नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए शानदार मौका आया है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने वन रक्षक (Forest Guard) और वन्य जीव रक्षक (Wildlife Guard) के कुल 708 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और योग्य उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
यह भर्ती उन अभ्यर्थियों के लिए विशेष अवसर है, जिन्होंने 12वीं (इंटरमीडिएट) पास की है और UPSSSC PET-2025 परीक्षा में शामिल होकर वैध नॉर्मलाइज्ड स्कोर प्राप्त किया है। चयनित उम्मीदवारों को लेवल-2 पे स्केल के तहत ₹19,900 से ₹63,200 प्रति माह तक वेतन मिलेगा।
भर्ती के तहत विभिन्न श्रेणियों में कुल 708 पद भरे जाएंगे।
आवेदन करने के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना अनिवार्य है। इसके साथ ही अभ्यर्थी ने UPSSSC PET-2025 परीक्षा दी हो और उसका वैध नॉर्मलाइज्ड स्कोरकार्ड उपलब्ध होना चाहिए।
आयु की गणना 1 जुलाई 2026 के आधार पर की जाएगी। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट मिलेगी।
पुरुष उम्मीदवार
महिला उम्मीदवार
इच्छुक उम्मीदवार अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन पूरा कर लें।
चयनित अभ्यर्थियों को लेवल-02 पे स्केल के तहत ₹19,900 से ₹63,200 प्रति माह तक वेतन मिलेगा। इसके अलावा सरकारी नियमों के अनुसार अन्य भत्तों का लाभ भी दिया जाएगा।
भर्ती प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होगी।
शारीरिक दक्षता परीक्षा में पुरुष अभ्यर्थियों को 10 किलोग्राम वजन के साथ 4 घंटे में 25 किलोमीटर तथा महिला अभ्यर्थियों को 14 किलोग्राम वजन के साथ 4 घंटे में 14 किलोमीटर की दौड़ पूरी करनी होगी।
इस भर्ती में सभी श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क ₹25 निर्धारित किया गया है। आवेदन के दौरान उम्मीदवारों को PET-2025 रोल नंबर, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), मूल निवास प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी दर्ज करनी होगी।
उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि आवेदन करने से पहले भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन ध्यानपूर्वक पढ़ें और पात्रता, दस्तावेज तथा चयन प्रक्रिया की पूरी जानकारी सुनिश्चित करने के बाद ही आवेदन करें। किसी भी प्रकार की त्रुटि आवेदन रद्द होने का कारण बन सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए शानदार मौका आया है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने वन रक्षक (Forest Guard) और वन्य जीव रक्षक (Wildlife Guard) के कुल 708 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और योग्य उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। यह भर्ती उन अभ्यर्थियों के लिए विशेष अवसर है, जिन्होंने 12वीं (इंटरमीडिएट) पास की है और UPSSSC PET-2025 परीक्षा में शामिल होकर वैध नॉर्मलाइज्ड स्कोर प्राप्त किया है। चयनित उम्मीदवारों को लेवल-2 पे स्केल के तहत ₹19,900 से ₹63,200 प्रति माह तक वेतन मिलेगा। 708 पदों पर होगी भर्ती भर्ती के तहत विभिन्न श्रेणियों में कुल 708 पद भरे जाएंगे। वन रक्षक (सामान्य) – 318 पद वन्य जीव रक्षक (सामान्य) – 10 पद वन रक्षक (विशेष चयन) – 329 पद वन्य जीव रक्षक (विशेष चयन) – 51 पद कौन कर सकता है आवेदन? आवेदन करने के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना अनिवार्य है। इसके साथ ही अभ्यर्थी ने UPSSSC PET-2025 परीक्षा दी हो और उसका वैध नॉर्मलाइज्ड स्कोरकार्ड उपलब्ध होना चाहिए। आयु सीमा न्यूनतम आयु: 18 वर्ष अधिकतम आयु: 40 वर्ष आयु की गणना 1 जुलाई 2026 के आधार पर की जाएगी। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट मिलेगी। शारीरिक योग्यता पुरुष उम्मीदवार सामान्य/ओबीसी/एससी – न्यूनतम लंबाई 168 सेमी एसटी – न्यूनतम लंबाई 160 सेमी महिला उम्मीदवार सामान्य/ओबीसी/एससी – न्यूनतम लंबाई 152 सेमी एसटी – 147 सेमी (5 सेमी की छूट) महत्वपूर्ण तिथियां ऑनलाइन आवेदन शुरू: 30 जून 2026 आवेदन की अंतिम तिथि: 20 जुलाई 2026 इच्छुक उम्मीदवार अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन पूरा कर लें। कितना मिलेगा वेतन? चयनित अभ्यर्थियों को लेवल-02 पे स्केल के तहत ₹19,900 से ₹63,200 प्रति माह तक वेतन मिलेगा। इसके अलावा सरकारी नियमों के अनुसार अन्य भत्तों का लाभ भी दिया जाएगा। चयन प्रक्रिया भर्ती प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होगी। PET-2025 स्कोर के आधार पर उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग मुख्य लिखित परीक्षा शारीरिक मानक परीक्षा (PST) शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) मेडिकल परीक्षण अंतिम मेरिट सूची शारीरिक दक्षता परीक्षा में पुरुष अभ्यर्थियों को 10 किलोग्राम वजन के साथ 4 घंटे में 25 किलोमीटर तथा महिला अभ्यर्थियों को 14 किलोग्राम वजन के साथ 4 घंटे में 14 किलोमीटर की दौड़ पूरी करनी होगी। आवेदन शुल्क इस भर्ती में सभी श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क ₹25 निर्धारित किया गया है। आवेदन के दौरान उम्मीदवारों को PET-2025 रोल नंबर, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), मूल निवास प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी दर्ज करनी होगी। आवेदन से पहले नोटिफिकेशन जरूर पढ़ें उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि आवेदन करने से पहले भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन ध्यानपूर्वक पढ़ें और पात्रता, दस्तावेज तथा चयन प्रक्रिया की पूरी जानकारी सुनिश्चित करने के बाद ही आवेदन करें। किसी भी प्रकार की त्रुटि आवेदन रद्द होने का कारण बन सकती है।
पटना, एजेंसियां। बिहार के विश्वविद्यालयों और अंगीभूत कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों (असिस्टेंट प्रोफेसर) की नियुक्ति के लिए नई नियमावली लागू कर दी गई है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद ‘स्टैच्यूट्स फॉर अपॉइंटमेंट ऑफ असिस्टेंट प्रोफेसर्स, 2026’ एक जुलाई 2026 से प्रभावी हो गया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध बनाना है। 200 अंकों के आधार पर होगा चयन नई नियमावली के अनुसार चयन प्रक्रिया कुल 200 अंकों की होगी। इसमें 175 अंकों की तीन घंटे की लिखित परीक्षा और 25 अंकों का इंटरव्यू शामिल रहेगा। इंटरव्यू में 13 अंक टीचिंग डेमो और 12 अंक साक्षात्कार के लिए निर्धारित किए गए हैं। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए टीचिंग डेमो की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी। आयु सीमा बढ़ी, NET अनिवार्य सरकार ने अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष से बढ़ाकर 43 वर्ष कर दी है। यह फैसला शोधार्थियों की मांग को देखते हुए लिया गया। अभ्यर्थियों के लिए संबंधित विषय में कम-से-कम 55 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर डिग्री आवश्यक होगी। बिहार के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, पिछड़ा वर्ग (नॉन-क्रीमी लेयर) और दिव्यांग अभ्यर्थियों को न्यूनतम अंकों में 5 प्रतिशत की छूट मिलेगी। नई व्यवस्था के तहत NET या SET उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। हालांकि, यूजीसी के निर्धारित मानकों के अनुरूप पात्र पीएचडी डिग्रीधारकों को NET से छूट दी जाएगी। PhD और भर्ती प्रक्रिया के लिए नए प्रावधान पीएचडी डिग्री के लिए शोध का मूल्यांकन दो बाहरी परीक्षकों से कराना अनिवार्य होगा। साथ ही अभ्यर्थी के कम-से-कम दो शोध पत्र प्रकाशित होना और एक शोध जर्नल में प्रकाशन आवश्यक होगा। विदेश से पीएचडी करने वाले उम्मीदवारों का विश्वविद्यालय विश्व के शीर्ष 500 संस्थानों में शामिल होना चाहिए। नियमित नियुक्तियां बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग की अनुशंसा पर होंगी। वहीं, भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए राज्य सरकार की अनुमति से अतिरिक्त इंटरव्यू बोर्ड भी गठित किए जा सकेंगे। नई नियमावली से राज्य में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की उम्मीद है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। बैंकिंग सेक्टर में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। Institute of Banking Personnel Selection (IBPS) ने 6,715 प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) / मैनेजमेंट ट्रेनी पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया आज से शुरू हो गई है। मुख्य बातें कुल रिक्तियां: 6,715 पद: Probationary Officer (PO) / Management Trainee आवेदन: ऑनलाइन चयन प्रक्रिया: प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू भर्ती: विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए होगी। युवाओं के लिए बड़ा अवसर IBPS की यह भर्ती 2026 की सबसे बड़ी बैंक भर्तियों में से एक मानी जा रही है। लाखों अभ्यर्थियों के आवेदन करने की संभावना है। इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन कर सकते हैं।