झारखंड

JSSC उत्पाद सिपाही भर्ती 2023: मेडिकल जांच 1 जुलाई से शुरू, उम्मीदवारों के लिए अहम अपडेट

उत्पाद सिपाही भर्ती में बड़ा अपडेट, 1 जुलाई से शुरू होगी मेडिकल जांच

anjali kumari जून 30, 2026 0

रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की ओर से आयोजित उत्पाद सिपाही प्रतियोगिता परीक्षा-2023 में सफल अभ्यर्थियों के लिए अहम सूचना जारी की गई है। परीक्षा में सूचीबद्ध 1941 अभ्यर्थियों की चिकित्सकीय (मेडिकल) जांच 1 जुलाई से शुरू होकर 14 जुलाई 2026 तक रांची के सदर अस्पताल स्थित आठवें तल्ले के ऑडिटोरियम में आयोजित की जाएगी। आयोग ने सभी अभ्यर्थियों को निर्धारित तिथि और समय पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

 

जरूरी दस्तावेज साथ लाना अनिवार्य


मेडिकल जांच के दौरान अभ्यर्थियों को परीक्षा में प्रयुक्त प्रवेश पत्र, दो नवीनतम रंगीन पासपोर्ट आकार के फोटो तथा किसी भी वैध फोटोयुक्त पहचान पत्र को साथ लाना होगा। निर्धारित दस्तावेजों के बिना जांच प्रक्रिया में शामिल होने में परेशानी हो सकती है।

 

एपेक्स मेडिकल बोर्ड करेगा अंतिम फैसला


जेएसएससी की ओर से जारी सूचना के अनुसार, यदि कोई अभ्यर्थी मेडिकल जांच के निर्णय से असंतुष्ट होता है तो उसकी अपील सुनने के लिए एपेक्स मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाएगा। मेडिकल बोर्ड का निर्णय अंतिम और मान्य होगा। मेडिकल जांच के बाद योग्य एवं अयोग्य अभ्यर्थियों की सूची आयोग को भेजी जाएगी। इसके बाद प्रमाण पत्रों का सत्यापन किया जाएगा और अंतिम परीक्षाफल प्रकाशित किया जाएगा।

 

अनुपस्थित अभ्यर्थियों को मिलेगा अंतिम अवसर


जो अभ्यर्थी किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर मेडिकल जांच में शामिल नहीं हो पाएंगे, उन्हें 17 और 18 जुलाई को अंतिम अवसर दिया जाएगा। इसके बाद किसी भी प्रकार का अतिरिक्त मौका नहीं मिलेगा। वहीं, मेडिकल जांच में असफल अभ्यर्थियों की अपील पर एपेक्स मेडिकल बोर्ड 20 और 21 जुलाई को सुबह 11 बजे से रिम्स, रांची के चिकित्सकीय अधीक्षक कार्यालय के सम्मेलन कक्ष में सुनवाई करेगा।

 

गौरतलब है कि इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से झारखंड में उत्पाद सिपाही के कुल 583 पदों पर नियुक्ति की जाएगी। ऐसे में मेडिकल जांच भर्ती प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

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जुमार पुल पर पाइपलाइन मरम्मत के लिए 1-2 जुलाई को रांची में रहेगी पानी की किल्लत

रांची। रांचीवासियों को अगले दो दिनों तक पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने जानकारी दी है कि जुमार पुल के पास राइजिंग पाइपलाइन की आवश्यक मरम्मत के कारण 1 और 2 जुलाई 2026 को रूक्का शहरी जलापूर्ति योजना से होने वाली जलापूर्ति पूरी तरह बाधित रहेगी। इसका असर राजधानी की लगभग 80 प्रतिशत आबादी पर पड़ेगा।   जरूरी मरम्मत के लिए रोकी जाएगी जलापूर्ति पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के स्वर्णरेखा शीर्षकार्य प्रमंडल, रांची के कार्यपालक अभियंता के अनुसार, जुमार पुल के समीप स्थित राइजिंग पाइपलाइन में तकनीकी खराबी को दूर करने के लिए मरम्मत कार्य किया जाना बेहद जरूरी है। पाइपलाइन की मरम्मत के दौरान जलापूर्ति जारी रखना संभव नहीं है, इसलिए विभाग ने दो दिनों तक पानी की सप्लाई रोकने का निर्णय लिया है।   1 और 2 जुलाई को प्रभावित रहेगी सप्लाई विभाग के अनुसार, 1 जुलाई और 2 जुलाई को रूक्का जलशोधन संयंत्र से शहर के अधिकांश इलाकों में पानी की आपूर्ति नहीं हो सकेगी। चूंकि रांची की बड़ी आबादी इसी योजना पर निर्भर है, इसलिए हजारों परिवारों को जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में लोगों को सलाह दी गई है कि वे पहले से पर्याप्त मात्रा में पेयजल और घरेलू उपयोग के लिए पानी का संग्रह कर लें।   लोगों से सहयोग की अपील पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने इस अस्थायी असुविधा के लिए खेद जताते हुए नागरिकों से सहयोग की अपील की है। विभाग का कहना है कि मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद जलापूर्ति सामान्य रूप से बहाल कर दी जाएगी। अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि पाइपलाइन की मरम्मत समय पर पूरी होने से भविष्य में जलापूर्ति अधिक सुचारु और निर्बाध तरीके से संचालित हो सकेगी। इसलिए नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे दो दिनों तक पानी का सोच-समझकर उपयोग करें और अनावश्यक बर्बादी से बचें।

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रिम्स में 30 मेधावी छात्रों को मिलेगा मुफ्त नीट कोचिंग

Coal Neer water
अब कोयला खदान का पानी बुझाएगा प्यास, सिर्फ 5 रुपये में मिलेगा 20 लीटर ‘कोल नीर’

धनबाद। धनबाद की पहचान लंबे समय से देश की कोयला राजधानी के रूप में रही है। वर्षों तक इन खदानों ने देश को ऊर्जा दी, लेकिन खदानों के बंद होने के बाद अवैध खनन और हादसों की खबरें लगातार सामने आती रहीं। अब इन्हीं बंद खदानों से निकलने वाला पानी लोगों की प्यास बुझाने का काम करेगा। कोल इंडिया की महत्वाकांक्षी ‘कोल नीर’ परियोजना के तहत खदानों के पानी को शुद्ध कर बोतलबंद पेयजल के रूप में बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा।   इस परियोजना के तहत भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल), सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल), साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) में माइन वाटर बॉटलिंग प्लांट तैयार किए गए हैं। झारखंड में 30 जून को इस योजना के उद्घाटन की संभावना है, जबकि केंद्रीय कोयला मंत्री अगले कुछ दिनों में इसका औपचारिक शुभारंभ कर सकते हैं।   46 खदानों से हर वर्ष लगभग 1,280 लाख  बीसीसीएल की 46 खदानों से हर वर्ष लगभग 1,280 लाख घनमीटर पानी निकलता है। अब इस पानी को अत्याधुनिक फिल्ट्रेशन और रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) तकनीक से शुद्ध किया जाएगा। गुणवत्ता जांच भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के मानकों के अनुसार होगी, जिसके बाद पानी की बॉटलिंग कर बाजार में भेजा जाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि 20 लीटर ‘कोल नीर’ की कीमत मात्र 5 रुपये तय की गई है, जिससे आम लोगों को बेहद कम कीमत पर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।   कोल इंडिया का मानना हैं  कोल इंडिया का मानना है कि यह परियोजना जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इससे खदानों से निकलने वाले पानी का बेहतर उपयोग होगा, स्थानीय समुदायों को सस्ता और सुरक्षित पेयजल मिलेगा तथा प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा। भविष्य में इस योजना का दायरा अन्य कोयला क्षेत्रों तक बढ़ाने की भी तैयारी है।

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Palamu Tragedy
झाड़-फूंक और राख का सेवन बना मौत का कारण, पलामू में एक ही परिवार के 5 लोगों की दर्दनाक मौत

पलामू। झारखंड के पलामू जिले के पड़वा प्रखंड स्थित सिक्का गांव में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की 10 दिनों के भीतर हुई मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। शुरुआत में इन मौतों को रहस्यमय बीमारी से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन अब जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। प्राथमिक जांच के अनुसार, परिवार बीमारी के इलाज के लिए आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ झाड़-फूंक का सहारा ले रहा था और ओझा की सलाह पर राख का सेवन कर रहा था। आशंका है कि यही राख शरीर में जाकर विषाक्त प्रभाव पैदा कर गई, जिससे एक के बाद एक पांच लोगों की मौत हो गई।   कुलदीप महतो की मौत के बाद बढ़ता गया मौत का सिलसिला जानकारी के अनुसार, सिक्का गांव निवासी कुलदीप महतो और उनकी बेटी सबसे पहले बीमार पड़े। 19 जून को कुलदीप महतो की मौत हुई, जबकि अगले दिन उनकी बेटी ने दम तोड़ दिया। इसके बाद परिवार के अन्य सदस्य झाड़-फूंक कराने के लिए लेस्लीगंज के पूर्णाडीह क्षेत्र पहुंचे। इसी दौरान परिवार के लोग लगातार राख का सेवन भी करते रहे।   26 जून को कुलदीप की दूसरी बेटी इंदु कुमारी की मौत हो गई। इसके बाद 28 जून को बहू श्वेता कुमारी और 29 जून को बेटे नकुल महतो ने इलाज के दौरान रांची के रिम्स अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस तरह महज 10 दिनों में परिवार के पांच सदस्य काल के गाल में समा गए।   जांच में जुटी स्वास्थ्य विभाग की टीम परिवार के अन्य सदस्य, जिनमें कुलदीप महतो की पत्नी, एक बेटा और एक पोता शामिल हैं, अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। स्वास्थ्य विभाग ने राख के नमूने, खाद्य सामग्री और सरसों तेल के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। मृतकों का विसरा भी सुरक्षित रखा गया है। पलामू के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पूरे मामले की वैज्ञानिक जांच कराई जा रही है। वहीं मेडिकल विशेषज्ञों ने ड्रॉप्सी बीमारी सहित अन्य संभावित कारणों की भी जांच की बात कही है। यह घटना अंधविश्वास और चिकित्सा से दूरी के खतरनाक परिणामों को उजागर करती है।

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