आस्था और श्रद्धा का प्रतीक Chaitra Navratri इस वर्ष 19 मार्च 2026 से प्रारंभ हो चुका है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और इसका समापन Ram Navami के साथ होता है। इस बार तिथियों, मुहूर्तों और विशेष संयोगों को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखा जा रहा है।
19 मार्च को सुबह 6:40 बजे तक अमावस्या रहने के बाद प्रतिपदा तिथि प्रारंभ हुई। प्रतिपदा के क्षय होने के कारण इसी दिन कलश स्थापना की गई।
रामनवमी से पहले इस बार तीन मंगलवारी जुलूसों का आयोजन हो रहा है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं:
इन जुलूसों में भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं और भक्ति का माहौल चरम पर होता है।
इस दिन से पंडालों में विधिवत पूजा-अर्चना शुरू हो जाती है।
26 मार्च (महाअष्टमी):
27 मार्च (महानवमी + रामनवमी):
इस वर्ष Ram Navami 27 मार्च को मनाई जाएगी। वाराणसी पंचांग के अनुसार नवमी तिथि सुबह 5:56 बजे से शाम 5:12 बजे तक रहेगी, जिससे पूजा के लिए पर्याप्त शुभ समय उपलब्ध रहेगा।
धार्मिक मान्यता के अनुसार:
इसे वर्ष भर के शुभ-अशुभ संकेतों से जोड़ा जाता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
ईसाई धर्म में ‘गुड फ्राइडे’ एक बेहद महत्वपूर्ण और भावनात्मक दिन माना जाता है। यह दिन मानवता के लिए प्रेम, त्याग और बलिदान का प्रतीक है। 2026 में यह पर्व 3 अप्रैल को मनाया जा रहा है। हालांकि यह दिन दुखद घटना से जुड़ा है, फिर भी इसे “Good” यानी ‘अच्छा’ कहा जाता है-और इसके पीछे की वजह गहरी आध्यात्मिक भावना से जुड़ी है। क्या हुआ था इस दिन? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था। उन्हें अनेक यातनाएं दी गईं और अंततः क्रूस (Cross) पर उनकी मृत्यु हुई। ईसाई धर्म में इसे मानवता के इतिहास का सबसे बड़ा बलिदान माना जाता है, क्योंकि उन्होंने अपने प्राण दूसरों के पापों के प्रायश्चित के लिए दिए। ‘Good Friday’ नाम क्यों पड़ा? यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि जब यह दिन दुख और पीड़ा से जुड़ा है, तो इसे ‘Good’ क्यों कहा जाता है? दरअसल, यहां ‘Good’ का अर्थ खुशी नहीं, बल्कि ‘पवित्र’, ‘महान’ और ‘कल्याणकारी’ होता है। ईसाई मान्यता के अनुसार, ईसा मसीह के बलिदान के कारण मानवता को मुक्ति और उद्धार का मार्ग मिला। इसलिए यह दिन भले ही दुखद हो, लेकिन इसका संदेश अत्यंत सकारात्मक और पवित्र है। क्या यह शोक का दिन है? जी हां, गुड फ्राइडे को शोक और आत्मचिंतन का दिन माना जाता है। इस दिन लोग चर्च जाकर शांतिपूर्वक प्रार्थना करते हैं, उपवास रखते हैं और ईसा मसीह के बलिदान को याद करते हैं। इस दिन किसी प्रकार का उत्सव नहीं मनाया जाता, बल्कि सादगी, श्रद्धा और मौन का वातावरण रहता है। इस दिन लोग क्या करते हैं? चर्च में विशेष प्रार्थना और सभाएं आयोजित होती हैं उपवास और संयम का पालन किया जाता है आत्मचिंतन और प्रायश्चित किया जाता है मानवता, प्रेम और क्षमा के संदेश को अपनाने का संकल्प लिया जाता है क्या संदेश देता है गुड फ्राइडे? गुड फ्राइडे हमें सिखाता है कि सच्चा प्रेम और बलिदान क्या होता है। यह दिन यह याद दिलाता है कि त्याग और करुणा के माध्यम से ही मानवता को सही दिशा मिलती है। यही कारण है कि इस दिन को “Good Friday” कहा जाता है-क्योंकि इसका संदेश पूरी मानवता के लिए कल्याणकारी है।
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र पूर्णिमा का विशेष महत्व है। यह हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा मानी जाती है, जिसमें पूजा, व्रत, दान और स्नान का अत्यंत पुण्य फल बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, चंद्रदेव और हनुमान जी की उपासना की जाती है। इस वर्ष 1 अप्रैल 2026 को व्रत और चंद्र पूजन किया जाएगा, जबकि 2 अप्रैल को स्नान-दान और हनुमान जयंती मनाई जाएगी। तिथि और शुभ मुहूर्त पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 1 अप्रैल 2026, सुबह 07:06 बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त: 2 अप्रैल 2026, सुबह 07:41 बजे व्रत और चंद्र अर्घ्य: 1 अप्रैल (संध्या समय) स्नान-दान और हनुमान जयंती: 2 अप्रैल (उदयातिथि के अनुसार) शास्त्रों के अनुसार, जिस दिन पूर्णिमा की तिथि शाम और रात में रहती है, उसी दिन व्रत और चंद्रमा की पूजा करना श्रेष्ठ माना जाता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि चैत्र पूर्णिमा की शाम चंद्रोदय के समय अर्घ्य देना विशेष फलदायी माना जाता है। चांदी या तांबे के पात्र में जल लें उसमें कच्चा दूध, अक्षत (चावल), सफेद फूल और थोड़ी चीनी मिलाएं चंद्रमा को देखते हुए धीरे-धीरे जल अर्पित करें “ॐ सोमाय नमः” मंत्र का जाप करें अंत में हाथ जोड़कर सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की कामना करें प्रमुख मंत्र ॐ सोमाय नमः ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः ॐ क्लीं सोम मंत्राय नमः ॐ नमः शशांकशेखराय नियम और सावधानियां तामसिक भोजन से बचें (लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा) क्रोध और विवाद से दूर रहें अर्घ्य के बाद सफेद वस्तुओं (चावल, चीनी, दूध, वस्त्र) का दान करें सत्यनारायण कथा का पाठ या श्रवण करें धार्मिक महत्व मान्यता है कि पूर्णिमा की रात चंद्रदेव अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होते हैं। इस दिन अर्घ्य देने से मानसिक शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त होती है। साथ ही, यह दिन आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता को बढ़ाने वाला माना जाता है।
हिंदू धर्म में हनुमान जयंती का विशेष महत्व है। यह दिन हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर सभी संकट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। हनुमान जयंती 2026: तिथि और मुहूर्त साल 2026 में हनुमान जयंती चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि आरंभ: 1 अप्रैल 2026, सुबह 07:06 बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त: 2 अप्रैल 2026, सुबह 07:41 बजे उदया तिथि के अनुसार पर्व: 2 अप्रैल 2026 शुभ मुहूर्त: 2 अप्रैल को सूर्योदय से लेकर सुबह 07:41 बजे तक पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है। पूजा सामग्री हनुमान जी की कृपा पाने के लिए पूजा में इन चीजों का विशेष महत्व है: लाल कपड़ा और चौकी चमेली का तेल, सिंदूर, जनेऊ लाल फूल, चंदन, अक्षत बेसन के लड्डू, बूंदी, गुड़-चना, केला घी का दीपक, धूप, कपूर, गंगाजल तुलसी दल (भोग में अनिवार्य) पूजा विधि हनुमान जयंती के दिन विधि-विधान से पूजा करना बेहद फलदायी माना जाता है: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ या लाल वस्त्र पहनें। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें। गंगाजल से स्नान कराकर चमेली तेल और सिंदूर से चोला चढ़ाएं। धूप-दीप जलाकर फूल, फल, चंदन और अक्षत अर्पित करें। बेसन के लड्डू या बूंदी का भोग लगाएं, साथ में तुलसी दल जरूर रखें। हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करें। अंत में आरती कर सुख-समृद्धि और रक्षा की प्रार्थना करें। प्रमुख मंत्र ॐ ऐं ह्रीं हनुमते श्री रामदूताय नमः ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्वरूपाय अमितविक्रमाय रामदूताय स्वाहा ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहरणाय सर्वरोगहराय रामदूताय स्वाहा इन मंत्रों के जप से मानसिक शांति, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। क्या है मान्यता? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जयंती पर पूजा करने से भय, रोग, शत्रु बाधा और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। भक्त इस दिन व्रत रखकर और भक्ति भाव से पूजा कर बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।