स्वास्थ्य

Lose Weight Naturally with Calorie Deficit Formula

वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं? इस सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट का आसान फॉर्मूला सच में करता है काम

surbhi मार्च 16, 2026 0
Simple calorie deficit formula for effective weight loss.
Dr. Siddhant Bhargava Weight Loss Tip

 

वजन कम करना कई लोगों के लिए आसान नहीं होता। डाइट प्लान, एक्सरसाइज, इंटरमिटेंट फास्टिंग और अलग-अलग सलाह के बीच लोग अक्सर कंफ्यूज हो जाते हैं। लेकिन सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट Dr. Siddhant Bhargava के मुताबिक वजन घटाने का सबसे आसान और वैज्ञानिक तरीका है कैलोरी डेफिसिट बनाना।

डॉ. सिद्धांत भार्गव बॉलीवुड सितारों जैसे Alia Bhatt, Ananya Panday और Sara Ali Khan के साथ काम कर चुके हैं। वे हेल्दी मील सर्विस प्लेटफॉर्म Food Darzee के सह-संस्थापक भी हैं।

 

वजन घटाने का असली नियम: कैलोरी डेफिसिट

डॉ. सिद्धांत के अनुसार, वजन घटाने का मूल सिद्धांत बेहद सरल है-
शरीर जितनी कैलोरी लेता है उससे ज्यादा कैलोरी खर्च करे।

इसे ही कैलोरी डेफिसिट कहा जाता है।

उदाहरण के लिए:

  • अगर आपका शरीर रोज 2000 कैलोरी खर्च करता है
  • और आप सिर्फ 1600–1700 कैलोरी लेते हैं

तो शरीर अतिरिक्त ऊर्जा के लिए स्टोर फैट को जलाना शुरू कर देता है, जिससे धीरे-धीरे वजन कम होने लगता है।

 

डाइट फॉलो करने से ज्यादा जरूरी है यह समझना

डॉ. सिद्धांत बताते हैं कि लोग अक्सर अलग-अलग डाइट ट्रेंड्स के पीछे भागते हैं, जैसे:

  • इंटरमिटेंट फास्टिंग
  • लो-कार्ब डाइट
  • क्रैश डाइट

लेकिन असल में इन सभी का उद्देश्य सिर्फ कैलोरी कम करना ही होता है।

 

कैलोरी डेफिसिट बनाने के दो आसान तरीके

1. कम खाना (Portion Control)
खाने की मात्रा थोड़ा कम कर दें और जंक फूड से बचें।

2️. ज्यादा एक्टिव रहना
वर्कआउट, वॉकिंग, रनिंग या जिम से ज्यादा कैलोरी बर्न करें।

इन दोनों तरीकों में से कोई भी अपनाया जा सकता है, बस शरीर को कम कैलोरी मिलनी चाहिए जितनी वह खर्च करता है

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Health workers in protective gear respond to the Ebola outbreak in the Democratic Republic of the Congo.
कांगो में इबोला का कहर, 500 से ज्यादा लोगों की मौत; WHO ने जताई गंभीर चिंता

अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला वायरस का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस प्रकोप में अब तक 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। बढ़ते मामलों के बीच WHO ने वैश्विक स्तर पर महामारी से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। अब तक कितने मामले सामने आए? WHO के मुताबिक, मई के मध्य में प्रकोप घोषित होने के बाद से DRC में अब तक: 1,561 पुष्ट इबोला संक्रमण के मामले 506 लोगों की मौत 254 मरीज स्वस्थ हुए 354 संदिग्ध मामलों की जांच जारी इसके अलावा पड़ोसी युगांडा में भी इबोला के 20 पुष्ट मामले सामने आए हैं, जिनमें 2 लोगों की मौत हुई है, जबकि 16 मरीज ठीक हो चुके हैं। Bundibugyo स्ट्रेन बना बड़ी चुनौती इस बार का प्रकोप इबोला के दुर्लभ Bundibugyo स्ट्रेन के कारण फैल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है। हालांकि, DRC में दो संभावित उपचारों की क्लीनिकल ट्रायल शुरू की गई है। इसमें: MBP134 मोनोक्लोनल एंटीबॉडी Remdesivir एंटीवायरल दवा की प्रभावशीलता और सुरक्षा का परीक्षण किया जा रहा है। WHO प्रमुख ने दी चेतावनी WHO के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा कि कांगो में जारी इबोला प्रकोप इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अगली महामारी का खतरा कभी भी सामने आ सकता है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक काल्पनिक स्थिति नहीं, बल्कि वास्तविक संकट है, जो बताता है कि दुनिया को महामारी से निपटने की तैयारियां लगातार मजबूत रखनी होंगी। कैसे फैलता है इबोला वायरस? इबोला वायरस संक्रमित व्यक्ति के: खून, शरीर के अन्य तरल पदार्थ, या संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क से फैलता है। यह एक गंभीर वायरल बीमारी है, जिसकी मृत्यु दर काफी अधिक हो सकती है। मानवीय संकट भी गहराया संयुक्त राष्ट्र की मानवीय एजेंसी OCHA के अनुसार, इटुरी (Ituri) प्रांत के विस्थापित शिविरों में खराब स्वच्छता, साफ पानी की कमी और सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2.73 लाख से अधिक विस्थापित लोग गंभीर मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं। वहीं राहत कार्यों के लिए आवश्यक धनराशि की भी कमी बनी हुई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं और बचाव अभियान पर असर पड़ रहा है।  

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रिम्स को मिली बड़ी सौगात, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने किया क्षेत्रीय नेत्र संस्थान का उद्घाटन

रांची। झारखंड के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बड़ी सौगात मिली है। राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) परिसर में अत्याधुनिक क्षेत्रीय नेत्र संस्थान (रीजनल आई इंस्टीट्यूट) का विधिवत उद्घाटन स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने किया। इस संस्थान के शुरू होने से अब राज्य के मरीजों को आंखों की गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा।   अत्याधुनिक सुविधाओं से होगा इलाज उद्घाटन के बाद स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य झारखंडवासियों को अपने ही राज्य में बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि संस्थान में मोतियाबिंद, रेटिना और आंखों से जुड़ी अन्य जटिल बीमारियों का इलाज एवं ऑपरेशन अत्याधुनिक तकनीक के साथ किया जाएगा। इससे मरीजों को बेहतर उपचार के साथ समय और खर्च दोनों की बचत होगी।   मंत्री ने कहा कि सरकार लगातार रिम्स को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है और क्षेत्रीय नेत्र संस्थान राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को नई मजबूती देगा।   हजारों मरीजों को मिलेगा लाभ इस अवसर पर कांके विधायक एवं रिम्स शासी परिषद के सदस्य सुरेश बैठा ने कहा कि इस संस्थान के शुरू होने से राज्य के हजारों मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा। अब बेहतर नेत्र चिकित्सा के लिए लोगों को राज्य से बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।   सुरक्षा विवाद पर भी दी प्रतिक्रिया कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा सरकारी सुरक्षा और कारकेड लौटाने के मुद्दे पर पूछे गए सवाल पर डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है, विशेषकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में। उन्होंने कहा कि यदि इस संबंध में कोई चिंता थी तो उसे कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष रखा जाना चाहिए था। मंत्री ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री सभी मंत्रियों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर गंभीरता से निर्णय लेते हैं।

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माइग्रेन के दर्द में अजवाइन का सहारा? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ और कैसे करें सही इस्तेमाल

नई दिल्ली: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, बढ़ता तनाव, नींद की कमी और अनियमित खानपान ने माइग्रेन की समस्या को आम बना दिया है। यह केवल साधारण सिरदर्द नहीं, बल्कि एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल समस्या है जो कई घंटों तक व्यक्ति की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित कर सकती है। माइग्रेन के दौरान सिर के एक हिस्से में तेज दर्द, मतली, उल्टी, तेज रोशनी और आवाज से परेशानी जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। दवाओं के अलावा कुछ घरेलू उपाय भी माइग्रेन के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। इन्हीं में से एक है अजवाइन, जो लगभग हर भारतीय रसोई में आसानी से मिल जाती है। आयुर्वेद में लंबे समय से अजवाइन का उपयोग पाचन, गैस, सर्दी-जुकाम और सिरदर्द जैसी समस्याओं में किया जाता रहा है। क्यों होता है माइग्रेन? विशेषज्ञों के अनुसार माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें सिर के एक हिस्से में बार-बार तेज दर्द होता है। यह दर्द 4 घंटे से लेकर 72 घंटे तक भी बना रह सकता है। इसके साथ कई लोगों को मतली, उल्टी, धुंधला दिखाई देना और चिड़चिड़ापन भी महसूस होता है। माइग्रेन के सामान्य ट्रिगर हैं: लगातार मानसिक तनाव पर्याप्त नींद न लेना हार्मोनल बदलाव लंबे समय तक भूखे रहना कुछ विशेष खाद्य पदार्थ तेज रोशनी और तेज आवाज माइग्रेन में कैसे फायदेमंद है अजवाइन? अजवाइन में थाइमोल (Thymol) नामक सक्रिय तत्व पाया जाता है। शोध के अनुसार इसमें एंटी-इन्फ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट और दर्द कम करने वाले गुण मौजूद होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार अजवाइन में: पाचन शक्ति बढ़ाने वाले गुण वात और कफ को संतुलित करने की क्षमता गैस और अपच कम करने वाले तत्व पाए जाते हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से माइग्रेन के कुछ ट्रिगर्स को कम करने में मदद कर सकते हैं। माइग्रेन में अजवाइन के संभावित फायदे 1. तनाव कम करने में मदद अजवाइन में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में सहायक माने जाते हैं। तनाव कम होने से माइग्रेन के एपिसोड की तीव्रता भी कम हो सकती है। 2. पाचन सुधारकर राहत कई लोगों में गैस, अपच और पेट की गड़बड़ी माइग्रेन का कारण बनती है। अजवाइन पाचन को बेहतर बनाकर इस ट्रिगर को कम करने में मदद कर सकती है। 3. सूजन कम करने में सहायक शरीर में सूजन भी माइग्रेन के लक्षणों को बढ़ा सकती है। अजवाइन के एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण सूजन कम करने में मदद कर सकते हैं। माइग्रेन में अजवाइन का इस्तेमाल कैसे करें? 1. अजवाइन की गर्म पोटली 2 से 4 चम्मच अजवाइन को तवे पर हल्का गर्म करें। इसे सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। समय-समय पर इसकी हल्की सुगंध लें। इससे बंद नाक खुलने, रक्त संचार बेहतर होने और सिरदर्द में कुछ राहत महसूस हो सकती है। 2. अजवाइन का पानी 2 कप पानी में 2 चम्मच अजवाइन डालें। इसे कुछ मिनट तक उबालें। छानकर सुबह और शाम हल्का गुनगुना पी सकते हैं। यह पाचन बेहतर रखने में मदद कर सकता है, जिससे माइग्रेन के कुछ ट्रिगर्स कम हो सकते हैं। माइग्रेन से बचने के लिए अपनाएं ये आदतें पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। रोज 7-8 घंटे की नींद लें। तेज रोशनी और तेज आवाज से बचें। लंबे समय तक खाली पेट न रहें। प्रोसेस्ड फूड और अत्यधिक कैफीन से दूरी बनाएं। योग, मेडिटेशन और नियमित व्यायाम करें। अपने माइग्रेन ट्रिगर्स की पहचान कर उनसे बचने की कोशिश करें।

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पैरों में सूजन को न करें नजरअंदाज! किडनी, हार्ट और लिवर की गंभीर बीमारी का हो सकता है संकेत

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