झारखंड

Weather update: झारखंड में मौसम का डबल झटका, कहीं बारिश तो कहीं लू का प्रकोप

Anjali Kumari अप्रैल 20, 2026 0
Weather update
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रांची। झारखंड में 20 अप्रैल को मौसम ने अचानक करवट ले ली है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग तरह का मौसम देखने को मिल रहा है। जहां उत्तर-पूर्वी जिलों में बारिश और वज्रपात की संभावना जताई गई है, वहीं उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में हीट वेव का अलर्ट जारी किया गया है।

 

डालटनगंज बना सबसे गर्म इलाका


पलामू जिले के डाल्टनगंज में तापमान 43.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो राज्य में सबसे अधिक है। यह सामान्य से करीब 4 डिग्री ज्यादा है, जिससे यहां लू जैसे हालात बन गए हैं। रात के समय भी तापमान अधिक रहने से लोगों को राहत नहीं मिल रही है।

 

अन्य शहरों में भी गर्मी का असर


जमशेदपुर में 41.6 डिग्री, बोकारो में 43.1 डिग्री और रांची में 39.3 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। अधिकांश शहर भीषण गर्मी की चपेट में हैं।

 

इन जिलों में बारिश और वज्रपात की संभावना


उत्तर-पूर्वी जिलों—देवघर, दुमका, गोड्डा, पाकुड़, जामताड़ा और साहिबगंज—में आंशिक बादल छाए रहने के साथ हल्की बारिश, गरज और वज्रपात की संभावना है। 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं।

 

हीट वेव को लेकर अलर्ट जारी


वहीं पलामू, गढ़वा, चतरा और लातेहार जिलों में हीट वेव का अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में तापमान 40 डिग्री से ऊपर रहने की संभावना है, जिससे लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

 

आने वाले दिनों का अनुमान


21 अप्रैल तक कुछ इलाकों में हल्की बारिश जारी रह सकती है, जबकि 22 अप्रैल के बाद मौसम साफ और शुष्क होने के साथ तापमान में और बढ़ोतरी होने की संभावना है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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अब 4 नहीं 10 लाख मिलेगी हाथी हमले के पीड़ितों को

रांची। झारखंड सरकार जंगली जानवरों, खासकर हाथियों के हमले में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। वन विभाग ने मुआवजा राशि 4 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे मंजूरी के लिए मंत्री के पास भेजा गया है। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद यह नई व्यवस्था लागू हो सकती है।   तत्काल और चरणबद्ध सहायता की योजना नई नीति के तहत पीड़ित परिवारों को तुरंत आर्थिक मदद देने पर जोर दिया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, घटना के कुछ घंटों के भीतर 1 लाख रुपये दिए जाएंगे। इसके बाद 15 दिनों के भीतर 4 लाख रुपये और दिए जाएंगे। शेष 5 लाख रुपये परिवार के नाम पर फिक्स डिपॉजिट किए जाएंगे। इसके अलावा, तीन साल तक हर महीने 2000 रुपये की सहायता देने का भी प्रावधान रखा गया है।   लंबी अवधि की सुरक्षा पर फोकस सरकार का उद्देश्य केवल तत्काल राहत देना नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों को लंबे समय तक आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। फिक्स डिपॉजिट और मासिक सहायता से परिवारों को स्थिर आय का सहारा मिलेगा।   बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष की पृष्ठभूमि राज्य में खासकर ग्रामीण और वन क्षेत्रों में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इसी को देखते हुए मुआवजा बढ़ाने की मांग तेज हो गई थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी बजट सत्र के दौरान इस दिशा में संकेत दिए थे।   अन्य राज्यों के बराबरी की कोशिश देश के कई राज्यों में पहले से अधिक मुआवजा दिया जा रहा है, जैसे कर्नाटक और महाराष्ट्र में 20 लाख रुपये तक। ऐसे में झारखंड भी अब इस दिशा में कदम बढ़ा रहा है।   ग्रामीणों को मिलेगी राहत नई योजना लागू होने पर वन क्षेत्रों के पास रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिससे पीड़ित परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकेगी।

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Jharkhand Treasury scam: 150 करोड़ का हुआ ट्रेजरी घोटाला, 7 जिलों में हुआ खेल

रांची। झारखंड के ट्रेजरी घोटाले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है 7 जिलों में वेतन के नाम पर 150 करोड़ रुपए से ज्यादा की अवैध निकासी की गई है। इस घोटाले को अंजाम देने वाले कोई बाहरी नहीं, बल्कि वही अधिकारी और कर्मचारी हैं, जिन पर पैसों की निगरानी करने की जिम्मेदारी थी। इस खुलासे के बाद वित्त सचिव प्रशांत कुमार ने कड़ा आदेश जारी किया है। उन्होंने कहा है कि तीन साल से एक ही जगह जमे अधिकारियों-कर्मचारियों का तत्काल तबादला करें। यह तबादला वहां नहीं होना चाहिए, जहां ये पहले रह चुके हैं। ट्रेजरी में तैनात कर्मियों ने ही की गड़बड़ी वित्त सचिव ने कहा कि अभी सात जिलों बोकारो, हजारीबाग, पलामू, जमशेदपुर, देवघर, रामगढ़ व रांची ट्रेजरी से वेतन के नाम पर यह निकासी हुई है। इसमें ट्रेजरी, सब ट्रेजरी, पेंशन एवं लेखा कार्यालय ओर स्टेट ऑडिट में तैनात कर्मचारियों की भूमिका सामने आ रही है। इन कार्यालयों में लंबे समय से जमे कई कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इसलिए ट्रेजरी निदेशालय, ऑडिट निदेशालय और लेखा निदेशालय संदिग्ध कर्मचारियों को फौरन वहां से हटाएं। दरअसल सरकार का मानना है कि तीन साल से जमे कर्मियों को हटाने से पुराने सिंडिकेट की कड़ियां बिखरेंगी। स्टेट ऑडिट भी जांच के घेरे मे जानकारी के मुताबिक जांच में पता चला है कि यह सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि सिस्टम में बैठे लोगों की मिलीभगत का परिणाम हो सकता है। डीडीओ और ट्रेजरी अफसर के अलावा स्टेट ऑडिट के सीनियर ऑडिटर, ऑडिट अफसर, लेखा निदेशालय के लेखा सहायक व वरीय लेखा सहायक और ट्रेजरी के लिपिक व कंप्यूटर ऑपरेटर पर शक की सुई है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन पदों पर वित्तीय निगरानी और ऑडिट की जिम्मेदारी थी, वही लोग अब शक के घेरे में हैं। जिलावार अवैध निकासी हजारीबाग    50-70 करोड़ बोकारो    30-50 करोड़ रांची    10-20 करोड़ जमशेदपुर    5-10 करोड़ देवघर    3-5 करोड़ रामगढ़    3-4 करोड़ पलामू    3-4 करोड़ हालांकि फर्जी निकासी का अंतिम आंकड़ा ऑडिट और सीआईडी जांच के बाद ही सामने आएगा।   ऐसी गड़बड़ी रोकने के लिए सरकार क्या कर सकती है तीन साल से ज्यादा समय से एक ही जगह जमे कर्मियों को हटाकर सरकार पुराने सिंडिकेट की कड़ियां बिखेरेगी। अवैध ढंग से निकासी की गई राशि की रिकवरी के लिए दोषियों की संपत्ति अटैच करने जैसे कदम भी उठा सकती है। यही नहीं, भविष्य में ऐसी चोरी रोकने के लिए ट्रेजरी के सॉफ्टवेयर में भी बड़े बदलाव किए जा सकते हैं, ताकि घोटालेबाज आसानी से ऐसी गड़बड़ी न कर सकें। सीआईडी को ट्रांसफर होगा हजारीबाग-बोकारो केस सरकार ने गृह विभाग को हजारीबाग और बोकारो थाने में दर्ज केस सीआईडी को ट्रांसफर करने का आदेश दिया था। अब जल्दी ही केस सीआईडी को ट्रांसफर करेगा। उधर, सरकार ने मामले की विस्तृत जांच के लिए उत्पाद विभाग के प्रधान सचिव अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बनाई है। इस समिति ने भी जांच शुरू कर दी है। तबादले के साथ होगी विभागीय कार्यवाही वित्त सचिव के आदेश के बाद जल्दी ही बड़े पैमाने पर तबादलों की सूची जारी हो सकती है। साथ ही विभागीय कार्यवाही और आपराधिक जांच भी तेजी से बढ़ सकती है। अगर सरकार ने इसके साथ टेक्नोलॉजी और जवाबदेही को जोड़ा तो यह कदम भविष्य में बड़े घोटालों पर लगाम लगाने में निर्णायक साबित हो सकता है। रांची में डीडीओ के सर्टिफिकेट के बाद ही वेतन भुगतान घोटाला उजागर होने के बाद राजधानी रांची में ट्रेजरी के कामकाज का तरीका बदल गया है। क्योंकि रांची डीसी ने डीडीओ के सर्टिफिकेट के बिना वेतन भुगतान पर रोक लगा दी है। सभी डीडीओ को कार्यालय में स्वीकृत पद और कार्यरत कर्मचारियों के आंकड़ों के साथ बिल भेजने का निर्देश दिया गया है। सर्टिफिकेट में यह भी बताना है कि कर्मचारियों के वेतन और उनके बैंक खातों का सत्यापन कर लिया गया है। अगर इसमें कोई त्रुटि होती है, तो इसके लिए वे खुद जिम्मेदार होंगे। ट्रेजरी में जिस डीडीओ की ओर से ये सर्टिफिकेट दिया जा रहा है, उसी कार्यालय के कर्मचारियों के वेतन का भुगतान हो रहा है। इसके कारण वेतन जारी होने की प्रक्रिया काफी धीमी है। कांके पशुपालन केंद्र में फाइलों की जांच शुरू इधर, पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान, कांके के अकाउंटेंट मुनिंद्र कुमार एवं उसके करीबी संजीव कुमार के वेतन मद में 2.94 करोड़ रुपए की निकासी का मामला सामने आने के बाद उच्चस्तरीय कमेटी संस्थान के सभी फाइलों की जांच कर रही है। मुनिंद्र जहां भी कार्यरत रहा, वहां से जुड़े खातों को भी खंगाला जा रहा है। दूसरी ओर वित्त विभाग और एजी की ओर से भी रांची ट्रेजरी की फाइलों को ऑनलाइन खंगाला जा रहा है।

Anjali Kumari अप्रैल 20, 2026 0
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हजारीबाग-चतरा बॉर्डर पर मुठभेड़ में मारे गए नक्सली सहदेव महतो और नताशा
हजारीबाग-चतरा बॉर्डर पर लेवी के लालच में ढेर हुआ नक्सली दंपती

रांची। झारखंड के हजारीबाग और चतरा जिले की सीमा पर शुक्रवार को पुलिस और नक्सलियों के बीच हुए मुठभेड़ में चार नक्सली मारे गए। इस एनकाउंटर में 15 लाख रुपये का इनामी नक्सली सहदेव महतो, उसकी पत्नी नताशा और दो अन्य साथी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार यह दस्ता लंबे समय से इलाके में सक्रिय था और लेवी वसूली में जुटा हुआ था।   लेवी के लालच में सक्रिय था नक्सली दस्ता आईजी अभियान डॉ. माइकल राज के मुताबिक, पारसनाथ, लुगु पहाड़, हजारीबाग और चतरा क्षेत्र में यह नक्सली दस्ता मुख्य रूप से पैसे की उगाही के लिए सक्रिय था। सहदेव महतो अपनी पत्नी नताशा के साथ मिलकर ठेकेदारों और स्थानीय लोगों से रंगदारी वसूल रहा था। पुलिस की लगातार कार्रवाई के बावजूद यह गिरोह पैसों के लालच में क्षेत्र में बना हुआ था।   सूचना के आधार पर चला ऑपरेशन पुलिस को सूचना मिली थी कि नक्सली लेवी वसूली के लिए निकले हैं। इसके बाद हजारीबाग एसपी अंजनी अंजन के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई, जिसमें कोबरा बटालियन के जवान भी शामिल थे। ऑपरेशन के दौरान दोनों पक्षों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें चारों नक्सली मारे गए। सभी के पास अत्याधुनिक हथियार, जिनमें एके-47 भी शामिल थे।   महाराष्ट्र से जुड़ी थी नताशा की पृष्ठभूमि सीआरपीएफ के आईजी साकेत सिंह के अनुसार, नताशा महाराष्ट्र के गढ़चिरौली क्षेत्र की रहने वाली थी, जो कभी नक्सल प्रभावित इलाका रहा है। संगठन ने उसे झारखंड भेजा था, जहां उसने सहदेव महतो से शादी की और सक्रिय भूमिका निभाने लगी।   जेल ब्रेक कांड में शामिल था सहदेव सहदेव महतो का आपराधिक इतिहास भी गंभीर रहा है। उसने 2014 में चाईबासा जेल ब्रेक कांड को अंजाम दिया था, जिसमें वह अन्य नक्सलियों के साथ फरार हो गया था। पुलिस इस एनकाउंटर को नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी सफलता मान रही है।

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