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₹9000 Aid to 40 Lakh Women in Assam

असम में ‘बिहार मॉडल’ का दांव? चुनाव से पहले अरुणोदय योजना के तहत 40 लाख महिलाओं के खातों में ₹9,000 ट्रांसफर

surbhi मार्च 11, 2026 0
Assam CM Himanta Biswa Sarma announcing ₹9000 Arunodoi scheme transfer to women beneficiaries before elections
Assam Arunodoi Scheme ₹9000 Transfer to Women

 

असम: देश की राजनीति में हाल के वर्षों में महिलाओं को केंद्र में रखकर शुरू की गई कल्याणकारी योजनाएं चुनावी समीकरणों को प्रभावित करती रही हैं। कई राज्यों में ऐसी योजनाओं ने सरकारों की वापसी का रास्ता आसान किया है। इसी पृष्ठभूमि में असम में भी विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है।

असम सरकार ने मंगलवार को अरुणोदय (Arunodoi) योजना के तहत करीब 40 लाख लाभार्थियों के बैंक खातों में ₹9,000 की एकमुश्त सहायता राशि ट्रांसफर की। यह राज्य में अब तक की सबसे बड़ी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) पहलों में से एक मानी जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया के तहत करीब ₹3,600 करोड़ सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजे गए।

 

चुनाव से पहले बड़ा कदम, लेकिन सरकार का दावा-राजनीति से नहीं जुड़ा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम बिहार के उस मॉडल से मिलता-जुलता है, जिसमें चुनाव से पहले महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देकर सरकार ने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया था। हालांकि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस योजना को चुनाव से जोड़ने से साफ इनकार किया है।

गुवाहाटी के खानापाड़ा स्थित ज्योति-बिष्णु अंतर्राष्ट्रीय कला मंदिर ऑडिटोरियम से वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से लाभार्थियों को यह राशि जारी करते हुए सरमा ने कहा कि अरुणोदय योजना कई वर्षों से चल रही है और इसका उद्देश्य केवल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मदद करना है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहल चुनावी रणनीति नहीं बल्कि राज्य सरकार की दीर्घकालिक सामाजिक कल्याण नीति का हिस्सा है।

 

चार महीने की सहायता और बिहू बोनस शामिल

सरकार द्वारा जारी की गई इस राशि में चार महीनों की वित्तीय सहायता के साथ-साथ महिलाओं के लिए दिया जाने वाला विशेष बिहू बोनस भी शामिल है। राज्य सरकार का कहना है कि त्योहारों के समय आर्थिक मदद से गरीब परिवारों को राहत मिलती है और उनकी जरूरतें पूरी करने में सहायता मिलती है।

 

किन लोगों को मिलता है योजना का लाभ

मुख्यमंत्री सरमा के अनुसार, अरुणोदय योजना खासतौर पर समाज के कमजोर वर्गों की महिलाओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं-

  • विधवा महिलाएं
     
  • तलाकशुदा या परित्यक्त महिलाएं
     
  • गंभीर बीमारियों से प्रभावित परिवार
     
  • आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद घर-परिवार
     

सरकार का कहना है कि लाभ केवल उन्हीं लोगों को दिया जाता है जो निर्धारित मानकों के आधार पर वास्तव में इसके पात्र हैं।

 

महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की पहल

असम की वित्त मंत्री अजंता नियोग ने इस पहल को राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत लगभग 40 लाख परिवारों को सहायता मिल रही है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं।

नियोग के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में राज्य सरकार ने गरीब परिवारों और महिलाओं के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं, जिनका उद्देश्य उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और समाज में उनका सम्मान बढ़ाना है।

 

लाभार्थियों में खुशी

योजना के तहत राशि सीधे बैंक खातों में पहुंचने से लाभार्थियों में उत्साह देखा गया।

सोनापुर की शिवानी बोरो डेका ने बताया कि ₹9,000 की सहायता मिलने से उन्हें काफी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि वह इस राशि का उपयोग परिवार की जरूरतों को पूरा करने में करेंगी।

वहीं एक अन्य लाभार्थी राधिका मंडल ने कहा कि यह आर्थिक सहायता उनके लिए छोटा व्यवसाय शुरू करने और रोजगार के नए अवसर तलाशने में मददगार साबित हो सकती है।

 

राजनीतिक और सामाजिक असर पर नजर

विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देने वाली योजनाएं सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ राजनीतिक दृष्टि से भी प्रभावशाली साबित होती हैं। ऐसे में आने वाले विधानसभा चुनावों के संदर्भ में असम सरकार की इस पहल पर राजनीतिक विश्लेषकों और विपक्षी दलों की नजरें टिकी हुई हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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होर्मुज जलडमरूमध्य में कतर के एलएनजी टैंकर पर ड्रोन हमला

दोहा/नई दिल्ली, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कतर से भारत के गुजरात स्थित दहेज बंदरगाह के लिए एलएनजी लेकर आ रहे विशाल टैंकर अल-रकियात पर होर्मुज जलडमरूमध्य के पास संदिग्ध ड्रोन हमला हुआ। घटना 7 जुलाई को उस समय हुई जब जहाज अरब सागर और ओमान की खाड़ी के मिलन बिंदु से गुजर रहा था। राहत की बात यह रही कि हमले में किसी के घायल होने या जहाज को गंभीर नुकसान पहुंचने की सूचना नहीं है। भारत की ओर से इस घटना पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।   घटना के बाद कतर ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपने यहां तैनात ईरान के उप-राजदूत मोहसेन मोहम्मद घनेई को विदेश मंत्रालय तलब किया। विदेश मंत्रालय के प्रोटोकॉल विभाग के निदेशक इब्राहिम बिन यूसुफ ने उन्हें विरोध पत्र सौंपते हुए इस हमले को अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए गंभीर खतरा बताया।   कतर ने कहा कतर ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक समुद्री मार्ग में किसी भी व्यापारी जहाज को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून और नौवहन सुरक्षा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। सरकार ने ईरान से इस घटना पर तत्काल स्पष्टीकरण मांगा है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।   कतर ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने राष्ट्रीय हितों, समुद्री संपत्तियों और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उपलब्ध सभी अधिकारों का उपयोग करने का अधिकार रखता है।   विशेषज्ञों का क्या है मानना  विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और एलएनजी आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस तरह के हमले न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर डाल सकते हैं। भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए भी इस घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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दिनांक - 08 जुलाई 2026 दिन - बुधवार विक्रम संवत 2083 शक संवत -1948 अयन - दक्षिणायन ऋतु - वर्षा ॠतु मास - आषाढ पक्ष - कृष्ण तिथि - अष्टमी दोपहर 12:21 तक तत्पश्चात नवमी नक्षत्र - रेवती शाम 04:00 तक तत्पश्चात अश्विनी योग - अतिगण्ड दोपहर 12:38 तक तत्पश्चात सुकर्मा राहुकाल - दोपहर 12:44 से दोपहर 02:24 तक सूर्योदय - 05:14 सूर्यास्त -  06:23 दिशाशूल - उत्तर दिशा मे व्रत पर्व विवरण- बुधवारी अष्टमी (सूर्योदय से दोपहर 12:21 तक),पंचक (समाप्त: शाम 04:00)* विशेष- *अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है (ब्रह्मवैवर्त पुराण ब्रह्म खण्ड: 27,29,34)

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करूर भगदड़ मामला: सुप्रीम कोर्ट ने डीएमके की याचिका खारिज, सीएम विजय के दौरे पर रोक से किया इनकार

नई दिल्ली, एजेंसियां। तमिलनाडु के करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने डीएमके की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मुख्यमंत्री विजय को पीड़ित परिवारों से मिलकर मुआवजा और सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र वितरित करने से रोकने की मांग की गई थी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि वह किसी मुख्यमंत्री की प्रशासनिक गतिविधियों का निर्धारण नहीं कर सकती और राजनीतिक विवादों को न्यायालय का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।   सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने डीएमके के वकील से कहा कि अदालत राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का मंच नहीं है। यदि सत्तारूढ़ दल के नेता किसी मुद्दे पर बयान दे रहे हैं, तो विपक्ष भी उसका राजनीतिक जवाब दे सकता है। अदालत ने कहा कि ऐसी लड़ाइयां लोकतांत्रिक और राजनीतिक मंचों पर लड़ी जानी चाहिए, न कि न्यायालय में।   डीएमके ने अपनी याचिका क्या आरोप लगाया? डीएमके ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि पिछले वर्ष करूर में हुई भगदड़ की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। पार्टी का कहना था कि मुख्यमंत्री विजय का पीड़ित परिवारों से मिलना, उन्हें 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी देने की घोषणा जांच की निष्पक्षता पर असर डाल सकती है। इसी आधार पर उनके प्रस्तावित दौरे पर रोक लगाने की मांग की गई थी।   क्या है मामला? यह मामला पिछले वर्ष सितंबर में करूर में तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) की एक रैली के दौरान हुई भगदड़ से जुड़ा है, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी। शुरुआत में मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपी गई थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने जांच राज्य पुलिस से लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी। मामले की निगरानी न्यायालय द्वारा गठित एक समिति भी कर रही है।   सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री विजय के करूर दौरे का रास्ता साफ हो गया है। वह जल्द ही पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें घोषित आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपेंगे। वहीं, इस फैसले के बाद राज्य की सियासत में इस मुद्दे पर बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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