झारखंड

Jharkhand Braces for Rain and Storms

झारखंड में फिर बिगड़ेगा मौसम, 13-14 मई के लिए येलो अलर्ट जारी, कई जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी

surbhi मई 13, 2026 0
Dark clouds and heavy rain over Ranchi roads amid Jharkhand weather alert warning
Jharkhand Weather Alert May 2026

रांची समेत कई जिलों में तेज हवाओं और वज्रपात का खतरा

Jharkhand में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। मंगलवार को राजधानी Ranchi समेत कई जिलों में तेज आंधी और बारिश देखने को मिली। खराब मौसम के कारण कई जगहों पर पेड़ उखड़कर सड़कों पर गिर गए, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। कुछ इलाकों में पेड़ कारों और ई-रिक्शा पर भी गिर पड़े।

मौसम विभाग ने 13 और 14 मई के लिए राज्य के कई हिस्सों में येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार 18 मई तक राज्य में आंधी, बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं का असर बना रह सकता है।

इन जिलों में जारी हुआ येलो अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक 13 और 14 मई को पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार, लोहरदगा, हजारीबाग और कोडरमा को छोड़कर बाकी अधिकांश जिलों में मौसम खराब रह सकता है।

Ranchi सहित कई जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, गरज-चमक के साथ बारिश और वज्रपात की संभावना जताई गई है। इसे देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है।

15 मई को ऑरेंज अलर्ट की चेतावनी

15 मई को मौसम और ज्यादा खराब हो सकता है। मौसम विभाग ने Ranchi, Khunti, Ramgarh, Bokaro, Giridih, Dhanbad, Dumka, Jamtara, Deoghar, Godda, Sahibganj और Pakur में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

इन इलाकों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी, बारिश और वज्रपात की संभावना जताई गई है।

18 मई तक जारी रहेगा मौसम का असर

मौसम विभाग के अनुसार 17 और 18 मई को भी राज्य के उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में कई जगहों पर गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।

लगातार बदलते मौसम के कारण लोगों को सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

पलामू में फिर बढ़ी गर्मी

एक तरफ राज्य के कई हिस्सों में बारिश हो रही है, वहीं Medininagar में गर्मी का असर बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को यहां अधिकतम तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

पिछले 24 घंटों में तापमान में 2.2 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है, जिससे लोगों को तेज धूप और गर्म हवाओं का सामना करना पड़ा।

वहीं Bokaro का अधिकतम तापमान 32.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो पिछले 24 घंटों में 2.4 डिग्री कम रहा।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Anemia monitoring
अब मोबाइल ऐप के जरिए होगी एनीमिया मरीजों की निगरानी

रांची। झारखंड में एनीमिया यानी खून की कमी की समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार डिजिटल तकनीक का सहारा ले रही है। इसी कड़ी में AMB T-4 मोबाइल ऐप के सफल क्रियान्वयन को लेकर नामकुम स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कार्यालय में एक ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई। बैठक में इस ऐप के उपयोग, तकनीकी सुविधाओं और राज्यभर में इसके विस्तार पर विस्तार से चर्चा हुई।   ऐप की तकनीकी खूबियों पर चर्चा बैठक के दौरान अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने ऐप की प्रमुख विशेषताओं पर विचार-विमर्श किया। इसमें ऑफलाइन मोड में काम करने की सुविधा, रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और गंभीर एनीमिया से पीड़ित मरीजों की ट्रैकिंग जैसे फीचर्स शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह ऐप स्वास्थ्यकर्मियों को गांव-गांव तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में मदद करेगा। इसके अलावा ऐप को JAP-IT के सर्वर पर माइग्रेट करने और इसे VHSND तथा PMSMA जैसे स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जोड़ने पर भी चर्चा हुई, ताकि विभिन्न योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।   एक महीने में राज्यभर में होगा सक्रिय शिशु स्वास्थ्य कोषांग के राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. विजय रजक ने बताया कि अगले एक महीने के भीतर राज्यभर में इस ऐप को इंस्टॉल कर पूरी तरह सक्रिय करने की योजना है। बैठक में आईईसी के राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. राहुल किशोर सिंह, जैप आईटी और भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।   राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान हाल ही में चंडीगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन में झारखंड के AMB T-4 मोबाइल ऐप और ‘एकीकृत शिशु देखभाल मॉडल’ को देश की बेहतरीन स्वास्थ्य कार्यप्रणालियों में शामिल करते हुए सम्मानित किया गया था। राज्य में सहिया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे संयुक्त गृह भ्रमण मॉडल को भी राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। इस पहल से कुपोषित बच्चों की पहचान और उपचार में तेजी आई है तथा पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हुआ है।

Anjali Kumari मई 15, 2026 0
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Jharkhand: अब ऑनलाइन वैध होंगे अवैध मकान, 2 माह में आवेदन, 3 किस्तों में करें पेमेंट

रांची। झारखंड में अब अवैध भवन ऑनलाइन वैध किये जा सकेंगे। इसके साथ ही लोगों को 3 आसान किस्तों में भुगतान की सुविधा भी दी जा रही है। नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार ने अपील की है कि वे तय समय के अंदर अपने अवैध मकान को नियमित करने के लिए आवेदन कर दें, ताकि समय पर काम पूरा हो सके। ऑनलाइन पोर्टन का उद्घाटन मंत्री ने इसके लिए गुरुवार को झारखंड अनधिकृत निर्मित भवन नियमितीकरण नियमावली, 2026 के तहत ऑनलाइन पोर्टल का उद्घाटन किया।  उन्होंने कहा कि आम लोगों को मौका प्रदान किया जा रहा है कि वे भवनों का नियमितीकरण करा सकें। इसमें यह पोर्टल काफी सहायक साबित होगा। सरकार ने आम लोगों को राहत प्रदान करने के लिए यह योजना लांच की है। अब लोग घर बैठे पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर अपना मकान नियमित करा सकेंगे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर आम लोगों को राहत देते हुए अनियमित मकानों के नियमितीकरण के लिए यह अवसर प्रदान किया गया है।   नगर विकास विभाग ने अथक प्रयासों के बाद इस योजना को मूर्तरूप दिया है। और अब आनलाइन पोर्टल का शुभारंभ हो चुका है। लोग अब पोर्टल के माध्यम से अपने मकानों के नियमितीकरण के लिए आवेदन कर सकेंगे और अपने मकानों को नियमित करा सकेंगे।  भवन नियमितीकरण का उद्देश्य अनियमितीकरण को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि जो लोग बिना नक्शा और मास्टर प्लान के मकान बना लिए हैं, उन लोगों के लिए एक मौका दिया गया है। बहुत सरल है नियमावली सरकार ने इसके लिए नियमावली को बहुत ही सरल बनाया है। नियमित करने में लगने वाली राशि को भी तीन किस्तों में भुगतान का प्रविधान कर लोगों को राहत देने का प्रयास किया है। व्यवस्थित शहरीकरण को बढ़ावा विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार के मुताबिक, सरकार नगरीय क्षेत्रों के विकास को गंभीरता से ले रही है। शहर की सूरत बदल रही है। रांची में तीन फ्लाइओवर बन कर तैयार है। सिरमटोली कनेक्टिंग फ्लाइओवर पर भी काम चल रहा है। अरगोड़ा, करमटोली और हरमू में तीन नए फ्लाइओवर की स्वीकृति मिल चुकी है। जमशेदपुर और धनबाद में भी फ्लाईओवर बन रहे हैं। मुख्यमंत्री का निर्देश है कि शहरीकरण अव्यवस्थित ढंग से ना हो। रोड, फुटपाथ, टाउनहाल, नाली आदि व्यवस्थित हों। शहरों में उन्नत बस स्टैंड की दिशा में काम जारी है। निकायों का राजस्व बढ़ाने पर फोकस है। टाउन प्लानर, इंजीनियर आदि की नियुक्ति सरकार ने की है। 2 माह में करें ऑनलाइन आवेदन दो माह के अंदर आनलाइन आवेदन करना है और छह माह के अंदर नियमितीकरण का निर्णय ले लिया जाएगा। जी 2 और 300 वर्गमीटर से कम में बने मकानों का ही नियमितीकरण होगा।

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देवघर अस्पताल की बदहाल व्यवस्था ,गंदगी और दुर्गंध से बेहाल मरीज

देवघर। देवघर के सदर अस्पताल में इन दिनों गंदगी और कचरे का अंबार मरीजों और उनके परिजनों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। अस्पताल परिसर में कई दिनों से कचरा जमा रहने के कारण तेज दुर्गंध फैल रही है, जिससे मरीजों को इलाज के साथ-साथ अस्वच्छ माहौल का भी सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि अस्पताल पहुंचते ही उन्हें गंदगी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है।   नगर निगम पर लापरवाही का आरोप   अस्पताल परिसर के बाहर पार्किंग स्टैंड के पास रखे नगर निगम के कचरा डब्बों में लंबे समय से कूड़ा जमा है। समय पर कचरा नहीं उठाए जाने के कारण वहां बदबू और गंदगी का माहौल बना हुआ है। मरीजों और उनके परिजनों ने नगर निगम और जिला प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि नियमित रूप से सफाई और कचरा उठाव होता, तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। लोगों ने यह भी कहा कि अस्पताल के मुख्य द्वार के पास फैली गंदगी से अस्पताल की छवि खराब हो रही है। कई परिजनों ने अस्पताल के अंदर की साफ-सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। खासकर मेटरनिटी वार्ड में पर्याप्त बेड की कमी और साफ-सफाई की खराब स्थिति को लेकर नाराजगी जताई गई।   अस्पताल प्रबंधन ने मानी समस्या मामले पर सदर अस्पताल की उपाधीक्षक Dr. Sushma Verma ने माना कि गंदगी के कारण मरीजों और अस्पताल प्रशासन दोनों को परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि नियमित कचरा उठाव नहीं होने के कारण यह स्थिति बनी है। डॉ. सुषमा वर्मा के अनुसार नगर निगम से संपर्क कर समस्या की जानकारी दी गई है और जल्द ही अस्पताल परिसर से कचरा हटाने का आश्वासन मिला है। अस्पताल प्रबंधन को उम्मीद है कि जल्द सफाई व्यवस्था सामान्य कर दी जाएगी, ताकि मरीजों को राहत मिल सके।

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