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Bengal Enforces Strict Slaughter Rules

पश्चिम बंगाल में पशु वध पर सख्त नियम: बिना सर्टिफिकेट अब नहीं होगा स्लॉटर, 6 महीने जेल या ₹1,000 जुर्माने का प्रावधान

surbhi मई 14, 2026 0
Officials inspect cattle as West Bengal enforces stricter animal slaughter certification rules
West Bengal Slaughter Rules 2026

सरकार ने जारी की नई अधिसूचना

पश्चिम बंगाल में पशु वध को लेकर नए और कड़े नियम लागू किए गए हैं। नई अधिसूचना के अनुसार अब किसी भी पशु का वध बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के नहीं किया जा सकेगा। यह नियम गाय, बैल, बछड़ा और भैंस समेत कई पशुओं पर लागू होगा।

फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य

नए नियमों के मुताबिक, किसी भी पशु का वध तभी किया जा सकेगा जब उसे अधिकृत अधिकारी और सरकारी पशु चिकित्सक द्वारा “फिट फॉर स्लॉटर” घोषित किया जाएगा। प्रमाणपत्र में यह भी दर्ज होना जरूरी है कि पशु की उम्र 14 वर्ष से अधिक हो या वह किसी बीमारी, चोट या अक्षमता के कारण काम या प्रजनन के योग्य न हो।

यह प्रमाणपत्र नगरपालिका अध्यक्ष या पंचायत समिति प्रमुख और सरकारी पशु चिकित्सक द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया जाएगा।

केवल निर्धारित स्थानों पर ही वध की अनुमति

अधिसूचना में यह भी साफ किया गया है कि जिन पशुओं को वध के लिए मंजूरी मिलेगी, उनका वध केवल नगरपालिकाओं द्वारा तय किए गए स्लॉटर हाउस या अधिकृत स्थानों पर ही किया जा सकेगा। सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

निरीक्षण में बाधा डालना अपराध

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी परिसर की जांच में बाधा डालना कानूनन अपराध माना जाएगा। प्रशासन और पशु चिकित्सा अधिकारी किसी भी समय निरीक्षण कर सकते हैं और इसमें सहयोग करना अनिवार्य होगा।

नियम तोड़ने पर सख्त सजा

नए नियमों के उल्लंघन पर अधिकतम 6 महीने की जेल या ₹1,000 तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। इसके अलावा इन मामलों को संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा गया है, यानी पुलिस सीधे कार्रवाई कर सकेगी।

राजनीतिक पृष्ठभूमि भी चर्चा में

यह आदेश ऐसे समय आया है जब राज्य की राजनीति पहले से ही गरम है। हाल ही में विधानसभा चुनावों में राजनीतिक बदलाव के बाद इस तरह के प्रशासनिक फैसलों को लेकर बहस तेज हो गई है।

निष्कर्ष

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा लागू किए गए ये नए नियम पशु वध प्रक्रिया को अधिक नियंत्रित और कानूनी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, इसके सख्त प्रावधानों को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा और तेज होने की संभावना है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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होर्मुज जलडमरूमध्य में कतर के एलएनजी टैंकर पर ड्रोन हमला

दोहा/नई दिल्ली, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कतर से भारत के गुजरात स्थित दहेज बंदरगाह के लिए एलएनजी लेकर आ रहे विशाल टैंकर अल-रकियात पर होर्मुज जलडमरूमध्य के पास संदिग्ध ड्रोन हमला हुआ। घटना 7 जुलाई को उस समय हुई जब जहाज अरब सागर और ओमान की खाड़ी के मिलन बिंदु से गुजर रहा था। राहत की बात यह रही कि हमले में किसी के घायल होने या जहाज को गंभीर नुकसान पहुंचने की सूचना नहीं है। भारत की ओर से इस घटना पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।   घटना के बाद कतर ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपने यहां तैनात ईरान के उप-राजदूत मोहसेन मोहम्मद घनेई को विदेश मंत्रालय तलब किया। विदेश मंत्रालय के प्रोटोकॉल विभाग के निदेशक इब्राहिम बिन यूसुफ ने उन्हें विरोध पत्र सौंपते हुए इस हमले को अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए गंभीर खतरा बताया।   कतर ने कहा कतर ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक समुद्री मार्ग में किसी भी व्यापारी जहाज को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून और नौवहन सुरक्षा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। सरकार ने ईरान से इस घटना पर तत्काल स्पष्टीकरण मांगा है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।   कतर ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने राष्ट्रीय हितों, समुद्री संपत्तियों और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उपलब्ध सभी अधिकारों का उपयोग करने का अधिकार रखता है।   विशेषज्ञों का क्या है मानना  विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और एलएनजी आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस तरह के हमले न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर डाल सकते हैं। भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए भी इस घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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दिनांक - 08 जुलाई 2026 दिन - बुधवार विक्रम संवत 2083 शक संवत -1948 अयन - दक्षिणायन ऋतु - वर्षा ॠतु मास - आषाढ पक्ष - कृष्ण तिथि - अष्टमी दोपहर 12:21 तक तत्पश्चात नवमी नक्षत्र - रेवती शाम 04:00 तक तत्पश्चात अश्विनी योग - अतिगण्ड दोपहर 12:38 तक तत्पश्चात सुकर्मा राहुकाल - दोपहर 12:44 से दोपहर 02:24 तक सूर्योदय - 05:14 सूर्यास्त -  06:23 दिशाशूल - उत्तर दिशा मे व्रत पर्व विवरण- बुधवारी अष्टमी (सूर्योदय से दोपहर 12:21 तक),पंचक (समाप्त: शाम 04:00)* विशेष- *अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है (ब्रह्मवैवर्त पुराण ब्रह्म खण्ड: 27,29,34)

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करूर भगदड़ मामला: सुप्रीम कोर्ट ने डीएमके की याचिका खारिज, सीएम विजय के दौरे पर रोक से किया इनकार

नई दिल्ली, एजेंसियां। तमिलनाडु के करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने डीएमके की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मुख्यमंत्री विजय को पीड़ित परिवारों से मिलकर मुआवजा और सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र वितरित करने से रोकने की मांग की गई थी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि वह किसी मुख्यमंत्री की प्रशासनिक गतिविधियों का निर्धारण नहीं कर सकती और राजनीतिक विवादों को न्यायालय का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।   सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने डीएमके के वकील से कहा कि अदालत राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का मंच नहीं है। यदि सत्तारूढ़ दल के नेता किसी मुद्दे पर बयान दे रहे हैं, तो विपक्ष भी उसका राजनीतिक जवाब दे सकता है। अदालत ने कहा कि ऐसी लड़ाइयां लोकतांत्रिक और राजनीतिक मंचों पर लड़ी जानी चाहिए, न कि न्यायालय में।   डीएमके ने अपनी याचिका क्या आरोप लगाया? डीएमके ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि पिछले वर्ष करूर में हुई भगदड़ की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। पार्टी का कहना था कि मुख्यमंत्री विजय का पीड़ित परिवारों से मिलना, उन्हें 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी देने की घोषणा जांच की निष्पक्षता पर असर डाल सकती है। इसी आधार पर उनके प्रस्तावित दौरे पर रोक लगाने की मांग की गई थी।   क्या है मामला? यह मामला पिछले वर्ष सितंबर में करूर में तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) की एक रैली के दौरान हुई भगदड़ से जुड़ा है, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी। शुरुआत में मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपी गई थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने जांच राज्य पुलिस से लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी। मामले की निगरानी न्यायालय द्वारा गठित एक समिति भी कर रही है।   सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री विजय के करूर दौरे का रास्ता साफ हो गया है। वह जल्द ही पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें घोषित आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपेंगे। वहीं, इस फैसले के बाद राज्य की सियासत में इस मुद्दे पर बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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