचर एक्टिवेट कर सकती हैं। क्यों खास है यह फीचर ऑफलाइन रिचार्ज करने वाले उपयोगकर्ताओं, खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों (टियर-3 और टियर-4) में रहने वाली महिलाओं के लिए यह फीचर बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। अक्सर दुकानदारों के पास महिला ग्राहकों के नंबर गलत तरीके से इस्तेमाल होने का जोखिम रहता है। कवच फीचर इस समस्या का समाधान करता है और महिलाओं को रिचार्ज के दौरान अपनी पहचान और नंबर की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करता है। BSNL का यह कदम महिलाओं की डिजिटल सुरक्षा और ऑफलाइन लेन-देन में प्राइवेसी बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे फीचर्स न केवल सुरक्षा बढ़ाते हैं, बल्कि महिला ग्राहकों के लिए डिजिटल सेवाओं का भरोसा भी मजबूत करते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।