राष्ट्रीय

राम मंदिर दान विवाद में बड़ा अपडेट: चंपत राय से पूछताछ, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार

abhishek singh जून 30, 2026 0
Ayodhya Ram Mandir
Ayodhya Ram Mandir Case Update

अयोध्या, एजेंसियां। राम मंदिर दान में कथित गड़बड़ी के मामले की जांच लगातार तेज हो रही है। अयोध्या पुलिस ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय से लगभग दो घंटे तक पूछताछ की। पुलिस ने दान प्राप्त करने, उसकी गिनती और बैंक में जमा करने की पूरी प्रक्रिया से जुड़े सवाल पूछे गये। जांच एजेंसियां अब ट्रस्ट के अन्य पूर्व पदाधिकारियों से भी पूछताछ की तैयारी कर रही हैं।

 

सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार

 

इस मामले में सीबीआई जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि इस समय मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि याचिका नियमित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी।

 

सभी आठ आरोपी न्यायिक हिरासत में

 

दान में कथित हेराफेरी के मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस वित्तीय लेन-देन, बैंक रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। साथ ही आरोपियों की आय और संपत्ति का भी मिलान किया जा रहा है।

 

राजनीतिक विवाद भी तेज

 

मामले को लेकर राजनीतिक हलचल भी बढ़ गई है। कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल आज अयोध्या पहुंचने वाला था, लेकिन पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रदेश अध्यक्ष अजय राय समेत कई नेताओं को पुलिस ने उनके आवास पर रोक दिया। वहीं प्रशासन ने इसे सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

राष्ट्रीय

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Delhi Government EV
दिल्ली कैबिनेट ने नई EV पॉलिसी को दी मंजूरी, 2030 तक जीरो-एमिशन ट्रांसपोर्ट का लक्ष्य

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली सरकार की कैबिनेट ने मंगलवार को नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी 2026 को मंजूरी दे दी है। यह नीति 1 जुलाई 2026 से लागू होगी और 31 मार्च 2030 तक प्रभावी रहेगी। सरकार का लक्ष्य राजधानी में प्रदूषण कम करना और सार्वजनिक परिवहन को चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह जीरो-एमिशन बनाना है।   पॉलिसी की प्रमुख बातें   सरकार अगले चार सालों में ₹15,000 करोड़ खर्च करेगी। 30 लाख रुपये तक की इलेक्ट्रिक कारों पर 100% रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस माफ होगी। पुरानी गाड़ी स्क्रैप कर नई EV खरीदने पर ₹1 लाख तक का प्रोत्साहन राशि दिया जाएगा। हाइब्रिड वाहनों को किसी प्रकार की सब्सिडी या विशेष छूट नहीं मिलेगी; प्रोत्साहन केवल पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों (Pure EVs) के लिए होगा। पेट्रोल और CNG वाहनों पर चरणबद्ध रोक   नई नीति के तहत 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा का ही नया पंजीकरण होगा। वहीं 1 अप्रैल 2028 से नए पेट्रोल और CNG दोपहिया वाहनों का पंजीकरण बंद कर दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाकर वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी लाना है।   चार्जिंग नेटवर्क का होगा विस्तार   नई EV नीति के तहत राजधानी में बड़े पैमाने पर चार्जिंग स्टेशन, बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जाएगा, ताकि इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने में लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। सरकार का लक्ष्य 2030 तक दिल्ली को देश के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक मोबिलिटी हब के रूप में विकसित करना है।

abhishek singh जून 30, 2026 0
Haldia Refinery

पश्चिम बंगाल के हल्दिया रिफाइनरी की नेफ्था पाइपलाइन में भीषण आग, 15 कर्मचारी झुलसे

Sonam Wangchuk protest

भूख हड़ताल के तीसरे दिन सोनम वांगचुक का शुगर लेवल घटा

Electric vehicles charging at a public EV station in Delhi after the government approved its new EV policy with tax exemptions and purchase incentives.

दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना हुआ सस्ता, रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस पूरी तरह माफ; नई EV पॉलिसी को मंजूरी

Punjab Chief Minister Bhagwant Mann and Sikh legislators appear before the Akal Takht in Amritsar over the Jagat Jot Shri Guru Granth Sahib Satkar (Amendment) Act, 2026.
गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़े कानून पर बढ़ा विवाद, अकाल तख्त ने सभी सिख विधायकों को किया तलब; सरकार को संशोधन के लिए मिला एक माह

  अमृतसर: पंजाब सरकार के 'जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम-2026' को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इसी मुद्दे पर सोमवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान समेत पंजाब विधानसभा के सभी 78 सिख विधायकों को अमृतसर स्थित अकाल तख्त के समक्ष उपस्थित होना पड़ा। सुनवाई के बाद अकाल तख्त ने सरकार को कानून में आवश्यक संशोधन करने के लिए एक महीने का समय दिया है। बैठक के बाद पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने इसे सकारात्मक और सार्थक बताया, लेकिन तख्त की मर्यादा का हवाला देते हुए चर्चा का विवरण सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया। वहीं, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पुष्टि की कि सरकार को कानून में संशोधन के लिए एक महीने का समय दिया गया है। क्या है पूरा मामला? पंजाब सरकार ने 13 अप्रैल 2026 को 'जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम-2026' विधानसभा के विशेष सत्र में पेश किया था। आनंदपुर साहिब में आयोजित इस विशेष सत्र में विधेयक सर्वसम्मति से पारित हुआ और बाद में इसे राज्यपाल की मंजूरी भी मिल गई। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी (अपमान) की घटनाओं पर रोक लगाना और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। कानून में क्या हैं प्रमुख प्रावधान? संशोधित कानून के तहत— बेअदबी की साजिश रचकर सांप्रदायिक तनाव फैलाने पर आजीवन कारावास और 5 से 20 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान। बेअदबी के अपराध पर 20 वर्ष तक की कैद और 2 से 10 लाख रुपये तक जुर्माना। अन्य संबंधित मामलों में 5 वर्ष तक की सजा का प्रावधान। अकाल तख्त ने क्यों जताई आपत्ति? अकाल तख्त ने कानून में सजा के प्रावधानों पर आपत्ति नहीं जताई है। उसकी मुख्य आपत्ति कानून बनाने की प्रक्रिया को लेकर है। अकाल तख्त का कहना है कि गुरु ग्रंथ साहिब से जुड़े किसी भी कानून को लागू करने से पहले अकाल तख्त, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और व्यापक सिख समुदाय से विचार-विमर्श किया जाना चाहिए था। इसके अलावा कानून में प्रयुक्त कुछ धार्मिक शब्दावली और प्रावधानों को सिख परंपराओं के अनुरूप नहीं बताया गया है। सुनवाई में क्या निर्णय हुआ? अकाल तख्त के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने सभी सिख विधायकों को कानून से जुड़ी आपत्तियों की सूची सौंपी और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह एक महीने के भीतर इन बिंदुओं पर संशोधन कर विधानसभा में संशोधित विधेयक लाए। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक मामलों से जुड़े विषयों में सरकार को संबंधित धार्मिक संस्थाओं से व्यापक परामर्श करना चाहिए। सरकार ने संशोधन पर जताई सहमति पंजाब सरकार ने अकाल तख्त की आपत्तियों का सम्मान करते हुए कानून में आवश्यक संशोधन करने पर सहमति जताई है। सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों में कड़ी सजा सुनिश्चित करना है, न कि धार्मिक परंपराओं या संस्थाओं के अधिकारों में हस्तक्षेप करना।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
Ali Khamenei

भारत खामेनेई के अंतिम संस्कार में भेजेगा उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल, विदेश राज्य मंत्री करेंगे प्रतिनिधित्व

Ayodhya Ram Mandir

राम मंदिर दान विवाद में बड़ा अपडेट: चंपत राय से पूछताछ, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार

A damaged Cessna-152 training aircraft lies in a field in Kasganj after making an emergency crash landing, while rescue teams inspect the site.

उत्तर प्रदेश में प्रशिक्षण विमान की क्रैश-लैंडिंग, महिला प्रशिक्षु पायलट सुरक्षित; हाई-टेंशन तार से टकराने के बाद खेत में गिरा एयरक्राफ्ट

Security personnel outside a special court in Srinagar after the State Investigation Agency filed a chargesheet in the 1990 Sarla Bhatt abduction and murder case.
कौन थीं नर्स सरला भट्ट? 36 साल पुराने अपहरण और हत्या मामले में SIA ने दाखिल की चार्जशीट

  श्रीनगर: कश्मीर में वर्ष 1990 के चर्चित नर्स सरला भट्ट अपहरण और हत्या मामले में 36 साल बाद जांच ने महत्वपूर्ण मोड़ लिया है। जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने 29 जून को श्रीनगर की विशेष अदालत में 737 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में तत्कालीन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) प्रमुख यासीन मलिक समेत पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि सरला भट्ट का अपहरण कर उन्हें प्रताड़ित किया गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई। एजेंसी के अनुसार, यह घटना कश्मीरी पंडित समुदाय में भय का माहौल बनाने की एक बड़ी आतंकी साजिश का हिस्सा थी। कौन थीं सरला भट्ट? सरला भट्ट 27 वर्षीय नर्स थीं और श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) के नियोनेटोलॉजी विभाग में कार्यरत थीं। 19 अप्रैल 1990 को उनका शव श्रीनगर के मल्लाबाग-ओमर कॉलोनी रोड पर मिला था। उस समय यह घटना पूरे कश्मीर में चर्चा का विषय बनी थी और कश्मीरी पंडितों पर बढ़ते हमलों के बीच इसे एक गंभीर घटना माना गया था। 36 साल बाद चार्जशीट में क्या कहा गया? SIA की जांच के अनुसार, सरला भट्ट का अपहरण, यातना और हत्या JKLF के सदस्यों द्वारा की गई थी। एजेंसी का कहना है कि यह वारदात आतंक फैलाने और कश्मीरी पंडित समुदाय को निशाना बनाने की सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी। मार्च 2024 में यह मामला SIA को सौंपा गया था, जिसके बाद एजेंसी ने दोबारा जांच शुरू की और विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर साक्ष्य जुटाए। किन लोगों को बनाया गया आरोपी? चार्जशीट में निम्न लोगों के नाम शामिल किए गए हैं— यासीन मलिक (तत्कालीन JKLF प्रमुख) खुर्शीद अहमद चाल्कू अब्दुल हामिद शेख गुलाम मोहम्मद टपलू मोहम्मद यूसुफ सूफी उर्फ इदरीस इनमें से अब्दुल हामिद शेख, गुलाम मोहम्मद टपलू और मोहम्मद यूसुफ सूफी की मृत्यु हो चुकी है, जबकि यासीन मलिक फिलहाल एक अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला? आरोपियों के खिलाफ आतंकवादी एवं विध्वंसक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (TADA), 1987 तथा भारतीय शस्त्र अधिनियम, 1959 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसी ने क्या कहा? अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में चार्जशीट दाखिल होना आतंकवाद के पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। SIA ने पिछले दो वर्षों में जुटाए गए दस्तावेजों, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत में आरोपपत्र पेश किया है। अब इस बहुचर्चित मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया विशेष अदालत में चलेगी।  

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