1500 – पुर्तगाली नाविक पेड्रो अलवेयर कैब्राल ने ब्राजील की खोज की।
1517 – तुर्की ने काहिरा पर कब्जा किया।
1521 – फ्रांसीसी सम्राट फ्रेंकाइस प्रथम ने स्पेन पर आक्रमण की घोषणा की।
1673 – न्यूयॉर्क एवं बोस्टन के बीच डाक सेवा की शुरुआत हुई।
1728 - पेरियर डी मैरविक्स ''पेरिस में ले ट्रायमफे डे प्लूटस का उद्घाटन हुआ।
1760 – वांदीवाश के युद्ध में अंग्रेजों ने फ्रांसिसियों को हराया।
1769 - मैडम डु बैरी किंग लुई XV की "आधिकारिक" मालकिन बनी।
1792 – अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन ने यूरोप के युद्ध में अमेरिकी तटस्थता की घोषणा की।
1793 - जॉर्ज वॉशिंगटन ने तटस्थता घोषणा पर हस्ताक्षर किए।
1837 – दक्षिणी सीरिया में भूकंप से हजारों लोग मरे।
1895 – क्यूबा वासियों ने स्पेन के साम्राज्यवाद से छुटकारा पाने के लिए पुन: व्रिदोह किया।
1905 – रूस के सेंट पीट्सबर्ग में मजदूरों पर गोलियां चलाई गयी जिसमें 500 से ज्यादा लोग मरे।
1906 – यूनान के एथेंस में 10वें ओलंपिक खेलों की शुरूआत हुई।
1915 – प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जर्मन सेना ने पहली बार जहरीली गैस का इस्तेमाल किया।
1921 – स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने देश सेवा के लिए भारतीय सिविल सेवा की नौकरी से इस्तीफा दिया।
1924 – रैमसे मैकडोनाल्ड ब्रिटेन में लेबर पार्टी के पहले प्रधानमंत्री बने।
1926 – पर्सिया, तुर्की और अफगानिस्तान के बीच सुरक्षा संधि पर हस्ताक्षर किए गए।
1931 – मिस्र और इराक ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए।
1944 – द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मित्र राष्ट्रों ने न्यू गिनी में जापानी के खिलाफ एक बड़े हमले की शुरुआत की।
1948 – अवैध इस्राईल के गठन के दौरान ज़ायोनियों ने पश्चिमोत्तरी फ़िलिस्तीन के तटवर्ती नगर हैफ़ा पर आक्रमण किया जिसमें 500 फ़िलिस्तीनी शहीद और 200 घायल हो गये।
1954 – तत्कालीन सोवियत रूस यूनेस्को में शामिल हुआ।
1958 – एडमिरल आर डी कटारी भारतीय नौसेना में पहले प्रमुख बने।
1961 – अलजीरिया की राजधानी में फ़्रांस की विशेष सेना ने कम से कम 1200 लोगों की हत्या की।
1963 – देहरादून में दृष्टिहीनों के लिए राष्ट्रीय पुस्तकालय की स्थापना हुई।
1966 – तत्कालीन सोवियत रूस ने भूमिगत परमाणु परीक्षण किया।
1970 – बोइंग 747 का न्यूयॉर्क एवं लंदन के बीच पहली व्यावसायिक उड़ान शुरु हुई।
1970 – पृथ्वी पर मौजूद पेड़-पौधों और जीव-जन्तुओं को बचाने और दुनियाभर में पर्यावरण के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लक्ष्य के लिए अमेरिका के लाखों लोगों ने पहली बार ‘पृथ्वी दिवस’ यानि 'अर्थ डे' मनाया।
1977 – ऑप्टिकल फाइबर को पहली बार टेलीफोन ट्रैफिक में यूज किया गया।
1983 – अंतरिक्ष यान सोयूज टी-8 पृथ्वी पर लौटा।
1992 – मैक्सिको में सीवर गैस विस्फोट में करीब 200 लोगों की मौत हुई।
1993 – इंडियन एयरलांइस का विमान औरंगाबाद मे दुर्घटनाग्रस्त, 61 यात्रियों की मौत।
2002 - पाकिस्तान में पर्ल हत्याकांड की सुनवाई प्रारम्भ।
2004 - उत्तर कोरिया में ट्रेनों की भीषण टक्कर, लगभग 3000 हताहत।
2005 - बांडुंग (इंडोनेशिया) में 50 वर्षों के बाद दूसरा एशियाई-अफ़्रीकी सम्मेलन आरम्भ।
2006 – इवा मोराल्स ने बोलीविया के राष्ट्रपति पद की शपथ ली।
2008 - भाजपा के महासचिव गोपीनाथ मुण्डे ने अपना इस्तीफ़ा वापस लिया।
2008 - रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन को लुडविग नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
2010 - दिल्ली के ज़िला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश एसपी गर्ग ने वर्ष 1996 में लाजपत नगर बाज़ार में हुए विस्फ़ोट मामले में दोषी छह लोगों में से तीन मोहम्मद नौशाद, मोहम्मद अली बट्ट और मिर्जा निशार हुसैन को मौत की सज़ा सुनायी।
2010 – लंबे समय से इनकार करते आ रहे चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी पर तिब्बत के पास सांग्पो में बांध बनाने की बात स्वीकार कर ली।
2012 – लंदन मैराथन के दौरान एक 30 वर्षीय महिला प्रतिभागी की अचानक गिरकर मौत हुई।
2015 – उक्रेन के दोनेत्स्क में हुए विस्फोट में 13 लोगों की माैत।
2019 -श्रीलंका- कोलंबो में एक चर्च के पास फिर धमाका, बस स्टेशन पर 87 डेटोनेटर भी मिले , आपातकाल की घोषणा।
2020 - विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक लॉन्च किया गया। भारत इस सूचकांक में 142वें स्थान पर रहा।
2020 - भारत ने नेपाल को कोरोना महामारी से लडने के लिए 23 टन दवाईयां सौंपी।
2020 - ईरान ने अपना पहला सैन्य उपग्रह सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया।
2021 - फ्रांस से चार और राफेल लड़ाकू विमान भारत पहुंचे।
2021 - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो बाइडन के निमंत्रण पर जलवायु परिवर्तन पर आयोजित शिखर सम्मेलन में भाग लिया।
2022 - भारत और ब्रिटेन के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए , रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
2022 - तीन दिवसीय ग्लोबल आयुष इन्वेस्टमेंट एंड इनोवेशन समिट का गांधीनगर में सफलतापूर्वक समापन हुआ।
2022 - रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में डेफकनेक्ट 2.0 के दौरान IDEX - PRIME व 6वां डिफेंस इंडिया स्टार्ट-अप चैलेंज लॉन्च किया।
2023 - पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक ट्रक झोपड़ियों से टकराने से कम से कम 7 लोगों की मौत हुई और 4 अन्य घायल हुए।
2023 - इसरो ने श्रीहरिकोटा सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी-सी55 रॉकेट से सिंगापुर के दो उपग्रह कक्षा में सफलता पूर्वक स्थापित किये।
2023 - जर्मन पत्रिका "डाई एकटुएल" के संपादक को एफआई रेसिंग ड्राइवर माइकल शूमाकर के साथ एआई द्वारा उत्पन्न एक तथाकथित साक्षात्कार चलाने के बाद बर्खास्त कर दिया गया।
2023 - मध्य माली शहर सेवरे में एक तिहरे आत्मघाती बम हमले में कम से कम 9 लोग मारे गए और 60 से अधिक घायल हुए।
2024 - ईरान के राष्ट्रपति डॉक्टर इब्राहिम इब्राहिम राईसी पड़ोसी पाकिस्तान के ऐतिहासिक दौरे पर पहुंचे।
2024 - नायडू, पाठक और प्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना पद्मा सुब्रमण्यम को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
2025 - गुजरात में ट्रेनिंग प्लेन क्रैश होने से एक पायलट की मौत हुई।
2025 - कश्मीर के पहलगाम 'मिनी स्विट्जरलैंड' में आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए।
1760 - अकबर द्वितीय - मुग़ल वंश का 18वाँ बादशाह था।
1840 - जेम्स प्रिंसेप - ब्राह्मी लिपि भाषाविद् एवं अशोक के शिलालेख पढ़ने वाले प्रथम अंग्रेज़ व्यक्ति थे।
1851 - सर गंगा राम - प्रसिद्ध इंजीनियर, समाजसेवी और भारत में हरित क्रांति के नायक थे।
1870 – रूस के मार्क्सवादी विचारक व्लादिमीर लेनिन का जन्म हुआ। लेनिन ने रुसी कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की और 1917 में हुई रुसी क्रांति का नेतृत्व किया।
1891 - भारत की प्रथम महिला सांसद: राधाबाई सुबारायन।
1894 - अम्मुकुट्टी स्वामीनाथन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की एक सेनानी व संविधान सभा के लिए चुनी जाने वाली महिला सदस्या।
1914 - बी. आर. चोपड़ा - हिन्दी फ़िल्म निर्माता-निर्देशक।
1916 - कानन देवी - भारत की प्रसिद्ध अभिनेत्री, गायिका और फ़िल्म निर्माता।
1929 - ऊषा किरण - हिन्दी फ़िल्मों की एक अभिनेत्री ।
1932 - स्वामी सच्चिदानंद - जानेमाने आध्यात्मिक संत, समाज सुधारक, दार्शनिक तथा लेखक।
1936 - पी. चंद्रशेखर राव, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में समुद्र के क़ानून के न्यायाधीश ।
1947 - वीरेंद्र भाटिया - समाजवादी पार्टी के एक राजनेता थे ।
1952 - कमला प्रसाद बिसेसर - भारतीय मूल की कैरेबियन द्वीप त्रिनिनाद एवं टोबैगो की महिला प्रधानमंत्री।
1960 - मनोज मुकुंद नरवणे - भारतीय थल सेना प्रमुख ।
1962 - गुरुप्रसाद मोहापात्रा - भारतीय आईएएस अधिकारी थे।
1974 - चेतन भगत- मशहूर उपन्यास लेखक।
1969 - जोगेशचंद्र चटर्जी - 'काकोरी कांड' के प्रसिद्ध क्रांतिकारी थे।
1980 - मंगूराम - समाज सुधारक थे।
1996 - हितेश्वर साइकिया - दो कार्यकालों के लिए असम के मुख्यमंत्री रहे।
2001 - महमूद अली ख़ाँ - भारत के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञों में से एक तथा मध्य प्रदेश के भूतपूर्व राज्यपाल।
2013 - जे एस वर्मा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के भूतपूर्व न्यायाधीश रहे।
2013 - लालगुड़ी जयरमण - भारत के प्रसिद्ध वायलिन वादक।
2020 - ओडिशा से राज्यसभा के पूर्व सदस्य बसंत दास का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया।
2021 - लोकप्रिय संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण के श्रवण कुमार राठौड़ (66वर्ष) का निधन हुआ।
2022 - दक्षिण अफ़्रीकी रग्बी यूनियन खिलाड़ी पेड्री जोहान्स वानेनबर्ग (41) का निधन हुआ।
2023 - आयरिश गेलिक फुटबॉलर (मेयो) और कार्यकारी मिक लॉफ्टस (93) का निधन हुआ।
2023 - ऑस्ट्रेलियाई हास्य अभिनेता , लेखक और व्यंग्यकार व टोनी पुरस्कार विजेता बैरी हम्फ्रीज़ (89) वह का निधन हुआ।
2023 - एक अंग्रेजी पेशेवर बॉलरूम डांसर , नृत्य शिक्षक और नृत्य प्रतियोगिता निर्णायक लियोनार्ड गॉर्डन गुडमैन (78) का निधन हुआ।
2023 - इंग्लिश रग्बी यूनियन प्रोप और रग्बी लीग फ्रंट रोवर माइक कॉलमैन (78) का निधन हुआ।
2024 - कनाडाई हॉकी एचओएफ स्पोर्ट्सकास्टर अल शेवर (96) का निधन हुआ।
2024 - आयरिश फुटबॉल खिलाड़ी चार्ली हर्ले (87) का निधन हुआ।
श्री अभिनन्दननाथ जी गर्भ - मोक्ष (बैशाख शुक्ल षष्ठी)।
मेला श्री गुमाणोमाता जी (करौली)।
श्री रामानुजाचार्य जयन्ती (उत्तर भारत)।
श्री हितेश्वर साइकिया स्मृति दिवस।
श्री जोगेश चन्द्र चटर्जी स्मृति दिवस।
विश्व वसुन्धरा / पृथ्वी दिवस।
प्रशासनिक पेशेवर दिवस (सचिव दिवस / प्रशासनिक दिवस /Administrative Professionals Day , अप्रैल के आखिरी पूरे सप्ताह के बुधवार को)।
कृपया ध्यान दें
यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए मेरी IDTV इन्द्रधनुष की जिम्मेदारी नहीं है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
कोलकाता, एजेंसियां। बंगाली अभिनेत्री और पूर्व सांसद नुसरत जहां राशन घोटाले से जुड़े मामले में पूछताछ के लिए ED के समन पर कोलकाता स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स पहुंचीं। बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे वह जांच एजेंसी के सामने पेश हुईं। उनके साथ अभिनेता यश दासगुप्ता भी मौजूद थे। जानकारी के मुताबिक, नुसरत अपने साथ जरूरी दस्तावेज भी लेकर पहुंची हैं। दिल्ली में पेश होने का अनुरोध हुआ खारिज सूत्रों के अनुसार, नुसरत जहां ने पहले दिल्ली स्थित ईडी कार्यालय में पूछताछ के लिए पेश होने का अनुरोध किया था, लेकिन एजेंसी ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद उन्हें कोलकाता कार्यालय में ही उपस्थित होने के निर्देश दिए गए। 175 ट्रकों में गेहूं तस्करी का आरोप यह मामला 2020 के कथित राशन घोटाले से जुड़ा है, जिसमें तृणमूल की पूर्व सांसद नुसरत जहां का नाम 2020 के राशन भ्रष्टाचार मामले में सामने आया है। बता दे 2020 में बसीरहाट के घोजाडांगा सीमा मार्ग से 175 ट्रकों में गेहूं की तस्करी का प्रयास किया गया था। आरोप है कि यह गेहूं सार्वजनिक वितरण प्रणाली (राशन) का था। उसी मामले में नुसरत जहां का नाम सामने आने के बाद ईडी ने जांच तेज कर दी है। पूछताछ में महिला अधिकारी रहेंगी मौजूद जांच एजेंसी ने पूछताछ के दौरान महिला अधिकारी की मौजूदगी सुनिश्चित की है। इसके अलावा एक जांच अधिकारी और सहायक निदेशक स्तर के अधिकारी भी इस प्रक्रिया में शामिल रहेंगे। नुसरत जहां का बयान दर्ज किया जाएगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। जांच के बाद आगे की कार्रवाई संभव ईडी हाल ही में इस मामले की जांच में सक्रिय हुई है। उस समय नुसरत जहां बसीरहाट से सांसद थीं, जिसके चलते एजेंसी उनसे संबंधित जानकारी जुटा रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के बाद मिले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।
सेना की क्षमता बढ़ाने के लिए बड़ा कदम भारत ने अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने 975 करोड़ रुपये के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत भारतीय सेना के लिए TRAWL सिस्टम खरीदे जाएंगे। यह समझौता 21 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में हुआ, जहां रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में इस डील को अंतिम रूप दिया गया। T-72 और T-90 टैंकों में लगेगा सिस्टम इस सौदे के तहत TRAWL सिस्टम को भारतीय सेना के T-72 और T-90 टैंकों में लगाया जाएगा। इस उपकरण की आपूर्ति Bharat Earth Movers Limited और Electro Pneumatics and Hydraulics (India) Private Limited द्वारा की जाएगी। माइनफील्ड में सुरक्षित रास्ता बनाएगा TRAWL TRAWL सिस्टम को Defence Research and Development Organisation द्वारा विकसित किया गया है। यह तकनीक युद्ध के दौरान माइनफील्ड को पार करने में मदद करती है। इसकी मदद से टैंक और अन्य बख्तरबंद वाहन बारूदी सुरंगों वाले इलाकों में सुरक्षित रास्ता बना सकते हैं। खासकर उन क्षेत्रों में, जहां एंटी-टैंक माइंस लगी होती हैं, यह सिस्टम बेहद कारगर साबित होगा। ‘आत्मनिर्भर भारत’ को मिलेगा बढ़ावा यह सौदा “Buy (Indian–Indigenously Designed, Developed and Manufactured)” श्रेणी के तहत किया गया है, जो सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती देता है। इससे देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और घरेलू कंपनियों को नए अवसर मिलेंगे। रोजगार और MSME सेक्टर को फायदा इस परियोजना से न सिर्फ सेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि देश के MSME सेक्टर को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। TRAWL सिस्टम के निर्माण में कई छोटे और मध्यम उद्योग शामिल होंगे, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर मांगा केंद्र का जवाब सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) एक्ट की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए चार हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि इस मामले की सुनवाई की जाएगी। अगली सुनवाई की तारीख 14 जुलाई तय की गई है। केरल के वकील ने दाखिल की PIL यह जनहित याचिका केरल के वकील मोहम्मद मुबारक अली ने दाखिल की है। खास बात यह है कि वह खुद भी NIA द्वारा जांच किए जा रहे एक मामले में आरोपी हैं। यह मामला प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की कथित गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़ा है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे और अधिवक्ता विष्णु पी. ने कोर्ट में पक्ष रखा। NIA एक्ट पर उठाए गए गंभीर सवाल याचिका में 2008 के NIA एक्ट के कई प्रावधानों को मनमाना बताया गया है। इसमें कहा गया है कि यह कानून संविधान के संघीय ढांचे और केंद्र-राज्य के बीच शक्तियों के संतुलन का उल्लंघन करता है। सबसे बड़ा मुद्दा धारा 8 को लेकर उठाया गया है, जिसके तहत NIA किसी भी ऐसे मामले को अपने हाथ में ले सकती है जो किसी अनुसूचित अपराध से “जुड़ा” हो। इसके अलावा, NIA को जांच संभालने के लिए राज्य सरकार की अनुमति की जरूरत नहीं होती, जबकि CBI को आमतौर पर राज्यों से पूर्व अनुमति लेनी पड़ती है। “समानांतर राष्ट्रीय पुलिस तंत्र” का आरोप याचिका में कहा गया है कि NIA एक्ट एक “बिना नियंत्रण वाला समानांतर राष्ट्रीय पुलिस ढांचा” तैयार करता है, जो राज्यों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करता है। याचिकाकर्ता का दावा है कि इससे राज्यों की स्वायत्तता प्रभावित होती है और संविधान में तय शक्तियों का संतुलन बिगड़ता है। आगे की सुनवाई पर नजर अब इस मामले में केंद्र सरकार का जवाब आने के बाद सुप्रीम कोर्ट में विस्तृत बहस होगी। यह मामला न सिर्फ NIA की शक्तियों, बल्कि भारत के संघीय ढांचे की व्याख्या के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।