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₹2500 Cr Cyber Fraud Busted in Gujarat

गुजरात साइबर फ्रॉड: ₹2500 करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश, बैंक अधिकारियों समेत 20 गिरफ्तार

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
Police investigating cyber fraud case in Rajkot with seized documents and arrested bank officials
Gujarat Cyber Fraud ₹2500 Crore Scam

Rajkot में एक बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ है, जिसने बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब ₹2500 करोड़ के इस घोटाले में निजी बैंकों के अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई है। पुलिस ने अब तक 20 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें बैंक कर्मचारी भी शामिल हैं।

फर्जी खातों के जरिए होता था खेल

पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों और नकली पहचान के आधार पर कई बैंक खाते खुलवाए। इन खातों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर अवैध लेन-देन के लिए किया जाता था, जिससे करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई।

बैंक अधिकारियों की मिलीभगत

जांच में सामने आया है कि Yes Bank, Axis Bank और HDFC Bank के कुछ अधिकारियों ने इस पूरे नेटवर्क को संचालित करने में मदद की।
आरोप है कि इन अधिकारियों ने:

  • संदिग्ध खातों को खोलने और सक्रिय रखने में सहयोग किया
  • बैंक के अलर्ट सिस्टम को नजरअंदाज किया
  • बड़े ट्रांजैक्शन को छिपाने में मदद की

85 खाते चिन्हित, 535 शिकायतें दर्ज

पुलिस के अनुसार, अब तक इस रैकेट से जुड़े 85 बैंक खातों की पहचान की जा चुकी है। वहीं, साइबर क्राइम पोर्टल पर 535 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं।

हवाला नेटवर्क से जुड़ाव

जांच में यह भी सामने आया है कि खातों से निकाली गई रकम को हवाला चैनलों के जरिए आगे ट्रांसफर किया जाता था, जिससे इस घोटाले का नेटवर्क और भी बड़ा हो सकता है।

पुलिस की कार्रवाई जारी

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।

 

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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कोलकाता के अस्पताल में आग से अफरा-तफरी, 70 मरीजों को सुरक्षित निकाला गया

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में स्थित आनंदलोक हॉस्पिटल  में मंगलवार सुबह अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। यह आग अस्पताल की दूसरी मंजिल पर लगी, जिससे कुछ ही देर में पूरे परिसर में घना धुआं फैल गया। हालात को देखते हुए अस्पताल में भर्ती करीब 70 मरीजों को तुरंत बाहर निकालना पड़ा।   शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग एयर कंडीशनिंग यूनिट में शॉर्ट सर्किट के कारण लगी हो सकती है। आग लगते ही कई वार्ड धुएं से भर गए, जिससे मरीजों और अस्पताल कर्मियों में अफरा-तफरी मच गई।   सड़क पर बैठाकर बचाई गई मरीजों की जान स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन और इमरजेंसी टीम ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया। मरीजों को जल्दबाजी में बाहर निकाला गया और कुछ को सड़क पर ही बैठाकर प्राथमिक उपचार जारी रखा गया। कई मरीज उस समय सलाइन और अन्य मेडिकल सपोर्ट पर थे, फिर भी उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई।   लिफ्ट बंद, सीढ़ियों से निकाले गए मरीज सुरक्षा के लिहाज से अस्पताल की लिफ्ट तुरंत बंद कर दी गई। मरीजों को सीढ़ियों के जरिए बाहर निकाला गया और पास के डीएल ब्लॉक स्थित अस्पताल की दूसरी शाखा में शिफ्ट किया गया। घटना के समय अस्पताल में करीब 70 मरीज भर्ती थे और 15 सर्जरी निर्धारित थीं। आग लगने के दौरान एक सर्जरी जारी थी, जिसे सुरक्षित रूप से रोका गया।   दमकल विभाग की तत्परता से टला बड़ा हादसा सूचना मिलते ही दमकल विभाग मौके पर पहुंचा और दो दमकल गाड़ियों की मदद से आग पर काबू पाया। खिड़कियां तोड़कर धुआं बाहर निकाला गया, जिससे हालात जल्दी नियंत्रण में आ गए।   प्रशासन ने ली राहत की सांस अस्पताल प्रशासन के अनुसार सभी मरीज सुरक्षित हैं। समय रहते उठाए गए कदमों की वजह से एक बड़ा हादसा टल गया और किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

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‘ये प्रेम मोल लिया’ से बड़जात्या की वापसी, जानें कब होगी रिलीज

मुंबई, एजेंसियां। फैमिली एंटरटेनर फिल्मों के लिए मशहूर निर्देशक सूरज बड़जात्या  ने अपनी नई फिल्म Yeh Prem Mol Liya की रिलीज डेट का ऐलान कर दिया है। ‘हम आपके हैं कौन’ और ‘विवाह’ जैसी क्लासिक फिल्मों के लिए जाने जाने वाले बड़जात्या एक बार फिर पारिवारिक मूल्यों पर आधारित कहानी लेकर आ रहे हैं।   27 नवंबर को सिनेमाघरों में होगी रिलीज फिल्म को 27 नवंबर को थिएटर्स में रिलीज किया जाएगा। प्रोडक्शन हाउस Rajshri Productions ने सोशल मीडिया के जरिए फिल्म के टाइटल और रिलीज डेट की आधिकारिक घोषणा की। रिलीज डेट सामने आने के बाद दर्शकों में उत्साह बढ़ गया है।   आयुष्मान खुराना और शरवरी पहली बार साथ इस फिल्म में आयुष्मान खुराना और शरवरीi लीड रोल में नजर आएंगे। यह पहली बार होगा जब दोनों कलाकार एक साथ स्क्रीन शेयर करेंगे। उनकी फ्रेश जोड़ी को लेकर फैंस में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।   हिमेश रेशमिया देंगे संगीत फिल्म का म्यूजिक मशहूर सिंगर और कंपोजर हिमेश रेशमिया तैयार कर रहे हैं। बड़जात्या की फिल्मों में संगीत की अहम भूमिका होती है, ऐसे में इस फिल्म के गानों को लेकर भी काफी उम्मीदें हैं।   फैमिली ड्रामा पर रहेगा फोकस ‘ये प्रेम मोल लिया’ को एक फैमिली एंटरटेनर बताया जा रहा है, जिसमें रिश्तों, प्रेम और संस्कारों की झलक देखने को मिलेगी। यह फिल्म Mahaveer Jain Films के साथ मिलकर बनाई जा रही है।   कलाकारों का वर्कफ्रंट और उम्मीदें आयुष्मान खुराना जल्द ही अन्य प्रोजेक्ट्स में भी नजर आएंगे, जबकि शरवरी भी लगातार बड़े बैनर की फिल्मों में अपनी जगह बना रही हैं। करीब 38 साल के करियर में यह सूरज बड़जात्या की आठवीं निर्देशित फिल्म होगी।

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पश्चिम बंगाल की राजधानी Kolkata के साल्ट लेक इलाके में स्थित Anandalok Hospital में मंगलवार सुबह भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। घटना के समय अस्पताल के भीतर बड़ी संख्या में मरीज भर्ती थे, जिन्हें तेजी से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया। आग से मचा हड़कंप, काले धुएं से ढका इलाका प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग दूसरी मंजिल से शुरू हुई और देखते ही देखते पूरे हिस्से में फैल गई। अस्पताल की ऊपरी मंजिलों से घना काला धुआं उठता दिखाई दिया, जिससे आसपास का इलाका पूरी तरह प्रभावित हो गया। दमकल विभाग को सुबह करीब 10 बजे सूचना मिली, जिसके बाद कई दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने की कोशिशें शुरू की गईं। मरीजों को निकालने के लिए तोड़ने पड़े शीशे स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि मरीजों और स्टाफ को बाहर निकालने के लिए दूसरी मंजिल के शीशों को तोड़ना पड़ा। अस्पताल कर्मचारियों के अनुसार आग बहुत तेजी से फैल रही थी, जिससे समय रहते बाहर निकलना जरूरी हो गया था। मरीजों को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर के जरिए बाहर लाया गया, जबकि कई परिजन भी राहत कार्य में जुट गए। कुछ लोगों ने दमकल के पहुंचने से पहले खुद ही आग बुझाने की कोशिश की। अब तक कोई हताहत नहीं, कारण शॉर्ट सर्किट की आशंका प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस हादसे में अब तक किसी के घायल या झुलसने की सूचना नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि आग लगने का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है, लेकिन शुरुआती तौर पर इसे शॉर्ट सर्किट से जोड़कर देखा जा रहा है। दमकल विभाग और प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि कोई भी व्यक्ति अंदर फंसा न रह जाए। जारी है राहत और बचाव अभियान घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल रहा। गंभीर मरीजों को पास के अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किया जा रहा है। दमकलकर्मी और बचाव दल युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं ताकि आग को पूरी तरह बुझाया जा सके और किसी बड़े नुकसान से बचा जा सके। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और आधिकारिक जानकारी का इंतजार करें।  

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