झारखंड

Orange Alert in Jharkhand

Jharkhand Weather: 17-18 मई को झारखंड के कई जिलों में तेज आंधी और बारिश के आसार, ऑरेंज अलर्ट जारी

surbhi मई 16, 2026 0
Dark clouds and strong winds over Jharkhand as IMD issues orange alert for thunderstorms and rain
Jharkhand-Weather-Orange-Alert-May-2026

Jharkhand में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र का असर अब राज्य के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है। मौसम विभाग ने 16 से 21 मई तक झारखंड के कई जिलों में तेज आंधी, वज्रपात और बारिश की संभावना जताई है। इसे देखते हुए 17 और 18 मई के लिए कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

17 मई को इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार 17 मई को Ranchi समेत धनबाद, कोडरमा, हजारीबाग, बोकारो, रामगढ़, गिरिडीह, देवघर, दुमका, जामताड़ा, पाकुड़, गोड्डा और साहिबगंज में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चल सकती है। इसके साथ वज्रपात और बारिश की भी संभावना है।

स्थिति को देखते हुए इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं राज्य के अन्य हिस्सों में बादल छाए रहने, 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने और कहीं-कहीं बारिश व वज्रपात को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है।

18 मई को भी खराब रहेगा मौसम

18 मई को भी मौसम में ज्यादा राहत मिलने के संकेत नहीं हैं। मौसम विभाग ने रांची, धनबाद, कोडरमा, हजारीबाग, बोकारो, रामगढ़, चतरा, गिरिडीह, देवघर, जामताड़ा, दुमका, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज जिलों में तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई है।

इन जिलों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चल सकती है और वज्रपात की आशंका भी बनी हुई है। इसलिए इन क्षेत्रों के लिए फिर से ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। बाकी जिलों में येलो अलर्ट लागू रहेगा।

इन जिलों में लू का असर

एक तरफ जहां कई जिलों में बारिश और आंधी का खतरा है, वहीं दूसरी तरफ राज्य के कुछ हिस्सों में गर्मी का असर भी जारी रहेगा।

Garhwa, Palamu और Latehar में 16 से 18 मई तक लू चलने की संभावना जताई गई है। वहीं 17 मई को चतरा जिले में भी हीटवेव की स्थिति बन सकती है।

मेदिनीनगर के तापमान में बड़ी गिरावट

लगातार मौसम बदलने के बीच Medininagar के तापमान में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। गुरुवार को यहां अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस था, लेकिन अगले 24 घंटों में तापमान करीब 5 डिग्री गिरकर 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और वज्रपात के समय खुले स्थानों से दूर रहने की अपील की है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Jharkhand transfer posting ban
झारखंड में ट्रांसफर - पोस्टिंग पर रोक

रांची। झारखंड ट्रांसफर पोस्टिंग पर पूरी तरह रोक लग चुकी है। यह निर्देश चुनाव आयोग ने  दिया है। चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट  किया  कि 20 जून से होने वाले  SIR को देखते हुए लिया गया। बता दे ट्रांसफर पोस्टिंग साल में 2 बार यानी जून- जुलाई और दिसंबर होता है।  झारखंड के अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सह अपर सचिव सुबोध कुमार ने सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव और उपायुक्तों को पत्र भेजकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पत्र में कहा गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य में लगे अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है और वर्तमान में उनसे प्री-एसआईआर का काम लिया जा रहा है। ऐसे में कार्य की निरंतरता बनाए रखने के लिए इनका स्थानांतरण आयोग की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता।   एसडीओ, बीडीओ और सीओ स्तर के अधिकारी शामिल चुनाव संबंधी कार्यों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाले निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी के रूप में एसडीओ स्तर के अधिकारी कार्यरत हैं। वहीं सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी के तौर पर बीडीओ और सीओ स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा बीएलओ पर्यवेक्षक और बीएलओ भी इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा रहे हैं।चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन सभी पदों पर कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले से पहले आयोग की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।   रिक्त पदों को जल्द भरने का निर्देश चुनाव आयोग ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि जो पद वर्तमान में रिक्त हैं, उन्हें भी आयोग की सहमति लेकर जल्द भरा जाए। आयोग का उद्देश्य है कि एसआईआर का कार्य तय समयसीमा के भीतर बिना किसी बाधा के पूरा हो सके।   साल में दो बार होती है ट्रांसफर-पोस्टिंग प्रक्रिया राज्य में सामान्य तौर पर ट्रांसफर-पोस्टिंग की प्रक्रिया जून-जुलाई और दिसंबर में होती है। लेकिन इस बार चुनाव आयोग की सख्ती के कारण संबंधित विभागों को तबादले से पहले विशेष अनुमति लेनी होगी।   एसआईआर को लेकर प्रशासन अलर्ट 20 जून से शुरू होने वाले विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। आयोग चाहता है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य पूरी पारदर्शिता और व्यवस्थित तरीके से पूरा हो, ताकि चुनाव प्रक्रिया प्रभावित न हो।

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झारखंड के कई जिलों में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई वट सावित्री पूजा

रांची। वट सावित्री पूजा के अवसर पर झारखंड  के कई जिलों में शनिवार को श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिला। सुहागिन महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर वट वृक्ष की पूजा-अर्चना की और अपने पति की लंबी आयु तथा सुख-समृद्धि की कामना की। महिलाओं ने व्रत रखकर पारंपरिक विधि-विधान से पूजा संपन्न की।   वट वृक्ष की परिक्रमा कर मांगा अखंड सौभाग्य सुबह से ही महिलाएं पूजा की थाली, फल और पूजा सामग्री लेकर वट वृक्ष के पास पहुंचीं। उन्होंने वट वृक्ष की पूजा कर उसकी परिक्रमा की और वट सावित्री कथा सुनी। पूजा के दौरान महिलाओं ने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगा। कई जगहों पर पूजा के बाद महिलाओं ने पति के चरण स्पर्श कर जल ग्रहण किया।   सरायकेला-खरसावां में दिखी खास आस्था सरायकेला-खरसावां जिले में महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ वट सावित्री पूजा की। सरायकेला, खरसावां, सीनी, राजनगर और चांडिल सहित आसपास के क्षेत्रों में महिलाओं ने वट वृक्ष के नीचे पूजा-अर्चना की और फल अर्पित किए। पूजा के बाद पति के चरण पखारने की परंपरा भी निभाई गई।   पाकुड़ और बगोदर में कथा सुनने उमड़ी महिलाएं पाकुड़ में जिला मुख्यालय और प्रखंड क्षेत्रों में महिलाओं ने वट सावित्री कथा सुनी और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा की। वहीं Bagodar में भी महिलाओं में विशेष उत्साह देखा गया। पुरोहितों द्वारा कथा सुनाई गई और महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर पति की लंबी उम्र की कामना की।   साहिबगंज में निभाई गई पारंपरिक रस्में साहिबगंज में भी सुहागिन महिलाओं ने व्रत रखकर वट वृक्ष के नीचे पूजा की। पूजा के बाद महिलाओं ने अपने पतियों को बांस से बने पारंपरिक पंखे से हवा कर पारिवारिक सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। पूरे राज्य में यह पर्व धार्मिक आस्था और पारंपरिक संस्कृति के साथ मनाया गया।

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हजारीबाग के अस्पताल में मौत का कहर

हजारीबाग। शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में 12 घंटे के भीतर तीन मरीजों की मौत के बाद भारी हंगामा हो गया। मृतकों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन, डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में लोग कार्रवाई की मांग को लेकर जुट गए।   ऑक्सीजन नहीं मिलने से दो मरीजों की मौत का आरोप परिजनों का आरोप है कि दो मरीजों की मौत समय पर ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण हुई। उन्होंने बताया कि कई बार डॉक्टरों और कर्मचारियों से गुहार लगाने के बावजूद इलाज शुरू नहीं किया गया। मरीजों की हालत बिगड़ती रही, लेकिन आवश्यक सुविधा समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई। इससे गुस्साए परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर विरोध प्रदर्शन किया।   प्रसव के दौरान महिला की गई जान कटकमसांडी प्रखंड की रहने वाली शोभा कुमारी की मौत प्रसव के दौरान हो गई। परिजनों के अनुसार डॉक्टरों ने खून की कमी बताते हुए रक्त चढ़ाने की सलाह दी थी। रक्त चढ़ाने के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। आरोप है कि डॉक्टर और नर्स को सूचना देने के बाद भी कोई देखने नहीं आया, जिससे महिला की मौत हो गई। हालांकि नवजात बच्चा सुरक्षित बताया जा रहा है।   अस्पताल पहुंचे विधायक प्रदीप प्रसाद मामले की गंभीरता को देखते हुए हजारीबाग सदर विधायक Pradeep Prasad अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के नाम पर भारी लापरवाही हो रही है और आए दिन मरीजों की मौत हो रही है। विधायक ने उपायुक्त को पूरे मामले की जानकारी देते हुए चेतावनी दी कि यदि अस्पताल की व्यवस्था नहीं सुधरी तो वे खुद हस्तक्षेप करेंगे, चाहे इसके लिए उनकी विधायकी ही क्यों न चली जाए।   पहले भी उठ चुके हैं सवाल गुरुवार को थैलेसीमिया पीड़ित महिला सरिता देवी और शुक्रवार सुबह पवन कुमार अग्रवाल की मौत को लेकर भी अस्पताल पर लापरवाही के आरोप लगे थे। दोनों मामलों में समय पर ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई थी। अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

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