लोहरदगा। झारखंड के लोहरदगा जिले में शनिवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने शादी की खुशियों को मातम में बदल दिया। मिशन चौक के पास तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से स्कूटी सवार तीन भाई-बहनों की मौत हो गई। तीनों एक पड़ोसी के शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे। हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई, जबकि मृतकों के परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
जानकारी के अनुसार, शहर के बरवाटोली निवासी मुकेश साहू के पड़ोस में शादी का कार्यक्रम कृषि बाजार स्थित एक धर्मशाला में आयोजित था। उसी समारोह में शामिल होने के लिए उनके बेटे 28 वर्षीय रोहित साहू, 24 वर्षीय विवाहित बेटी सपना कुमारी और 14 वर्षीय सृष्टि कुमारी एक ही स्कूटी से निकले थे। रास्ते में मिशन चौक के पास गुमला से लोहरदगा की ओर आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रक स्कूटी और उसमें सवार तीनों भाई-बहनों को काफी दूर तक घसीटता चला गया। हादसे में सपना कुमारी और सृष्टि कुमारी की मौके पर ही मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल रोहित साहू को स्थानीय लोगों की मदद से तत्काल सदर अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए रिम्स रेफर किया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने भी दम तोड़ दिया।
बताया जा रहा है कि मृतक सपना कुमारी गर्भवती थीं, जिससे यह हादसा और भी दर्दनाक बन गया। रोहित साहू एक निजी प्रतिष्ठान में कार्यरत थे, जबकि उनके पिता मुकेश साहू मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं।इस हृदयविदारक हादसे के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पुलिस ने ट्रक को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
देवघर। श्रावणी मेले से पहले देवघर में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में एक नई पहल की गई है। गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे की पहल पर सोमवार से 'नमो एंबुलेंस' सेवा की शुरुआत कर दी गई। फिलहाल चार आधुनिक एंबुलेंस सेवा में शामिल की गई हैं, जिनका उद्देश्य आपात स्थिति में मरीजों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है। सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि पिछले दो वर्षों के दौरान श्रावणी मेले में स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने कई चुनौतियां देखने को मिलीं। कई बार समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी हुई, जिससे उनकी स्थिति गंभीर हो गई। इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष पहले चरण में चार एंबुलेंस सेवा शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में जरूरत के अनुसार इस सेवा का और विस्तार किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। श्रावणी मेले में मिलेगी त्वरित चिकित्सा सुविधा श्रावणी मेले के दौरान देवघर में देशभर से लाखों श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं। ऐसे में दुर्घटना, स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति या अन्य मेडिकल जरूरतों के दौरान त्वरित एंबुलेंस सेवा काफी अहम मानी जा रही है। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में मदद मिलेगी और आपात चिकित्सा व्यवस्था पहले से अधिक प्रभावी होगी। कांग्रेस पर साधा निशाना एंबुलेंस सेवा के शुभारंभ के दौरान सांसद निशिकांत दुबे ने राज्य की राजनीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने हालिया विधानसभा चुनाव परिणामों का हवाला देते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि यदि पार्टी में नैतिकता बची है तो उसे सरकार से समर्थन वापस लेने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस प्रदेश प्रभारी के. राजू पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि कांग्रेस सत्ता और राजनीतिक हितों तक सीमित हो गई है। सरयू राय के बयान पर भी दी प्रतिक्रिया जदयू विधायक सरयू राय द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कांग्रेस से अलग होकर सरकार चलाने की सलाह दिए जाने संबंधी बयान पर निशिकांत दुबे ने कहा कि सरयू राय अनुभवी नेता हैं और उनके बयान के पीछे निश्चित रूप से कोई राजनीतिक सोच होगी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर उनकी सरयू राय से कोई व्यक्तिगत चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि संभवतः सरयू राय को लग रहा है कि कांग्रेस की वर्तमान राजनीति झारखंड के हित में नहीं है।
रांची। ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) अपने 41वें स्थापना दिवस के अवसर पर धनबाद में जनाक्रोश मार्च निकालेगा। पार्टी ने इस मार्च को भ्रष्टाचार, अवैध खनन और कथित माफिया राज के खिलाफ उलगुलान की शुरुआत बताया है। पार्टी के केंद्रीय नेताओं के अनुसार इस कार्यक्रम में आजसू प्रमुख सुदेश महतो, सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी, विधायक निर्मल महतो समेत झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से सभी केंद्रीय नेता तथा हजारों कार्यकर्ता शामिल होंगे। झारखंड का निर्माण लंबे संघर्ष का परिणाम पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर और हसन अंसारी ने मीडिया से कहा कि झारखंड राज्य का निर्माण लंबे आंदोलन और संघर्ष का परिणाम है, जिसमें आजसू की अहम भूमिका रही है। उन्होंने दावा किया कि 1989 में आजसू के आंदोलन ने केंद्र सरकार को झारखंड मुद्दे पर बातचीत के लिए मजबूर किया था। वहीं, पार्टी नेताओं ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है। उन्होंने कहा कि छात्र, युवा, महिला, आदिवासी, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। साथ ही कोयलांचल क्षेत्र में अवैध खनन और कथित माफिया गतिविधियों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए गए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जनाक्रोश मार्च आगामी चुनावी रणनीति और विपक्षी राजनीति को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।
पलामू। झारखंड के पलामू जिले से होकर गुजरने वाली ट्रेनों को लेकर रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। सोन नगर-पतरातू रेलखंड पर थर्ड लाइन निर्माण कार्य के कारण डालटनगंज रूट से गुजरने वाली 14 पैसेंजर ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है, जबकि 16 एक्सप्रेस ट्रेनों का मार्ग अस्थायी रूप से बदल दिया गया है। रेलवे के अनुसार यह व्यवस्था 22 से 28 जून तक प्रभावी रहेगी, जबकि एक्सप्रेस ट्रेनों का डायवर्जन 27 जून तक लागू रहेगा। थर्ड लाइन निर्माण बना वजह रेलवे अधिकारियों के मुताबिक सोन नगर से पतरातू के बीच तीसरी रेल लाइन का निर्माण तेजी से चल रहा है। अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन छिपादोहर और मंगरा स्टेशन के बीच तीसरी लाइन को जोड़ने का काम जारी है। इसी कारण सुरक्षा और परिचालन को ध्यान में रखते हुए कई ट्रेनों के परिचालन में बदलाव किया गया है। 16 एक्सप्रेस ट्रेनों का बदला गया रूट डालटनगंज होकर चलने वाली कई महत्वपूर्ण एक्सप्रेस ट्रेनों को अब गढ़वा रोड, गया, डेहरी ऑन सोन, बरकाकाना और चोपन मार्ग से संचालित किया जाएगा। प्रभावित ट्रेनों में विशाखापट्टनम-वाराणसी एक्सप्रेस, धनबाद-भोपाल एक्सप्रेस, नई दिल्ली-रांची गरीब रथ, नई दिल्ली-रांची राजधानी, आनंद विहार-हटिया एक्सप्रेस, टाटा-जम्मूतवी एक्सप्रेस, जम्मूतवी-हावड़ा एक्सप्रेस, रांची-वाराणसी इंटरसिटी और शक्तिपुंज एक्सप्रेस समेत कुल 16 ट्रेनें शामिल हैं। 14 पैसेंजर ट्रेनें रहेंगी रद्द रेलवे ने रांची-सासाराम पैसेंजर सहित कुल 14 पैसेंजर ट्रेनों को अलग-अलग तिथियों में रद्द किया है। इसके अलावा बरकाकाना-डेहरी ऑन सोन, बरवाडीह-चोपन, गोमो-बरवाडीह, बरकाकाना-वाराणसी और डेहरी ऑन सोन-बरवाडीह जैसी महत्वपूर्ण पैसेंजर सेवाएं भी प्रभावित रहेंगी। रेलवे ने यात्रियों से यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जांच करने और वैकल्पिक यात्रा योजना बनाने की अपील की है, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।