नई दिल्ली, एजेंसियां। जर्मनी की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी वोक्सवैगन एजी (Volkswagen AG) भारत में अपने कारोबार को लेकर बड़ा रणनीतिक कदम उठाने की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी JSW Group के साथ अपनी भारतीय इकाई में हिस्सेदारी बेचने को लेकर अंतिम चरण की बातचीत कर रही है। यदि यह सौदा पूरा होता है, तो भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में यह हाल के वर्षों के सबसे बड़े निवेश सौदों में से एक हो सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस संभावित साझेदारी का उद्देश्य वोक्सवैगन के भारतीय कारोबार का विस्तार करना और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) समेत नए सेगमेंट में निवेश को गति देना है। JSW Group पहले से ही ऑटो और ईवी सेक्टर में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है, ऐसे में दोनों कंपनियों की साझेदारी भारतीय बाजार में नई संभावनाएं खोल सकती है।
हालांकि, अब तक वोक्सवैगन और JSW Group की ओर से इस संभावित सौदे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों के अनुसार, बातचीत अंतिम चरण में है और दोनों पक्ष सौदे की शर्तों पर चर्चा कर रहे हैं। समझौता होने के बाद ही हिस्सेदारी और निवेश से जुड़े अंतिम विवरण सार्वजनिक किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल होता है, तो भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। साथ ही वोक्सवैगन को स्थानीय उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नई तकनीकों में निवेश करने और इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी। निवेशकों और उद्योग जगत की नजर फिलहाल इस संभावित डील की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत स्वास्थ्य विभाग में बड़ी भर्ती निकली है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय रायपुर ने नर्सिंग ऑफिसर, स्टाफ नर्स, एएनएम, कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) समेत विभिन्न पदों पर कुल 206 रिक्तियों के लिए भर्ती अधिसूचना जारी की है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार निर्धारित तिथियों के अनुसार 28 जुलाई 2026 से 31 अगस्त 2026 तक वॉक-इन भर्ती प्रक्रिया में शामिल होकर आवेदन कर सकते हैं। इन पदों पर होगी भर्ती इस भर्ती अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग में कई महत्वपूर्ण पदों को भरा जाएगा। इनमें नर्सिंग ऑफिसर, स्टाफ नर्स, एएनएम, कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO), आरएमए, लैब टेक्नीशियन, एमपीडब्ल्यू, सचिवालय सहायक, कक्षा-4 कर्मचारी समेत अन्य पद शामिल हैं। नर्सिंग और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े पदों पर ज्यादा अवसर NHM रायपुर भर्ती में नर्सिंग क्षेत्र से जुड़े उम्मीदवारों के लिए कई अवसर हैं। जारी विवरण के अनुसार, दूसरी एएनएम पद के लिए 12,000 रुपये मासिक वेतन, नर्सिंग ऑफिसर पद के लिए 16,500 रुपये और वरिष्ठ नर्सिंग ऑफिसर पद के लिए 31,500 रुपये तक मासिक वेतन निर्धारित किया गया है। वॉक-इन इंटरव्यू के जरिए होगा चयन उम्मीदवारों का चयन निर्धारित प्रक्रिया के तहत वॉक-इन इंटरव्यू के माध्यम से किया जाएगा। अभ्यर्थियों को अपने आवश्यक दस्तावेजों के साथ तय तारीख और स्थान पर पहुंचना होगा। विभाग की ओर से पात्रता, शैक्षणिक योग्यता और अन्य जरूरी जानकारी आधिकारिक अधिसूचना में जारी की गई है। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में कदम स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य इन नियुक्तियों के जरिए जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाना है। नई भर्तियों से अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
मुजफ्फराबाद, एजेंसियां। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के प्रमुख नवाज शरीफ ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के आगामी चुनावों के बीच बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। मुजफ्फराबाद में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि उनकी पार्टी चुनाव जीतती है तो वह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से उन्हें PoK का प्रधानमंत्री बनाने का अनुरोध करेंगे। उनके इस बयान ने पाकिस्तान की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। AJK चुनाव प्रचार का किया आगाज नवाज शरीफ ने अपनी बेटी और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज के साथ मुजफ्फराबाद में रैली कर आजाद जम्मू-कश्मीर (AJK) चुनाव अभियान की औपचारिक शुरुआत की। उन्होंने कहा कि यदि PML-N सत्ता में आती है तो क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन से जुड़ी बड़ी परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। विकास के कई वादे किए रैली में नवाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में मोटरवे और एक्सप्रेसवे बने, लेकिन मुजफ्फराबाद और आसपास के क्षेत्रों में विकास अपेक्षित गति से नहीं हुआ। उन्होंने क्षेत्र में आधुनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण का वादा किया। बयान से तेज हुई राजनीतिक बहस नवाज शरीफ के PoK का प्रधानमंत्री बनने संबंधी बयान के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे चुनावी बयान बताया, जबकि PML-N समर्थकों ने इसे क्षेत्र के विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता बताया। 27 जुलाई से शुरू होंगे चुनाव आजाद जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव 27 जुलाई से चरणबद्ध तरीके से शुरू होने वाले हैं। चुनाव से पहले सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपना प्रचार अभियान तेज कर दिया है और PML-N इस चुनाव को अपने लिए अहम मान रही है।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली हाई कोर्ट की अनुमति के बाद सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया। उन्हें एंबुलेंस के जरिए मेदांता ले जाया गया, जहां अब विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी में इलाज करेगी। यह फैसला वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो की याचिका पर सुनवाई के बाद लिया गया। उन्होंने निजी अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति मांगी थी। हाई कोर्ट ने क्या कहा? दिल्ली हाई कोर्ट की पीठ ने निर्देश दिया कि सोनम वांगचुक का इलाज मेदांता अस्पताल के डॉक्टरों की सलाह और निर्धारित मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार किया जाए। अदालत ने अस्पताल प्रबंधन को विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम गठित करने और उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मिला ट्रांसफर हाई कोर्ट ने एम्स, सफदरजंग अस्पताल और वांगचुक की मेडिकल टीम की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद ट्रांसफर की अनुमति दी। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि सफदरजंग अस्पताल वांगचुक के सभी मेडिकल रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट मेदांता अस्पताल को उपलब्ध कराए, ताकि इलाज में कोई बाधा न आए। केंद्र सरकार ने नहीं किया विरोध सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार को वांगचुक को मेदांता अस्पताल भेजे जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि वांगचुक को लगातार मेडिकल निगरानी की जरूरत है और अस्पताल से छुट्टी देने का फैसला केवल डॉक्टरों की सलाह पर ही होना चाहिए। डिस्चार्ज के समय क्या थी स्वास्थ्य स्थिति? सफदरजंग अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि डिस्चार्ज के समय वांगचुक के वाइटल पैरामीटर स्थिर थे। हालांकि, उन्हें पैनसाइटोपेनिया की समस्या बनी हुई है और उनका सीरम पोटैशियम स्तर 3.4 mEq/L दर्ज किया गया, जिसके चलते डॉक्टरों ने लगातार निगरानी की सलाह दी है। पत्नी ने लगाया 'हिरासत' जैसा व्यवहार का आरोप वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए आरोप लगाया कि सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराना एक तरह की हिरासत जैसा था। उन्होंने कहा कि पुलिस वांगचुक को अस्पताल लेकर गई और उन्हें बिना आवश्यकता आईसीयू में रखा गया। साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल पर रोक होने के कारण वह परिवार और समर्थकों से संपर्क भी नहीं कर पा रहे थे। 'हालत गंभीर नहीं, लेकिन निगरानी जरूरी' गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि वांगचुक की कुछ मेडिकल रिपोर्ट सामान्य नहीं हैं, लेकिन उनकी स्थिति फिलहाल जानलेवा नहीं है। उन्होंने कहा कि इलाज के दौरान मरीज की मानसिक स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है और परिवार को यह अधिकार होना चाहिए कि वह तय करे कि मरीज का इलाज किस अस्पताल में कराया जाए। 28 जून से अनशन पर हैं वांगचुक सोनम वांगचुक 28 जून से कथित परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में अनिश्चितकालीन अनशन पर हैं। दिल्ली पुलिस ने 19 जुलाई को उन्हें चिकित्सकीय जरूरत और न्यायिक निर्देशों का हवाला देते हुए सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था। अब हाई कोर्ट के आदेश के बाद उनका इलाज गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में जारी रहेगा।