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Meloni Says She Quit Smoking at G7 Summit

G7 Summit 2026: मेलोनी ने छोड़ी सिगरेट, बोलीं- एक महीने से नहीं किया धूम्रपान; अब नींद भगाने के लिए पी रहीं तीन-तीन कॉफी

Deepshikha जून 17, 2026 0
Italian Prime Minister Giorgia Meloni smiles during the G7 Summit in France after revealing she quit smoking since May 1.
Giorgia Meloni Reveals She Quit Smoking at G7 Summit

 

एवियन-ले-बैंस (फ्रांस): फ्रांस के एवियन-ले-बैंस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान जहां दुनिया के प्रमुख नेताओं ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, यूक्रेन युद्ध, सुरक्षा और भू-राजनीतिक संकटों जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा की, वहीं नेताओं की कुछ अनौपचारिक बातचीत भी सुर्खियों में रही। सबसे ज्यादा चर्चा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की रही, जिन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने पिछले एक महीने से सिगरेट को हाथ तक नहीं लगाया है।

'1 मई के बाद से सिगरेट नहीं पी', मेलोनी ने किया खुलासा

बैठक शुरू होने से पहले जॉर्जिया मेलोनी ने बताया कि उन्होंने उस दिन तीन कप कॉफी पी है। इस पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने उनसे पूछा कि इतनी कॉफी क्यों? जवाब में मेलोनी ने मुस्कुराते हुए कहा, "खुद को जगाए रखने के लिए।"

इसके बाद जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने सुबह सिगरेट पी है? इस पर मेलोनी ने जवाब दिया, "मैंने 1 मई के बाद से सिगरेट नहीं पी है।"

उनके इस जवाब पर बैठक में मौजूद नेताओं ने तालियां बजाकर और बधाई देकर उनका उत्साह बढ़ाया।

मार्क कार्नी ने पूछा- निकोटीन पैच लगाया क्या?

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची और यूरोपीय संघ के अन्य प्रतिनिधियों ने मेलोनी को धूम्रपान छोड़ने के लिए बधाई दी।

खुशी जाहिर करते हुए मेलोनी ने दोनों हाथ ऊपर उठा दिए। इसी दौरान मार्क कार्नी ने मजाकिया अंदाज में पूछा, "क्या आपने निकोटीन पैच लगाया है?"

उनके इस सवाल पर वहां मौजूद सभी नेता हंस पड़े और माहौल हल्का-फुल्का हो गया।

नेताओं ने साझा किए धूम्रपान छोड़ने के अनुभव

सिगरेट छोड़ने को लेकर बातचीत आगे बढ़ी तो कई नेताओं ने अपने निजी अनुभव भी साझा किए।

यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने बताया कि उन्होंने 2005 में धूम्रपान छोड़ दिया था। इस पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने पूछा कि क्या उसके बाद कभी सिगरेट पी? कोस्टा ने जवाब दिया, "कभी नहीं, 21 साल हो गए।"

इस बातचीत ने जी7 जैसे गंभीर मंच पर नेताओं का एक मानवीय और सहज पक्ष भी सामने ला दिया।

जी7 में फिर चर्चा में आया 'मेलोडी' मोमेंट

जी7 सम्मेलन के दौरान एक और दिलचस्प पल तब देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी पारंपरिक 'फैमिली फोटो' से पहले आमने-सामने आए।

दोनों नेताओं की दोस्ताना केमिस्ट्री पहले भी सोशल मीडिया पर 'मेलोडी' (Meloni + Modi) नाम से वायरल हो चुकी है।

मुलाकात के दौरान मेलोनी ने मुस्कुराते हुए कहा, "आपसे फिर मिलकर अच्छा लगा।" बताया जाता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान इंस्टाग्राम का जिक्र किया। इस पर मेलोनी ने तुरंत जवाब दिया, "हां, हम इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा मशहूर हैं।"

उनकी इस टिप्पणी पर आसपास मौजूद लोग हंस पड़े।

जी7 में कौन-कौन से देश हुए शामिल?

जी7 समूह में दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, जिनमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा शामिल हैं। इसके अलावा यूरोपीय संघ भी इसकी बैठकों में भाग लेता है।

इस वर्ष मेजबान फ्रांस ने भारत, ब्राजील, केन्या, दक्षिण कोरिया, यूक्रेन और अन्य साझेदार देशों को भी विशेष आमंत्रित राष्ट्र के रूप में बुलाया था।

सम्मेलन के एजेंडे में वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियां प्रमुख रहीं, लेकिन नेताओं के ये अनौपचारिक और हल्के-फुल्के पल भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गए।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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पाकिस्तान में पुलिस फायरिंग में ऑस्ट्रेलियाई बच्ची की मौत, लुटेरों ने घूमने आए परिवार से गहने लूटे; पुलिस ने डकैत समझकर गोली मारी

इस्लामाबाद, एजेंसियां। पाकिस्तान में 9 साल की ऑस्ट्रेलियाई बच्ची हानिया अहमद की पुलिस की गोलीबारी में मौत हो गई। हानिया अपने परिवार के साथ पाकिस्तान घूमने आई थी। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर के केवडेल इलाके का यह परिवार पंजाब के चकवाल शहर में अपने रिश्तेदारों से मिलने आया था। मंगलवार रात वे किराये की कार से सफर कर रहे थे, तभी कुछ बदमाशों ने उनके गहने लूट लिए। मोटरसाइकिल पर सवार थे लुटेरे बताया गया है कि मोटरसाइकिल पर सवार दो लुटेरे वारदात के बाद भाग रहे थे। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी की नजर उन पर पड़ गई। लुटेरे मौके से फरार हो गए और परिवार की किराये की कार भी वहां से आगे बढ़ गई। पुलिस ने गलती से गोली मारी पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पुलिस ने गलती से परिवार की कार को लुटेरों की गाड़ी समझ लिया और उस पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। गोलियां लगने से 9 साल की बच्ची की मौत हो गई, जबकि उसके पिता और बड़े भाई गंभीर रूप से घायल हो गए। बच्ची की मां सुरक्षित है। पुलिस बोली- लुटेरों ने पहले गोली चलाई, पिता ने नकारा पंजाब पुलिस के मुताबिक, संदिग्ध लुटेरों ने एक पुलिस अधिकारी पर गोली चलाई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई। हालांकि हानिया के पिता ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि पुलिस ने ही सबसे पहले गोली चलाई थी। इस घटना पर बयान देते हुए ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। जांच पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि सबसे पहले परिवार और फिर बाकी लोगों को भी सच्चाई पता चल सके। ऑस्ट्रेलिया ने की जांच की मांग ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रालय ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि वह मृत बच्ची के परिवार और घायल ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को हर संभव कांसुलर सहायता उपलब्ध करा रहा है। मंत्रालय ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना भी व्यक्त की। रिपोर्ट के मुताबिक, यह परिवार हाल ही में मक्का की धार्मिक यात्रा (हज/उमरा) पूरी करके पाकिस्तान पहुंचा था। पंजाब पुलिस ने अधिकारी को निलंबित किया पुलिस ने गोली चलाने वाले अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। घटना की जांच के लिए एक संयुक्त जांच टीम (जॉइंट इन्वेस्टिगेशन टीम) भी बनाई गई है। पुलिस का कहना है कि लूटपाट में शामिल दो संदिग्ध लोगों को बाद में एक अलग मुठभेड़ में मार गिराया गया। इस घटना के बाद पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया दोनों देशों में लोगों में नाराजगी है। परिवार ऑस्ट्रेलिया में रहता था। पाकिस्तान के सीनियर पुलिस अधिकारियों ने इसे गलत पहचान की वजह से हुई एक दुखद घटना बताया है और कहा है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के जरिए परिवार को न्याय दिलाया जाएगा।   इस मामले ने पाकिस्तान में पुलिस के कामकाज पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान बल प्रयोग और आम लोगों की मौत होने पर जवाबदेही तय करने के तरीकों पर चर्चा तेज हो गई है।

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H-1B वीजा के नाम पर भारतीय आईटी प्रोफेशनल से 94 लाख की ठगी! टेक्सास कोर्ट पहुंचा मामला

  अमेरिका में काम कर रहे एक भारतीय आईटी पेशेवर ने अपने भारतीय-अमेरिकी नियोक्ता के खिलाफ टेक्सास की अदालत का दरवाजा खटखटाया है। कर्मचारी का आरोप है कि H-1B वीजा और अमेरिका में नौकरी बनाए रखने के नाम पर उससे करीब एक लाख डॉलर (लगभग 94 लाख रुपये) की जबरन वसूली की गई। शिकायतकर्ता ऋषिकेश राज मीसाला ने कंपनी के मालिक साई जितेंद्र कलागरा पर आर्थिक शोषण, धमकी और इमिग्रेशन स्टेटस का डर दिखाकर पैसे वसूलने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी अदालत में होना बाकी है। मास्टर डिग्री के बाद मिली नौकरी, फिर शुरू हुआ कथित शोषण ऋषिकेश राज मीसाला छात्र वीजा पर अमेरिका पहुंचे थे और वर्ष 2023 में अपनी मास्टर डिग्री पूरी की। इसके बाद उन्हें टेक्सास स्थित साई जितेंद्र कलागरा की कंपनी में नौकरी मिली, जिसने उनका H-1B वीजा स्पॉन्सर किया। यह नौकरी उनके लिए अमेरिका में स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम थी। लेकिन नौकरी शुरू होने के कुछ समय बाद ही परिस्थितियां बदल गईं। 'बेंच' पर रखा, काम नहीं दिया, फिर भी मांगे पैसे शिकायत के मुताबिक, कंपनी ने उन्हें किसी प्रोजेक्ट पर नियुक्त नहीं किया और 'बेंच' पर रखा। आईटी सेक्टर में इसका मतलब होता है कि कर्मचारी कंपनी में तो रहता है, लेकिन उसे कोई सक्रिय प्रोजेक्ट नहीं दिया जाता। आरोप है कि काम न देने के बावजूद कंपनी ने उनका H-1B स्टेटस बनाए रखने के नाम पर लगातार बड़ी रकम की मांग की। दस्तावेज रोकने और डिपोर्ट कराने की धमकी का आरोप ऋषिकेश ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने पैसे देने का विरोध किया तो कंपनी ने वेतन पर्ची (Salary Slip) और अन्य जरूरी दस्तावेज देने से इनकार कर दिया। H-1B वीजाधारकों के लिए ये दस्तावेज नई नौकरी तलाशने, वीजा नवीनीकरण और इमिग्रेशन प्रक्रिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि उन्हें अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी (ICE) से निर्वासित (Deport) कराने और भारत में रह रहे उनके पिता को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई। डर के माहौल में उन्होंने कथित तौर पर करीब 8.31 लाख रुपये नकद भी दिए। लॉ फर्म ने बताया मानव तस्करी और जबरन मजदूरी जैसा मामला ऋषिकेश की ओर से पैरवी कर रही 'बानियास लॉ' फर्म ने इस मामले को मानव तस्करी, जबरन श्रम और दस्तावेजों के जरिए कर्मचारी को बंधक बनाकर रखने जैसा मामला बताया है। वकीलों का दावा है कि कंपनी को रुकी हुई सैलरी और कथित तौर पर जबरन वसूले गए पैसों को मिलाकर कम से कम 93.30 लाख रुपये लौटाने चाहिए। H-1B वीजा को लेकर फिर उठे सवाल यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका में H-1B वीजा प्रणाली को लेकर बहस तेज है। अमेरिकी तकनीकी और इंजीनियरिंग कंपनियां बड़े पैमाने पर इस वीजा का उपयोग करती हैं। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) के वर्ष 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, H-1B वीजा प्राप्त करने वालों में करीब 71 प्रतिशत भारतीय मूल के लोग हैं। ऐसे में भारतीय पेशेवरों के कथित शोषण के मामलों ने एक बार फिर इस वीजा प्रणाली की पारदर्शिता और श्रमिक सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल टेक्सास की अदालत में यह मामला विचाराधीन है और सभी आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and US President Donald Trump shake hands during the G7 Summit in Evian, France.

G7 Summit: 16 महीने बाद आमने-सामने आए पीएम मोदी और ट्रंप, सौहार्दपूर्ण अंदाज में मिलाया हाथ

Italian Prime Minister Giorgia Meloni smiles during the G7 Summit in France after revealing she quit smoking since May 1.

G7 Summit 2026: मेलोनी ने छोड़ी सिगरेट, बोलीं- एक महीने से नहीं किया धूम्रपान; अब नींद भगाने के लिए पी रहीं तीन-तीन कॉफी

Russian warship Admiral Grigorovich sails near a British yacht in the English Channel amid heightened maritime tensions.

इंग्लिश चैनल में बढ़ा तनाव: रूसी युद्धपोत ने चलाई चेतावनी फायरिंग, भारतीय कप्तान की गिरफ्तारी के बाद गरमाया माहौल

Prime Minister Narendra Modi and US President Donald Trump share a warm moment during the G7 Summit family photo session in France.
G7 समिट में ट्रंप ने थामी पीएम मोदी की कलाई, फोटोशूट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

  एवियन-ले-बैंस (फ्रांस): फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात एक बार फिर सुर्खियों में है। दोनों नेताओं का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ट्रंप सीढ़ियां चढ़ते समय प्रधानमंत्री मोदी की कलाई पकड़कर उनके साथ आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं। यह मुलाकात करीब 16 महीने बाद दोनों नेताओं की पहली प्रत्यक्ष मुलाकात थी। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में आमने-सामने मिले थे, जब ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत की थी। फोटोशूट के दौरान दिखी दोनों नेताओं की गर्मजोशी वायरल वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप अन्य विश्व नेताओं के साथ पारंपरिक फैमिली फोटो के लिए जाते दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान एक छोटी सी सीढ़ी चढ़ते समय ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी की कलाई पकड़ते हैं और दोनों साथ आगे बढ़ते हैं। वीडियो में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पत्नी भी ट्रंप के पास खड़ी होने की कोशिश करती दिखाई देती हैं। इसी दौरान राष्ट्रपति मैक्रों कहते हैं, "Ready Everybody?" इस पर प्रधानमंत्री मोदी मुस्कुराते हुए जवाब देते हैं, "We are always ready." यह संवाद भी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। हाथ मिलाने के बाद कुछ देर हुई बातचीत फोटोशूट से पहले प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया और कुछ देर बातचीत भी की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब भारत और अमेरिका के संबंध व्यापार, रणनीतिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर नए दौर से गुजर रहे हैं। हाल के महीनों में कई मुद्दों पर बढ़ी थीं चुनौतियां भारत-अमेरिका संबंधों को हाल के महीनों में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ट्रंप प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर काउंटर टैरिफ लगाए थे। इसके अलावा ओमान तट के पास एक व्यापारी जहाज पर अमेरिकी कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भी दोनों देशों के संबंधों को लेकर सवाल उठे थे। इन चुनौतियों के बावजूद नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच संवाद और सहयोग लगातार जारी है। मार्को रुबियो ने दिया था ट्रंप का संदेश पिछले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत दौरे के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को निकट भविष्य में व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण दिया था। रुबियो ने भारत को अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति का "आधार स्तंभ" बताते हुए दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया था। जी7 मंच से पीएम मोदी ने उठाया समुद्री सुरक्षा का मुद्दा जी7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने समुद्री व्यापार मार्गों और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में जारी संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और समुद्री व्यापार पर पड़ा है। प्रधानमंत्री ने कहा, "वैश्विक समुद्री व्यापार के जरिए देशों को जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी भय के अपना कर्तव्य निभा सकें।" ओमान की खाड़ी में तीन भारतीय नाविकों की हुई थी मौत प्रधानमंत्री का यह बयान उस घटना के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी बलों ने 8 जून को 'मारिवेक्स', 9 जून को 'सेटेबेलो' और 11 जून को 'जलवीर' नामक जहाजों के खिलाफ अभियान चलाया था। अमेरिका का आरोप था कि ये जहाज ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों और नाकेबंदी का उल्लंघन करने की कोशिश कर रहे थे। मोदी और ट्रंप की मुलाकात को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब दोनों देश व्यापार, समुद्री सुरक्षा, इंडो-पैसिफिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर साझेदारी को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi addresses the G7 Summit in France and raises concerns over Indian sailors' deaths and maritime security.

G7 में पीएम मोदी ने ट्रंप के सामने उठाया भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा, बोले- समुद्री मार्गों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना दुनिया की जिम्मेदारी

Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu addresses media amid growing opposition to the proposed US-Iran peace agreement.

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Deepshikha जून 10, 2026 0

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