राष्ट्रीय

Amazon-Flipkart सेल अलर्ट: फेंके गए डिलीवरी बॉक्स बन रहे साइबर ठगी का हथियार

Anjali Kumari मई 7, 2026 0
Amazon Flipkart sale alert
Amazon Flipkart sale alert

नई दिल्ली, एजेंसियां। ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते ट्रेंड के साथ एक नया साइबर खतरा भी तेजी से सामने आ रहा है। खासकर सेल सीजन के दौरान घरों में आने वाले डिलीवरी बॉक्स अब ठगों के लिए आसान निशाना बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, लोग सामान निकालने के बाद खाली डिब्बों को बिना सोचे-समझे फेंक देते हैं, जो उनकी निजी जानकारी लीक होने का बड़ा कारण बन रहा है।

 

क्या है ‘डिलीवरी बॉक्स स्कैम’?


हर पार्सल बॉक्स पर एक शिपिंग लेबल लगा होता है, जिसमें ग्राहक का नाम, पता, मोबाइल नंबर और ऑर्डर डिटेल्स जैसी संवेदनशील जानकारी होती है। जब लोग इन बॉक्स को बिना लेबल हटाए कूड़े में डाल देते हैं, तो यह जानकारी आसानी से जालसाजों के हाथ लग जाती है। इसके बाद ठग इन्हीं जानकारियों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाते हैं।

 

कैसे होता है फ्रॉड?


ठग इन बॉक्स से जानकारी जुटाकर खुद को ई-कॉमर्स कंपनी का कर्मचारी बताकर कॉल करते हैं। वे फीडबैक, कैशबैक या डिस्काउंट का लालच देते हैं और एक लिंक भेजते हैं। इस लिंक पर क्लिक करते ही या तो मोबाइल में मालवेयर इंस्टॉल हो जाता है या यूजर फर्जी वेबसाइट पर पहुंच जाता है। इसके जरिए बैंकिंग डिटेल्स, OTP और अन्य जरूरी जानकारी चुरा ली जाती है।


सेल के दौरान क्यों बढ़ते हैं ऐसे मामले?


सेल के समय ऑर्डर की संख्या बढ़ जाती है, जिससे ज्यादा डिलीवरी बॉक्स कूड़े में जाते हैं। साथ ही, ग्राहक भी ऑफर्स और कॉल्स की उम्मीद करते हैं, जिसका फायदा ठग आसानी से उठाते हैं।

 

कैसे करें बचाव?


इस तरह की ठगी से बचने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाना जरूरी है:
•    बॉक्स फेंकने से पहले शिपिंग लेबल को फाड़ दें या मार्कर से जानकारी मिटा दें। 
•    किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 
•    फर्जी कॉल्स से सतर्क रहें, भले ही सामने वाला आपकी सही जानकारी बताए। 
छोटी-सी लापरवाही बड़ी साइबर ठगी में बदल सकती है। ऐसे में थोड़ी सतर्कता अपनाकर आप अपनी निजी जानकारी और पैसे दोनों को सुरक्षित रख सकते हैं।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

राष्ट्रीय

View more
Prime Minister Narendra Modi praising Indian armed forces during Operation Sindoor anniversary event
ऑपरेशन सिंदूर पर पीएम मोदी का बड़ा बयान, बोले- आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त जवाब

Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय सेना की बहादुरी और देश की आतंकवाद विरोधी नीति की सराहना की है. पीएम मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ भारत के सख्त रुख, मजबूत इच्छाशक्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आतंकवाद और उसे समर्थन देने वाले नेटवर्क के खिलाफ अपनी लड़ाई में पूरी तरह अडिग है. उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और भारत हर आतंकी चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है. भारतीय सेना के शौर्य को किया सलाम पीएम मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने अद्भुत साहस, सटीक रणनीति और मजबूत समन्वय का परिचय दिया. उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों की हत्या करने वालों को भारतीय सुरक्षा बलों ने करारा जवाब दिया. प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि पूरा देश भारतीय जवानों की वीरता और समर्पण को सलाम करता है. उन्होंने कहा कि इस अभियान ने दुनिया को भारतीय सेना की तैयारी, पेशेवर क्षमता और तीनों सेनाओं के मजबूत तालमेल की ताकत दिखायी. आत्मनिर्भर भारत की ताकत भी दिखी पीएम मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती क्षमता को भी सामने रखा. उन्होंने कहा कि आधुनिक सैन्य तकनीक, स्वदेशी रक्षा उपकरण और बेहतर समन्वय ने इस अभियान को सफल बनाने में अहम भूमिका निभायी. उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सुरक्षा बलों के बीच बढ़ती एकजुटता और सामरिक क्षमता आज देश की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है. क्यों शुरू किया गया था ऑपरेशन सिंदूर? ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना, वायुसेना, नौसेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा संयुक्त रूप से चलाया गया सैन्य अभियान था. यह ऑपरेशन 7 मई से 10 मई 2025 के बीच पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में आतंकवादी ठिकानों और सैन्य अड्डों को निशाना बनाकर अंजाम दिया गया था. यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गयी थी. उस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें ज्यादातर पर्यटक शामिल थे. आतंकवाद के खिलाफ भारत का संदेश प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को साफ संदेश दिया कि भारत अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत पूरी मजबूती और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ता रहेगा.  

surbhi मई 7, 2026 0
Election officials verifying voter lists in West Bengal during Special Intensive Revision process

वोटर लिस्ट की ‘सफाई’ ने बदली बंगाल की सियासत? SIR प्रक्रिया पर उठे बड़े सवाल

Police and security forces deployed in West Bengal after post-election violence and political clashes

बंगाल में कत्लेआम-बमबाजी: शुभेंदु के PA की हत्या, हावड़ा में बमबाजी, कमरहट्टी में BJP कार्यकर्ता के घर हमला

Coal India recruitment 2026

सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका! Coal India में 660 पदों पर भर्ती, 12 मई से शुरू होंगे आवेदन

Amazon Flipkart sale alert
Amazon-Flipkart सेल अलर्ट: फेंके गए डिलीवरी बॉक्स बन रहे साइबर ठगी का हथियार

नई दिल्ली, एजेंसियां। ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते ट्रेंड के साथ एक नया साइबर खतरा भी तेजी से सामने आ रहा है। खासकर सेल सीजन के दौरान घरों में आने वाले डिलीवरी बॉक्स अब ठगों के लिए आसान निशाना बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, लोग सामान निकालने के बाद खाली डिब्बों को बिना सोचे-समझे फेंक देते हैं, जो उनकी निजी जानकारी लीक होने का बड़ा कारण बन रहा है।   क्या है ‘डिलीवरी बॉक्स स्कैम’? हर पार्सल बॉक्स पर एक शिपिंग लेबल लगा होता है, जिसमें ग्राहक का नाम, पता, मोबाइल नंबर और ऑर्डर डिटेल्स जैसी संवेदनशील जानकारी होती है। जब लोग इन बॉक्स को बिना लेबल हटाए कूड़े में डाल देते हैं, तो यह जानकारी आसानी से जालसाजों के हाथ लग जाती है। इसके बाद ठग इन्हीं जानकारियों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाते हैं।   कैसे होता है फ्रॉड? ठग इन बॉक्स से जानकारी जुटाकर खुद को ई-कॉमर्स कंपनी का कर्मचारी बताकर कॉल करते हैं। वे फीडबैक, कैशबैक या डिस्काउंट का लालच देते हैं और एक लिंक भेजते हैं। इस लिंक पर क्लिक करते ही या तो मोबाइल में मालवेयर इंस्टॉल हो जाता है या यूजर फर्जी वेबसाइट पर पहुंच जाता है। इसके जरिए बैंकिंग डिटेल्स, OTP और अन्य जरूरी जानकारी चुरा ली जाती है। सेल के दौरान क्यों बढ़ते हैं ऐसे मामले? सेल के समय ऑर्डर की संख्या बढ़ जाती है, जिससे ज्यादा डिलीवरी बॉक्स कूड़े में जाते हैं। साथ ही, ग्राहक भी ऑफर्स और कॉल्स की उम्मीद करते हैं, जिसका फायदा ठग आसानी से उठाते हैं।   कैसे करें बचाव? इस तरह की ठगी से बचने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाना जरूरी है: •    बॉक्स फेंकने से पहले शिपिंग लेबल को फाड़ दें या मार्कर से जानकारी मिटा दें।  •    किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।  •    फर्जी कॉल्स से सतर्क रहें, भले ही सामने वाला आपकी सही जानकारी बताए।  छोटी-सी लापरवाही बड़ी साइबर ठगी में बदल सकती है। ऐसे में थोड़ी सतर्कता अपनाकर आप अपनी निजी जानकारी और पैसे दोनों को सुरक्षित रख सकते हैं।

Anjali Kumari मई 7, 2026 0
Women bone health

40 के बाद महिलाओं की हड्डियां क्यों होने लगती हैं कमजोर? जानें बचाव के तरीके

Petrol and diesel prices updated at fuel station boards across Indian cities on 7 May 2026

तेल का खेल: कहीं महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, तो कहीं मिली राहत, जानें 7 मई 2026 के नए रेट

Tamil Nadu politics

तमिलनाडु: क्या विजय को रोकने के लिए DMK और AIADMK साथ आएंगे?

RB Choudhary dies
सड़क हादसे में मशहूर निर्माता आर बी चौधरी हुआ निधन, थलापति विजय समेत कई सितारे हुए भावुक

चेन्नई, एजेंसियां। तमिल फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर निर्माता आर बी चौधरी का सड़क दुर्घटना में निधन हो गया। यह हादसा उदयपुर में हुआ, जिसके बाद पूरे सिनेमा जगत में शोक की लहर फैल गई। चेन्नई में बुधवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां बड़ी संख्या में फिल्मी हस्तियां उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचीं।   थलापति विजय ने दी अंतिम श्रद्धांजलि अंतिम संस्कार के दौरान अभिनेता और पॉलिटिशियन थलापति विजय भी मौजूद रहे। उन्होंने आर बी चौधरी के पार्थिव शरीर पर फूल अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में विजय भावुक नजर आए। उनका चौधरी के साथ गहरा जुड़ाव रहा था, खासकर फिल्म ‘Poove Unakkaga’ के जरिए, जिसने उनके करियर को नई ऊंचाई दी थी।   जीवा को गले लगाकर दी सांत्वना अंतिम दर्शन के दौरान विजय ने आर बी चौधरी के छोटे बेटे जीवा को गले लगाकर ढांढस बंधाया। इस भावुक पल में वहां मौजूद कई लोगों की आंखें नम हो गईं। जीवा अपने पिता के निधन से बेहद दुखी नजर आए।   फिल्मी सितारों ने दी श्रद्धांजलि अंतिम संस्कार में विक्रम, सूर्या और अन्य कई बड़े कलाकार शामिल हुए। कई सितारों ने सोशल मीडिया पर भी आर बी चौधरी को श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया।   तमिल सिनेमा के बड़े निर्माता थे चौधरी आर बी चौधरी ने ‘सुपर गुड फिल्म्स’ की स्थापना की थी और कई सुपरहिट फिल्में दीं, जिनमें ‘नट्टामई’, ‘सूर्यवंशम’ और ‘थुल्लाथा मनमुम थुल्लुम’ शामिल हैं। उन्होंने कई कलाकारों के करियर को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। खासकर 1996 की फिल्म ‘Poove Unakkaga’ ने विजय को स्टार बनाने में बड़ी भूमिका निभाई।   सिनेमा जगत में अपूरणीय क्षति उनके निधन से तमिल फिल्म इंडस्ट्री में गहरा शोक है। फिल्मी दुनिया ने एक ऐसे निर्माता को खो दिया है, जिन्होंने न केवल हिट फिल्में दीं बल्कि कई कलाकारों के करियर को नई दिशा भी दी।

Anjali Kumari मई 7, 2026 0
West Bengal politics

चंद्रनाथ रथ हत्या पर सियासी संग्राम तेज, सुवेंदु अधिकारी ने ममता सरकार पर साधा निशाना

Suvendu Adhikari PA murder news

भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के पीए की हत्या में प्री-प्लानिंग का खुलासा

Today Horoscope

Today Horoscope: आज का राशिफल 07 मई 2026, बृहस्पतिवार

0 Comments