Central Board of Secondary Education यानी सीबीएसई की री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। 12वीं बोर्ड परीक्षा के एक छात्र ने दावा किया था कि बोर्ड द्वारा भेजी गई फिजिक्स की स्कैन आंसरशीट उसकी नहीं है। अब बोर्ड ने छात्र के दावे को सही मानते हुए उसे सही उत्तरपुस्तिका भेज दी है।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग और री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से चर्चा में है।
12वीं के छात्र वेदांत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया था कि फिजिक्स विषय में कम अंक आने के बाद उसने री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के तहत स्कैन कॉपी मंगवाई थी, लेकिन जो उत्तरपुस्तिका उसे भेजी गई, वह उसकी नहीं थी।
छात्र ने कहा था कि उत्तरपुस्तिका में लिखावट उसकी नहीं थी और केवल रोल नंबर उसका दिखाई दे रहा था। उसने यह भी कहा कि इंग्लिश की उत्तरपुस्तिका में उसकी खुद की हैंडराइटिंग साफ नजर आ रही थी, जबकि फिजिक्स की कॉपी पूरी तरह अलग थी।
इसके बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और छात्रों ने मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग शुरू कर दी।
मामला बढ़ने के बाद Central Board of Secondary Education ने छात्र से संपर्क किया और जांच के बाद सही उत्तरपुस्तिका उसके पंजीकृत ईमेल पते पर भेज दी।
सीबीएसई ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर कहा कि छात्र की शिकायत की समीक्षा की गई और सही उत्तरपुस्तिका भेज दी गई है। बोर्ड ने यह भी कहा कि जहां आवश्यक होगा वहां परिणाम अपडेट करने की प्रक्रिया भी की जाएगी।
छात्र वेदांत ने भी सोशल मीडिया पर पुष्टि की कि बोर्ड ने उसे सही आंसरशीट भेज दी है और उसका दावा सही साबित हुआ।
इस घटना के बाद छात्रों और अभिभावकों ने Central Board of Secondary Education की री-इवैल्यूएशन और स्कैनिंग प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कई लोगों का कहना है कि अगर एक छात्र की कॉपी बदल सकती है, तो अन्य छात्रों के साथ भी ऐसी गलती संभव है।
वेदांत ने बोर्ड से ऑन-स्क्रीन मार्किंग और स्कैनिंग प्रक्रिया का ऑडिट कराने की मांग की है। छात्र का कहना है कि पूरे साल मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी ऐसी गलतियां बेहद गंभीर हैं।
सीबीएसई इस वर्ष 12वीं बोर्ड परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के जरिए कर रहा है। इसमें उत्तरपुस्तिकाओं को स्कैन करके डिजिटल माध्यम से जांचा जाता है।
हालांकि इस घटना के बाद अब इस प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर बहस शुरू हो गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी प्रक्रिया में छोटी सी चूक भी छात्रों के परिणाम पर बड़ा असर डाल सकती है।
री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी स्कैन कॉपी के लिए आवेदन किया था। ऐसे में यह मामला सामने आने के बाद कई छात्र अब अपनी उत्तरपुस्तिकाओं को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।
फिलहाल Central Board of Secondary Education ने मामले को सुधारने की कार्रवाई कर दी है, लेकिन इस घटना ने बोर्ड की मूल्यांकन प्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। रांची विश्वविद्यालय में नए शैक्षणिक सत्र 2026-30 के स्नातक और 2026-29 के वोकेशनल पाठ्यक्रमों में नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले 24 अंगीभूत कॉलेजों में कुल 43,530 सीटों पर प्रवेश लिया जाएगा। इच्छुक छात्र-छात्राएं 12 जून से 29 जून तक चांसलर पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। कुलपति डॉ. सरोज शर्मा ने कहा कि इस बार विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी प्राथमिकता शैक्षणिक सत्र को नियमित करना, समय पर परीक्षा और परिणाम जारी करना तथा छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। 24 कॉलेजों में होगा नामांकन, मेरिट के आधार पर मिलेगा प्रवेश विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद मेरिट सूची जारी की जाएगी। दस्तावेज सत्यापन के बाद नामांकन की प्रक्रिया पूरी होगी। इस वर्ष मारवाड़ी कॉलेज, रांची वीमेंस कॉलेज, डोरंडा कॉलेज, केओ कॉलेज गुमला, एसएसएम कॉलेज, बीएस कॉलेज लोहरदगा, बिरसा कॉलेज खूंटी और अन्य कॉलेजों में बड़ी संख्या में सीटें उपलब्ध हैं। एनईपी के तहत बड़ा बदलाव, 'लाइफ साइंस' विषय की शुरुआत राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के तहत इस बार बॉटनी और जूलॉजी विषयों को मिलाकर 'लाइफ साइंस' विषय बनाया गया है। कुलपति ने बताया कि इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को बहुविषयक शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बदलाव से सीटों की संख्या में कोई कमी नहीं की गई है और सभी कॉलेजों में पूर्व निर्धारित क्षमता के अनुसार ही नामांकन होगा। सेशन नियमित करने और परीक्षा व्यवस्था सुधारने पर जोर डॉ. सरोज शर्मा ने स्वीकार किया कि विश्वविद्यालय लंबे समय से शैक्षणिक सत्र में देरी की समस्या से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि लंबित परीक्षाओं के परिणाम तेजी से जारी किए जा रहे हैं और परीक्षा, मूल्यांकन तथा रिजल्ट प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। छात्र संघ चुनाव, प्लेसमेंट और स्टार्टअप को मिलेगा बढ़ावा कुलपति ने बताया कि लॉ इंस्टीट्यूट में कानूनी विवाद समाप्त होने के बाद अब वहां भी नामांकन का रास्ता साफ हो गया है। विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव कराने के भी सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। साथ ही प्लेसमेंट सेल को मजबूत किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को रोजगार के अवसर मिल सकें। पूर्व छात्रों को विश्वविद्यालय से जोड़ने, उद्योगों के साथ साझेदारी बढ़ाने तथा स्टार्टअप और उद्यमिता को प्रोत्साहन देने की भी योजना तैयार की गई है। कुलपति ने विश्वास जताया कि नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, नियमित सत्र, समय पर परीक्षा, बेहतर प्लेसमेंट और प्रशासनिक सुधारों के जरिए रांची विश्वविद्यालय आने वाले वर्षों में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा का मजबूत केंद्र बनकर उभरेगा।
नई दिल्ली: 12वीं के बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए सही कॉलेज चुनना हर छात्र और अभिभावक के लिए बेहद महत्वपूर्ण फैसला होता है। अगर आप दिल्ली-एनसीआर में बेहतरीन बीटेक कॉलेज की तलाश कर रहे हैं, तो ग्रेटर नोएडा आज देश के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में शामिल हो चुका है। यहां के कई संस्थान आधुनिक सुविधाओं, उत्कृष्ट शिक्षण व्यवस्था और शानदार प्लेसमेंट रिकॉर्ड के लिए जाने जाते हैं। ग्रेटर नोएडा के प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेज और प्लेसमेंट रिकॉर्ड कॉलेज का नाम औसत पैकेज उच्चतम पैकेज प्रमुख भर्ती करने वाली कंपनियां जीएल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट 6.5 लाख रुपये प्रतिवर्ष 40 से 57 लाख रुपये अमेजन, पालो ऑल्टो, सिस्को, टीसीएस, कैपजेमिनी गलगोटियास कॉलेज एवं विश्वविद्यालय 5.4 लाख रुपये प्रतिवर्ष 60 लाख रुपये इंफोसिस, कॉग्निजेंट, विप्रो, एक्सेंचर शिव नादर विश्वविद्यालय 9.88 लाख रुपये प्रतिवर्ष 54.82 लाख रुपये गोल्डमैन सैक्स, एडोबी, आईबीएम, ओरेकल, मैकिन्से नोएडा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एनआईईटी) 6 लाख रुपये प्रतिवर्ष 44 लाख रुपये माइक्रोसॉफ्ट, जेपी मॉर्गन, एचसीएल, विप्रो, टीसीएस जीएनआईओटी समूह संस्थान 5.5 से 7.25 लाख रुपये प्रतिवर्ष 70 लाख रुपये अमेजन, डेलॉइट, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, इन्फोगेन कॉलेज चुनते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान फीस और प्लेसमेंट का संतुलन कॉलेज में प्रवेश लेने से पहले यह जरूर देखें कि चार वर्षों की पढ़ाई पर होने वाले खर्च के मुकाबले वहां का औसत प्लेसमेंट पैकेज कितना है। जीएल बजाज और एनआईईटी जैसे संस्थान बेहतर निवेश प्रतिफल (आरओआई) के लिए जाने जाते हैं, जबकि शिव नादर विश्वविद्यालय अपेक्षाकृत अधिक फीस के साथ उच्च औसत पैकेज प्रदान करता है। आधुनिक और उद्योग आधारित पाठ्यक्रम आज के समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा विज्ञान, मशीन लर्निंग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसलिए यह सुनिश्चित करें कि कॉलेज में इन विषयों से जुड़े पाठ्यक्रम और अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं उपलब्ध हों। स्थान का लाभ ग्रेटर नोएडा का नॉलेज पार्क क्षेत्र नोएडा, दिल्ली और गुरुग्राम के सूचना प्रौद्योगिकी केंद्रों के नजदीक स्थित है। इसका फायदा छात्रों को इंटर्नशिप, व्यावहारिक परियोजनाओं और कैंपस प्लेसमेंट के रूप में मिलता है। बेहतर करियर और आकर्षक वेतन पैकेज की तलाश कर रहे छात्रों के लिए ग्रेटर नोएडा के ये संस्थान बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) जल्द ही यूजीसी नेट जून 2026 परीक्षा के लिए एग्जाम सिटी इंटीमेशन स्लिप जारी करने जा रही है। परीक्षा 22 जून से 30 जून 2026 तक देशभर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। एनटीए के दिशा-निर्देशों के अनुसार, एग्जाम सिटी स्लिप परीक्षा तिथि से 8 से 10 दिन पहले जारी की जाती है। ऐसे में संभावना है कि उम्मीदवारों के लिए यह स्लिप 12 या 13 जून तक उपलब्ध करा दी जाएगी। सिटी इंटीमेशन स्लिप के माध्यम से अभ्यर्थी अपने परीक्षा शहर की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, जिससे उन्हें यात्रा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते करने में सुविधा होगी। ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे सिटी स्लिप यूजीसी नेट जून 2026 की एग्जाम सिटी स्लिप केवल ऑनलाइन माध्यम से जारी की जाएगी। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने आवेदन संख्या, जन्मतिथि और सुरक्षा पिन की सहायता से इसे डाउनलोड कर सकेंगे। सिटी स्लिप डाउनलोड करने के लिए अभ्यर्थियों को सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। इसके बाद "एग्जाम सिटी इंटीमेशन स्लिप" लिंक पर क्लिक कर लॉगिन विवरण दर्ज करना होगा। लॉगिन के बाद परीक्षा शहर की जानकारी स्क्रीन पर प्रदर्शित हो जाएगी, जिसे डाउनलोड और प्रिंट किया जा सकता है। दो शिफ्ट में आयोजित होगी परीक्षा एनटीए द्वारा यूजीसी नेट परीक्षा का आयोजन 22, 23, 24, 25, 29 और 30 जून को किया जाएगा। परीक्षा प्रतिदिन दो शिफ्टों में होगी। पहली शिफ्ट सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित की जाएगी। विभिन्न विषयों के अनुसार परीक्षा कार्यक्रम पहले ही जारी किया जा चुका है। एडमिट कार्ड परीक्षा से चार दिन पहले होंगे जारी एनटीए परीक्षा तिथि से लगभग चार दिन पहले एडमिट कार्ड जारी करेगा। उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र पर प्रवेश पत्र के साथ एक वैध फोटो पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट ले जाना अनिवार्य होगा। बिना एडमिट कार्ड और पहचान पत्र के किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें।