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UP Home Guard Salary and Selection Details

यूपी में होमगार्ड को कितनी मिलती है सैलरी? जानिए क्या होता है काम और कैसे होता है चयन

surbhi मई 9, 2026 0
Uttar Pradesh Home Guard personnel standing in uniform during recruitment and security duty training.
UP Home Guard Salary and Recruitment 2026

Uttar Pradesh में 41 हजार से ज्यादा होमगार्ड भर्ती को लेकर युवाओं के बीच काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। लिखित परीक्षा पूरी हो चुकी है और अब अगले चरण की तैयारी चल रही है। ऐसे में कई उम्मीदवार यह जानना चाहते हैं कि होमगार्ड की नौकरी में क्या काम करना होता है, कितनी सैलरी मिलती है और चयन प्रक्रिया कैसी होती है।

होमगार्ड पुलिस और प्रशासन की सहायता करने वाला एक महत्वपूर्ण बल माना जाता है। हालांकि यह स्थायी सरकारी नौकरी नहीं होती, बल्कि स्वयंसेवक आधारित सेवा होती है।

कौन बन सकता है होमगार्ड?

Uttar Pradesh में होमगार्ड भर्ती के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास होना जरूरी है।

आयु सीमा

  • न्यूनतम उम्र: 18 वर्ष
  • अधिकतम उम्र: 30 वर्ष
  • आरक्षित वर्गों को नियमानुसार आयु में छूट दी जाती है

इसके अलावा उम्मीदवार का चरित्र अच्छा होना चाहिए और वह शारीरिक रूप से फिट होना चाहिए।

क्या होता है होमगार्ड का काम?

होमगार्ड राज्य में पुलिस और प्रशासन की मदद के लिए काम करते हैं। जरूरत पड़ने पर उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाती हैं।

होमगार्ड की प्रमुख जिम्मेदारियां

  • पुलिस बल के सहायक के रूप में कार्य करना
  • कानून व्यवस्था बनाए रखने में मदद करना
  • बाढ़, आग, महामारी और आपदा जैसी स्थितियों में राहत कार्य करना
  • सार्वजनिक सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण में सहयोग देना
  • जिला प्रशासन के निर्देश पर अलग-अलग क्षेत्रों में ड्यूटी करना

यूपी में होमगार्ड की सैलरी कितनी होती है?

होमगार्ड को स्थायी मासिक वेतन नहीं मिलता। उन्हें ड्यूटी के हिसाब से भुगतान किया जाता है।

दैनिक भुगतान

  • प्रतिदिन लगभग ₹600 दिए जाते हैं

अगर किसी होमगार्ड को पूरे महीने यानी 30 दिन ड्यूटी मिलती है, तो उसे करीब ₹18,000 तक भुगतान हो सकता है।

इसके अलावा राज्य सरकार समय-समय पर महंगाई भत्ता (DA) भी देती है।

कैसे होता है चयन?

होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया मुख्य रूप से तीन चरणों में पूरी होती है।

1. लिखित परीक्षा

विषय

सामान्य ज्ञान

कुल प्रश्न

100

कुल अंक

100

समय

2 घंटे

25 प्रतिशत से कम अंक लाने वाले उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो जाते हैं।

2. फिजिकल टेस्ट

लिखित परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को शारीरिक मानक और दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया जाता है।

होमगार्ड भर्ती के लिए शारीरिक मानक

पुरुष उम्मीदवार

  • सामान्य/OBC/SC लंबाई: 168 सेमी
  • ST लंबाई: 160 सेमी

सीना

  • सामान्य/OBC/SC: 79 सेमी (बिना फुलाए)
  • ST: 77 सेमी (बिना फुलाए)

महिला उम्मीदवार

  • सामान्य/OBC/SC लंबाई: 152 सेमी
  • ST लंबाई: 147 सेमी
  • न्यूनतम वजन: 40 किलोग्राम

दौड़ कितनी होती है?

पुरुष उम्मीदवार

  • 4.8 किमी दौड़
  • समय: 28 मिनट

महिला उम्मीदवार

  • 2.4 किमी दौड़
  • समय: 16 मिनट

फिजिकल टेस्ट के बाद मेडिकल टेस्ट और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन किया जाता है। सभी चरणों में सफल होने वाले उम्मीदवारों को होमगार्ड के रूप में चयनित किया जाता है।

 

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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BA के बाद करियर की चिंता खत्म: ये 5 सरकारी नौकरियां दिला सकती हैं स्थिर भविष्य और शानदार सैलरी

बैचलर ऑफ आर्ट्स (BA) करने के बाद अक्सर छात्रों के मन में यह सवाल उठता है कि आगे कौन-सा करियर चुना जाए। लेकिन हकीकत यह है कि BA के बाद सरकारी क्षेत्र में कई ऐसे अवसर मौजूद हैं, जो न सिर्फ अच्छी सैलरी देते हैं बल्कि जॉब सिक्योरिटी और सामाजिक सम्मान भी सुनिश्चित करते हैं। सही दिशा में तैयारी और रणनीति अपनाकर इन नौकरियों को हासिल किया जा सकता है। यहां हम आपको ऐसे पांच प्रमुख सरकारी करियर विकल्पों के बारे में बता रहे हैं, जो BA के बाद आपके भविष्य को नई दिशा दे सकते हैं। 1. SSC CGL: स्थिर करियर का मजबूत विकल्प SSC CGL परीक्षा BA ग्रेजुएट्स के बीच सबसे लोकप्रिय विकल्पों में से एक है। इस परीक्षा के माध्यम से इनकम टैक्स ऑफिसर, ऑडिटर और असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर जैसे पदों पर नियुक्ति मिलती है। इसमें आकर्षक वेतन के साथ-साथ नियमित प्रमोशन के अवसर भी मिलते हैं। 2. बैंकिंग सेक्टर: सुरक्षित और संतुलित नौकरी बैंकिंग क्षेत्र में करियर बनाने के लिए IBPS Exam और State Bank of India द्वारा आयोजित परीक्षाएं अहम होती हैं। इन परीक्षाओं के जरिए प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) और क्लर्क पद हासिल किए जा सकते हैं। बैंकिंग नौकरियों में फिक्स वर्किंग आवर्स, अच्छी सैलरी और ग्रोथ के पर्याप्त अवसर होते हैं। 3. UPSC सिविल सर्विस: देश सेवा के साथ प्रतिष्ठा अगर आप प्रशासनिक सेवा में जाना चाहते हैं, तो UPSC Civil Services Examination आपके लिए सबसे बड़ा मंच है। इस परीक्षा के माध्यम से IAS, IPS और IFS जैसे प्रतिष्ठित पदों पर चयन होता है। BA के दौरान पढ़े गए विषय इस परीक्षा की तैयारी में काफी मददगार साबित होते हैं। 4. रेलवे में नौकरी: सुविधाओं के साथ स्थिरता Railway Recruitment Board (RRB) हर साल NTPC, ग्रुप D और क्लर्क जैसे पदों के लिए भर्ती करता है। रेलवे की नौकरियां अपने बेहतरीन भत्तों, जॉब सिक्योरिटी और परिवार के लिए सुविधाओं के कारण बेहद लोकप्रिय हैं। 5. राज्य सरकार की नौकरियां: अपने राज्य में अवसर हर राज्य की Public Service Commission Exams के जरिए विभिन्न प्रशासनिक पदों, पुलिस और राजस्व विभाग में भर्तियां होती हैं। इन परीक्षाओं का सिलेबस BA के विषयों से काफी मेल खाता है, जिससे आर्ट्स के छात्रों को अतिरिक्त फायदा मिलता है। सरकारी नौकरी पाने के लिए सिर्फ डिग्री ही नहीं, बल्कि सही प्लानिंग, नियमित पढ़ाई और समय प्रबंधन भी जरूरी है। यदि आप लक्ष्य तय कर लें और निरंतर मेहनत करें, तो BA के बाद भी आपके पास सफल और सुरक्षित करियर बनाने के कई रास्ते खुले हैं।  

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
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