स्वास्थ्य

AI Detects Brain Tumors

AI से ब्रेन ट्यूमर की पहचान में क्रांति: MRI से 98% तक सटीक डायग्नोसिस, डॉक्टरों का काम होगा आसान

surbhi मई 4, 2026 0
AI analyzing MRI brain scan to detect tumor with high accuracy using deep learning model
AI Brain Tumor Detection MRI

नई दिल्ली: मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता सामने आई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एक नया डीप लर्निंग मॉडल अब MRI स्कैन के जरिए ब्रेन ट्यूमर की पहचान को और तेज़, सटीक और भरोसेमंद बना सकता है।

इस तकनीक का नाम MultiAttenNet है, जो जटिल मामलों में भी ट्यूमर को बेहतर तरीके से पहचानने में सक्षम है।

कैसे काम करता है यह AI मॉडल?

MultiAttenNet एक हाइब्रिड डीप लर्निंग सिस्टम है, जिसमें:

  • मल्टी-स्केल CNN (Convolutional Neural Networks)
  • ट्रांसफॉर्मर बेस्ड अटेंशन मैकेनिज्म

का इस्तेमाल किया गया है।

यह तकनीक न सिर्फ इमेज के छोटे-छोटे हिस्सों को बारीकी से समझती है, बल्कि पूरे MRI स्कैन का कॉन्टेक्स्ट भी पकड़ती है। इससे अलग-अलग आकार और अनियमित संरचना वाले ट्यूमर की पहचान आसान हो जाती है।

फॉल्स पॉजिटिव कम, सटीकता ज्यादा

इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत है इसका “अडैप्टिव अटेंशन सिस्टम”, जो सिर्फ जरूरी हिस्सों पर फोकस करता है।

इससे:

  • गलत अलर्ट (False Positives) कम होते हैं
  • ट्यूमर की लोकेशन और बाउंड्री ज्यादा सटीक मिलती है

कितनी है सटीकता?

रिसर्च के दौरान इस मॉडल का परीक्षण कई बड़े डेटासेट्स पर किया गया, जिनमें Brain Tumor Segmentation 2023 शामिल है।

नतीजे बेहद प्रभावशाली रहे:

  • Accuracy: 98.4%
  • Sensitivity: 96.8%
  • Specificity: 99.2%
  • False Positive Rate: सिर्फ 1.3%

यह प्रदर्शन मौजूदा कई एडवांस सिस्टम्स से बेहतर बताया जा रहा है।

कम डेटा में भी असरदार

इस AI मॉडल की एक खासियत यह भी है कि यह “सेमी-सुपरवाइज्ड लर्निंग” पर काम करता है।

यानी:

  • कम लेबल्ड डेटा में भी ट्रेन हो सकता है
  • अनलेबल्ड डेटा का भी उपयोग करता है
  • अलग-अलग क्लीनिकल परिस्थितियों में बेहतर काम करता है

डॉक्टरों और मरीजों के लिए क्या मतलब?

ब्रेन ट्यूमर की जल्दी और सही पहचान इलाज के लिए बेहद जरूरी होती है।

इस तकनीक से:

  • डॉक्टरों का वर्कलोड कम होगा
  • डायग्नोसिस में एकरूपता (Consistency) बढ़ेगी
  • मरीजों को जल्दी और बेहतर इलाज मिल सकेगा
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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मीठी ड्रिंक्स से बढ़ रहा फैटी लिवर का खतरा, स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताए बचाव के उपाय

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने 4 मई को लोगों को फैटी लिवर जैसी गंभीर समस्या को लेकर सतर्क किया है। मंत्रालय के अनुसार, जरूरत से ज्यादा चीनी और मीठी ड्रिंक्स का सेवन सीधे लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आज की अनहेल्दी लाइफस्टाइल और खानपान की खराब आदतें लिवर से जुड़ी बीमारियों को तेजी से बढ़ा रही हैं। यही वजह है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने फैटी लिवर से बचने के लिए कुछ आसान लेकिन बेहद जरूरी उपाय बताए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, लिवर शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो खाना पचाने, शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने, ऊर्जा बनाने और हार्मोन संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन जब शरीर में ज्यादा मात्रा में चीनी पहुंचती है, तो उसका असर सीधे लिवर पर पड़ता है।   कैसे नुकसान पहुंचाती है ज्यादा चीनी? शोध के अनुसार, चीनी शरीर में ग्लूकोज और फ्रुक्टोज के रूप में लिवर तक पहुंचती है। जब कोई व्यक्ति जरूरत से ज्यादा मीठा खाता है, तो शरीर में इंसुलिन का स्तर बढ़ जाता है। इससे लिवर अतिरिक्त ग्लूकोज और फ्रुक्टोज को फैट के रूप में जमा करने लगता है। लगातार ऐसा होने पर लिवर में चर्बी जमा होती जाती है और फैटी लिवर की समस्या विकसित हो जाती है।   मीठी ड्रिंक्स ज्यादा खतरनाक क्यों? विशेषज्ञ बताते हैं कि मीठी ड्रिंक्स में मौजूद फ्रुक्टोज और आर्टिफिशियल स्वीटनर्स बहुत तेजी से लिवर तक पहुंचते हैं। इसके अलावा सोडा, केमिकल्स और आर्टिफिशियल कलर लिवर को और ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं। यही कारण है कि कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस और शुगर ड्रिंक्स का अधिक सेवन फैटी लिवर का खतरा तेजी से बढ़ा सकता है।   फैटी लिवर से बचने के 3 आसान उपाय MoHFW ने फैटी लिवर से बचाव के लिए तीन महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं— •    संतुलित और पौष्टिक आहार लें  •    ताजे फलों का नियमित सेवन करें  •    शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त पानी पिएं  विशेषज्ञों के अनुसार, संतुलित डाइट और फलों में मौजूद फाइबर व एंटीऑक्सीडेंट्स लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। वहीं पर्याप्त पानी शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में सहायक होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को शराब से दूरी बनाने, पर्याप्त नींद लेने, नियमित व्यायाम करने और तनाव कम रखने की भी सलाह दी है, ताकि लिवर लंबे समय तक स्वस्थ रह सके।

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फ्लू नहीं हो सकता है हंटावायरस! इन संकेतों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

नई दिल्ली, एजेंसियां। दुनियाभर में संक्रामक बीमारियों के बढ़ते खतरे के बीच अब हंटावायरस संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ गई है। हाल ही में अटलांटिक महासागर में एक क्रूज शिप पर फैले संदिग्ध हंटावायरस संक्रमण से तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग बीमार बताए जा रहे हैं। इस घटना के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मामले पर नजर बनाए रखी है और यात्रियों को मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। शुरुआती जांच में एक व्यक्ति में हंटावायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है, जबकि पांच अन्य लोगों में भी संक्रमण की आशंका जताई गई है।   क्या है हंटावायरस संक्रमण? हंटावायरस एक गंभीर वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृंतक जीवों के मल, पेशाब और लार के संपर्क में आने से फैलता है। यह वायरस इंसानों में सांस के जरिए भी प्रवेश कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बीमारी दुर्लभ जरूर है, लेकिन कई मामलों में जानलेवा साबित होती है। मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक, संक्रमित लोगों में मृत्यु दर 35 से 60 प्रतिशत तक हो सकती है।   फ्लू जैसे दिखते हैं शुरुआती लक्षण हंटावायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू की तरह होते हैं, जिससे इसकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। संक्रमित व्यक्ति को बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, बदन दर्द और कमजोरी महसूस हो सकती है। संक्रमण बढ़ने पर सांस लेने में दिक्कत, सीने में जकड़न और फेफड़ों में पानी भरने जैसी गंभीर समस्याएं सामने आने लगती हैं। कई मामलों में इसका असर किडनी और अन्य अंगों पर भी पड़ता है।   बचाव ही सबसे बड़ा उपाय विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी का अभी तक कोई विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट और आईसीयू जैसी सुविधाओं की जरूरत पड़ सकती है। बचाव के लिए चूहों और उनके मल-मूत्र से दूरी बनाए रखना जरूरी है। घरों और गोदामों की सफाई करते समय ग्लव्स और ब्लीच का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। वहीं, संक्रमित जगहों पर झाड़ू या वैक्यूम क्लीनर के उपयोग से बचने को कहा गया है, क्योंकि इससे वायरस हवा में फैल सकता है।

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इन सब्जियों को कच्चा खाना पड़ सकता है भारी

नई दिल्ली, एजेंसियां।  हेल्दी रहने के लिए लोग अक्सर कच्ची सब्जियों को अपनी डाइट में शामिल करते हैं, लेकिन हर सब्जी को कच्चा खाना सुरक्षित नहीं होता। विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ सब्जियों में ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो बिना पकाए खाने पर पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं और कई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकते हैं। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर पाचन वाले लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।   क्यों नुकसानदायक होती हैं कुछ कच्ची सब्जियां? कई सब्जियों में प्राकृतिक रूप से मौजूद रसायन और एंजाइम कच्चे रूप में शरीर के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। ये पाचन में बाधा डालते हैं, गैस, एसिडिटी और पेट दर्द जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। इसलिए इन्हें सही तरीके से पकाकर खाना जरूरी होता है।   इन सब्जियों को कच्चा खाने से बचें ब्रोकली और फूलगोभी जैसी सब्जियों में गोइट्रोजन और गैस बनाने वाले तत्व पाए जाते हैं, जो कच्चा खाने पर थायरॉयड और पाचन से जुड़ी परेशानी बढ़ा सकते हैं। पत्तागोभी भी कच्ची खाने पर पेट में भारीपन और गैस का कारण बन सकती है।   टमाटर भले ही सलाद का हिस्सा हो, लेकिन कुछ लोगों में यह एसिडिटी बढ़ा सकता है। वहीं, बैंगन को कच्चा खाना बिल्कुल नहीं चाहिए, क्योंकि इसमें सोलानिन नामक हल्का जहरीला तत्व होता है, जो अपच और जलन पैदा कर सकता है।   इसके अलावा, पालक और सरसों के पत्तों में ऑक्सलेट्स होते हैं, जो कच्चे सेवन पर कैल्शियम के अवशोषण को प्रभावित करते हैं और किडनी स्टोन का खतरा बढ़ा सकते हैं।   सुरक्षित तरीके से कैसे करें सेवन? इन सब्जियों को हल्का उबालकर, भूनकर या स्टीम करके खाना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है। पकाने से इनमें मौजूद हानिकारक तत्व काफी हद तक कम हो जाते हैं और पाचन भी आसान हो जाता है।   सावधानी ही है बचाव स्वस्थ रहने के लिए केवल पौष्टिक भोजन ही नहीं, बल्कि उसे सही तरीके से खाना भी जरूरी है। छोटी-सी लापरवाही पेट से जुड़ी बड़ी समस्या बन सकती है। इसलिए डाइट में बदलाव करते समय यह जरूर जान लें कि कौन सी सब्जी किस रूप में आपके लिए फायदेमंद है।

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