पटना: बिहार में मॉनसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और आने वाले दिनों में मौसम और अधिक बिगड़ सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार को राज्य के 18 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए तेज बारिश, 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी दी है। वहीं नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण उत्तर बिहार की प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे कई इलाकों में बाढ़ का खतरा भी गहराने लगा है।
मौसम विभाग के अनुसार बक्सर, भोजपुर, अरवल, औरंगाबाद, कैमूर, रोहतास, सुपौल, अररिया, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, खगड़िया, भागलपुर, मुंगेर, बांका और जमुई जिलों में मौसम खराब रहने की संभावना है।
इन जिलों में तेज बारिश के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। इसके अलावा कई स्थानों पर वज्रपात (बिजली गिरने) की भी आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की अपील की है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार राज्य में अगले तीन से चार दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।
4 जुलाई को उत्तर बिहार के अधिकांश जिलों के साथ दक्षिण बिहार के कई हिस्सों में भी बारिश होने की संभावना है। वहीं 5 और 6 जुलाई को लगभग पूरे बिहार के लिए आंधी, बारिश और वज्रपात का अलर्ट जारी किया गया है। लगातार सक्रिय मॉनसून के कारण कई इलाकों में भारी वर्षा हो सकती है।
पिछले 24 घंटों के दौरान बक्सर, जमुई, पटना, किशनगंज, बेगूसराय और खगड़िया समेत कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। हालांकि बारिश के बावजूद लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत नहीं मिल सकी।
पटना सहित अधिकांश जिलों में अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक बारिश और उमस दोनों का असर एक साथ देखने को मिल सकता है।
नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश का असर अब बिहार की नदियों पर भी दिखाई देने लगा है। कोसी, बागमती और उत्तर बिहार की कई अन्य नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
यदि नेपाल में इसी तरह बारिश जारी रही तो कई नदियां जल्द ही खतरे के निशान के करीब या उससे ऊपर पहुंच सकती हैं। इससे उत्तर बिहार के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है।
मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, बिजली चमकने के समय खुले स्थानों पर न रहने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। किसानों और नदी किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि अगले कुछ दिन मौसम की दृष्टि से संवेदनशील रह सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
पटना, एजेंसियां। भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर सियासत लगातार तेज होती जा रही है। शुक्रवार को पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने एक बार फिर पुलिस कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने परिस्थितियों के अनुसार बिल्कुल सटीक कदम उठाया। मांझी ने कहा कि यदि पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो पुलिसकर्मियों की जान भी जा सकती थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मामले की न्यायिक जांच चल रही है, इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा। 'पुलिस ने जान बचाने के लिए की कार्रवाई' मांझी ने भरत तिवारी के खिलाफ दर्ज मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि यदि वह निर्दोष थे, तो उन पर एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला क्यों दर्ज था। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि भरत तिवारी के हाथ में दिखाई गई रिवॉल्वर क्या लाइसेंसी थी। मांझी ने कहा कि यदि पुलिस का मकसद हत्या करना होता, तो गोली सिर या सीने में मारी जाती, जबकि गोली कमर के नीचे लगी। दुर्भाग्यवश उनकी मौत हो गई, लेकिन इससे पुलिस की मंशा पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। एसडीपीओ के तबादले और महापंचायत पर भी बोले एनकाउंटर मामले में नामजद एसडीपीओ राजेश शर्मा के ट्रांसफर पर मांझी ने कहा कि किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होना और दोषी साबित होना अलग-अलग बातें हैं। न्यायिक जांच पूरी होने तक किसी अधिकारी को हटाना उचित नहीं था, खासकर तब जब बिहार पुलिस पहले से ही बल की कमी से जूझ रही है। महापंचायत में शामिल नहीं होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर राज्य की कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उनके वहां जाने से बड़ी भीड़ जुट सकती थी और असामाजिक तत्व माहौल खराब कर सकते थे, इसलिए उन्होंने दूरी बनाए रखना उचित समझा। चिराग पासवान के दौरे पर दिया संतुलित जवाब भरत तिवारी के गांव बिलौटी पहुंचकर परिजनों से मुलाकात करने वाले केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान पर पूछे गए सवाल पर मांझी ने कहा, "चिराग पासवान जो करते हैं, वही हम भी करेंगे।" उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में संतुलित प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर बिहार की राजनीति में बयानबाजी और न्यायिक जांच दोनों पर सबकी नजर बनी हुई है।
पटना, एजेंसियां। पूर्व मध्य रेलवे ने दानापुर रेल मंडल समेत अपने सरकारी क्वार्टरों में रहने वाले रेलकर्मियों और उनके परिवारों की सुविधा के लिए रेलवे बिल्डिंग मेंटेनेंस सिस्टम (RBMS) ऐप लॉन्च किया है। इस नई डिजिटल व्यवस्था के तहत अब क्वार्टरों की मरम्मत और रखरखाव से जुड़ी शिकायतें पूरी तरह ऑनलाइन दर्ज की जा सकेंगी। इससे कर्मचारियों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी और शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी व तेज होगी। फोटो और वीडियो के साथ दर्ज कर सकेंगे शिकायत RBMS ऐप के माध्यम से रेलकर्मी अपने क्वार्टर में आने वाली किसी भी समस्या की शिकायत फोटो, वीडियो या लिखित विवरण के साथ ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। शिकायत प्राप्त होने के बाद इंजीनियरिंग और संबंधित विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करेगी और आवश्यक मरम्मत कार्य करेगी। इससे शिकायतों के समाधान में तेजी आने की उम्मीद है। खत्म होगी पुरानी मैनुअल व्यवस्था रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना की रूपरेखा वर्ष 2024 में तैयार की गई थी। रेलवे बोर्ड के निर्देश के बाद अब इसे पूर्व मध्य रेलवे में लागू कर दिया गया है। इसके साथ ही क्वार्टरों की मरम्मत से जुड़ी पुरानी मैनुअल व्यवस्था को समाप्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, जिससे पूरी व्यवस्था डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित होगी। गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकेंगे ऐप पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र ने बताया कि कर्मचारी RBMS ऐप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं। ऐप में जोन, डिवीजन, रेलवे कॉलोनी, क्वार्टर नंबर और पहचान संबंधी जानकारी दर्ज करने के बाद शिकायत आसानी से भेजी जा सकेगी। शिकायतों की होगी ऑनलाइन निगरानी नई व्यवस्था के तहत यह भी देखा जा सकेगा कि कितनी शिकायतें लंबित हैं, किन शिकायतों का समाधान हो चुका है और उन्हें निपटाने में कितना समय लगा। इससे जवाबदेही बढ़ेगी और कर्मचारियों को अपनी शिकायत की स्थिति की रियल टाइम जानकारी मिलती रहेगी। रेलवे यूनियनों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे क्वार्टरों की रखरखाव व्यवस्था में सुधार आएगा और रेलकर्मियों को बड़ी राहत मिलेगी।
पटना, एजेंसियां। बिहार में जुलाई की शुरुआत मानसून की जोरदार बारिश के साथ होने जा रही है। पटना मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) ने 1 से 3 जुलाई तक राज्य के कई जिलों में भारी बारिश, तेज आंधी और वज्रपात की आशंका जताते हुए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से घरों से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी है। 1 जुलाई को उत्तर और पश्चिम बिहार में सबसे ज्यादा असर मौसम विभाग के अनुसार, 1 जुलाई को उत्तर और पश्चिम बिहार में मानसून सबसे अधिक सक्रिय रहेगा। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा, मधुबनी और समस्तीपुर के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, साथ ही भारी बारिश और बिजली गिरने की संभावना है। वहीं पटना समेत राज्य के कई अन्य जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है, जहां हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक की संभावना है। 2 जुलाई को भी जारी रहेगा बारिश का दौर 2 जुलाई को पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम बिहार के कई जिलों, जिनमें पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, बक्सर, भोजपुर, कैमूर, रोहतास और औरंगाबाद शामिल हैं, के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में भारी बारिश, तेज हवा और वज्रपात की आशंका जताई गई है। अन्य जिलों में येलो अलर्ट के तहत हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है। 3 जुलाई को दक्षिण और मध्य बिहार में बढ़ेगा असर 3 जुलाई को मानसून का प्रभाव दक्षिण और मध्य बिहार की ओर शिफ्ट होगा। इस दौरान पटना, बक्सर, भोजपुर, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, अरवल, जहानाबाद, नालंदा, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय और बेगूसराय में भारी बारिश और बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। हालांकि, कोशी और सीमांचल क्षेत्र के कई जिलों, जैसे पूर्णिया, अररिया, कटिहार, किशनगंज, सुपौल, सहरसा और मधेपुरा में मौसम अपेक्षाकृत सामान्य रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने लोगों से बारिश और आकाशीय बिजली के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।