राष्ट्रीय

केतन अग्रवाल मर्डर केस में आया नया मोड़: सिया गोयल और चेतन चौधरी ने एक-दूसरे पर लगाया हत्या की साजिश का आरोप

anjali kumari जून 26, 2026 0
Ketan Agarwal murder case
Ketan Agarwal murder case

पुणे, एजेंसियां। महाराष्ट्र के चर्चित केतन अग्रवाल मर्डर केस में जांच के दौरान एक नया मोड़ सामने निकलकर आया है। पुलिस पूछताछ में मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी अब एक-दूसरे पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा रहे हैं। दोनों के बयानों में विरोधाभास आने के बाद पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है।

 

पूछताछ में बदले दोनों आरोपियों के बयान

 

पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान सिया गोयल ने दावा किया कि पूरी योजना चेतन चौधरी ने बनाई थी, जबकि चेतन ने आरोप लगाया कि हत्या की साजिश सिया ने रची और उसने केवल उसके कहने पर उसका साथ दिया। दोनों के अलग-अलग दावों के कारण जांच एजेंसियां अब डिजिटल सबूतों, कॉल रिकॉर्ड और घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों का मिलान कर रही हैं।

 

SIT जांच के आदेश

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र विधानसभा में इस केस की विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि SIT पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और विस्तृत जांच करेगी।

 

प्री-वेडिंग वीडियो आया सामने

 

इस बीच सोशल मीडिया पर केतन अग्रवाल और सिया गोयल का एक प्री-वेडिंग वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में दोनों शादी की तैयारियों के दौरान खुश नजर आ रहे हैं। यह वीडियो सामने आने के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया है।

 

सिया की मां की भावुक प्रतिक्रिया

 

सिया गोयल की मां ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यदि उनकी बेटी अदालत में दोषी साबित होती है तो उसे कानून के तहत सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उनका यह बयान पूरे मामले में नया भावनात्मक पहलू जोड़ रहा है।

 

पुलिस जुटा रही सबूत

 

पुलिस ने दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन, चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच तेज कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक और डिजिटल सबूतों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि हत्या की साजिश किसने रची और वारदात में किसकी क्या भूमिका थी।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

राष्ट्रीय

View more
Passport
1 जुलाई 2026 से पासपोर्ट बनवाना होगा महंगा

नई दिल्ली, एजेंसियां। विदेश यात्रा की योजना बना रहे लोगों के लिए 1 जुलाई 2026 से पासपोर्ट बनवाना महंगा हो जाएगा। केंद्र सरकार ने पासपोर्ट की फीस में बढ़ोतरी का फैसला किया है। विदेश मंत्रालय ने ‘पासपोर्ट नियम, 1980’ में संशोधन करते हुए नई शुल्क दरों की अधिसूचना जारी कर दी है। करीब 14 वर्षों बाद पासपोर्ट शुल्क में बदलाव किया गया है। इससे पहले वर्ष 2012 में फीस संशोधित की गई थी।   सामान्य और तत्काल पासपोर्ट की नई फीस नई व्यवस्था के तहत 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के आवेदकों के लिए 36 पेज वाले सामान्य पासपोर्ट की फीस 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दी गई है, जबकि तत्काल सेवा के लिए अब 5,000 रुपये चुकाने होंगे। वहीं, 60 पेज वाले सामान्य पासपोर्ट की फीस 3,500 रुपये और तत्काल पासपोर्ट की फीस 6,000 रुपये निर्धारित की गई है।   खोया या क्षतिग्रस्त पासपोर्ट बनवाना होगा और महंगा पासपोर्ट खोने या क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में रिप्लेसमेंट पासपोर्ट के लिए भी शुल्क बढ़ा दिया गया है। 36 पेज वाले सामान्य रिप्लेसमेंट पासपोर्ट के लिए 5,000 रुपये और तत्काल सेवा के लिए 7,500 रुपये देने होंगे। वहीं, 60 पेज वाले रिप्लेसमेंट पासपोर्ट के लिए सामान्य श्रेणी में 6,000 रुपये तथा तत्काल सेवा में 8,500 रुपये शुल्क तय किया गया है।   नाबालिगों और अन्य सेवाओं की फीस भी बढ़ी 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए 36 पेज वाले नए पासपोर्ट की फीस 1,750 रुपये होगी, जबकि तत्काल सेवा के लिए 4,250 रुपये देने होंगे। पुलिस क्लियरेंस सर्टिफिकेट (PCC), सरेंडर सर्टिफिकेट और ग्लोबल एंट्री प्रोग्राम वेरिफिकेशन जैसी सेवाओं की फीस भी बढ़ाकर 750 रुपये कर दी गई है।   वैधता और छूट में कोई बदलाव नहीं फीस बढ़ने के बावजूद पासपोर्ट की वैधता पहले की तरह ही रहेगी। वयस्कों का पासपोर्ट 10 वर्ष और नाबालिगों का पासपोर्ट 5 वर्ष या 18 वर्ष की आयु पूरी होने तक मान्य रहेगा। वहीं, 8 वर्ष तक के बच्चों और 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली 10 प्रतिशत शुल्क छूट भी पहले की तरह जारी रहेगी।

abhishek singh जून 26, 2026 0
Ketan Agrawal Murder

पुणे मर्डर केस: 'अगर मेरी बेटी दोषी है तो उसे भी सख्त सजा मिले', सिया गोयल के माता-पिता का बड़ा बयान

Bengal Assembly UCC

पश्चिम बंगाल में UCC बिल लाने की तैयारी, सोमवार को विधानसभा में हो सकता है पेश

Police arrest Kalicharan Banerjee, former OSD to ex-Kolkata Mayor Firhad Hakim, in connection with the Taratala warehouse shed collapse investigation.

तारातला हादसा: पूर्व मेयर फिरहाद हकीम के पूर्व OSD कालीचरण बनर्जी गिरफ्तार, पुलिस कर रही पूछताछ

Senior IPS officer Mahesh Dixit appointed as the new Director of India's Intelligence Bureau (IB).
डॉक्टर से IPS और अब IB चीफ: कौन हैं महेश दीक्षित, जिन्हें मिली देश की सबसे अहम जिम्मेदारी?

  नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी महेश दीक्षित को देश की प्रमुख खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) का नया प्रमुख नियुक्त किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (ACC) ने उनके नाम को मंजूरी दे दी है। वह मौजूदा आईबी प्रमुख तपन डेका का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो रहा है। महेश दीक्षित की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब देश के सामने आतंकवाद, सीमा सुरक्षा, साइबर खतरे और आंतरिक सुरक्षा जैसी कई बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं। ऐसे में उनके अनुभव को एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महेश दीक्षित कौन हैं? महेश दीक्षित 1993 बैच के IPS अधिकारी हैं और आंध्र प्रदेश कैडर से संबंध रखते हैं। वर्तमान में वह इंटेलिजेंस ब्यूरो में स्पेशल डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं, जो एजेंसी का दूसरा सबसे वरिष्ठ पद माना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि पुलिस सेवा में आने से पहले वह पेशे से डॉक्टर थे। बाद में उन्होंने सिविल सेवा की राह चुनी और भारतीय पुलिस सेवा में शामिल होकर देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आंतरिक सुरक्षा में लंबा अनुभव महेश दीक्षित को खुफिया अभियानों और आंतरिक सुरक्षा मामलों का व्यापक अनुभव है। उन्होंने कई संवेदनशील क्षेत्रों में काम किया है और लंबे समय तक जम्मू-कश्मीर में राज्य खुफिया ब्यूरो के प्रमुख के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इसके अलावा वह श्रीनगर में सहायक आसूचना ब्यूरो (Subsidiary Intelligence Bureau) के प्रमुख भी रह चुके हैं। सुरक्षा एजेंसियों के बीच उनका मजबूत जमीनी खुफिया नेटवर्क और आतंकवाद-रोधी रणनीतियों में अनुभव उनकी बड़ी ताकत माना जाता है। अनुच्छेद 370 के बाद निभाई अहम भूमिका अधिकारियों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में महेश दीक्षित की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस दौरान उन्होंने विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर कई संवेदनशील अभियानों का नेतृत्व किया। 'सफेदपोश' आतंकी नेटवर्क का किया था पर्दाफाश पिछले वर्ष महेश दीक्षित ने एक कथित 'सफेदपोश' आतंकी नेटवर्क का खुलासा करने में अहम भूमिका निभाई थी। बताया जाता है कि यह कार्रवाई श्रीनगर पुलिस से प्राप्त शुरुआती खुफिया जानकारी के आधार पर की गई थी। इस अभियान को आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से बड़ी सफलता माना गया था। क्या है इंटेलिजेंस ब्यूरो की जिम्मेदारी? इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) भारत की सबसे पुरानी और प्रमुख घरेलू खुफिया एजेंसी है। इसका मुख्य कार्य देश की आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी अभियान, जासूसी विरोधी गतिविधियों, कट्टरपंथी संगठनों की निगरानी, साइबर सुरक्षा खतरों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर नजर रखना है। आईबी विभिन्न केंद्रीय और राज्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर खुफिया सूचनाएं साझा करती है और संभावित खतरों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। तपन डेका की जगह संभालेंगे जिम्मेदारी महेश दीक्षित, मौजूदा आईबी प्रमुख तपन डेका का स्थान लेंगे। डेका, 1988 बैच के हिमाचल प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी हैं। उन्हें वर्ष 2022 में आईबी प्रमुख नियुक्त किया गया था और बाद में उनके कार्यकाल को दो बार एक-एक वर्ष के लिए बढ़ाया गया। अब महेश दीक्षित के नेतृत्व में इंटेलिजेंस ब्यूरो देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियों से निपटने की जिम्मेदारी संभालेगा।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
Nihang Sikhs gather at the Uttarakhand–Himachal Pradesh border before returning after successful talks with the state administration.

उत्तराखंड-हिमाचल सीमा पर खत्म हुआ निहंग सिखों और प्रशासन का गतिरोध, कई घंटे की वार्ता के बाद बनी सहमति

Father of accused Siya Goyal says she should receive the strictest punishment if found guilty in the Ketan Agrawal murder case.

पुणे मर्डर केस: 'अगर बेटी दोषी है तो उसे कड़ी से कड़ी सजा मिले', सिया गोयल के पिता का भावुक बयान

Uttar Pradesh Police arrest eight accused in Ayodhya Ram Temple donation mismanagement case following an SIT investigation.

राम मंदिर दान चोरी मामला: FIR दर्ज होने के कुछ घंटों के भीतर 8 आरोपी गिरफ्तार, SIT जांच के बाद बड़ी कार्रवाई

Prime Minister Narendra Modi to visit Seychelles for a three-day state visit and attend the National Day Golden Jubilee celebrations.
PM Modi Seychelles Visit: 27 जून से सेशेल्स दौरे पर रहेंगे प्रधानमंत्री मोदी, हिंद महासागर में रणनीतिक साझेदारी होगी मजबूत

  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 से 29 जून तक हिंद महासागर के द्वीपीय देश सेशेल्स की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर जाएंगे। इस दौरान वह सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा और विकास सहयोग सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर होगा दौरा विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह यात्रा सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर करेंगे। अपने प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री राष्ट्रपति हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसमें दोनों देशों के संबंधों की समीक्षा की जाएगी और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा। राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह में होंगे शामिल प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के 50वें वर्ष के समारोह में विशेष अतिथि के रूप में हिस्सा लेंगे। इस अवसर पर भारतीय सशस्त्र बलों का एक दल और भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत भी समारोह में भाग लेंगे, जो दोनों देशों के रक्षा सहयोग और मजबूत रणनीतिक संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है। संसद को करेंगे संबोधित, भारतीय समुदाय से भी मिलेंगे यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की संसद को संबोधित करेंगे। इसके अलावा वह वहां रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक एवं जन-से-जन संबंधों को मजबूत करने पर जोर देंगे। भारत-सेशेल्स संबंधों को मिलेगी नई मजबूती विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह दौरा भारत और सेशेल्स के बीच दशकों पुराने मैत्रीपूर्ण संबंधों को नई दिशा देगा। दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण, विकास परियोजनाओं और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान रहेगा। हिंद महासागर में भारत का अहम साझेदार है सेशेल्स सेशेल्स हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का एक महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार है। भारत की 'सागर' (Security and Growth for All in the Region) नीति, समुद्री सुरक्षा रणनीति और ग्लोबल साउथ देशों के साथ सहयोग बढ़ाने में सेशेल्स की अहम भूमिका मानी जाती है। यही वजह है कि इस यात्रा को क्षेत्रीय रणनीति और हिंद महासागर में भारत की बढ़ती भूमिका के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2015 के बाद प्रधानमंत्री मोदी की पहली सेशेल्स यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले वर्ष 2015 में सेशेल्स की यात्रा पर गए थे। लगभग एक दशक बाद हो रही यह यात्रा दोनों देशों के रणनीतिक, आर्थिक और समुद्री सहयोग को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
OpenAI stock market debut

OpenAI IPO को लेकर चर्चा तेज, 2027 तक टल सकती है शेयर बाजार में एंट्री

Cyber Crime

Cyber Crime का शिकार हो गए हैं? घबराएं नहीं, तुरंत करें ये 7 काम, वापस मिल सकता है आपका पैसा

Ketan Agarwal murder case

केतन अग्रवाल मर्डर केस में आया नया मोड़: सिया गोयल और चेतन चौधरी ने एक-दूसरे पर लगाया हत्या की साजिश का आरोप

0 Comments

Top week

झारखंड

वरिष्ठ संपादक एवं प्रतिष्ठित पत्रकार दीपेश कुमार का हृदयाघात से निधन

anjali kumari जून 24, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?