Hashmatullah Shahidi Resigns: भारत के खिलाफ हाल ही में खेली गई तीन मैचों की वनडे सीरीज में 3-0 से हार झेलने के बाद अफगानिस्तान क्रिकेट टीम में बड़ा बदलाव हुआ है। टीम के कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी ने वनडे टीम की कप्तानी छोड़ने का फैसला किया है। 2022 में कप्तानी संभालने वाले 31 वर्षीय बाएं हाथ के बल्लेबाज ने लगभग तीन साल तक टीम का नेतृत्व किया और इस दौरान अफगानिस्तान को कई ऐतिहासिक जीत दिलाईं।
अफगानिस्तान ने भारत दौरे पर तीन मैचों की वनडे सीरीज खेली, लेकिन टीम एक भी मुकाबला जीतने में सफल नहीं रही। भारतीय टीम ने सीरीज में 3-0 से क्लीन स्वीप किया। इसी सीरीज के बाद शाहिदी ने वनडे कप्तानी छोड़ने का निर्णय लिया।
हालांकि बल्लेबाजी में उन्होंने सीरीज के अंतिम मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने वनडे करियर का पहला शतक लगाया, लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सके।
हशमतुल्लाह शाहिदी को वर्ष 2022 में अफगानिस्तान की वनडे टीम की कमान सौंपी गई थी। उनकी कप्तानी में टीम ने कुल 55 वनडे मुकाबले खेले, जिनमें 27 मैचों में जीत दर्ज की।
उनकी कप्तानी की प्रमुख उपलब्धियां:
2013 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले हशमतुल्लाह शाहिदी अफगानिस्तान के भरोसेमंद मध्यक्रम बल्लेबाजों में गिने जाते हैं।
अब तक उनके ODI करियर के प्रमुख आंकड़े:
उन्होंने कई मौकों पर टीम को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकालने वाली पारियां भी खेलीं।
शाहिदी की कप्तानी में अफगानिस्तान ने लगातार मजबूत प्रदर्शन किया।
टीम ने:
चैंपियंस ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अहम मुकाबला बारिश की भेंट चढ़ गया था। यदि वह मैच पूरा होता और अफगानिस्तान जीतता, तो टीम सेमीफाइनल में पहुंच सकती थी।
2027 ODI वर्ल्ड कप से पहले अफगानिस्तान को नया वनडे कप्तान चुनना होगा। टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती कप्तानी में स्थिरता बनाए रखने और आगामी ICC टूर्नामेंटों की तैयारी करने की होगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
काबुल, एजेंसियां। अफगानिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान हश्मतुल्लाह शाहिदी ने वनडे टीम की कप्तानी से इस्तीफा दे दिया है। शाहिदी ने सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा करते हुए कहा कि यह उनका व्यक्तिगत फैसला है। उन्होंने टीम, कोचिंग स्टाफ और अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड का समर्थन के लिए आभार भी जताया। चार साल से अधिक समय तक संभाली टीम की कमान 31 वर्षीय शाहिदी ने साल 2022 में अफगानिस्तान की वनडे टीम की कप्तानी संभाली थी। उनके नेतृत्व में टीम ने 2023 वनडे विश्व कप और 2025 चैंपियंस ट्रॉफी जैसे बड़े टूर्नामेंट खेले। 2023 विश्व कप में अफगानिस्तान ने इंग्लैंड, पाकिस्तान, श्रीलंका और नीदरलैंड जैसी टीमों को हराकर शानदार प्रदर्शन किया था और सेमीफाइनल में पहुंचने से मामूली अंतर से चूक गया था। खिलाड़ी के रूप में खेलना जारी रखेंगे शाहिदी कप्तानी छोड़ने के बावजूद शाहिदी ने स्पष्ट किया है कि वह अफगानिस्तान की वनडे टीम के लिए खिलाड़ी के रूप में उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने कहा कि देश का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए हमेशा गर्व की बात रहेगी और वह आगे भी टीम की सफलता में योगदान देना चाहते हैं। अब नए कप्तान की तलाश में अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (ACB) जल्द ही नए वनडे कप्तान के नाम का ऐलान कर सकता है। अगले महीने आयरलैंड के खिलाफ होने वाली पांच मैचों की वनडे सीरीज से पहले नए कप्तान की नियुक्ति होने की संभावना है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इब्राहिम जादरान, रहमानुल्लाह गुरबाज़ और राशिद खान संभावित दावेदारों में शामिल हैं।
हरारे, एजेंसियां। भारत और जिम्बाब्वे के बीच शुरू होने वाली तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज से पहले मेजबान टीम के कप्तान सिकंदर रजा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भले ही भारतीय टीम युवा खिलाड़ियों के साथ मैदान पर उतरे, लेकिन उनकी नजर में यह मुकाबला एकतरफा नहीं होगा। रजा का मानना है कि दोनों टीमों के पास सीरीज जीतने का बराबर मौका है और जिम्बाब्वे अपने घरेलू मैदान पर कड़ी चुनौती पेश करेगा। 'भारत मजबूत है, लेकिन हम भी पूरी तरह तैयार' प्री-मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिकंदर रजा ने कहा कि भारत विश्व क्रिकेट की सबसे मजबूत टीमों में शामिल है, लेकिन टी20 क्रिकेट में किसी भी टीम को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा कि जिम्बाब्वे के खिलाड़ी घरेलू परिस्थितियों से अच्छी तरह परिचित हैं और इसी का फायदा उठाने की कोशिश करेंगे। युवा भारतीय टीम पर रहेंगी सभी की निगाहें भारत इस दौरे पर कई युवा खिलाड़ियों के साथ मैदान में उतर रहा है। ऐसे में दोनों टीमों के बीच रोमांचक मुकाबले की उम्मीद जताई जा रही है। भारतीय टीम जहां नई प्रतिभाओं को परखने का प्रयास करेगी, वहीं जिम्बाब्वे घरेलू परिस्थितियों का लाभ उठाकर उलटफेर करने की कोशिश करेगा। पहला मुकाबला हरारे में भारत और जिम्बाब्वे के बीच टी20 सीरीज का पहला मुकाबला 23 जुलाई को हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेला जाएगा। दोनों टीमें जीत के साथ सीरीज की शुरुआत करना चाहेंगी, जिससे मुकाबले को लेकर क्रिकेट प्रशंसकों में उत्साह बना हुआ है।
चांगझोउ (चीन), एजेंसियां। प्रतिष्ठित चाइना ओपन सुपर 1000 बैडमिंटन टूर्नामेंट 2026 का आगाज़ आज से चीन के चांगझोउ में हो रहा है। दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों की मौजूदगी वाले इस टूर्नामेंट में भारतीय शटलर भी दमदार चुनौती पेश करेंगे। पहले दिन क्वालिफिकेशन और शुरुआती दौर के मुकाबले खेले जाएंगे, जिन पर भारतीय बैडमिंटन प्रशंसकों की खास नजर रहेगी। भारतीय खिलाड़ियों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद भारतीय दल में अनुभवी खिलाड़ियों के साथ कई युवा शटलर भी शामिल हैं। हाल के अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में बेहतर प्रदर्शन के बाद भारतीय खिलाड़ियों से इस बार भी गहरे दौर तक पहुंचने की उम्मीद की जा रही है। दुनिया के शीर्ष खिलाड़ी होंगे आमने-सामने सुपर 1000 श्रेणी के इस टूर्नामेंट में चीन, जापान, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, डेनमार्क और मलेशिया सहित कई देशों के शीर्ष खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। विश्व रैंकिंग के लिहाज से यह टूर्नामेंट खिलाड़ियों के लिए बेहद अहम माना जाता है। ओलंपिक क्वालीफिकेशन की तैयारी का अहम मंच विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रतियोगिता आगामी बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों और ओलंपिक क्वालीफिकेशन की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को विश्व रैंकिंग में महत्वपूर्ण अंक हासिल होंगे। भारतीय बैडमिंटन पर रहेंगी सबकी निगाहें भारतीय बैडमिंटन संघ और खेल प्रेमियों को उम्मीद है कि भारतीय शटलर इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन करेंगे। शुरुआती दौर के मुकाबलों के नतीजों पर पूरे टूर्नामेंट की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।