झारखंड

Jharkhand Under Yellow Alert

झारखंड में मॉनसून हुआ सक्रिय, 27 जून तक कई जिलों में येलो अलर्ट; बारिश और वज्रपात की चेतावनी

surbhi जून 22, 2026 0
Dark monsoon clouds and rainfall over Jharkhand as IMD issues yellow alert for several districts.
Jharkhand Monsoon Alert Until June 27

रांची: झारखंड में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के सक्रिय होने के साथ ही मौसम का मिजाज बदल गया है। राज्य के कई हिस्सों में बारिश का दौर शुरू हो चुका है और आने वाले दिनों में भी मौसम ऐसा ही बने रहने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 27 जून तक राज्य के विभिन्न जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है।

मौसम विभाग के अनुसार, पंजाब से बिहार तक सक्रिय टर्फ और झारखंड से तटीय आंध्र प्रदेश तक बने दूसरे टर्फ के कारण राज्य में नमी बढ़ रही है। इसके चलते अगले कुछ दिनों तक बादल छाए रहने, हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना है।

तापमान में आएगी गिरावट

मौसम विभाग का अनुमान है कि 22 और 23 जून के दौरान अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। हालांकि, इसके बाद तापमान में फिर से 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी होने की संभावना जताई गई है।

गुमला में हुई सबसे ज्यादा बारिश

पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक 40.2 मिलीमीटर बारिश गुमला जिले के चैनपुर में रिकॉर्ड की गई।

इसके अलावा—

  • रांची में 35.6 मिमी बारिश
  • बोकारो में 35.5 मिमी बारिश
  • नामकुम में 23.5 मिमी बारिश दर्ज की गई

तेज हवा और वज्रपात का अलर्ट

22 जून को दक्षिणी झारखंड और राजधानी क्षेत्र के आसपास के जिलों में तेज हवाओं और वज्रपात की चेतावनी जारी की गई है।

वहीं 23 जून से 27 जून तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में—

  • गरज-चमक के साथ बारिश,
  • वज्रपात,
  • और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और खुले स्थानों में जाने से बचने की सलाह दी है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

झारखंड

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CBSE 12th Board Result: DPS बोकारो का आदित्य बना साइंस में नेशनल टॉपर पुनर्मूल्यांकन में बढ़े अंक

बोकारो। सीबीएसई की बोर्ड परीक्षाओं में दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) बोकारो के छात्र आदित्य मिश्रा 12वीं साइंस में नेशनल टॉप बने हैं। अब तक विज्ञान संकाय में झारखंड स्टेट टॉपर रहे आदित्य का पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के उपरांत कुल प्राप्तांक 99.20 प्रतिशत से बढ़कर 99.60 प्रतिशत हो गया है। आदित्य ने विगत 13 मई, 2026 को घोषित परीक्षा-परिणाम में अपने बायोलॉजी के रिजल्ट पर असंतोष व्यक्त करते हुए बोर्ड की मूल्यांकन प्रणाली को चुनौती दी थी। उन्होंने री-इवैल्युएशन के लिए सीबीएसई को आधिकारिक रूप से आवेदन किया, जिसका परिणाम उनकी अपेक्षा के अनुरूप और सुखद रहा। पुनर्मूल्यांकन में आदित्य के बायोलॉजी के मार्क्स अब 96 से बढ़कर 99 हो हो गए। इसके साथ ही अब वह कानपुर की छात्रा सोनाक्षी गोयल के साथ संयुक्त रूप से विज्ञान संकाय के नेशनल टॉपर हो गए। अब इन दोनों विद्यार्थियों के कुल प्राप्तांक 99.60 प्रतिशत हैं। 3 विषयों में मिले 100-100 अंक आदित्य ने तीन विषयों – इंग्लिश कोर, केमिस्ट्री और पेंटिंग में 100 में 100 अंक हासिल किए हैं। जबकि, फिजिक्स में उन्हें 99 अंक मिले। उक्त विषयों के अलावा अन्य सभी में उन्होंने ए1 ग्रेडिंग अर्जित की है। स्कूल ने किया सम्मानित आदित्य के प्रदर्शन से डीपीएस बोकारो प्रबंधन खुश है। सोमवार को विद्यालय के प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार ने आदित्य को उनके पिता प्रजेश चन्द्र मिश्रा के साथ सम्मानित किया। प्राचार्य ने उन्हें माला पहनाई और मिठाई खिलाकर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना व्यक्त की। डॉ. गंगवार ने आदित्य की इस उपलब्धि को न केवल विद्यालय, बल्कि पूरे बोकारो और समस्त झारखंड प्रदेश के लिए अत्यंत ही गौरवपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आदित्य शुरू से ही प्रतिभावान छात्र रहा है और अपनी मेधाविता, लगन व परिश्रम की बदौलत विद्यालय के कुशल शिक्षकों को मार्गदर्शन में राष्ट्रीय मानचित्र पर उसने डीपीएस बोकारो का परचम लहराया है। इस मौके पर विद्यालय के वरीय उपप्राचार्य अंजनी भूषण व उपप्राचार्या शालिनी शर्मा सहित अन्य शिक्षकगण मौजूद रहे।

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रांची। झारखंड के वन क्षेत्रों में मानसून के दौरान तीन महीने तक सन्नाटा पसरा रहेगा। वन एवं पर्यावरण विभाग ने एक जुलाई से 30 सितंबर तक सभी प्रकार की गतिविधियों पर रोक लगा दी है। इसका मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और नए लगाए जाने वाले पौधों को बेहतर वातावरण देना है। जंगल में अन्य सभी काम बंद रहेंगे इस अवधि में पर्यटन, जंगल सफारी, सड़क निर्माण, बिजली टावर लगाने जैसे सभी कार्य पूरी तरह बंद रहेंगे। पलामू टाइगर रिजर्व और दलमा समेत सभी प्रमुख वन क्षेत्रों में यह नियम सख्ती से लागू किया जाएगा। विभाग का मानना है कि बारिश के समय मानव गतिविधियों में कमी से वन्यजीवों को प्राकृतिक रूप से विचरण करने का अवसर मिलता है और नए पौधों के पनपने की संभावना बढ़ जाती है।   10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य मानसून के इन तीन महीनों में राज्य भर में 10 लाख से अधिक पौधे लगाने की योजना है। विभाग ने इसके लिए विशेष रणनीति बनाई है। जिसमें कच्ची संरचनाओं के जरिए पानी का संचयन प्रमुख भूमिका निभाएगा। पलामू क्षेत्र में जून तक औसत से कम बारिश होने के कारण पौधों की सिंचाई एक चुनौती बन गई है। ऐसे में टैंकर और स्थानीय संसाधनों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। कृषि वानिकी विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई से सितंबर के बीच अधिक बारिश होती है। लेकिन जून में लगाए गए पौधों को बचाने के लिए अतिरिक्त प्रयास जरूरी हैं। यही कारण है कि इस बार पौधरोपण के साथ-साथ संरक्षण पर भी बराबर ध्यान दिया जा रहा है। मानसून के बाद इको टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा वन विभाग मानसून के बाद पर्यटन गतिविधियों को नए स्वरूप में शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इको टूरिज्म का दायरा बढ़ाने के साथ जंगल सफारी के लिए बैट्री चालित वाहनों की संख्या 25 तक करने की योजना है। इसके अलावा वन क्षेत्रों में स्थित आवासीय परिसरों में सोलर आधारित बिजली व्यवस्था लागू की जाएगी।   पलामू टाइगर रिजर्व और लातेहार में प्रस्तावित सफारी परियोजनाओं को भी मानसून के बाद तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। विभाग का लक्ष्य है कि पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन को संतुलित तरीके से विकसित किया जाए, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिले और जंगल का प्राकृतिक संतुलन भी बना रहे।

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लोहरदगा। झारखंड के लोहरदगा सदर अस्पताल में डॉक्टरों और आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता के बावजूद मरीजों, खासकर गर्भवती महिलाओं को निजी अस्पतालों में रेफर किए जाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हाल ही में एक गर्भवती महिला को रेफर किए जाने के बाद स्कूटी से निजी अस्पताल ले जाने की घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पताल में सक्रिय बिचौलियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।   सिजेरियन के नाम पर बढ़ रहे रेफरल जानकारी के अनुसार, सामान्य प्रसव की तुलना में सिजेरियन डिलीवरी के मामलों में मरीजों को अक्सर निजी अस्पताल भेज दिया जाता है। जबकि सदर अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ और एनेस्थेटिस्ट जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। चिकित्सा पदाधिकारियों के 11 स्वीकृत पदों में से फिलहाल पांच चिकित्सक कार्यरत हैं, जिनमें तीन महिला चिकित्सक और दोनों स्वीकृत स्त्री रोग विशेषज्ञ भी शामिल हैं।   बिचौलियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल स्थानीय लोगों का आरोप है कि निजी अस्पतालों के एजेंट अस्पताल परिसर में सक्रिय रहते हैं और मरीजों व उनके परिजनों को बहलाकर निजी अस्पतालों में ले जाते हैं। कई मामलों में मरीजों को सुरक्षित एंबुलेंस के बजाय निजी वाहनों से ले जाया जाता है, जिससे उनकी जान भी जोखिम में पड़ सकती है। हालिया घटना के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है।   सरकारी सुविधाओं के बावजूद निजी अस्पतालों का रुख स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, केवल मई 2026 में लोहरदगा सदर प्रखंड की 18 गर्भवती महिलाओं का प्रसव निजी अस्पतालों में हुआ। यह सवाल खड़ा होता है कि जब सरकारी अस्पताल में आवश्यक संसाधन मौजूद हैं, तब भी मरीजों को बाहर क्यों जाना पड़ रहा है।   सुधार की जरूरत स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से स्पष्ट है कि केवल संसाधन उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। अस्पताल प्रबंधन, रेफरल प्रक्रिया और बिचौलियों पर प्रभावी नियंत्रण के बिना मरीजों का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा बहाल करना बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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