World Cup 2027 Qualification Scenario: दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में होने वाले ICC Men's ODI World Cup 2027 की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने स्पष्ट कर दिया है कि 30 सितंबर 2026 को जारी होने वाली ICC ODI टीम रैंकिंग ही यह तय करेगी कि कौन-सी टीमें बिना क्वालिफायर खेले सीधे वर्ल्ड कप में जगह बनाएंगी और किन टीमों को क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट का रास्ता अपनाना होगा।
4 अक्टूबर से 21 नवंबर 2027 तक खेले जाने वाले इस टूर्नामेंट में कुल 14 टीमें हिस्सा लेंगी। इस बार ICC ने प्रतियोगिता का प्रारूप भी पहले से अलग और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया है।
ICC के अनुसार, 30 सितंबर 2026 तक जारी ODI टीम रैंकिंग ही सीधे क्वालिफिकेशन का आधार होगी। इस तारीख तक खेले जाने वाले सभी वनडे मुकाबले टीमों की रैंकिंग को प्रभावित करेंगे। ऐसे में हर द्विपक्षीय ODI सीरीज और बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट का महत्व काफी बढ़ गया है।
मेजबान दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे ने वर्ल्ड कप के लिए अपनी जगह पहले ही सुनिश्चित कर ली है। वहीं तीसरे सह-मेजबान नामीबिया को स्वतः प्रवेश मिलेगा या नहीं, इस पर अभी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है।
मेजबान दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे के अलावा ICC ODI रैंकिंग की शीर्ष आठ टीमें सीधे वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई करेंगी।
मौजूदा रैंकिंग के आधार पर मजबूत दावेदार हैं:
यदि अफगानिस्तान और बांग्लादेश 30 सितंबर 2026 तक अपनी मौजूदा स्थिति बनाए रखते हैं, तो उन्हें भी सीधा टिकट मिल सकता है।
दो बार की विश्व चैंपियन वेस्टइंडीज फिलहाल सीधे क्वालिफिकेशन की दौड़ से बाहर दिखाई दे रही है। यदि टीम आने वाले महीनों में अपनी ODI रैंकिंग में सुधार नहीं कर पाती, तो उसे वर्ल्ड कप में जगह बनाने के लिए क्वालिफायर टूर्नामेंट खेलना होगा।
गौरतलब है कि वेस्टइंडीज 2023 ODI World Cup के लिए भी सीधे क्वालिफाई नहीं कर सका था। ऐसे में टीम पर इस बार बेहतर प्रदर्शन का दबाव रहेगा।
ICC ने इस बार टूर्नामेंट का नया प्रारूप तैयार किया है, जिससे मुकाबले और अधिक रोमांचक होंगे।
आने वाले महीनों में इन टीमों के प्रदर्शन पर विशेष नजर रहेगी:
इन टीमों के लिए हर ODI मुकाबला वर्ल्ड कप की उम्मीदों को मजबूत या कमजोर कर सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। एशिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंट 135वें डूरंड कप 2026 को लेकर राजधानी रांची में उत्साह चरम पर है। बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में आयोजित होने वाले मुकाबलों के लिए बुधवार से दर्शकों को फ्री 'जीरो टिकट' का वितरण शुरू हो गया। पहले ही दिन टिकट काउंटरों पर फुटबॉल प्रेमियों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। सभी मैचों में दर्शकों के लिए मुफ्त प्रवेश राज्य सरकार ने डूरंड कप के सभी मुकाबलों में दर्शकों के लिए नि:शुल्क प्रवेश की व्यवस्था की है। हालांकि, स्टेडियम में प्रवेश के लिए जीरो टिकट अनिवार्य होगा। इससे बड़ी संख्या में खेल प्रेमियों को बिना किसी शुल्क के अंतरराष्ट्रीय स्तर के फुटबॉल मुकाबलों का आनंद लेने का अवसर मिलेगा। 12 काउंटरों से हो रहा टिकट वितरण टिकट वितरण के लिए खेल विभाग और आर्मी विंग की ओर से 12 काउंटर बनाए गए हैं। इनमें गेट नंबर-11 से 13 के बीच 10 काउंटर और गेट नंबर-23 के पास दो अतिरिक्त काउंटर संचालित किए जा रहे हैं। टिकट सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक दिए जा रहे हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अधिकतम चार टिकट मिल रहे हैं और इसके लिए पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य है। फुटबॉल प्रेमियों ने सराही व्यवस्था टिकट लेने पहुंचे दर्शकों ने राज्य सरकार और खेल विभाग की व्यवस्थाओं की सराहना की। उनका कहना है कि कई काउंटर बनाए जाने से भीड़ के बावजूद टिकट आसानी से मिल रहे हैं। खेल प्रेमियों का मानना है कि डूरंड कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट की मेजबानी झारखंड के लिए गर्व की बात है और इससे राज्य में फुटबॉल संस्कृति को नई पहचान मिलेगी। 26 जुलाई को होगा उद्घाटन मुकाबला खेल निदेशक छवि रंजन ने बताया कि डूरंड कप के सफल आयोजन के लिए सुरक्षा, पार्किंग, चिकित्सा सुविधा, टिकट वितरण और दर्शकों की अन्य व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि 26 जुलाई को शाम 5 बजे बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में उद्घाटन मुकाबले के साथ टूर्नामेंट की शुरुआत होगी। राज्यवासियों से बड़ी संख्या में स्टेडियम पहुंचकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने की अपील भी की गई है।
नई दिल्ली,एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम में खिलाड़ियों की लगातार बढ़ रही हैमस्ट्रिंग चोटों ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की चिंता बढ़ा दी है। हाल के महीनों में कई प्रमुख खिलाड़ियों के बार-बार चोटिल होने के बाद बोर्ड ने बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) की कार्यप्रणाली और खिलाड़ियों के वर्कलोड मैनेजमेंट की समीक्षा शुरू कर दी है। लगातार चोटों ने बढ़ाई चिंता सूत्रों के अनुसार, टीम इंडिया के कई तेज गेंदबाज और बल्लेबाज हाल के दौर में हैमस्ट्रिंग की समस्या से जूझते रहे हैं। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों के बाद खिलाड़ियों के फिटनेस कार्यक्रम, रिकवरी प्रक्रिया और ट्रेनिंग मॉड्यूल को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बोर्ड का मानना है कि खिलाड़ियों की फिटनेस पर और अधिक वैज्ञानिक तरीके से काम करने की जरूरत है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की होगी समीक्षा बीसीसीआई अब सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में अपनाई जा रही फिटनेस और रिहैबिलिटेशन प्रक्रिया का विस्तृत आकलन करेगा। इसमें खिलाड़ियों के वर्कलोड, रिकवरी प्लान, मेडिकल सपोर्ट और ट्रेनिंग सिस्टम की समीक्षा की जाएगी। बोर्ड यह भी देखेगा कि लगातार क्रिकेट खेलने के कारण खिलाड़ियों पर पड़ रहे शारीरिक दबाव को कैसे कम किया जा सकता है। फिटनेस प्रबंधन में हो सकते हैं बदलाव क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय और फ्रेंचाइजी क्रिकेट के व्यस्त कार्यक्रम के कारण खिलाड़ियों पर फिटनेस का दबाव बढ़ा है। ऐसे में बीसीसीआई आने वाले समय में वर्कलोड मैनेजमेंट, रोटेशन नीति और चोट से बचाव के लिए नए दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। बोर्ड की कोशिश खिलाड़ियों को लंबे समय तक फिट बनाए रखने और बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए पूरी तरह तैयार रखने की है।
World Cup 2027 Qualification Scenario: दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में होने वाले ICC Men's ODI World Cup 2027 की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने स्पष्ट कर दिया है कि 30 सितंबर 2026 को जारी होने वाली ICC ODI टीम रैंकिंग ही यह तय करेगी कि कौन-सी टीमें बिना क्वालिफायर खेले सीधे वर्ल्ड कप में जगह बनाएंगी और किन टीमों को क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट का रास्ता अपनाना होगा। 4 अक्टूबर से 21 नवंबर 2027 तक खेले जाने वाले इस टूर्नामेंट में कुल 14 टीमें हिस्सा लेंगी। इस बार ICC ने प्रतियोगिता का प्रारूप भी पहले से अलग और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया है। 30 सितंबर 2026 की रैंकिंग क्यों है अहम? ICC के अनुसार, 30 सितंबर 2026 तक जारी ODI टीम रैंकिंग ही सीधे क्वालिफिकेशन का आधार होगी। इस तारीख तक खेले जाने वाले सभी वनडे मुकाबले टीमों की रैंकिंग को प्रभावित करेंगे। ऐसे में हर द्विपक्षीय ODI सीरीज और बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट का महत्व काफी बढ़ गया है। मेजबान टीमों की स्थिति मेजबान दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे ने वर्ल्ड कप के लिए अपनी जगह पहले ही सुनिश्चित कर ली है। वहीं तीसरे सह-मेजबान नामीबिया को स्वतः प्रवेश मिलेगा या नहीं, इस पर अभी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है। किन टीमों की सीधी एंट्री की संभावना? मेजबान दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे के अलावा ICC ODI रैंकिंग की शीर्ष आठ टीमें सीधे वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई करेंगी। मौजूदा रैंकिंग के आधार पर मजबूत दावेदार हैं: भारत न्यूजीलैंड ऑस्ट्रेलिया पाकिस्तान श्रीलंका इंग्लैंड अफगानिस्तान बांग्लादेश यदि अफगानिस्तान और बांग्लादेश 30 सितंबर 2026 तक अपनी मौजूदा स्थिति बनाए रखते हैं, तो उन्हें भी सीधा टिकट मिल सकता है। वेस्टइंडीज के सामने बड़ी चुनौती दो बार की विश्व चैंपियन वेस्टइंडीज फिलहाल सीधे क्वालिफिकेशन की दौड़ से बाहर दिखाई दे रही है। यदि टीम आने वाले महीनों में अपनी ODI रैंकिंग में सुधार नहीं कर पाती, तो उसे वर्ल्ड कप में जगह बनाने के लिए क्वालिफायर टूर्नामेंट खेलना होगा। गौरतलब है कि वेस्टइंडीज 2023 ODI World Cup के लिए भी सीधे क्वालिफाई नहीं कर सका था। ऐसे में टीम पर इस बार बेहतर प्रदर्शन का दबाव रहेगा। 2027 वर्ल्ड कप का नया फॉर्मेट ICC ने इस बार टूर्नामेंट का नया प्रारूप तैयार किया है, जिससे मुकाबले और अधिक रोमांचक होंगे। पहला चरण: सुपर सीरीज सबसे निचली रैंक वाली तीन क्वालिफाई टीमें सुपर सीरीज खेलेंगी। मुकाबले राउंड-रॉबिन फॉर्मेट में होंगे। केवल एक टीम अगले चरण में पहुंचेगी। दो टीमें बाहर हो जाएंगी। दूसरा चरण: ग्रुप स्टेज सुपर सीरीज से आगे बढ़ने वाली टीम सहित कुल 12 टीमें दो ग्रुप में होंगी। प्रत्येक ग्रुप में 6-6 टीमें रहेंगी। दोनों ग्रुप की शीर्ष टीमें अगले दौर में प्रवेश करेंगी। तीसरा चरण: सुपर 7 ग्रुप चरण के बाद टीमें सुपर 7 में खेलेंगी। यहां के प्रदर्शन के आधार पर शीर्ष चार टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी। अंतिम चरण दो सेमीफाइनल मुकाबले होंगे। विजेता टीमें फाइनल खेलेंगी। फाइनल में 2027 विश्व कप चैंपियन का फैसला होगा। इन टीमों पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर आने वाले महीनों में इन टीमों के प्रदर्शन पर विशेष नजर रहेगी: अफगानिस्तान बांग्लादेश वेस्टइंडीज आयरलैंड स्कॉटलैंड नीदरलैंड्स इन टीमों के लिए हर ODI मुकाबला वर्ल्ड कप की उम्मीदों को मजबूत या कमजोर कर सकता है।