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Pakistan Seeks $10 Billion US Aid

अमेरिका से पाकिस्तान की 10 अरब डॉलर की बड़ी मांग, ट्रंप सरकार से मांगी 5 साल की आर्थिक मदद

kalpana जुलाई 22, 2026 0
Pakistan Finance Minister Muhammad Aurangzeb meeting US Treasury Secretary Scott Bessent in Washington
Pakistan Requests $10 Billion Financial Support from the US

Pakistan-US Relations: आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने अमेरिका से 10 अरब डॉलर (करीब 96 हजार करोड़ रुपये) की वित्तीय सहायता मांगी है। यह राशि द्विपक्षीय एक्सचेंज स्टेबिलाइजेशन सपोर्ट फैसिलिटी के तहत मांगी गई है, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करना और पाकिस्तानी रुपये को स्थिर रखना है। यह मांग ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव में पाकिस्तान ने मध्यस्थता की भूमिका निभाने की कोशिश की थी।

5 साल के लिए मांगी वित्तीय सहायता

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट को भेजे अनुरोध में 10 अरब डॉलर की सहायता सुविधा पांच वर्षों के लिए उपलब्ध कराने की मांग की है। यदि अमेरिका इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो इससे पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिल सकती है।

पाकिस्तान को क्या होगा फायदा?

अगर यह फंड मिलता है, तो पाकिस्तान को कई आर्थिक लाभ मिल सकते हैं:

  • विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी होगी।
  • पाकिस्तानी रुपये पर दबाव कम होगा।
  • आयात और बाहरी भुगतान की क्षमता मजबूत होगी।
  • अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं से कर्ज पर निर्भरता घट सकती है।
  • आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

हालांकि, पाकिस्तान ने यह भी कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कार्यक्रम के तहत लागू वित्तीय और मौद्रिक सुधारों को जारी रखेगा।

स्कॉट बेसेंट से हुई मुलाकात

पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने वॉशिंगटन में अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से मुलाकात की। पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के अनुसार, बैठक में क्षेत्रीय भू-राजनीतिक हालात और उनके पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा हुई। हालांकि, मंत्रालय के आधिकारिक बयान में 10 अरब डॉलर की सहायता मांग का उल्लेख नहीं किया गया।

क्यों अहम है यह मांग?

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान लंबे समय से विदेशी मुद्रा संकट, बढ़ते कर्ज और कमजोर आर्थिक वृद्धि जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में अमेरिका से इस स्तर की वित्तीय सहायता मिलने पर उसकी अर्थव्यवस्था को अस्थायी राहत मिल सकती है। हालांकि, अभी तक ट्रंप प्रशासन की ओर से इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर अमेरिका में चलेगा ड्रग तस्करी का मुकदमा, जून 2027 से ट्रायल का प्रस्ताव

वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर अमेरिका में ड्रग तस्करी के गंभीर आरोपों को लेकर मुकदमे की तैयारी तेज हो गई है। मादुरो और अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने संयुक्त रूप से अदालत से अनुरोध किया है कि मामले की सुनवाई जून 2027 से शुरू की जाए। अब इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला अमेरिकी जिला न्यायाधीश अल्विन हेलरस्टीन करेंगे। मैनहट्टन फेडरल कोर्ट में दायर संयुक्त प्रस्ताव के अनुसार, दोनों पक्ष मुकदमे की तैयारी के लिए पर्याप्त समय चाहते हैं। हालांकि अदालत जरूरत पड़ने पर सुनवाई की तारीख में बदलाव भी कर सकती है। अमेरिकी मीडिया इस मामले को हाल के वर्षों के सबसे चर्चित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक मामलों में से एक मान रहा है। ड्रग तस्करी के गंभीर आरोप अमेरिकी न्याय विभाग ने निकोलस मादुरो पर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप लगाए हैं। अभियोजन पक्ष का दावा है कि उनके शासनकाल के दौरान मादुरो और उनके सहयोगियों ने बड़े पैमाने पर मादक पदार्थों की तस्करी को संरक्षण दिया। वहीं मादुरो लगातार इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते रहे हैं और इन्हें खारिज करते आए हैं। जनवरी में हुई थी गिरफ्तारी रिपोर्ट के मुताबिक, इसी साल जनवरी में अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास में विशेष अभियान चलाकर निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार किया था। इसके बाद दोनों को न्यूयॉर्क लाया गया, जहां उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। अदालत के फैसले पर टिकी नजर फिलहाल अदालत को यह तय करना है कि ट्रायल जून 2027 से शुरू होगा या नहीं। यदि प्रस्ताव मंजूर होता है, तो आने वाले महीनों में अभियोजन और बचाव पक्ष सबूतों, गवाहों और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं की तैयारी करेंगे। यह मामला न केवल अमेरिका और वेनेजुएला के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के दृष्टिकोण से भी बेहद अहम माना जा रहा है।  

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ट्रंप का बड़ा ऐलान: जेनेरिक दवाओं पर 200% तक टैरिफ लगाने की तैयारी, भारतीय फार्मा उद्योग पर पड़ सकता है बड़ा असर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आयातित जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध तरीके से भारी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। ट्रंप के मुताबिक, यह नई नीति 1 अगस्त 2026 से लागू होगी और इसका उद्देश्य दवा निर्माण को दोबारा अमेरिका में बढ़ावा देना है। चूंकि भारत अमेरिका को जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा निर्यातक है, इसलिए इस फैसले का भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग पर बड़ा असर पड़ सकता है। चरणबद्ध तरीके से लागू होगा टैरिफ ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर बताया कि नई टैरिफ नीति कई चरणों में लागू की जाएगी। 1 अगस्त 2026 से अगले दो साल तक आयातित जेनेरिक दवाओं पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। तीसरे वर्ष टैरिफ बढ़ाकर 100% कर दिया जाएगा। इसके बाद 200% टैरिफ लागू किया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि जो कंपनियां तय समय सीमा के भीतर अमेरिका में उत्पादन इकाइयां स्थापित नहीं करेंगी, उन पर अतिरिक्त कार्रवाई और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। क्या है ट्रंप सरकार का उद्देश्य? ट्रंप का कहना है कि इस नीति का मकसद दवा निर्माण को अमेरिका में वापस लाना, विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नीति केवल जेनेरिक दवाओं पर लागू होगी, जबकि पेटेंटेड और ब्रांडेड दवाओं से जुड़ी मौजूदा नीति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। भारत पर क्यों पड़ सकता है बड़ा असर? भारत को दुनिया की 'फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड' कहा जाता है। अमेरिकी बाजार में बिकने वाली जेनेरिक दवाओं का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा भारत से आता है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार: वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने अमेरिका को 9.7 अरब डॉलर की दवाओं का निर्यात किया। यह भारत के कुल 25.8 अरब डॉलर के दवा निर्यात का करीब 38 प्रतिशत है। ऐसे में भविष्य में 100% और फिर 200% टैरिफ लागू होने से भारतीय दवा कंपनियों की प्रतिस्पर्धा और मुनाफे पर असर पड़ सकता है। व्यापार समझौते पर भी नजर भारत और अमेरिका के बीच फरवरी में हुए व्यापार समझौते में जेनेरिक दवाओं से जुड़े मुद्दों पर बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी थी। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच इस विषय पर नई वार्ता हो सकती है।  

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Fuel station in Pakistan displaying revised petrol and diesel prices from July 22
पाकिस्तान में फिर महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, 22 जुलाई से नई कीमतें लागू; आम लोगों पर बढ़ेगा महंगाई का बोझ

Pakistan Fuel Price Hike: पाकिस्तान सरकार ने एक बार फिर पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 22 जुलाई से लागू हो गई हैं। इस फैसले के बाद पेट्रोल 4.93 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल 7.15 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है। बढ़ती ईंधन कीमतों का असर परिवहन, माल ढुलाई और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ने की आशंका है। क्या हैं नई कीमतें? नई कीमतों के लागू होने के बाद पाकिस्तान में: पेट्रोल: 320.73 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हाई-स्पीड डीजल (HSD): 367.21 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर भारतीय मुद्रा के हिसाब से यह कीमतें लगभग इस प्रकार हैं: ईंधन भारत पाकिस्तान (भारतीय रुपये में लगभग) पेट्रोल ₹102.12/लीटर ₹111.21/लीटर डीजल ₹95.20/लीटर ₹127.33/लीटर अप्रैल के रिकॉर्ड स्तर से अभी भी कम कीमतें हालांकि मौजूदा कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन ये इस साल अप्रैल में दर्ज रिकॉर्ड स्तर से अभी भी काफी नीचे हैं। डीजल 3 अप्रैल को बढ़कर 520.35 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया था। पेट्रोल भी 3 अप्रैल को 458.41 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आने से ईंधन दरों में कमी दर्ज की गई थी। अब रोजाना तय होंगे पेट्रोल-डीजल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने ईंधन मूल्य निर्धारण की नीति में बड़ा बदलाव किया है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने घोषणा की है कि अब पेट्रोल और डीजल की कीमतें साप्ताहिक के बजाय रोजाना तय की जाएंगी। सरकार का कहना है कि इससे वैश्विक बाजार के अनुरूप कीमतों में तेजी से बदलाव किया जा सकेगा। डीलर्स एसोसिएशन ने किया विरोध सरकार के इस फैसले का ऑल पाकिस्तान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने विरोध किया है। एसोसिएशन का कहना है कि रोजाना कीमतें बदलने से कारोबार प्रभावित होगा और उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा होगी। संगठन ने इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन की चेतावनी भी दी है। महंगाई पर पड़ेगा सीधा असर विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन महंगा होने से सबसे अधिक असर मध्यम और निम्न आय वर्ग पर पड़ेगा। पेट्रोल महंगा होने से निजी वाहन, मोटरसाइकिल और ऑटो रिक्शा चलाने वालों का खर्च बढ़ेगा। डीजल की कीमत बढ़ने से ट्रक, बस, माल ढुलाई और बिजली उत्पादन की लागत बढ़ेगी। इसका असर खाद्य पदार्थों समेत रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। पाकिस्तान में हर महीने करीब 7 से 8 लाख टन पेट्रोल और डीजल की खपत होती है, इसलिए ईंधन की कीमतों में मामूली बदलाव भी देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर बड़ा प्रभाव डालता है।  

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