दिनांक - 12 मई 2026
दिन - मंगलवार
विक्रम संवत 2083
शक संवत -1948
अयन - उत्तरायण
ऋतु - ग्रीष्म ॠतु
मास - ज्येष्ठ
पक्ष - कृष्ण
तिथि - दशमी दोपहर 02:52 तक तत्पश्चात एकादशी*
नक्षत्र - पूर्वभाद्रपद 13 मई रात्रि 01:17 तक तत्पश्चात उत्तरभाद्रपद
योग - वैधृति रात्रि 11:20 तक तत्पश्चात विष्कंभ
राहुकाल - शाम 03:52 से शाम 05:30 तक
सूर्योदय - 05:23
सूर्यास्त - 06:17
दिशाशूल - उत्तर दिशा मे
व्रत पर्व विवरण-
विशेष -
17 मई से अक्षय पुण्य कमाने का बन रहा है महायोग भूलकर भी न चूके इस दुर्लभ संयोग को संपूर्ण जानकारी
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में सोने के आयात में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के बीच सोना एक सुरक्षित निवेश विकल्प बनकर उभरा है। इसी कारण देश में सोने की मांग तेजी से बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में लोगों से सोने की खरीद टालने और मितव्ययिता अपनाने की अपील की थी, ताकि अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा सोने का आयात वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सोना आयात 24 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 71.98 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। हालांकि मात्रा के हिसाब से आयात घटकर 721 टन रह गया, लेकिन कीमतों में भारी उछाल के कारण कुल आयात मूल्य तेजी से बढ़ा है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है और यहां सोने की मांग मुख्य रूप से आभूषण उद्योग और निवेश के कारण बढ़ती है। क्यों बढ़ रही है सोने की मांग? विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, शेयर बाजार में अस्थिरता और आर्थिक अनिश्चितता के कारण लोग सोने को सुरक्षित निवेश मान रहे हैं। इसके अलावा, सोने की कीमत 2025-26 में बढ़कर लगभग 99,825 डॉलर प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। दिल्ली में सोने का भाव करीब 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास है। अर्थव्यवस्था पर बढ़ रहा दबाव सोने के बढ़ते आयात का असर देश के व्यापार घाटे और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहा है। 2025-26 में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 333.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया। रिजर्व बैंक के अनुसार चालू खाता घाटा भी बढ़ा है। कुल आयात में सोने की हिस्सेदारी अब 9 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। सरकार और विशेषज्ञों की चिंता सरकार ने सोने के आयात को नियंत्रित करने के लिए शुल्क और नियमों में बदलाव किए हैं। वहीं विशेषज्ञों ने भारत-यूएई व्यापार समझौते की समीक्षा की मांग की है। उनका मानना है कि कम शुल्क का फायदा उठाकर दुबई के रास्ते बड़े पैमाने पर सोना भारत लाया जा रहा है, जिससे व्यापार संतुलन पर असर पड़ रहा है।
चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु में नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। उन्होंने राज्यभर में स्कूलों, कॉलेजों, पूजा स्थलों और बस स्टैंडों के पास संचालित 717 शराब दुकानों को बंद करने का आदेश दिया है। सरकार ने इन दुकानों को अगले दो सप्ताह के भीतर बंद करने के निर्देश दिए हैं। विशेष सर्वे में सामने आईं दुकानें राज्य सरकार के मुताबिक Tamil Nadu State Marketing Corporation (TASMAC) तमिलनाडु में कुल 4,765 शराब दुकानों का संचालन करता है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अधिकारियों ने पूरे राज्य में विशेष सर्वे कराया। जांच में पाया गया कि 276 दुकानें पूजा स्थलों के पास, 186 दुकानें स्कूलों और कॉलेजों के नजदीक तथा 255 दुकानें बस स्टैंडों के आसपास स्थित हैं। इन्हीं 717 दुकानों को बंद करने के लिए चिन्हित किया गया है। जनता की शिकायतों के बाद फैसला सरकार का कहना है कि लंबे समय से लोग संवेदनशील और सार्वजनिक स्थानों के पास शराब की दुकानों को लेकर शिकायत कर रहे थे। इस फैसले का उद्देश्य सार्वजनिक सुरक्षा बढ़ाना, अनुशासन बनाए रखना और शराब की बिक्री पर नियंत्रण करना है। प्रशासन का मानना है कि इससे छात्रों, महिलाओं और आम लोगों को राहत मिलेगी। मलेशिया के प्रधानमंत्री ने दी बधाई इसी बीच Anwar Ibrahim ने तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री विजय को बधाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर तमिलनाडु और मलेशिया के ऐतिहासिक संबंधों का जिक्र करते हुए विजय को अपना मित्र बताया। इब्राहिम ने कहा कि फिल्मों में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले विजय को अब जनता ने वास्तविक नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी है। हाल ही में बने हैं मुख्यमंत्री 51 वर्षीय विजय Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) के संस्थापक हैं। उन्होंने हाल ही में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है और सत्ता संभालते ही बड़े फैसले लेने शुरू कर दिए हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आईपीएल में शानदार शुरुआत करने वाली पंजाब किंग्स को लगातार चौथे मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। धर्मशाला के हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में खेले गए रोमांचक मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स ने पंजाब को तीन विकेट से हरा दिया। पंजाब द्वारा दिए गए 210 रन के बड़े लक्ष्य को दिल्ली ने छह गेंद शेष रहते हासिल कर लिया। कप्तान अय्यर ने बताई हार की वजह मैच के बाद पंजाब किंग्स के कप्तान Shreyas Iyer ने हार के लिए टीम की खराब गेंदबाजी और कमजोर फील्डिंग को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने साफ कहा कि टीम अपनी योजनाओं के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। अय्यर ने कहा कि जिस तरह की पिच थी, उस पर 210 रन का स्कोर जीत के लिए काफी होना चाहिए था। उन्होंने बताया कि विकेट पर सीम मूवमेंट और असमान उछाल देखने को मिल रहा था, जिससे बल्लेबाजी आसान नहीं थी। इसके बावजूद गेंदबाज सही लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी करने में नाकाम रहे। चहल को गेंदबाजी न देने पर दिया जवाब मैच के दौरान Yuzvendra Chahal को कम गेंदबाजी दिए जाने पर भी सवाल उठे। इस पर अय्यर ने कहा कि ओस के कारण तेज गेंदबाजों को फायदा मिलने की उम्मीद थी। टीम ने योजना बनाई थी कि हार्ड लेंथ पर गेंदबाजी कर विकेट निकाले जाएं, लेकिन खिलाड़ी उस रणनीति को सही तरीके से लागू नहीं कर सके। बल्लेबाजों ने दिखाया दम पंजाब की ओर से प्रियांश और कप्तान श्रेयस अय्यर ने शानदार अर्धशतक लगाए। दोनों की पारियों की बदौलत टीम ने 20 ओवर में 210 रन बनाए। जवाब में दिल्ली के कप्तान Axar Patel और David Miller ने बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए टीम को यादगार जीत दिलाई।