शिक्षा

NCERT Gets Deemed University Status

NCERT बना ‘डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’: सरकार का बड़ा फैसला, अब चला सकेगा डिग्री कोर्स

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
NCERT building with students and education symbols representing new deemed university status in India
NCERT Deemed University Status India Education Reform

केंद्र सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा और अहम फैसला लेते हुए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद को ‘डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ का दर्जा दे दिया है। इस फैसले के बाद अब NCERT न केवल शोध और पाठ्यक्रम निर्माण तक सीमित रहेगा, बल्कि खुद भी डिग्री और उच्च शिक्षा कार्यक्रम संचालित कर सकेगा।

क्या है सरकार का फैसला?

शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, NCERT को UGC अधिनियम 1956 की धारा 3 के तहत ‘Deemed to be University’ घोषित किया गया है।

इसका मतलब है कि अब NCERT को विश्वविद्यालय जैसी शैक्षणिक स्वायत्तता मिल गई है।

अब NCERT क्या-क्या कर सकेगा?

इस नए दर्जे के बाद NCERT के अधिकार काफी बढ़ जाएंगे:

  • डिप्लोमा, अंडरग्रेजुएट (UG) और पोस्टग्रेजुएट (PG) कोर्स शुरू कर सकेगा
  • पीएचडी और शोध आधारित कार्यक्रम चला सकेगा
  • स्पेशलाइज्ड एजुकेशन प्रोग्राम डिजाइन कर सकेगा
  • देश-विदेश में ऑफ-कैंपस और ऑफशोर सेंटर खोल सकेगा (UGC गाइडलाइन के तहत)

क्यों लिया गया यह फैसला?

यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया माना जा रहा है।

सरकार का लक्ष्य है:

  • शिक्षक शिक्षा (Teacher Training) को बेहतर बनाना
  • शिक्षा में रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देना
  • एक मजबूत और आधुनिक शिक्षा ढांचा तैयार करना

छात्रों और शिक्षा प्रणाली पर क्या होगा असर?

विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले से:

  • शिक्षक बनने की पढ़ाई और अधिक गुणवत्ता वाली होगी
  • शिक्षा क्षेत्र में नए कोर्स और रिसर्च के अवसर बढ़ेंगे
  • NCERT का रोल सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगा

हालांकि, यह भी देखना होगा कि नए कोर्स और कैंपस कैसे और कब शुरू किए जाते हैं।

निष्कर्ष

NCERT को ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा मिलना भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। इससे न केवल शिक्षक शिक्षा मजबूत होगी, बल्कि छात्रों को भी नए अवसर मिलेंगे।

 

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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CBSE ने क्लास 9वीं के मैथ्स सिलेबस में बड़ा बदलाव किया है। 2026-27 सत्र से अब 12 की जगह 15 चैप्टर पढ़ाए जाएंगे, और 2027 की परीक्षा इसी नए पैटर्न पर होगी। क्या बदला है सिलेबस में? नए सिलेबस में कई अहम टॉपिक्स जोड़े गए हैं: नंबर सिस्टम सिक्वेंसेस और प्रोग्रेशन अरिथमेटिक आइडेंटिटीज यूक्लिड ज्योमेट्री एक्सिओम और पोस्टुलेट ट्राएंगल कांग्रुएंस थ्योरम क्वाड्रिलेटरल और मेंसुरेशन कुल मिलाकर अब स्टूडेंट्स को ज्यादा गहराई और विविधता के साथ मैथ्स पढ़ना होगा। बदलाव का मकसद क्या है? यह बदलाव NEP 2020 (नई शिक्षा नीति) के तहत किया गया है, जिसमें फोकस है: रटने की बजाय समझने पर जोर लॉजिकल और क्रिटिकल थिंकिंग बढ़ाना प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स को मजबूत करना मैथ्स को रियल लाइफ से जोड़ना भारतीय गणितज्ञ भी सिलेबस में अब स्टूडेंट्स पढ़ेंगे: आर्यभट्ट ब्रह्मगुप्त बौधायन इससे छात्रों को गणित में भारत के योगदान और इतिहास की जानकारी मिलेगी। एग्जाम और मार्किंग में बदलाव 80 मार्क्स: लिखित परीक्षा 20 मार्क्स: इंटरनल असेसमेंट 10 मार्क्स: पेन-पेपर टेस्ट 10 मार्क्स: प्रोजेक्ट, पोर्टफोलियो, लैब एक्टिविटी फायदा या दबाव? फायदे: कॉन्सेप्ट क्लियर होंगे रियल लाइफ एप्लिकेशन समझ आएगा प्रतियोगी परीक्षाओं में मदद चुनौतियां: सिलेबस बढ़ने से स्टडी लोड बढ़ सकता है कमजोर बेस वाले छात्रों को ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी

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