शिक्षा

IIM Ranchi Debuts in QS EMBA Rankings 2026

IIM रांची का ग्लोबल मंच पर परचम: QS Executive MBA Ranking 2026 में पहली बार बनाई जगह

surbhi मई 1, 2026 0
IIM Ranchi campus celebrates entry into QS Executive MBA Rankings 2026 globally
IIM Ranchi QS Executive MBA Ranking 2026

झारखंड के लिए गर्व की बात है कि Indian Institute of Management Ranchi ने पहली बार प्रतिष्ठित QS Executive MBA Ranking 2026 में अपनी जगह बना ली है। यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब IIM रांची वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर रहा है।

देश में चौथा स्थान, ग्लोबल और एशिया-पैसिफिक में भी मजबूत उपस्थिति
इस रैंकिंग में Indian Institute of Management Ranchi ने भारत के अन्य IIMs के बीच चौथा स्थान हासिल किया है। वहीं, वैश्विक स्तर पर इसे 201+ बैंड में जगह मिली है और एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में 33वां स्थान प्राप्त हुआ है। QS Executive MBA Ranking दुनिया की सबसे विश्वसनीय और प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूल रैंकिंग्स में से एक मानी जाती है।

किन मानकों पर होती है रैंकिंग?
QS Executive MBA Ranking में संस्थानों का मूल्यांकन कई अहम मानकों पर किया जाता है, जिनमें प्लेसमेंट पैकेज, अकादमिक प्रतिष्ठा, करियर ग्रोथ, प्रोफेशनल प्रोफाइल और स्टूडेंट डाइवर्सिटी शामिल हैं। सरल शब्दों में, यह रैंकिंग इस बात का आकलन करती है कि किसी संस्थान से पढ़ाई के बाद छात्रों को कितने बेहतर करियर अवसर मिलते हैं और इंडस्ट्री में उनकी वैल्यू कितनी बढ़ती है।

करियर ग्रोथ और इंडस्ट्री कनेक्शन बने सफलता की कुंजी
IIM रांची ने इस रैंकिंग में सभी पैरामीटर पर प्रभावशाली प्रदर्शन किया है, खासकर करियर आउटकम्स में इसकी मजबूती साफ नजर आती है। यहां से पढ़ने वाले प्रोफेशनल्स को बेहतर सैलरी ग्रोथ, प्रमोशन के अवसर और मजबूत इंडस्ट्री एक्सपोजर मिलता है।

संस्थान की सफलता के पीछे उसकी इंडस्ट्री से गहरी साझेदारी और रिसर्च-ओरिएंटेड अप्रोच अहम भूमिका निभाती है। Indian Institute of Management Ranchi अपने छात्रों को सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि वास्तविक बिजनेस परिस्थितियों का अनुभव भी देता है। ग्लोबल कोलैबोरेशन और आधुनिक पाठ्यक्रम के जरिए संस्थान लगातार अपने शैक्षणिक स्तर को ऊंचा उठा रहा है।

Executive MBA प्रोग्राम: प्रोफेशनल्स के लिए खास डिजाइन
IIM रांची का Executive MBA प्रोग्राम विशेष रूप से कामकाजी पेशेवरों के लिए तैयार किया गया है। यह दो वर्षीय कोर्स है, जिसमें प्रवेश के लिए कम से कम 3 साल का कार्य अनुभव जरूरी होता है। इस कार्यक्रम में फाइनेंस, मार्केटिंग, ऑपरेशंस, स्ट्रेटेजी और ह्यूमन रिसोर्स जैसे महत्वपूर्ण विषयों के साथ कई वैकल्पिक विषय भी शामिल हैं, जिससे छात्र अपनी जरूरत और करियर लक्ष्यों के अनुसार पढ़ाई को कस्टमाइज कर सकते हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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डिजिटल युग में तेजी से हो रहे बदलावों ने करियर के पारंपरिक रास्तों को पूरी तरह बदल दिया है। इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)–एक ऐसी तकनीक जो न सिर्फ काम करने के तरीके को बदल रही है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रही है। आज कंपनियां ऐसे प्रोफेशनल्स की तलाश में हैं जो AI को समझते हों और उसे प्रभावी ढंग से लागू कर सकें। अगर आप भी अपने करियर को भविष्य के हिसाब से तैयार करना चाहते हैं, तो AI से जुड़ी कुछ अहम स्किल्स सीखना अब विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन गया है। AI क्यों बन गया है करियर का सबसे बड़ा ट्रेंड? AI अब सिर्फ टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रहा। हेल्थकेयर, बैंकिंग, एजुकेशन, ई-कॉमर्स और मार्केटिंग जैसे हर सेक्टर में इसका इस्तेमाल हो रहा है। कंपनियां अपने काम को तेज, सटीक और ऑटोमेटेड बनाने के लिए AI पर निर्भर होती जा रही हैं। यही वजह है कि AI स्किल्स रखने वाले प्रोफेशनल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है और उन्हें आकर्षक सैलरी पैकेज भी मिल रहे हैं।   ये 6 AI स्किल्स बना सकती हैं आपका करियर 1. मशीन लर्निंग (Machine Learning) AI की नींव मानी जाने वाली यह स्किल कंप्यूटर को डेटा के आधार पर खुद सीखने और निर्णय लेने की क्षमता देती है। इस फील्ड में काम करने वाले डेटा साइंटिस्ट और AI इंजीनियर की डिमांड काफी ज्यादा है। 2. डेटा एनालिसिस (Data Analysis) AI का पूरा खेल डेटा पर टिका है। डेटा को समझना, उसका विश्लेषण करना और उससे सही निष्कर्ष निकालना एक जरूरी स्किल है। Python, SQL और Excel जैसे टूल्स इसमें आपकी मदद करते हैं। 3. प्रोग्रामिंग स्किल्स AI में करियर बनाने के लिए कोडिंग का ज्ञान बेहद जरूरी है। खासतौर पर Python, Java और R जैसी प्रोग्रामिंग भाषाएं इस फील्ड में अहम भूमिका निभाती हैं। 4. डीप लर्निंग (Deep Learning) यह AI का एडवांस्ड हिस्सा है, जिसमें Neural Networks के जरिए मशीनों को इंसानों की तरह सोचने और समझने की क्षमता दी जाती है। इसका इस्तेमाल फेस रिकग्निशन, रोबोटिक्स और सेल्फ-ड्राइविंग टेक्नोलॉजी में होता है। 5. क्लाउड कंप्यूटिंग (Cloud Computing) AI मॉडल्स को रन करने के लिए हाई कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है, जो AWS, Google Cloud और Microsoft Azure जैसे प्लेटफॉर्म्स से मिलती है। इस स्किल के जरिए आप बड़े स्तर पर काम कर सकते हैं। 6. कम्युनिकेशन और प्रॉब्लम सॉल्विंग टेक्निकल स्किल्स के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि आप अपनी सोच को स्पष्ट तरीके से व्यक्त कर सकें और समस्याओं का समाधान निकाल सकें। टीमवर्क और क्रिएटिविटी आज हर कंपनी की प्राथमिकता है।   AI फील्ड में कितनी है कमाई? AI सेक्टर में सैलरी पैकेज काफी आकर्षक होते हैं। एक शुरुआती प्रोफेशनल सालाना 6 से 10 लाख रुपये तक कमा सकता है। वहीं अनुभव और विशेषज्ञता बढ़ने के साथ यह आंकड़ा करोड़ों तक पहुंच सकता है। इसके अलावा फ्रीलांसिंग और स्टार्टअप के जरिए भी कमाई के बड़े अवसर मौजूद हैं।  

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Students exploring modern career options like AI, game design, and digital marketing after 12th
12वीं के बाद क्या करें? ये 10 यूनिक कोर्स बना सकते हैं आपका करियर, बदल सकते हैं भविष्य की दिशा

  आज के समय में करियर सिर्फ पारंपरिक डिग्री तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह आपके स्किल, इंटरेस्ट और बदलते ट्रेंड्स पर निर्भर करता है। 12वीं के बाद सही कोर्स चुनना छात्रों के लिए सबसे अहम निर्णय होता है, और अब कई ऐसे यूनिक और ट्रेंडिंग विकल्प मौजूद हैं जो आपको भीड़ से अलग पहचान दिला सकते हैं। अगर आप भी कुछ हटकर करना चाहते हैं, तो ये 10 कोर्स आपके लिए गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। फूड टेस्टिंग एंड सेंशरी साइंस Food Science से जुड़ा यह कोर्स खाने के स्वाद, टेक्सचर और क्वालिटी का वैज्ञानिक विश्लेषण सिखाता है। FMCG कंपनियों में इसकी अच्छी मांग है और शुरुआती सैलरी 2.5 से 3.5 लाख रुपये सालाना हो सकती है। गेम डिजाइन एंड डेवलपमेंट Game Design युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इस क्षेत्र में शुरुआत में 3-7 लाख और अनुभव के साथ 15-30 लाख रुपये तक की कमाई संभव है। एविएशन मैनेजमेंट एयरलाइन और एयरपोर्ट ऑपरेशंस में रुचि रखने वालों के लिए यह बेहतरीन विकल्प है। इस कोर्स में मैनेजमेंट, सिक्योरिटी और कस्टमर सर्विस की ट्रेनिंग दी जाती है। न्यूरोसाइंस Neuroscience एक चुनौतीपूर्ण लेकिन बेहद संभावनाओं से भरा फील्ड है। इसमें करियर बनाने के लिए मेडिकल बैकग्राउंड (MBBS) के बाद स्पेशलाइजेशन जरूरी होता है। डिजिटल मार्केटिंग और UI/UX डिजाइन Digital Marketing और User Experience Design आज के डिजिटल युग में तेजी से बढ़ते करियर ऑप्शन हैं। कम समय में स्किल सीखकर अच्छी कमाई की जा सकती है। जेनेटिक इंजीनियरिंग Genetic Engineering एक 4 साल का बीटेक कोर्स है। इसमें रिसर्च और हेल्थ सेक्टर में शानदार करियर के अवसर मिलते हैं। चॉकलेट मेकिंग एंड कंफेक्शनरी Confectionery में शॉर्ट टर्म कोर्स करके आप खुद का बिजनेस शुरू कर सकते हैं या बड़े ब्रांड्स के साथ काम कर सकते हैं। पर्यावरण विज्ञान Environmental Science में करियर बनाने वालों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई अवसर मिलते हैं। यह फील्ड तेजी से उभर रहा है। फोटोग्राफी Photography एक क्रिएटिव करियर है, जहां मीडिया, एडवरटाइजिंग और फ्रीलांसिंग से अच्छी कमाई संभव है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) Artificial Intelligence आज के समय का सबसे तेजी से बढ़ता सेक्टर है। भारत ही नहीं, विदेशों में भी AI एक्सपर्ट की भारी मांग है। बदलते दौर में करियर की नई सोच इन सभी कोर्स से साफ है कि आज का करियर विकल्प सिर्फ डॉक्टर-इंजीनियर तक सीमित नहीं है। अगर आप अपने इंटरेस्ट और स्किल के अनुसार सही दिशा चुनते हैं, तो ये यूनिक कोर्स आपके भविष्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।  

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